विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' का जीवन और साहित्यिक परिचय
विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' जी हिंदी साहित्य में 'प्रेमचंद युगीन' यथार्थवादी और आदर्शोन्मुखी कथा-परंपरा के एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। पारिवारिक जीवन, सामाजिक कुरीतियों और मानवीय मनोविज्ञान के सूक्ष्म चितेरे के रूप में उनका स्थान हिंदी साहित्य में विशिष्ट है।
१. जीवन परिचय
- जन्म: उनका जन्म सन 1891 में छावनी अम्बाला (पंजाब) में हुआ था, किंतु उनका अधिकांश जीवन और कार्यक्षेत्र कानपुर (उत्तर प्रदेश) रहा।
- प्रारंभिक जीवन और शिक्षा: उनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू में हुई, जिसके कारण उनकी भाषा में उर्दू के मुहावरों और लोकोक्तियों का अत्यंत स्वाभाविक और जीवंत प्रयोग देखने को मिलता है। बाद में उन्होंने हिंदी सीखी और उसमें रचनाएँ कीं।
- पत्रकारिता एवं कार्यक्षेत्र: उन्होंने लंबे समय तक प्रसिद्ध पत्रिका 'चाँद' में लेखन कार्य किया। इस पत्रिका में 'विजयानंद दुबे' के छद्म नाम से लिखी गई उनकी 'दुबे जी की चिट्ठियाँ' बहुत लोकप्रिय हुईं।
- निधन: 1945 में उनका देहावसान हो गया।
२. साहित्यिक परिचय एवं प्रवृत्तियाँ
कौशिक जी की कहानियों और उपन्यासों की मूल आत्मा समाज-सुधार और पारिवारिक सामंजस्य है। उनके साहित्य की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- आदर्शोन्मुखी यथार्थवाद: प्रेमचंद जी की तरह ही कौशिक जी भी यथार्थ का चित्रण करते हुए अंततः एक आदर्श की स्थापना करते हैं (जैसे 'ताई' कहानी में हृदय परिवर्तन)।
- पारिवारिक और सामाजिक समस्याएं: उन्होंने बाल-विवाह, छुआछूत, दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा और वेश्यावृत्ति जैसी तत्कालीन सामाजिक बुराइयों पर तीखा प्रहार किया।
- बाल मनोविज्ञान: बच्चों की निश्छलता और उनके मनोविज्ञान का जैसा सटीक चित्रण कौशिक जी ने किया है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।
- हास्य-व्यंग्य: गंभीर सामाजिक विषयों के साथ-साथ उन्होंने हास्य और व्यंग्य विधा में भी उत्कृष्ट कोटि का साहित्य सृजा है।
३. विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' की प्रमुख पुस्तकों का विवरण
कौशिक जी ने लगभग 300 कहानियाँ और कई महत्वपूर्ण उपन्यास लिखे। उनकी प्रकाशित प्रमुख पुस्तकों, उनकी विधा और मूल संवेदना का विवरण इस प्रकार है:
| क्र.सं. | पुस्तक/रचना का नाम | विधा (Genre) | मूल भावना / विषयवस्तु (Core Theme) |
| 1. | भिखारिणी (1929) | उपन्यास | मूल भावना: अंतर्जातीय विवाह, सामाजिक भेदभाव और निश्छल प्रेम का द्वंद्व। यह उपन्यास समाज के खोखले जातिगत बंधनों और मानवीय प्रेम के बीच के संघर्ष को रेखांकित करता है। |
| 2. | माँ (1929) | उपन्यास | मूल भावना: मातृत्व की महिमा, वेश्या जीवन की त्रासदी और मध्यवर्गीय समाज की विसंगतियाँ। इसमें एक माँ के त्याग और सामाजिक रूढ़ियों के प्रति विद्रोह को दर्शाया गया है। |
| 3. | संघर्ष (1945) | उपन्यास | मूल भावना: आर्थिक विषमता, मध्यवर्गीय जीवन का यथार्थ और अस्तित्व का संघर्ष। |
| 4. | चित्रशाला (दो भागों में) | कहानी संग्रह | मूल भावना: पारिवारिक अंतर्द्वंद्व, मानवीय संवेदनाएं, और समाज-सुधार। (इसमें कौशिक जी की अनेक प्रसिद्ध कहानियाँ संकलित हैं, जो घरेलू जीवन के सुख-दुख को दर्शाती हैं।) |
| 5. | गल्प-मंदिर | कहानी संग्रह | मूल भावना: आदर्शोन्मुखी यथार्थवाद। इसमें मानवीय आदर्शों, नैतिकता और हृदय-परिवर्तन की कहानियाँ शामिल हैं। |
| 6. | प्रेम-प्रतिमा | कहानी संग्रह | मूल भावना: प्रेम के विविध रूप (वात्सल्य, दांपत्य और सामाजिक प्रेम) तथा मानव मन की जटिलताओं का मनोवैज्ञानिक चित्रण। |
| 7. | मणिमाला | कहानी संग्रह | मूल भावना: तत्कालीन समाज की कुरीतियों (जैसे दहेज, अंधविश्वास) पर प्रहार और नारी की सामाजिक स्थिति का यथार्थ चित्रण। |
| 8. | कल्लोल | कहानी संग्रह | मूल भावना: बाल मनोविज्ञान, मानवीय करुणा और पारिवारिक संबंधों की बारीकियों का मार्मिक प्रस्तुतीकरण। |
| 9. | दुबे जी की चिट्ठियाँ | हास्य-व्यंग्य (निबंध/पत्र) | मूल भावना: तत्कालीन भारतीय समाज में व्याप्त अंधविश्वासों, खोखले पश्चिमीकरण, और पाखंड पर करारा व्यंग्य। |
| 10. | दुबे जी की डायरी | हास्य-व्यंग्य (डायरी/लेख) | मूल भावना: मध्यवर्गीय समाज की विडंबनाओं और दैनिक जीवन की विसंगतियों पर हास्य के माध्यम से तीखी चोट। |
(नोट: कौशिक जी ने विपुल मात्रा में कहानियाँ (जैसे- रक्षाबंधन, खोटा बेटा, पेरिस की नर्तकी आदि) लिखी हैं, जो मुख्य रूप से ऊपर उल्लिखित कहानी संग्रहों (चित्रशाला, गल्प-मंदिर आदि) में ही संकलित हैं।)
विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' का यह साहित्य न केवल उनके युग के समाज का दर्पण है, बल्कि आज भी अपने मनोवैज्ञानिक और पारिवारिक विश्लेषण के कारण अत्यंत प्रासंगिक है।
'ताई' कहानी (विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक')
'ताई' हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कहानीकार विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' जी की एक अत्यंत मार्मिक और मनोवैज्ञानिक कहानी है। यह कहानी बाल मनोविज्ञान, निःसंतान स्त्री की मानसिक कुंठा और अंततः उसके हृदय परिवर्तन (आदर्शोन्मुखी यथार्थवाद) को बहुत ही सूक्ष्मता से रेखांकित करती है।
मुख्य पात्र
- रामेश्वरी (ताई): कहानी की मुख्य पात्र, जो निःसंतान होने के कारण मानसिक अवसाद में है और अपने देवर के बच्चों से ईर्ष्या करती है।
- रामजीदास (ताऊ): रामेश्वरी के पति, जो अत्यंत सहृदय हैं और अपने भतीजे-भतीजियों से अपनी संतान की तरह प्रेम करते हैं।
- मनोहर: रामजीदास के छोटे भाई (कृष्णदास) का पाँच वर्षीय पुत्र, जिसे बाल-स्वभाव के कारण अपनी ताई (रामेश्वरी) से बहुत लगाव है।
कथासार
रामेश्वरी और रामजीदास निसंतान दंपत्ति हैं। रामजीदास अपने छोटे भाई के बच्चों को बहुत लाड़-प्यार करते हैं, लेकिन रामेश्वरी को यह बिल्कुल पसंद नहीं है। समाज के तानों और मातृत्व सुख से वंचित रहने की पीड़ा ने रामेश्वरी के मन में एक गहरी हीन भावना और देवर के बच्चों के प्रति कटुता भर दी है। नन्हा मनोहर अपनी ताई से बहुत स्नेह करता है और बार-बार उनके पास जाता है, लेकिन रामेश्वरी उसे हमेशा दुत्कारती और झिड़कती रहती है।
कहानी का चरमोत्कर्ष एक दिन शाम को छत पर आता है। मनोहर छत पर पतंग लूटने के प्रयास में मुंडेर से फिसल जाता है और छज्जे पर लटक कर ताई से मदद मांगता है। रामेश्वरी के मन में क्षण भर के लिए ईर्ष्या हावी हो जाती है कि यदि यह गिर गया, तो उसकी आँखों का काँटा हमेशा के लिए निकल जाएगा। इसी द्वंद्व में वह तुरंत हाथ नहीं बढ़ाती।
लेकिन जैसे ही मनोहर नीचे गिरता है, रामेश्वरी के भीतर का सोया हुआ मातृत्व अचानक जाग उठता है। उसे अपने कृत्य पर घोर अपराधबोध होता है और वह चीख मारकर बेहोश हो जाती है। इस घटना के सदमे से रामेश्वरी को तेज बुखार आ जाता है और वह प्रलाप करने लगती है। जब कई दिनों बाद उसे होश आता है और वह मनोहर को जीवित तथा स्वस्थ देखती है, तो उसका हृदय पूरी तरह परिवर्तित हो चुका होता है। वह मनोहर को सीने से लगा लेती है और उसकी सारी ईर्ष्या निर्मल वात्सल्य में बदल जाती है।
साहित्यिक दृष्टिकोण एवं मूल संवेदना
परीक्षा और शोध के दृष्टिकोण से इस कहानी में निम्नलिखित बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- मनोवैज्ञानिक द्वंद्व: कहानी में रामेश्वरी के अंतर्मन का संघर्ष बहुत सजीव है। एक तरफ सामाजिक और पारिवारिक कुंठा है, तो दूसरी तरफ एक स्त्री का स्वाभाविक वात्सल्य।
- प्रेमचंद युगीन प्रभाव: कौशिक जी प्रेमचंद परंपरा के कहानीकार माने जाते हैं। इस कहानी का अंत 'आदर्शोन्मुखी यथार्थवाद' से प्रेरित है, जहाँ हृदय परिवर्तन के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं की विजय दिखाई गई है।
- बाल मनोविज्ञान का सटीक चित्रण: मनोहर का निश्छल प्रेम यह सिद्ध करता है कि बच्चों का हृदय किसी भी प्रकार के राग-द्वेष से मुक्त होता है और वही निश्छलता कठोर से कठोर हृदय को पिघला सकती है।
| क्र.सं. | पात्र का नाम | लिंग (पुरुष / महिला) | कहानी में भूमिका एवं प्रमुख विशेषताएँ |
| 1. | रामेश्वरी (ताई) | महिला | • भूमिका: यह कहानी की मुख्य और केंद्रीय पात्र हैं , जो बाबू रामजीदास की पत्नी हैं • विशेषताएँ: यह निःसंतान हैं , जिसके कारण इनके मन में गहरी कुंठा, हीन भावना और ईर्ष्या घर कर गई है । शुरुआत में यह अपने देवर के बच्चों से द्वेष रखती हैं , किंतु अंत में बालक मनोहर की दुर्घटना के बाद इनका मातृत्व जाग उठता है और इनका हृदय पूरी तरह परिवर्तित (आदर्शोन्मुखी) हो जाता है। |
| 2. | बाबू रामजीदास (ताऊ) | पुरुष [cite: 1.1.4] | • भूमिका: रामेश्वरी के पति और एक संपन्न व्यापारी • विशेषताएँ: यह अत्यंत सहृदय, उदार और स्नेहशील व्यक्ति हैं । निःसंतान होने का दुःख इन्हें अधिक नहीं सताता क्योंकि यह अपने छोटे भाई के बच्चों को ही अपनी संतान मानकर बहुत प्यार करते हैं । यह अपनी पत्नी को भी परिवार में प्रेमभाव से रहने की प्रेरणा देते हैं । |
| 3. | मनोहर | पुरुष (बालक) | • भूमिका: रामजीदास के छोटे भाई का लगभग 5 वर्षीय पुत्र (रामेश्वरी का भतीजा)। • विशेषताएँ: यह अत्यंत नटखट, अबोध, निश्छल और बाल-सुलभ जिद्दी स्वभाव का बालक है। ताई की डांट और उपेक्षा सहने के बावजूद वह उनके प्रति किसी प्रकार की दुर्भावना नहीं रखता [cite: 1.1.3]। इसी की एक दुर्घटना (छत से फिसलना) के कारण कहानी में नाटकीय और भावनात्मक मोड़ आता है। |
| 4. | चुन्नी (छोटी कन्या) | महिला (बालिका) | • भूमिका: रामजीदास के छोटे भाई की लगभग दो वर्षीय पुत्री (मनोहर की बहन) । • विशेषताएँ: यह एक दूधमुंही और मासूम बच्ची है जो खेल-खेल में अचानक रामेश्वरी की गोद में आ जाती है। यही वह पहली पात्र बनती है जिसके स्पर्श से रामेश्वरी के भीतर का सुप्त ममत्व क्षण भर के लिए जागृत होता है । |
| 5. | कृष्णदास | पुरुष | • भूमिका: बाबू रामजीदास के छोटे भाई और मनोहर-चुन्नी के पिता। • विशेषताएँ: संयुक्त परिवार की व्यवस्था के तहत यह बड़े भाई (रामजीदास) के साथ ही रहते हैं । कहानी में इनका उल्लेख परोक्ष रूप से बच्चों के पिता और संयुक्त पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर आता है। |
विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' जी की कहानी 'ताई' के कथानक, अंतर्द्वंद्व और पात्रों के स्वभाव को दर्शाने वाली 21 प्रमुख पंक्तियाँ और संवाद नीचे तालिका में दिए गए हैं:
'ताई' कहानी की 21 प्रमुख पंक्तियाँ और संवाद
| क्र.सं. | पंक्ति / संवाद | किसने कहा (वक्ता / संदर्भ) |
| 1. | "दूसरों के बच्चों से जी लगाना मूर्खता है। अपना बच्चा अपना ही होता है।" | रामेश्वरी (अपने पति से) |
| 2. | "जब ईश्वर ने हमें संतान नहीं दी, तो क्या हम दूसरों के बच्चों से प्यार भी न करें?" | बाबू रामजीदास |
| 3. | "तुम तो इन पर जान देते हो, पर मुझे तो ये आँखों के काँटे मालूम होते हैं।" | रामेश्वरी |
| 4. | "बच्चे तो भगवान का रूप होते हैं, उनसे ऐसी नफरत अच्छी नहीं।" | बाबू रामजीदास |
| 5. | "रामेश्वरी को इन बच्चों (मनोहर और चुन्नी) से न जाने क्यों चिढ़ थी।" | लेखक (कथाकार) |
| 6. | "ताई! ताई! हमें भी मिठाई दो।" | मनोहर (अपनी ताई से बाल-हठ करते हुए) |
| 7. | "चल भाग यहाँ से! तेरा ताऊ लाएगा, जा उसी से माँग।" | रामेश्वरी (मनोहर को दुत्कारते हुए) |
| 8. | "ताई, मैं तुम्हारे पास सोऊंगा।" | मनोहर |
| 9. | "जा, अपनी माँ के पास जाकर सो, मुझे तंग मत कर।" | रामेश्वरी |
| 10. | "मनोहर को अपनी ताई से न जाने क्यों इतना लगाव था, वह उनकी झिड़कियाँ सुनकर भी उन्हीं के पास जाता था।" | लेखक (कथाकार) |
| 11. | "इन बच्चों ने मेरा जीना हराम कर रखा है, जहाँ जाती हूँ, पीछे-पीछे आ जाते हैं।" | रामेश्वरी |
| 12. | "अरे, वे तो तुम्हें प्यार करते हैं, इसलिए तुम्हारे पास आते हैं।" | बाबू रामजीदास |
| 13. | "मुझे नहीं चाहिए ऐसा प्यार! मैं बाँझ ही भली।" | रामेश्वरी (कुंठा और खीझ में) |
| 14. | "ताई! देखो मेरी पतंग कितनी ऊपर गई है!" | मनोहर (छत पर खेलते हुए) |
| 15. | "मर, मेरी छाती से क्यों चिपटता है! जा अपनी पतंग उड़ा।" | रामेश्वरी |
| 16. | "ताई! ताई! बचाओ, मैं गिरा!" | मनोहर (छत की मुंडेर से फिसलकर लटकते हुए) |
| 17. | "रामेश्वरी के मन में एक क्षण के लिए आया—अच्छा है, मर जाने दो, पाप कटेगा।" | लेखक (रामेश्वरी के मानसिक द्वंद्व को दर्शाते हुए) |
| 18. | "हाय रे! मेरा बच्चा!" | रामेश्वरी (जब मनोहर नीचे गिरता है और उसका सुप्त वात्सल्य अचानक जाग उठता है) |
| 19. | "कई दिनों की बेहोशी के बाद जब रामेश्वरी को होश आया, तो उसके मुँह से पहला शब्द निकला—'मनोहर'।" | लेखक (कथाकार) |
| 20. | "लो, तुम्हारा मनोहर यह रहा। भगवान की कृपा से यह बच गया।" | बाबू रामजीदास |
| 21. | "रामेश्वरी ने मनोहर को सीने से लगा लिया, और उसकी सारी ईर्ष्या आंसुओं में बह गई।" | लेखक (कहानी का आदर्शोन्मुखी यथार्थवादी अंत) |
यहाँ विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' जी की 'ताई' कहानी पर आधारित 30 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) उत्तर सहित दिए गए हैं, जिन्हें आप सीधे कॉपी और पेस्ट कर सकते हैं:
'ताई' कहानी - 30 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: 'ताई' कहानी के लेखक कौन हैं?
(A) मुंशी प्रेमचंद
(B) जयशंकर प्रसाद
(C) विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक'
(D) सुदर्शन
उत्तर: (C) विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक'
प्रश्न 2: कहानी की मुख्य स्त्री पात्र (ताई) का क्या नाम है?
(A) राजेश्वरी
(B) रामेश्वरी
(C) रुक्मिणी
(D) राधिका
उत्तर: (B) रामेश्वरी
प्रश्न 3: रामेश्वरी के पति का क्या नाम है?
(A) बाबू रामजीदास
(B) बाबू श्यामदास
(C) बाबू कृष्णदास
(D) बाबू हरिदास
उत्तर: (A) बाबू रामजीदास
प्रश्न 4: रामेश्वरी किस कारण से मानसिक अवसाद और कुंठा से ग्रस्त है?
(A) गरीबी के कारण
(B) पति के बुरे व्यवहार के कारण
(C) निःसंतान होने के कारण
(D) बीमारी के कारण
उत्तर: (C) निःसंतान होने के कारण
प्रश्न 5: बाबू रामजीदास के छोटे भाई का क्या नाम है?
(A) रामदास
(B) कृष्णदास
(C) शिवदास
(D) विष्णुदास
उत्तर: (B) कृष्णदास
प्रश्न 6: मनोहर, बाबू रामजीदास का रिश्ते में क्या लगता है?
(A) बेटा
(B) भांजा
(C) पोता
(D) भतीजा
उत्तर: (D) भतीजा
प्रश्न 7: मनोहर की आयु लगभग कितनी है?
(A) तीन वर्ष
(B) पाँच वर्ष
(C) सात वर्ष
(D) आठ वर्ष
उत्तर: (B) पाँच वर्ष
प्रश्न 8: मनोहर की छोटी बहन का क्या नाम है?
(A) मुन्नी
(B) चुन्नी
(C) गुड़िया
(D) रूबी
उत्तर: (B) चुन्नी
प्रश्न 9: बाबू रामजीदास का स्वभाव कैसा है?
(A) अत्यंत कठोर
(B) लोभी
(C) उदार और सहृदय
(D) क्रोधी
उत्तर: (C) उदार और सहृदय
प्रश्न 10: रामेश्वरी बच्चों से घृणा क्यों करती है?
(A) क्योंकि बच्चे बहुत शोर मचाते हैं
(B) क्योंकि वह हीन भावना और ईर्ष्या से ग्रस्त है
(C) क्योंकि बच्चे उसके पैसे चुराते हैं
(D) क्योंकि बच्चे उसे मारते हैं
उत्तर: (B) क्योंकि वह हीन भावना और ईर्ष्या से ग्रस्त है
प्रश्न 11: "दूसरों के बच्चों से जी लगाना मूर्खता है। अपना बच्चा अपना ही होता है।" यह कथन किसका है?
(A) बाबू रामजीदास का
(B) कृष्णदास का
(C) रामेश्वरी का
(D) मनोहर की माँ का
उत्तर: (C) रामेश्वरी का
प्रश्न 12: ताई की झिड़कियाँ और दुत्कार सुनकर भी मनोहर क्या करता है?
(A) ताई को मारता है
(B) ताई के पास जाना छोड़ देता है
(C) फिर भी अपनी ताई के पास ही जाता है
(D) रोते हुए अपनी माँ के पास भाग जाता है
उत्तर: (C) फिर भी अपनी ताई के पास ही जाता है
प्रश्न 13: "बच्चे तो भगवान का रूप होते हैं, उनसे ऐसी नफरत अच्छी नहीं।" यह वाक्य किसने कहा?
(A) बाबू रामजीदास ने
(B) रामेश्वरी ने
(C) कृष्णदास ने
(D) मनोहर ने
उत्तर: (A) बाबू रामजीदास ने
प्रश्न 14: कहानी का मुख्य घटनाक्रम (चरमोत्कर्ष) किस स्थान पर घटित होता है?
(A) आँगन में
(B) छत पर
(C) बाज़ार में
(D) विद्यालय में
उत्तर: (B) छत पर
प्रश्न 15: छत पर मनोहर क्या कर रहा था?
(A) खेल-कूद रहा था
(B) सो रहा था
(C) कटी हुई पतंग लूटने का प्रयास कर रहा था
(D) पढ़ाई कर रहा था
उत्तर: (C) कटी हुई पतंग लूटने का प्रयास कर रहा था
प्रश्न 16: जब मनोहर छत की मुंडेर से फिसलता है, तो रामेश्वरी की प्रारंभिक प्रतिक्रिया क्या होती है?
(A) वह तुरंत हाथ बढ़ाकर उसे बचा लेती है
(B) वह क्षण भर के लिए ईर्ष्या के कारण ठिठक जाती है
(C) वह ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगती है
(D) वह भाग जाती है
उत्तर: (B) वह क्षण भर के लिए ईर्ष्या के कारण ठिठक जाती है
प्रश्न 17: मुंडेर पर लटकते हुए मनोहर ने किससे मदद माँगी थी?
(A) अपनी माँ से
(B) अपने ताऊ से
(C) अपनी ताई से
(D) अपने पिता से
उत्तर: (C) अपनी ताई से
प्रश्न 18: मनोहर के नीचे गिरने पर रामेश्वरी पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(A) उसे बहुत खुशी होती है
(B) वह चीख मारकर बेहोश हो जाती है
(C) वह चुपचाप नीचे चली जाती है
(D) वह खाना खाने लगती है
उत्तर: (B) वह चीख मारकर बेहोश हो जाती है
प्रश्न 19: मनोहर के गिरने की घटना के बाद रामेश्वरी के भीतर कौन सा भाव जाग उठता है?
(A) प्रतिशोध का भाव
(B) घृणा का भाव
(C) मातृत्व का भाव
(D) वैराग्य का भाव
उत्तर: (C) मातृत्व का भाव
प्रश्न 20: इस दुर्घटना के सदमे से रामेश्वरी की क्या स्थिति होती है?
(A) वह पागल हो जाती है
(B) उसे तेज बुखार आ जाता है और वह प्रलाप करने लगती है
(C) वह घर छोड़कर चली जाती है
(D) वह बिल्कुल स्वस्थ रहती है
उत्तर: (B) उसे तेज बुखार आ जाता है और वह प्रलाप करने लगती है
प्रश्न 21: कई दिनों की बेहोशी के बाद जब रामेश्वरी को होश आता है, तो उसके मुँह से पहला शब्द क्या निकलता है?
(A) रामजीदास
(B) पानी
(C) मनोहर
(D) भगवान
उत्तर: (C) मनोहर
प्रश्न 22: 'ताई' कहानी का अंत किस प्रकार का है?
(A) दुखांत
(B) रहस्यमयी
(C) सुखांत (हृदय परिवर्तन)
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (C) सुखांत (हृदय परिवर्तन)
प्रश्न 23: विशंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' जी मुख्य रूप से किस युग के कथाकार माने जाते हैं?
(A) भारतेंदु युग
(B) द्विवेदी युग
(C) प्रेमचंद युग
(D) स्वातंत्र्योत्तर युग
उत्तर: (C) प्रेमचंद युग
प्रश्न 24: कहानी में बालक मनोहर किस बात का प्रतीक है?
(A) ईर्ष्या और द्वेष का
(B) बाल निश्छलता और अबोधपन का
(C) स्वार्थ का
(D) क्रोध का
उत्तर: (B) बाल निश्छलता और अबोधपन का
प्रश्न 25: रामेश्वरी का हृदय परिवर्तन कहानी की किस विशेषता को दर्शाता है?
(A) आदर्शोन्मुखी यथार्थवाद
(B) नग्न यथार्थवाद
(C) प्रकृतिवाद
(D) अतियथार्थवाद
उत्तर: (A) आदर्शोन्मुखी यथार्थवाद
प्रश्न 26: बाबू रामजीदास अपने छोटे भाई के बच्चों को क्या मानते हैं?
(A) अपने ऊपर एक बोझ
(B) अपनी संतान के समान
(C) अपने नौकर
(D) अपने दुश्मन
उत्तर: (B) अपनी संतान के समान
प्रश्न 27: 'ताई' कहानी का मुख्य विषय क्या है?
(A) राजनीतिक संघर्ष
(B) बाल मनोविज्ञान और नारी के अंतर्द्वंद्व का चित्रण
(C) ऐतिहासिक घटना
(D) वैज्ञानिक आविष्कार
उत्तर: (B) बाल मनोविज्ञान और नारी के अंतर्द्वंद्व का चित्रण
प्रश्न 28: रामेश्वरी को सबसे ज्यादा चिढ़ किससे थी?
(A) अपने पति से
(B) अपनी सास से
(C) देवर के बच्चों से (मनोहर और चुन्नी से)
(D) पड़ोसियों से
उत्तर: (C) देवर के बच्चों से (मनोहर और चुन्नी से)
प्रश्न 29: कहानी के अंत में रामेश्वरी मनोहर के साथ कैसा व्यवहार करती है?
(A) उसे फिर से डांटती है
(B) उसे घर से बाहर निकाल देती है
(C) उसे सीने से लगा लेती है
(D) उससे बात करना बंद कर देती है
उत्तर: (C) उसे सीने से लगा लेती है
प्रश्न 30: "रामेश्वरी के मन में एक क्षण के लिए आया—अच्छा है, मर जाने दो, पाप कटेगा।" यह वाक्य रामेश्वरी की किस मानसिक स्थिति को दर्शाता है?
(A) उसके प्रेम को
(B) उसकी गहरी कुंठा और ईर्ष्या को
(C) उसकी दयालुता को
(D) उसकी बुद्धिमानी को
उत्तर: (B) उसकी गहरी कुंठा और ईर्ष्या को