उषा प्रियंवदा द्वारा रचित 'वापसी' हिंदी कहानी UPHESC

 उषा प्रियंवदा द्वारा रचित 'वापसी' हिंदी कहानी साहित्य की एक बेहद मार्मिक और चर्चित कहानी है। यह कहानी आधुनिक परिवार में बढ़ते हुए 'जनरेशन गैप' और एक सेवानिवृत्त (Retire) व्यक्ति के अपने ही घर में 'अजनबी' बन जाने की पीड़ा को दर्शाती है।

यहाँ कहानी का सारांश दिया गया है:


1. सेवानिवृत्ति और घर वापसी

कहानी के मुख्य पात्र गजाधर बाबू हैं, जो रेलवे में ३५ साल की नौकरी करने के बाद सेवानिवृत्त होकर अपने घर लौटते हैं। नौकरी के दौरान वे अकेले रहे थे, लेकिन हमेशा यही सोचते थे कि रिटायरमेंट के बाद वे अपने पत्नी और बच्चों के साथ सुखद समय बिताएंगे। वे अपने परिवार को ही अपने जीवन का केंद्र मानते थे।

2. उम्मीदों का टूटना

घर पहुँचने पर गजाधर बाबू को जो अनुभव होता है, वह उनकी कल्पना से बिल्कुल अलग था। उन्हें महसूस होता है कि इतने वर्षों में उनके परिवार ने उनके बिना जीना सीख लिया है। परिवार के सदस्यों (पत्नी, दो बेटे- अमर और नरेंद्र, और बेटी बसंती) के जीवन में उनके लिए कोई जगह नहीं बची है।

  • असहज उपस्थिति: गजाधर बाबू का घर के कामों में दखल देना या अनुशासन की बात करना बच्चों को "टोका-टाकी" लगता है।

  • अजनबीपन: उनकी पत्नी भी घर के कामों और बच्चों के बीच इतनी व्यस्त है कि उसके पास पति की भावनाओं को समझने का समय नहीं है। वह उनके लिए केवल भोजन बनाने वाली एक मशीन की तरह व्यवहार करती है।

3. चारपाई का प्रतीक

घर में जगह की कमी के कारण गजाधर बाबू की चारपाई पहले बैठक में लगाई जाती है, जहाँ से उन्हें घर की गतिविधियों पर नजर रखने में आसानी होती है। लेकिन बाद में, जब उनके रहने से बच्चों की प्राइवेसी में खलल पड़ता है, तो उनकी चारपाई को अंदर के स्टोर रूम (अंधेरी कोठरी) में डाल दिया जाता है। यह चारपाई गजाधर बाबू के घटते सम्मान और उनके परिवार में "अनावश्यक" होने का प्रतीक है।

4. अंतिम निर्णय (पुनः वापसी)

जब गजाधर बाबू को पूरी तरह अहसास हो जाता है कि वे अपने ही घर में एक फालतू सामान की तरह हैं और उनकी पत्नी भी उनके साथ जाने के बजाय बच्चों के साथ रहना पसंद करती है, तो वे एक बड़ा फैसला लेते हैं।

वे घर की शांति बनाए रखने के लिए एक चीनी मिल में फिर से नौकरी ढूंढ लेते हैं। कहानी के अंत में, वे अपनी चारपाई खोलकर फिर से स्टेशन की ओर निकल जाते हैं। उनके जाने के बाद परिवार राहत की सांस लेता है, जो कहानी का सबसे दुखद हिस्सा है।


निष्कर्ष

'वापसी' केवल एक व्यक्ति की घर वापसी नहीं है, बल्कि यह मानवीय संबंधों के बिखराव और मध्यमवर्गीय परिवार के स्वार्थ की कहानी है। यह दिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति जो पूरे जीवन परिवार के लिए कमाता है, अंत में उसी परिवार के लिए बोझ बन जाता है।

उषा प्रियंवदा की कहानी 'वापसी' के पात्रों का वर्गीकरण और उनके स्वभाव का विवरण नीचे दी गई तालिका (Chart) के माध्यम से समझा जा सकता है:

'वापसी' कहानी के पात्रों का विवरण

पात्र का नामगजाधर बाबू से संबंधस्वभाव और विशेषताएँ
गजाधर बाबूमुख्य पात्र (नायक)स्नेहशील, परिवार प्रेमी और अनुशासित। 35 साल रेलवे की नौकरी के बाद घर में प्रेम की तलाश करते हैं, पर अंत में उपेक्षित महसूस करते हैं।
पत्नीजीवनसंगिनीव्यावहारिक लेकिन संवेदनहीन। वह गजाधर बाबू को केवल एक 'कमाने वाला' मानती है और घर के कामकाज व बच्चों के मोह में पति की भावनाओं को भूल चुकी है।
अमरबड़ा बेटाविद्रोही और आधुनिक विचारों वाला। उसे पिता का घर के मामलों में हस्तक्षेप करना पसंद नहीं है। वह अपनी पत्नी के प्रभाव में है।
नरेंद्रछोटा बेटालापरवाह और उदंड। उसे पिता की मौजूदगी एक बोझ लगती है और वह केवल अपने ऐश-ओ-आराम की चिंता करता है।
बसंतीबेटीचंचल और जिद्दी। उसे पिता द्वारा रोक-टोक (जैसे रसोई में काम न करना) पसंद नहीं आती। वह अपनी माँ और भाइयों के पक्ष में रहती है।
बहूअमर की पत्नीकलहप्रिय और आधुनिक। वह ससुर (गजाधर बाबू) के आने से अपनी आजादी छिनती हुई महसूस करती है और घर में तनाव का कारण बनती है।
गनेशीरेलवे का नौकरवफादार और सेवाभावी। यद्यपि वह परिवार का सदस्य नहीं है, लेकिन वह गजाधर बाबू को उनके परिवार से कहीं अधिक सम्मान और प्रेम देता है।

पात्रों का विश्लेषण (संक्षेप में)

  1. गजाधर बाबू बनाम परिवार: गजाधर बाबू जहाँ 'आत्मीयता' ढूंढ रहे हैं, वहीं परिवार के अन्य सदस्य उन्हें केवल एक 'बाधा' या 'बाहरी व्यक्ति' मानते हैं।

  2. पीढ़ियों का टकराव: अमर, नरेंद्र और बसंती उस नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Privacy) को पारिवारिक अनुशासन से ऊपर रखती है।

  3. त्रासदी: कहानी की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस परिवार के लिए गजाधर बाबू ने अपना पूरा जीवन खपा दिया, उसी परिवार में उनके लिए कोई स्थान नहीं बचा।

 

'वापसी' कहानी के मुख्य कथन (Quotes/Dialogues) कहानी की गहरी संवेदना और गजाधर बाबू की आंतरिक पीड़ा को व्यक्त करते हैं। यहाँ कहानी के सबसे महत्वपूर्ण अंश दिए गए हैं:


1. पारिवारिक अलगाव पर

"गजाधर बाबू ने महसूस किया कि वह एक गहरे सागर में डूब रहे हैं, जिसके पानी की सतह पर उनके परिवार के लोग तैर रहे हैं, पर वे उन्हें छू नहीं पा रहे।"

यह कथन गजाधर बाबू के उस अकेलेपन को दर्शाता है जो वे अपनों के बीच रहकर भी महसूस कर रहे थे।

2. पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) पर

"बहू और बच्चों के लिए वह एक फालतू सामान की तरह थे, जिसे कहीं भी खिसकाया जा सकता था।"

यह वाक्य दिखाता है कि रिटायरमेंट के बाद गजाधर बाबू की स्थिति घर में एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक अनावश्यक वस्तु की हो गई थी।

3. गजाधर बाबू की निराशा पर

"मैंने सोचा था कि रिटायर होने के बाद अपने परिवार के बीच चैन से रहूँगा, लेकिन यहाँ तो मेरा अस्तित्व ही किसी को स्वीकार नहीं है।"

यह गजाधर बाबू का आत्म-चिंतन है, जहाँ उनकी बरसों की उम्मीदें टूटती नजर आती हैं।

4. पत्नी की उदासीनता पर

"उनकी पत्नी के लिए वे केवल एक कमाने वाले व्यक्ति थे। जब तक पैसा आता रहा, वे पूज्य थे; जब वे खुद घर आ गए, तो वे बोझ बन गए।"

यह कहानी का सबसे कड़वा सच है, जो मध्यमवर्गीय परिवारों में आर्थिक उपयोगिता और रिश्तों के संबंध को उजागर करता है।

5. कहानी का निर्णायक अंत

"गजाधर बाबू ने अपनी चारपाई फिर से उठा ली। उन्होंने महसूस किया कि उनका घर वह नहीं था जिसे वे छोड़ कर गए थे, और अब उनकी 'वापसी' फिर से उसी अकेलेपन की ओर है जहाँ से वे आए थे।"

यह कथन कहानी के शीर्षक 'वापसी' को सार्थकता देता है। अंत में उनकी वास्तविक वापसी घर की ओर नहीं, बल्कि काम की ओर होती है।


निष्कर्ष (Key Theme)

इन कथनों का सार यही है कि "जब व्यक्ति की उपयोगिता खत्म हो जाती है, तो भावनाएँ भी दम तोड़ देती हैं।" उषा प्रियंवदा ने इन संवादों के जरिए समाज के उस कड़वे सच को आईना दिखाया है जहाँ रिटायरमेंट के बाद बुजुर्गों को हाशिए पर धकेल दिया जाता है।

 

कहानी की मर्मस्पर्शी और मुख्य पंक्तियों को उनके भावार्थ के साथ नीचे दी गई सारणी (Table) में समझा जा सकता है:

'वापसी' कहानी की मुख्य पंक्तियों की सारणी

क्रममुख्य पंक्ति (कथन)भावार्थ / महत्व
1"गजाधर बाबू ने अनुभव किया कि वे एक गहरी खाई में गिर रहे हैं।"यह पंक्ति उनके मानसिक अकेलेपन और परिवार से अलगाव की गहरी पीड़ा को दर्शाती है।
2"बहू और बच्चों के लिए वह एक फालतू सामान की तरह थे।"घर में उनकी स्थिति एक सम्मानित मुखिया के बजाय एक अनावश्यक वस्तु जैसी हो गई थी।
3"उनकी चारपाई बैठक से निकालकर भीतर के स्टोर में डाल दी गई।"यह भौतिक बदलाव उनके घटते सम्मान और परिवार द्वारा उन्हें किनारे किए जाने का प्रतीक है।
4"पत्नी को केवल अपने चौके-बर्तन और बच्चों से मतलब था।"यह गजाधर बाबू की पत्नी की संवेदनहीनता और पति की भावनात्मक जरूरतों के प्रति उदासीनता को दिखाता है।
5"अमर ने कहा- बाबूजी को हर बात में दखल देने की क्या जरूरत है?"नई पीढ़ी द्वारा बुजुर्गों के अनुभव और अनुशासन को 'हस्तक्षेप' (Interference) मान लेने का प्रमाण।
6"गनेशी की याद उन्हें बार-बार आती रही।"अपनों से मिले तिरस्कार के कारण उन्हें घर से बाहर (नौकरी की जगह) मिला सम्मान अधिक प्यारा लगने लगा।
7"रिक्शे पर अपना सामान लादकर वे फिर से स्टेशन की ओर चल दिए।"यह कहानी का चरमोत्कर्ष (Climax) है, जहाँ एक व्यक्ति अपनों के बीच हारकर पुनः अकेलेपन की ओर लौट जाता है।

विशेष टिप्पणी:

इन पंक्तियों के माध्यम से उषा प्रियंवदा ने समाज के दो चेहरों को उजागर किया है:

  1. बाहरी दुनिया: जहाँ गजाधर बाबू 'साहब' थे और गनेशी जैसे लोग उनका सम्मान करते थे।

  2. आंतरिक दुनिया (घर): जहाँ वे केवल एक रिटायर्ड व्यक्ति थे, जिनका दखल किसी को पसंद नहीं था।


उषा प्रियंवदा की कहानी 'वापसी' पर आधारित 30 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) यहाँ दिए गए हैं, जो परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं:


'वापसी' कहानी: महत्वपूर्ण MCQs

  1. 'वापसी' कहानी की लेखिका कौन हैं?

    (क) मन्नू भंडारी (ख) उषा प्रियंवदा (ग) कृष्णा सोबती (घ) शिवानी

  2. गजाधर बाबू किस विभाग में नौकरी करते थे?

    (क) शिक्षा विभाग (ख) पुलिस विभाग (ग) रेलवे विभाग (घ) डाक विभाग

  3. गजाधर बाबू ने कितने वर्षों तक नौकरी की थी?

    (क) 20 वर्ष (ख) 30 वर्ष (ग) 35 वर्ष (घ) 40 वर्ष

  4. गजाधर बाबू के कुल कितने बच्चे थे?

    (क) दो (ख) तीन (ग) चार (घ) पाँच

  5. गजाधर बाबू के बड़े बेटे का क्या नाम था?

    (क) नरेंद्र (ख) अमर (ग) गनेशी (घ) बसंती

  6. गजाधर बाबू की बेटी का क्या नाम था?

    (क) सुधा (ख) रीता (ग) बसंती (घ) नीलम

  7. नौकरी के दौरान गजाधर बाबू का वफादार नौकर कौन था?

    (क) रामू (ख) गनेशी (ग) श्यामू (घ) अमर

  8. सेवानिवृत्ति के बाद गजाधर बाबू ने घर लौटने पर कैसा अनुभव किया?

    (क) बहुत खुशी (ख) अजनबीपन और उपेक्षा (ग) सम्मान (घ) उत्साह

  9. गजाधर बाबू की चारपाई पहले कहाँ लगाई गई थी?

    (क) आँगन में (ख) बैठक में (ग) रसोई में (घ) छत पर

  10. कहानी में 'फालतू सामान' की उपमा किसे दी गई है?

    (क) गनेशी को (ख) पुराने कपड़ों को (ग) गजाधर बाबू को (घ) घर के फर्नीचर को

  11. बसंती को रसोई में काम करना कैसा लगता था?

    (क) बहुत अच्छा (ख) बुरा और बोझ (ग) रुचिकर (घ) इनमें से कोई नहीं

  12. गजाधर बाबू की चारपाई अंत में बैठक से हटाकर कहाँ डाल दी गई?

    (क) सड़क पर (ख) स्टोर रूम (कोठरी) में (ग) बरामदे में (घ) अमर के कमरे में

  13. अमर और उसकी पत्नी का व्यवहार गजाधर बाबू के प्रति कैसा था?

    (क) सम्मानजनक (ख) विद्रोही और कटु (ग) प्यार भरा (घ) उदासीन

  14. गजाधर बाबू की पत्नी को सबसे ज्यादा चिंता किसकी रहती थी?

    (क) पति की (ख) घर के खर्च और बच्चों की (ग) समाज की (घ) नौकर की

  15. गजाधर बाबू ने अंत में कहाँ जाने का निर्णय लिया?

    (क) तीर्थ यात्रा पर (ख) चीनी मिल की नौकरी पर (ग) अपने गाँव (घ) वनवास

  16. 'वापसी' कहानी का मुख्य विषय क्या है?

    (क) गरीबी (ख) भ्रष्टाचार (ग) पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) (घ) देशभक्ति

  17. गजाधर बाबू स्वभाव से कैसे व्यक्ति थे?

    (क) क्रोधी (ख) स्नेहशील और अनुशासित (ग) कंजूस (घ) घमंडी

  18. बसंती अपनी माँ से किसकी शिकायत करती है?

    (क) अमर की (ख) बाबूजी के टोकने की (ग) भाभी की (घ) गनेशी की

  19. गजाधर बाबू के जाने के बाद परिवार ने कैसा महसूस किया?

    (क) दुख (ख) राहत और शांति (ग) पछतावा (घ) क्रोध

  20. कहानी के अंत में गजाधर बाबू ने अपनी चारपाई का क्या किया?

    (क) बेच दी (ख) तोड़ दी (ग) नौकर को दे दी (घ) साथ ले जाने के लिए बंधवा ली

  21. गजाधर बाबू के छोटे बेटे का नाम क्या था?

    (क) अमर (ख) नरेंद्र (ग) विजय (घ) संजू

  22. पत्नी द्वारा गजाधर बाबू के भोजन की उपेक्षा करना क्या दर्शाता है?

    (क) उसकी बीमारी (ख) उसकी व्यस्तता (ग) भावनात्मक जुड़ाव की कमी (घ) गरीबी

  23. गजाधर बाबू को अपनी नौकरी वाले स्थान की याद क्यों आती थी?

    (क) वहाँ अधिक पैसा था (ख) वहाँ उनका सम्मान था (ग) वहाँ वे अकेले थे (घ) शहर छोटा था

  24. अमर अपनी पत्नी के साथ अलग रहने की धमकी क्यों देता है?

    (क) उसे घर छोटा लगता था (ख) उसे पिता का हस्तक्षेप पसंद नहीं था (ग) उसे नौकरी बदलनी थी (घ) उसे माँ से चिढ़ थी

  25. 'वापसी' शीर्षक का अर्थ क्या है?

    (क) विदेश से आना (ख) घर लौटकर भी फिर चले जाना (ग) धन की वापसी (घ) बचपन की यादें

  26. गजाधर बाबू की उपस्थिति घर में किसके समान थी?

    (क) मुखिया के (ख) एक अतिथि के (ग) एक बाहरी व्यक्ति के (घ) उपर्युक्त ख और ग दोनों

  27. गजाधर बाबू की पत्नी ने उनके साथ जाने से मना क्यों कर दिया?

    (क) वह बीमार थी (ख) वह बच्चों और घर को नहीं छोड़ना चाहती थी (ग) वह उनसे नाराज थी (घ) उसे शहर पसंद नहीं था

  28. इस कहानी में समाज के किस वर्ग का चित्रण है?

    (क) उच्च वर्ग (ख) निम्न वर्ग (ग) मध्य वर्ग (घ) कृषक वर्ग

  29. गजाधर बाबू के जाने के बाद घर का वातावरण कैसा हो गया?

    (क) उदास (ख) पूर्ववत खुशहाल (जैसे उनके आने से पहले था) (ग) भयावह (घ) शांत

  30. गजाधर बाबू की चारपाई का कोठरी में जाना किस बात का प्रतीक है?

    (क) जगह की कमी (ख) घर की सफाई (ग) गजाधर बाबू का हाशिए पर जाना (घ) उनकी पसंद


उत्तर कुंजी (Answer Key)

1(ख), 2(ग), 3(ग), 4(ग), 5(ख), 6(ग), 7(ख), 8(ख), 9(ख), 10(ग), 11(ख), 12(ख), 13(ख), 14(ख), 15(ख), 16(ग), 17(ख), 18(ख), 19(ख), 20(घ), 21(ख), 22(ग), 23(ख), 24(ख), 25(ख), 26(घ), 27(ख), 28(ग), 29(ख), 30(ग)।


 यहाँ कुछ मुख्य बिंदुओं और उत्तरों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:

1. गजाधर बाबू का अजनबीपन (उत्तर 8 और 26)

गजाधर बाबू ने ३५ साल रेलवे की नौकरी में अकेले बिताए। वे इस उम्मीद में घर लौटे थे कि परिवार उनका सहारा बनेगा। लेकिन जब वे पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि परिवार उनके बिना रहना सीख चुका है। उनकी उपस्थिति घर के सदस्यों को 'साहब' या 'पिता' के बजाय एक 'अतिथि' या 'बाहरी व्यक्ति' जैसी लगी, जो उनके दैनिक जीवन के ढर्रे को बिगाड़ रहा था।

2. चारपाई का प्रतीकवाद (उत्तर 9, 12 और 30)

कहानी में 'चारपाई' गजाधर बाबू के सम्मान का पैमाना है:

  • बैठक में चारपाई: जब वे आए, तो उन्हें मुख्य स्थान दिया गया।

  • कोठरी (स्टोर रूम) में चारपाई: जैसे-जैसे उनकी टोक-टाक से बच्चे नाराज हुए, उन्हें बैठक से हटाकर सामान रखने वाली अंधेरी कोठरी में भेज दिया गया। यह दर्शाता है कि परिवार की नजरों में उनका महत्व अब एक 'पुराने फालतू सामान' से ज्यादा नहीं रह गया था।

3. पीढ़ीगत अंतराल - Generation Gap (उत्तर 13, 16 और 24)

अमर, नरेंद्र और बसंती उस आधुनिक पीढ़ी के प्रतीक हैं जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता को महत्व देते हैं। गजाधर बाबू पुराने संस्कारों वाले व्यक्ति थे, जो चाहते थे कि बहू सिर ढक कर रहे और बेटी रसोई का काम करे।

  • विवाद का कारण: जब गजाधर बाबू ने बहू को नौकर को पैसे देने से टोका या बसंती को बाहर जाने से मना किया, तो बच्चों को यह अनुशासन नहीं बल्कि 'दखलंदाजी' लगी। अमर का घर छोड़ने की धमकी देना इसी मानसिक दूरी का परिणाम था।

4. पत्नी की भूमिका (उत्तर 14, 22 और 27)

गजाधर बाबू की पत्नी कहानी का सबसे जटिल पात्र है। वह कोई बुरी औरत नहीं है, लेकिन वह पूरी तरह 'पारिवारिक मोह' और 'दिनचर्या' में डूबी है।

  • उदासीनता: जब गजाधर बाबू उसे अपने अकेलेपन की बात बताते हैं, तो वह सहानुभूति जताने के बजाय घरेलू शिकायतों (अचार खत्म होना, चीनी महंगी होना) का पिटारा खोल देती है।

  • अंतिम इंकार: जब गजाधर बाबू दोबारा नौकरी पर जाने लगे, तो उन्होंने पत्नी से साथ चलने को कहा। पत्नी ने बच्चों का मोह नहीं छोड़ा, जो गजाधर बाबू के लिए अंतिम भावनात्मक चोट थी।

5. 'वापसी' शीर्षक की सार्थकता (उत्तर 25)

इस कहानी का शीर्षक 'वापसी' विडंबनापूर्ण (Ironical) है।

  • पहली वापसी सुखद होने की उम्मीद थी (नौकरी से घर)।

  • दूसरी वापसी विवशता भरी थी (घर से पुनः नौकरी)।

    गजाधर बाबू को अहसास हुआ कि उनका असली घर वह था जहाँ वे ३५ साल अकेले रहे, क्योंकि अपनों के बीच वे खुद को और भी ज्यादा अकेला पा रहे थे।

6. गनेशी का पात्र (उत्तर 7 और 23)

गनेशी (रेलवे का नौकर) यह दिखाने के लिए रखा गया है कि कभी-कभी खून के रिश्तों से ज्यादा सम्मान और आत्मीयता बाहरी लोगों से मिल जाती है। गनेशी गजाधर बाबू की पसंद-नापसंद का ध्यान रखता था, जबकि पत्नी ने उनके खाने तक की परवाह छोड़ दी थी।


निष्कर्ष:

यह कहानी यह कड़वा सच उजागर करती है कि सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद एक पुरुष का अपने ही घर में कोई 'इमोशनल स्पेस' नहीं बचता यदि उसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा घर से दूर बिताया हो।

 

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