UGC NET की परीक्षा में 'कथनों का मिलान' या 'किस पात्र ने किससे कहा' वाले प्रश्न सबसे कठिन माने जाते हैं। यहाँ पाठ्यक्रम की प्रमुख कहानियों के वे प्रसिद्ध कथन हैं जो अक्सर परीक्षाओं में दोहराए जाते हैं:
UGC NET यूनिट-7: कहानियों के प्रसिद्ध कथन (Famous Quotes)
| कहानी का नाम | महत्वपूर्ण कथन / पंक्तियाँ | संदर्भ / पात्र |
| उसने कहा था | "अब के हाड़ में यह आम खूब फलेगा... चचा-भतीजा दोनों यहीं बैठकर आम खाना।" | लहना सिंह (अंतिम क्षणों में वजीरा सिंह से) |
| उसने कहा था | "मृत्यु के कुछ समय पहले स्मृति बहुत साफ़ हो जाती है।" | लेखक का कथन (कहानी का दार्शनिक पक्ष) |
| ईदगाह | "मोहसिन हँसकर बोला- यह चिमटा क्यों लाया पगले, इसे क्या करेगा?" | मोहसिन (हामिद से, बाल-मनोविज्ञान) |
| आकाशदीप | "बुद्धगुप्त! मेरे हृदय में कोमल भावनाएँ नहीं हैं... मैं तुम्हें घृणा करती हूँ, फिर भी तुम्हारे लिए मर सकती हूँ।" | चम्पा (बुद्धगुप्त से, प्रेम और घृणा का द्वंद्व) |
| गैंग्रीन (रोज़) | "मेरे लिए यह नई बात नहीं है। रोज़ ही ऐसा होता है।" | मालती (अपनी यंत्रवत ज़िंदगी पर) |
| तीसरी कसम | "मारे गए गुलफाम! अजी हाँ, मारे गए गुलफाम!" | हिरामन (मन ही मन गुनगुनाते हुए) |
| कोशिका का घटवार | "ओ लछमा! अब इस जनम में तो मिलना नहीं होगा।" | गुसाईं (अतीत की स्मृतियों में) |
| सिक्का बदल गया | "शाहनी! आज सिक्का बदल गया है।" | शेरा (विभाजन के समय शाहनी से क्रूरतापूर्वक) |
| पिता | "वे पिछले तीस वर्षों से इसी तरह शाम को घर लौटते हैं।" | पुत्र (सुधीर) (पिता की दिनचर्या और दूरी पर) |
| परिंदे | "क्या हम सब परिंदे ही हैं, जो एक जगह से दूसरी जगह उड़ते रहते हैं और कहीं रुक नहीं पाते?" | लतिका/डॉ. मुखर्जी (अकेलेपन और विस्थापन का बोध) |
| राही | "जेल जाने से ही देशभक्ति नहीं होती, असली देशभक्ति गरीबों की सेवा में है।" | अनिता (राही से बातचीत के दौरान आत्म-मंथन) |
| राजा निरबंसिया | "जगपति! तुम मुझे पहचानते नहीं हो, मैं तुम्हारी वही चंदा हूँ।" | चंदा (जगपति के संदेह पर अपनी सफाई में) |
| चीफ की दावत | "माँ, तुम अपनी कोठरी में चली जाओ, चीफ के सामने मत आना।" | शामनाथ (दिखावे और शर्म के कारण) |
| इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर | "यहाँ पुलिस व्यवस्था ऐसी है कि मुर्दा भी बोल उठता है।" | मातादीन (चाँद की पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली सिखाते हुए) |
तैयारी का विशेष नुस्खा:
परिंदे: नामवर सिंह ने इसे हिंदी की 'नई कहानी' की पहली कृति माना है, यह तथ्य अक्सर पूछा जाता है।
चन्द्रदेव से मेरी बातें: इसे हिंदी की पहली 'राजनीतिक कहानी' के रूप में देखा जाता है।
क्रम वाले प्रश्न: कहानियों के प्रकाशन वर्ष (जो मैंने पिछले चार्ट में दिए थे) को उँगलियों पर रट लें, क्योंकि 2-3 प्रश्न केवल कालक्रम (Chronology) पर आते हैं।