इस ब्लॉग पर हिंदी साहित्य से सम्बंधित जानकारी दी जाती है। पाठक को किसी विषय पर दिक्कत हो रही है तब उसकी आवश्यकता अनुसार उस से सम्बंधित विषय पर लेख भी दिया जायेगा। यह ब्लॉग मुख्यतः हिंदी के प्रचार -प्रसार के लिए बनाया गया है। हिंदी नेट /जे.आर.एफ में आने वाले संभावित प्रश्नों का टेस्ट लिया जाता है।हिंदी नेट के पाठ्यक्रम के अनुसार आपको सामग्री प्रदान की जाती है।।
कुकुरमुत्ता
एक थे नव्वाब,फ़ारस से मंगाए थे गुलाब।बड़ी बाड़ी में लगाएदेशी पौधे भी उगाएरखे माली, कई नौकरगजनवी का बाग मनहरलग रहा था।एक सपना जग रहा थासांस पर तहजबी की,गोद पर तरतीब की।क्यारियां सुन्दर बनीचमन में फैली घनी।फूलों के पौधे वहाँलग रहे थे खुशनुमा।बेला, गुलशब्बो, चमेली, कामिनी,जूही, नरगिस, रातरानी, कमलिनी,चम्पा, गुलमेंहदी, गुलखैरू, गुलअब्बास,गेंदा, गुलदाऊदी, निवाड़, गन्धराज,और किरने फ़ूल, फ़व्वारे कई,रंग अनेकों-सुर्ख, धनी, चम्पई,आसमानी, सब्ज, फ़िरोज सफ़ेद,जर्द, बादामी, बसन्त, सभी भेद।फ़लों के भी पेड़ थे,आम, लीची, सन्तरे और फ़ालसे।चटकती कलियां, निकलती मृदुल गन्ध,लगे लगकर हवा चलती मन्द-मन्द,चहकती बुलबुल, मचलती टहनियां,बाग चिड़ियों का बना था आशियाँ।साफ़ राह, सरा दानों ओर,दूर तक फैले हुए कुल छोर,बीच में आरामगाहदे रही थी बड़प्पन की थाह।कहीं झरने, कहीं छोटी-सी पहाड़ी,कही सुथरा चमन, नकली कहीं झाड़ी।आया मौसिम, खिला फ़ारस का गुलाब,बाग पर उसका पड़ा था रोब-ओ-दाब;वहीं गन्दे में उगा देता हुआ बुत्तापहाड़ी से उठे-सर ऐंठकर बोला कुकुरमुत्ता-“अब, सुन बे, गुलाब,भूल मत जो पायी खुशबु, रंग-ओ-आब,खून चूसा खाद का तूने अशिष्ट,डाल पर इतरा रहा है केपीटलिस्ट!कितनों को तूने बनाया है गुलाम,माली कर रक्खा, सहाया जाड़ा-घाम,हाथ जिसके तू लगा,पैर सर रखकर वो पीछे को भागाऔरत की जानिब मैदान यह छोड़कर,तबेले को टट्टू जैसे तोड़कर,शाहों, राजों, अमीरों का रहा प्यारातभी साधारणों से तू रहा न्यारा।वरना क्या तेरी हस्ती है, पोच तूकांटो ही से भरा है यह सोच तूकली जो चटकी अभीसूखकर कांटा हुई होती कभी।रोज पड़ता रहा पानी,तू हरामी खानदानी।चाहिए तुझको सदा मेहरून्निसाजो निकाले इत्र, रू, ऐसी दिशाबहाकर ले चले लोगो को, नही कोई किनाराजहाँ अपना नहीं कोई भी सहाराख्वाब में डूबा चमकता हो सितारापेट में डंड पेले हों चूहे, जबां पर लफ़्ज प्यारा।देख मुझको, मैं बढ़ाडेढ़ बालिश्त और ऊंचे पर चढ़ाऔर अपने से उगा मैंबिना दाने का चुगा मैंकलम मेरा नही लगतामेरा जीवन आप जगतातू है नकली, मै हूँ मौलिकतू है बकरा, मै हूँ कौलिकतू रंगा और मैं धुलापानी मैं, तू बुलबुलातूने दुनिया को बिगाड़ामैंने गिरते से उभाड़ातूने रोटी छीन ली जनखा बनाकरएक की दी तीन मैने गुन सुनाकर।
हिंदी साहित्य नेट से सम्बंधित कुछ प्रश्न
हिंदी साहित्य नेट से सम्बंधित कुछ प्रश्न
प्रश्न 1 - गीत फरोश किसकी कविता है ?
1 -मुक्तिबोध 2 अज्ञेय 3 धूमिल 4 भवानी प्रसाद मिश्र
प्रश्न 2 -निम्न को क्रम से लगाइये
- धूमिल ,मुक्तिबोध, अज्ञेय ,भवानी प्रसाद मिश्र
- अज्ञेय ,भवानीप्रसाद मिश्र ,मुक्तिबोध ,धूमिल
- भवानीप्रसाद मिश्र ,अज्ञेय ,मुक्तिबोध ,धूमिल
- धूमिल ,अज्ञेय ,भवानीप्रसाद मिश्र ,मुक्तिबोध
प्रश्न ३-बिहारी सतसई में कितने दोहे है ?
1 -709 2- 712 3- 715 4 -713
प्रश्न 4 -अँधेरे में कविता में कितने खंड है ?
1 - 8 खंड 75 बंध २-8 खंड 71 बंध 3 -6 खंड 71 बंध
4 -6 खंड 75 बंध
प्रश्न ५-जोरावर किस नाटक पात्र है ?
1 -सिंदूर की होली 2 -बकरी 3 -महाभोज 4 -आगरा बाजार
प्रश्न 6 -सावित्री किस नाटक की पात्र है ?
1 -महाभोज 2 -अंजो दीदी 3 -इनमे से कोई नहीं 4 -बकरी
प्रश्न 7 -कविता क्या है निबंध किस संग्रह में संकलित है ?
1 -रस मीमांसा २-चितामणि १ भाग ३ -चिंता मणि २ भाग ४ -इनमे से कोई नहीं
प्रश्न 8 -ध्रुस्वमिनी नाटक कब आया ?
१ -1915 २ 1928 ३ -1931 ४ 1933
प्रश्न 9 -देवरानी जेठानी की कहानी को किसने हिंदी का पहला उपन्यास माना है ?
१ -मधुरेश 2 गोपाल राय ३ हजारी प्रसाद दिवेदी ४ रामचंद्र शुक्ल
प्रश्न 10 -इस करुणा कलित ह्रदय में
अब विकल रागनी बजती
क्यों हाहाकार स्वरों में
वेदना असीम गरजती ?
१ -आँसू २ -कामायनी ३ - सरोज स्मृति ४ -फिर विकल है प्राण मेरे
देवकांत सिंह -मोबाईल न-9555935125
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नेट हिंदी साहित्य में लगे कहानीकारों का जन्म
नेट हिंदी साहित्य में लगे कहानीकारों का जन्म
- सुभद्रा कुमारी चौहान1905
- प्रेमचंद -1880
- चंद्रधर शर्मा गुलेरी -1883
- जयशंकर प्रसाद -1889
- जैनेन्द्र -1905
- फणीश्वरनाथ रेणु -1921
- अज्ञेय -1911
- शेखर जोशी -1932
- भीष्म साहनी -1915
- कृष्णा सोबती -1925
- हरिशंकर परसाई - 1924
- ज्ञानरंजन -1931
- कमलेश्वर -1932
- निर्मल वर्मा -1929
- राजेंद्र बाला घोष -1882
- माधवप्रसाद सप्रे -1871
- दुनिया का अनमोल रतन कहानी सोजे वतन में संकलित हे। यह रचना 1907 ई में ै आई थी। इसे अंग्रेजो जब्त कर लिया। उसके पश्चात् नवाबराय ने प्रेमचंद नाम से लिखना आरम्भ किया।
- उसने कहा था कहानी का प्रकाशन 1915 ई में हुआ। यह सरस्वती पत्रिका में सम्पादित हुई। इसे राजेंद्र यादव ने हिंदी की पहली प्रौढ़ कहानी कहा है।
- परिंदे कहानी 1960 में प्रकाशित हुई। डॉ नामवर सिंह ने इसे अपनी पुस्तक कहानी और नयी कहानी में हिंदी नै कहानी की प्रथम कहानी माना है।
- ईदगाह कहानी 1933 में प्रकाशित हुई। इसमें एक बालक के मनोविज्ञान की दशा को दिखाया गया है की वह कैसे काम उम्र में इतना संवेदनशील हो जाता है। कि अपनी जरूरतों को न देख वह दादी के लिया चिंता ले अत है।
- अमृतसर आ गया कहानी साम्प्रदाइकता की विभीषिका पर लिखी गई कहानी है। किस प्रकार मनुष्य हैवान बन जाता है। वह अपने ही जैसे दूसरे व्यक्ति की हत्या तक कर देता है। क्योकि उसका धर्म अलग है। ऐसे में जरुरी नहीं जो गलत करता है। वही व्यक्ति दूसरे का निशाना हो। उसमे किसी की भी बलि चढ़ जाती है।
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