'संप्रेषण के विविध आयाम' (Dimensions of Communication)

 बी.ए. (B.A.) के पाठ्यक्रम के अनुसार 'संप्रेषण के विविध आयाम' (Dimensions of Communication) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। संप्रेषण केवल बातचीत करना नहीं है, बल्कि यह एक बहुआयामी प्रक्रिया है।

यहाँ आपके लिए सरल और व्यवस्थित नोट्स दिए गए हैं:


संप्रेषण के विविध आयाम (Dimensions of Communication)

संप्रेषण के आयामों को मुख्य रूप से उन दिशाओं और तरीकों के आधार पर समझा जा सकता है जिनसे सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। इसके मुख्य आयाम निम्नलिखित हैं:

1. दिशा के आधार पर आयाम

किसी भी संगठन या समाज में संदेश किस दिशा में जा रहा है, इसके आधार पर तीन भाग होते हैं:

  • अधोगामी संप्रेषण (Downward Communication): जब सूचना उच्चाधिकारियों से अधीनस्थों (नीचे के कर्मचारियों) की ओर आती है। जैसे- आदेश, निर्देश या नीतियां।

  • ऊर्ध्वगामी संप्रेषण (Upward Communication): जब सूचना नीचे से ऊपर की ओर जाती है। जैसे- सुझाव, शिकायतें या रिपोर्ट।

  • क्षैतिज या समतल संप्रेषण (Horizontal Communication): जब एक ही स्तर के व्यक्तियों के बीच बातचीत होती है। जैसे- दो सहपाठियों या दो मैनेजरों के बीच चर्चा।

2. माध्यम के आधार पर आयाम

सूचना भेजने के लिए किस साधन का प्रयोग किया जा रहा है:

  • शाब्दिक संप्रेषण (Verbal Communication): इसमें शब्दों का प्रयोग होता है। इसके दो रूप हैं:

    • मौखिक: बोलकर (भाषण, साक्षात्कार)।

    • लिखित: लिखकर (पत्र, ईमेल, नोटिस)।

  • अशाब्दिक संप्रेषण (Non-Verbal Communication): बिना शब्दों के होने वाला संप्रेषण। इसमें शरीर की भाषा (Body Language), चेहरे के हाव-भाव, आंखों के संकेत और स्पर्श शामिल हैं।

3. संबंधों के आधार पर आयाम

  • औपचारिक संप्रेषण (Formal Communication): जो नियमों और मर्यादाओं में बंधा होता है। कार्यालयी पत्र या आधिकारिक बैठकें इसके उदाहरण हैं।

  • अनौपचारिक संप्रेषण (Informal Communication): इसे 'ग्रेपवाइन' (Grapevine) भी कहते हैं। यह मित्रों या परिवार के बीच बिना किसी नियम के होता है।


संप्रेषण के अन्य महत्वपूर्ण प्रकार (Technical Dimensions)

आयामविवरण
अंत:वैयक्तिक (Intrapersonal)स्वयं से बात करना (चिंतन, मनन)।
अंतरवैयक्तिक (Interpersonal)दो व्यक्तियों के बीच संवाद।
समूह संप्रेषण (Group)एक छोटे समूह में चर्चा (जैसे क्लासरूम)।
जन संचार (Mass Communication)एक बड़े जनसमूह तक सूचना पहुँचाना (जैसे टीवी, अखबार, सोशल मीडिया)।

संप्रेषण के प्रभावी होने की शर्तें (7 C's)

बी.ए. की परीक्षा में अक्सर यह पूछा जाता है। अच्छा संप्रेषण वह है जो:

  1. स्पष्ट (Clear) हो।

  2. संक्षिप्त (Concise) हो।

  3. पूर्ण (Complete) हो।

  4. ठोस (Concrete) हो।

  5. शिष्ट (Courteous) हो।

  6. शुद्ध (Correct) हो।

  7. क्रमबद्ध (Coherent) हो।

महत्वपूर्ण नोट: संप्रेषण में 'प्रतिपुष्टि' (Feedback) सबसे अनिवार्य तत्व है। बिना फीडबैक के संप्रेषण प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है।


 

  संप्रेषण की बाधाएँ (Barriers to Communication)  

संप्रेषण (Communication) में बाधाएँ वे तत्व हैं जो संदेश के सही अर्थ को प्राप्तकर्ता तक पहुँचने से रोकते हैं। परीक्षा के दृष्टिकोण से इन्हें निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:


संप्रेषण की प्रमुख बाधाएँ (Barriers to Communication)

1. भाषाई या अर्थ संबंधी बाधाएँ (Semantic Barriers)

जब प्रेषक (Sender) और प्राप्तकर्ता (Receiver) शब्दों के अर्थ को अलग-अलग समझते हैं।

  • दोषपूर्ण अनुवाद: यदि संदेश का अनुवाद गलत हो जाए।

  • अस्पष्ट शब्द: ऐसे शब्दों का प्रयोग जिनके एक से अधिक अर्थ निकलते हों।

  • तकनीकी शब्दावली: विशेषज्ञों द्वारा ऐसी भाषा का प्रयोग करना जो सामान्य व्यक्ति न समझ पाए (Jargon)।

2. मनोवैज्ञानिक बाधाएँ (Psychological Barriers)

यह मानसिक स्थिति से जुड़ी होती हैं।

  • अविश्वास: यदि सुनने वाले को बोलने वाले पर भरोसा न हो, तो वह संदेश को गंभीरता से नहीं लेगा।

  • पूर्वाग्रह: किसी व्यक्ति के प्रति पहले से ही कोई राय बना लेना।

  • ध्यान की कमी: जब प्राप्तकर्ता का मन कहीं और हो और वह बात अनसुनी कर दे।

  • समय से पूर्व मूल्यांकन: पूरी बात सुनने से पहले ही निष्कर्ष निकाल लेना।

3. भौतिक या वातावरणीय बाधाएँ (Physical Barriers)

बाहरी वातावरण के कारण उत्पन्न होने वाली रुकावटें।

  • शोर (Noise): मशीनों, ट्रैफिक या लोगों का शोर।

  • दूरी: प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच अधिक भौगोलिक दूरी।

  • तकनीकी खराबी: नेटवर्क की समस्या, माइक का खराब होना या फोन कट जाना।

4. संगठनात्मक बाधाएँ (Organizational Barriers)

किसी संस्था या ऑफिस के नियमों के कारण आने वाली बाधाएँ।

  • जटिल नियम: बहुत अधिक कागजी कार्रवाई या कड़े नियम।

  • पद का अंतर: उच्च अधिकारी और चपरासी के बीच संवाद में हिचकिचाहट।

  • सुविधाओं का अभाव: संदेश भेजने के लिए पर्याप्त साधन (जैसे कंप्यूटर या इंटरनेट) न होना।

5. व्यक्तिगत बाधाएँ (Personal Barriers)

ये बाधाएँ स्वयं व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ी होती हैं।

  • डर: सजा के डर से अधीनस्थों का सच न बोलना।

  • प्रेरणा की कमी: जब कर्मचारी को लगता है कि सुझाव देने से कोई लाभ नहीं होगा।


संप्रेषण की बाधाओं को दूर करने के उपाय

  1. सरल भाषा का प्रयोग: संदेश हमेशा प्राप्तकर्ता की समझ के अनुसार होना चाहिए।

  2. सक्रिय श्रवण (Active Listening): वक्ता की बात को ध्यानपूर्वक सुनना।

  3. फीडबैक (Feedback): यह सुनिश्चित करना कि प्राप्तकर्ता ने संदेश समझ लिया है।

  4. उचित वातावरण: शांतिपूर्ण स्थान पर संवाद करना जहाँ शोर कम हो।


 

संप्रेषण की बाधाओं का फ्लोचार्ट (Flowchart)

Code snippet
graph TD
    A[संप्रेषण की बाधाएँ] --> B(भाषाई बाधाएँ)
    A --> C(मनोवैज्ञानिक बाधाएँ)
    A --> D(भौतिक बाधाएँ)
    A --> E(संगठनात्मक बाधाएँ)
    A --> F(व्यक्तिगत बाधाएँ)

    B --- B1[कठिन शब्द]
    B --- B2[गलत अनुवाद]

    C --- C1[पूर्वाग्रह]
    C --- C2[अविश्वास]

    D --- D1[शोर - Noise]
    D --- D2[दूरी]

    E --- E1[जटिल नियम]
    E --- E2[पद का अंतर]

    F --- F1[आत्मविश्वास की कमी]
    F --- F2[डर]

परीक्षा में इसे कैसे बनाएँ?

जब आप हाथ से अपनी कॉपी पर बनाएँ, तो इन सुझावों का पालन करें:

  1. मुख्य हेडिंग: बीच में एक बॉक्स बनाएँ और उसमें 'संप्रेषण की बाधाएँ' लिखें।

  2. शाखाएँ (Branches): मुख्य बॉक्स से 5 रेखाएँ निकालें और पाँचों प्रमुख प्रकारों को लिखें।

  3. उप-बिंदु (Sub-points): प्रत्येक प्रकार के नीचे छोटे बॉक्स या बुलेट्स बनाकर उनके उदाहरण लिखें।

टिप: इसे हमेशा उत्तर के बीच में या शुरुआत में बनाएँ और इसके लिए ब्लैक पेन या पेंसिल का उपयोग करें ताकि यह साफ दिखे।

 

  

'संप्रेषण के विविध आयाम' (Dimensions of Communication)

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