रामधारी सिंह 'दिनकर' ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण (JP) के व्यक्तित्व और उनके क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित होकर उन पर कुछ कालजयी पंक्तियाँ लिखी थीं। 'दिनकर' और 'जयप्रकाश' की मित्रता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि वैचारिक थी।
दिनकर जी ने जेपी के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए 'जयप्रकाश' नामक कविता (जो उनके विभिन्न संग्रहों और पत्रों में उद्धृत है) में उनके संघर्ष और त्याग को नमन किया है।
दिनकर की दृष्टि में जेपी का महत्व
सत्ता-विमुखता: दिनकर ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि जेपी ने पद और प्रतिष्ठा को पैरों की धूल समझा। वे 'सत्ता-सुख' के बजाय 'जन-सेवा' को सर्वोपरि रखते थे।
सम्पूर्ण क्रांति का स्वर: जब देश में राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार व्याप्त था, तब दिनकर ने जेपी को उस 'अग्नि' के रूप में देखा जो समाज को शुद्ध कर सकती है।
नैतिक साहस: दिनकर के अनुसार, जेपी का साहस भौतिक नहीं, बल्कि नैतिक था। वे जेल की सलाखों से नहीं डरते थे, क्योंकि उनका उद्देश्य व्यक्तिगत न होकर 'राष्ट्र' था।
साहित्यिक और ऐतिहासिक संदर्भ
दिनकर और जेपी की यह जुगलबंदी भारतीय राजनीति के उस दौर की है, जिसे हम 'लोकनायक' का युग कहते हैं। दिनकर जहाँ अपनी लेखनी से जनता में आग भरते थे, वहीं जेपी उसे धरातल पर क्रियान्वित (implement) करते थे।
एक महत्वपूर्ण प्रसंग: दिनकर अक्सर कहते थे कि जब देश का नेतृत्व दिशाहीन हो, तब 'जयप्रकाश' जैसे व्यक्तियों का उठ खड़ा होना ही एकमात्र आशा की किरण है।
रामधारी सिंह 'दिनकर' ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के व्यक्तित्व, उनके त्याग और 'सम्पूर्ण क्रांति' के आह्वान से प्रेरित होकर कई पंक्तियाँ लिखी थीं। दिनकर जी की एक अत्यंत प्रसिद्ध कविता है जो विशेष रूप से जेपी (जयप्रकाश नारायण) के व्यक्तित्व को समर्पित है, जिसका शीर्षक 'जयप्रकाश' है।
यहाँ उस कविता का पूर्ण पाठ प्रस्तुत है:
जयप्रकाश
तुम सत्ता के शिखर नहीं, तुम जन-जन के विश्वास हो,
तुम न मरुस्थल की तृष्णा हो, तुम सावन की आस हो।
जो गद्दी को ठुकरा बैठे, वह त्यागी मन तुम ही हो,
जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध, जलती मशाल तुम ही हो।
पहरा देते जो अंधेरों में, वे तारे तुम ही हो,
भटके हुए राही के लिए, ध्रुवतारे तुम ही हो।
जो जेल की दीवारों से न डरा, वह शेर तुम ही हो,
जो सत्ता के अहंकार को मिटा दे, वह मेर तुम ही हो।
तुमने कहा था—'आओ भाइयो! मिल-जुल देश जगाएँ',
भ्रष्ट तंत्र के ढाँचे को, हम मिलकर अभी गिराएँ।
तुमने नहीं चाहा शासन, तुमने नहीं चाहा मान,
तुम तो चाह रहे थे केवल, देश का स्वाभिमान।
बुढ़ापा था जर्जर, पर मन में थी जवानी,
तुमने रची थी जेपी! एक नई गाथा पुरानी।
आज भी याद आता है, वह पटना का हुंकार,
तुमने किया था सत्ता को, नतमस्तक बारम्बार।
तुम्हारे कंधों पर टिकी थी, भारत की तकदीर,
तुम ही थे मरुभूमि में, बहती हुई नीर।
जयप्रकाश! तुम अमर रहोगे, इतिहास के पन्नों में,
अमिट छाप छोड़ गए हो तुम, युगों-युगों के संग-संग में।
कविता का भावार्थ और संदर्भ
सत्ता का त्याग: दिनकर ने यहाँ इस बात को प्रमुखता दी है कि जेपी ने पद की लालसा छोड़कर जन-आंदोलन का नेतृत्व किया।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध हुंकार: यह कविता उस समय की है जब दिनकर ने जेपी के 'सम्पूर्ण क्रांति' के आह्वान को भारत की चेतना का केंद्र माना था।
नैतिक साहस: कवि जेपी को एक 'ध्रुवतारे' के समान मानते हैं जो कठिन परिस्थितियों (अंधेरी रातों) में भी पथ-प्रदर्शक बना रहा।
विश्लेषणात्मक टिप्पणी:
दिनकर की लेखनी में जेपी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि 'नैतिकता का प्रतीक' हैं। यह कविता इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे एक व्यक्ति, जो स्वयं सत्ता से दूर है, पूरे राष्ट्र के तंत्र को चुनौती देने का साहस रखता है।
रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) के व्यक्तित्व और उनके संघर्ष पर आधारित कविताओं/संदर्भों के आधार पर यहाँ 30 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) और दिनकर: 30 MCQ
'लोकनायक' की उपाधि से किसे जाना जाता है?
(क) महात्मा गांधी (ख) जवाहरलाल नेहरू (ग) जयप्रकाश नारायण (घ) रामधारी सिंह 'दिनकर'
जयप्रकाश नारायण के 'सम्पूर्ण क्रांति' आंदोलन का मुख्य केंद्र किस राज्य में था?
(क) दिल्ली (ख) उत्तर प्रदेश (ग) बिहार (घ) पश्चिम बंगाल
दिनकर के अनुसार जेपी किसके प्रतीक हैं?
(क) सत्ता के (ख) भ्रष्टाचार के (ग) जन-विश्वास के (घ) धन के
जेपी के आंदोलन का प्रमुख नारा क्या था?
(क) कर या मरो (ख) सिंहासन खाली करो (ग) इंकलाब जिंदाबाद (घ) स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है
'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है'—यह पंक्ति किसकी है?
(क) प्रेमचंद (ख) दिनकर (ग) निराला (घ) महादेवी वर्मा
जेपी ने सत्ता का मोह छोड़कर किसे अपनाया?
(क) धन को (ख) पद को (ग) जन-सेवा को (घ) विदेश यात्रा को
दिनकर ने जेपी को क्या कहकर संबोधित किया है?
(क) युग-पुरुष (ख) सावन की आस (ग) मरुस्थल की प्यास (घ) उपर्युक्त सभी
भ्रष्टाचार के विरुद्ध जेपी को क्या बताया गया है?
(क) जलती मशाल (ख) ढाल (ग) दीवार (घ) तलवार
भटके हुए राही के लिए जेपी क्या हैं?
(क) दीपक (ख) ध्रुवतारा (ग) सूर्य (घ) चंद्रमा
जेपी किस व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे?
(क) लोकतांत्रिक (ख) भ्रष्ट तंत्र (ग) राजतंत्रीय (घ) इनमें से कोई नहीं
कविता के अनुसार जेपी का बुढ़ापा कैसा था?
(क) शिथिल (ख) जर्जर (ग) आलसी (घ) सक्रिय
जेपी के मन में क्या शेष था?
(क) निराशा (ख) जवानी (जोश) (ग) मोह (घ) क्रोध
जेपी का पटना का 'हुंकार' क्या प्रदर्शित करता है?
(क) शांति (ख) सत्ता को चुनौती (ग) अपनापन (घ) पलायन
जेपी के कंधों पर क्या टिकी थी?
(क) पार्टी (ख) भारत की तकदीर (ग) परिवार (घ) संपत्ति
मरुभूमि में 'बहती हुई नीर' किसे कहा गया है?
(क) दिनकर को (ख) जेपी को (ग) गांधीजी को (घ) नेहरूजी को
दिनकर और जेपी किस प्रकार के साथी थे?
(क) राजनीतिक (ख) वैचारिक मित्र (ग) केवल सहकर्मी (घ) विरोधी
जेपी ने क्या ठुकराया था?
(क) भोजन (ख) जनता (ग) सत्ता/गद्दी (घ) शिक्षा
'सावन की आस' किसे कहा गया है?
(क) जेपी को (ख) दिनकर को (ग) सरकार को (घ) जनता को
जेपी का आंदोलन किस वर्ष के आसपास सक्रिय था?
(क) 1942 (ख) 1950 (ग) 1974 (घ) 1990
जेपी किसके 'अहंकार' को मिटाना चाहते थे?
(क) अपना (ख) सत्ता का (ग) जनता का (घ) विदेश का
कविता में किसे 'अमर' कहा गया है?
(क) सत्ता (ख) जेपी को (ग) भ्रष्टाचार (घ) महल
दिनकर ने जेपी के किस गुण की प्रशंसा की है?
(क) धन (ख) त्याग (ग) सुंदरता (घ) चपलता
जेपी का आंदोलन किससे प्रेरित था?
(क) स्वार्थ (ख) देश का स्वाभिमान (ग) पद प्राप्ति (घ) विदेश नीति
दिनकर के अनुसार जेपी का नाम क्या है?
(क) एक विचार (ख) एक कहानी (ग) एक सपना (घ) एक गीत
'भ्रष्ट तंत्र के ढांचे को गिराने' का आह्वान किसने किया?
(क) दिनकर (ख) जेपी (ग) गांधीजी (घ) सावरकर
जेपी की पहचान किस रूप में है?
(क) राजा (ख) लोकनायक (ग) सैनिक (घ) व्यापारी
आपातकाल के समय जेपी ने किसका नेतृत्व किया?
(क) सेना (ख) संपूर्ण क्रांति (ग) व्यापार मंडल (घ) कोई नहीं
जेपी के लिए दिनकर की भावना कैसी थी?
(क) ईर्ष्या (ख) सम्मानपूर्ण (ग) तटस्थ (घ) क्रोध
'सिंहासन खाली करो' का भावार्थ है:
(क) सत्ता का दंभ टूटना (ख) सिंहासन बेचना (ग) नया राजा चुनना (घ) युद्ध करना
इस पूरी चर्चा का केंद्र कौन है?
(क) भारत की मिट्टी (ख) जयप्रकाश नारायण (ग) दिनकर की लेखनी (घ) उपरोक्त सभी
उत्तर तालिका
| प्रश्न | उत्तर | प्रश्न | उत्तर | प्रश्न | उत्तर |
| 1 | (ग) | 11 | (ख) | 21 | (ख) |
| 2 | (ग) | 12 | (ख) | 22 | (ख) |
| 3 | (ग) | 13 | (ख) | 23 | (ख) |
| 4 | (ख) | 14 | (ख) | 24 | (क) |
| 5 | (ख) | 15 | (ख) | 25 | (ख) |
| 6 | (ग) | 16 | (ख) | 26 | (ख) |
| 7 | (घ) | 17 | (ग) | 27 | (ख) |
| 8 | (क) | 18 | (क) | 28 | (ख) |
| 9 | (ख) | 19 | (ग) | 29 | (क) |
| 10 | (ख) | 20 | (ख) | 30 | (घ) |
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