हिंदी साहित्य का इतिहास

हिंदी साहित्य का इतिहास 

vivekanand institute

DEVKANT SINGH

प्रश्न 1 -रचनाकारों को सही क्रम से लगाओ 

  1. महादेवी वर्मा ,निराला ,जयशंकर ,पंत 
  2. निराला ,महादेवी ,पंत जयशंकर 
  3. जयशंकर ,निराला ,पंत ,महादेवी 
  4. महादेवी ,जयशंकर ,निराला ,पंत 

प्रश्न 2 -इनमे से कौन छायावाद का नहीं है 

  1. निराला 
  2. महादेवी 
  3. जयशंकर 
  4. प्रताप नारायण मिश्र 

प्रश्न ३-इनमे से कौन सा नाटक जयशंकर प्रसाद का नहीं है। 

  1. झरना 
  2. आँसू 
  3. लहर 
  4. वीणा 

प्रश्न 4 -इनमे से कौन प्रगतिवादी कवी नहीं है। 

  1. केदारनाथ अग्रवाल 
  2. त्रिलोचन 
  3. शिवमंगल सिंह सु
  4. रामधारी सिंह दिनकर 

प्रश्न 5 -इनमे से कौन सा कवि नवगीत से सम्बंधित है। 

  1. शम्भुनाथ सिंह 
  2. प्रताप नारायण मिश्र 
  3. जयशंकर प्रसाद 
  4. कृति चौधरी 

प्रश्न 6 -कवियों को सही क्रम से लगाओ। 

  1. अज्ञेय,रामधारी सिंह दिनकर ,सुभद्रा कुमारी चौहान ,भवानी प्रसाद मिश्र 
  2. भवानी प्रसाद मिश्र , रामधारी सिंह दिकर ,सुभद्रा कुमारी चौहान ,अज्ञेय 
  3. सुभद्रा कुमारी चौहान ,रामधारी सिंह दिनकर ,अज्ञेय ,भवानी प्रसाद मिश्र 
  4. भवानी प्रसाद मिश्र ,अज्ञेय ,रामधारी सिंह दिनकर ,सुभद्रा कुमारी चौहान 

प्रश्न 7 -इनमे से कोण सी रचना रामनरेश त्रिपाठी की नहीं है ?

  1. मिलन 
  2. पथिक 
  3. स्वप्न 
  4. जीवन संगीत 

प्रश्न 8 -वियोगी होगा पहला कवि ,

आह से उपजा होगा गान। 
निकलकर आँखों से चुपचाप ,
बही होगी कविता अनजान। 
  1. निराला 
  2. महादेवी 
  3. जयशंकर 
  4. पंत 

प्रश्न 9 -ये किस रचनाकार की पंक्ति है। 

जो घनीभूत पीड़ा थी मस्तक में स्मृति सी छाई। 
दुर्दिन में आँसू बनकर वह आज बरसने आई। 

  1. पंत 
  2. महादेवी 
  3. जयशंकर 
  4. निराला 

प्रश्न 10 -सही क्रम से लगाओ 

  1. जयद्रथ वध ,भारत भारती ,साकेत ,यशोधरा 
  2. भारत भारती ,साकेत ,यशोधरा ,जयद्रथ वध 
  3. भारत भारती ,यशोधरा ,साकेत ,जयद्रथ वध 
  4. भारत भारती ,साकेत ,जयदथ वध ,साकेत 

प्रश्न 11 -राम की  शक्ति पूजा किसकी रचना है ?

  1. रामधारी सिंह दिनकर 
  2. नरेश मेहता 
  3. निराला 
  4. जयशंकर प्रसाद 

प्रश्न 12 -कामायनी का रचनाकाल ?

  1. 1931 
  2. 1933 
  3. 1937 
  4. 1936 

प्रश्न 13 -गीत फरोश किसकी रचना है ?

  1. भारत भूषण  अग्रवाल 
  2. भवानी प्रसाद मिश्र 
  3. अज्ञेय 
  4. मुक्तिबोध 
प्रश्न 14 -नक्सलवाडी कविता किसकी हैं ?
  1. नागार्जुन 
  2. मुक्तिबोध 
  3. धूमिल 
  4. भवानी प्रसाद मिश्र 

प्रश्न 15 -सतपुड़ा के जंगल किसकी रचना है ?

  1. धूमिल 
  2. भवानी प्रसाद मिस्र 
  3. मुक्तिबोध 
  4. नागार्जुन 

प्रश्न 16 -शुक्ल ने हिंदी की प्रथम कहानी किसे माना है ?

  1. एक टोकरी भर मिट्टी 
  2. इंदुमती 
  3. ग्यारह वर्ष का समय 
  4. दुलाईवली 

प्रश्न 17 -दिल्ली दरबार दर्पण  किसकी रचना है ?

  1. हजारी प्रसाद द्विवेदी 
  2. भारतेन्दु 
  3. प्रताप नारायण मिश्र 
  4. बालकृष्ण भट्ट 

प्रश्न 18 -संस्कृति और सौंदर्य  किसकी रचना है ?


  1. नामवर सिंह 
  2. कुबेरनाथ राय 
  3. विवेकी राय 
  4. विद्यानिवास मिश्र 

प्रश्न 19 - मेरे राम का मुकुट भीग रहा है ?

  1. नामवर सिंह 
  2. कुबेरनाथ राय 
  3. विवेकी राय 
  4. विद्यानिवास मिश्र 

प्रश्न 20 -कविता क्या है किस विधा की रचना है ?

  1. निबंध 
  2. आलोचना 
  3. कविता 
  4. कहानी 

प्रश्न 21 -कविता क्या है किस संग्रह में संकलित है ?

  1. चिंतामणि 1 
  2. चिंतामणि 2 
  3. चिंतामणि 3 
  4. चिंतामणि 4 

प्रश्न 22 -आवारा मसीहा किसके जीवन पर आधारित है ?

  1. सूरदास 
  2. तुलसीदास 
  3. रवींद्रनाथ टेगौर 
  4. शरतचंद 

प्रश्न 22 -माटी की मूरते किसकी रचना है ?

  1. तुलसीराम 
  2. मन्नू भंडारी 
  3. रामवृक्ष बेनीपुरी 
  4. गुलाब राय 

प्रश्न 23 -प्रेमचंद किस प्रकार के उपन्यास कर है ?

  1. आदर्शवादी 
  2. यथार्थवादी 
  3. आदर्शोन्मुखी यथार्थवाद 
  4. अस्तित्व वादी 

प्रश्न 24 -इनमे से कौन मनोवैज्ञानिक उपन्यास कर नहीं है ?

  1. देवराज 
  2. जैनेन्द्र 
  3. अज्ञेय 
  4.  यशपाल 

प्रश्न 25 -क्रम से लगाइये 

  1. अँधा युग ,चन्द्रगुप्त ,आधे अधूरे ,बकरी 
  2. अँधा युग ,बकरी ,आधे अधूरे ,चंद्रगुप्त ,
  3. चन्द्रगुप्त ,आधे अधूरे ,बकरी ,अँधा युग , 
  4. चन्द्रगुप्त ,अँधा युग ,आधे अधूरे ,बकरी 

प्रश्न 26 -तर सप्तक के संपादक कौन थे ?

  1. मुक्तिबोध 
  2. अज्ञेय 
  3. रामविलास शर्मा 
  4. धर्मवीर भारती 

प्रश्न 27 -दूसरा तार सप्तक का संपादन कब हुआ ?

  1. 1943 
  2. 1951 
  3. 1959 
  4. 1979 

प्रश्न 28 -सिंदूर की होली किसकी रचना है ?

  1. मोहन राकेश 
  2. हबीब तनवीर 
  3. लक्समीनारायण मिश्र 
  4. उपेन्द्रनाथ अश्क 

प्रश्न 29 - कौन भारतेन्दु युग का कवी नहीं है ?

  1. बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघन 
  2. प्रताप नारायण मिश्र 
  3. राधाकृष्ण दास 
  4. जगमोहन सिंह 

प्रश्न ३० -प्रियप्रवास का रचनाकाल क्या है ?

  1. 1913 
  2. 1914 
  3. 1915 
  4. 1916 

प्रश्न 31 -यही सच है कहानी पर कौन सी फिल्म बनी है ?

  1. पिंजर 
  2. ट्रैन टू पाकिस्तान 
  3. तमस 
  4. रजनी गंधा 

प्रश्न ३२ -छायावाद स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह नहीं रहा----?

  1. नगेन्द्र 
  2. रामविलास शर्मा 
  3. महादेवी वर्मा 
  4. जयशंकर प्रसाद 

प्रश्न 33 -छायावाद की विशेषता नहीं है ?

  1. आत्मभिव्यंजना 
  2. नारी भावना 
  3. प्रकति चित्रण 
  4. इतिवृतनात्मकता 

प्रश्न 34 -प्रगतिवाद किस विचारधारा से प्रभावित है ?

  1. मनोविज्ञान 
  2. अस्तित्ववाद 
  3. मार्क्सवाद 
  4. इनमे से कोई नहीं 

प्रश्न 35 -सही क्रम से लगाइये ?

  1. सांध्यगीत ,नीरजा ,रश्मि ,निहार 
  2. नीरजा ,सांध्यगीत रश्मि ,निहार 
  3. नीरजा ,रश्मि ,सांध्यगीत ,निहार 
  4. निहार ,रश्मि ,नीरजा ,सांध्यगीत 

प्रश्न 36 -अंधेर नगरी किसकी रचना है ?

  1. भारतेन्दु हरिश्चंद 
  2. प्रताप नारायण मिश्र 
  3. बालकृष्ण भट्ट 
  4. बालमुकुंद गुप्त 

प्रश्न 37 -प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना कब हुई ?

  1. 1931 
  2. 1936 
  3. 1940 
  4. 1945 

प्रश्न 38 -प्रेमचंद ने कौन सी विधा से ख्याति प्राप्त की ?

  1. कहानी ,उपन्यास 
  2. कविता ,कहानी ,उपन्यास 
  3. कविता ,निबंध 
  4. कविता ,आलोचना 

प्रश्न 39 -जयशंकर प्रसाद का अधूरा उपन्यास ?

  1. कंकाल 
  2. तितली 
  3. इरावती 
  4. माँ 

प्रश्न 40 -रामधारी सिंह दिनकर की रचना नहीं है ?

  1. उर्वसी 
  2. हुंकार 
  3. हिमतंगनी 
  4. पशुराम की प्रतीक्षा 

प्रश्न 41 -कामायनी में कुल  कितने सर्ग है?

  1. 12 
  2. 15 
  3. 17 
  4. 21  
प्रश्न 42 - कौन तीसरे तारसप्तक का कवि है ?-

  1. शमशेर 
  2. मुक्तिबोध 
  3. कुँवरनारायण 
  4. नरेश मेहता
प्रश्न 43 -चेतना के बिम्ब के लेखक है ?
  1. नन्द दुलारे वाजपेयी 
  2. नामवर सिंह 
  3. सुमित्रानंदन पंत 
  4. नगेन्द्र 

प्रस्न 44 -ठेठ हिंदी का ठाठ किस लेखक का उपन्यास है ?

  1. अयोध्यासिंह उपाध्याय हरियोध 
  2. बालकृष्ण भट्ट 
  3. राधिकारमण प्रसाद सिंह 
  4. भारतेन्दु हरिश्चंद 

प्रश्न 45 -कौन सा उपन्यास हजारी प्रसाद द्विवेदी का नहीं है ?

  1. मानस का हंस 
  2. अनामदास का पोथा 
  3. बाणभट्ट की आत्मकथा 
  4. पुनर्नवा 

प्रश्न 46 -राग दरबारी के रचनाकार कौन है ?

  1. श्री लाल शुक्ल 
  2. अमृतलाल नागर 
  3. शिवपूजन सहाय 
  4. फणीश्वरनाथ रेणु 

प्रश्न 4-श्यामा स्वप्न के लेखक कौन है ?

  1. लज्जाराम मेहता 
  2. जगमोहन सिंह 
  3. बालकृष्ण भट्ट 
  4. किशोरीलाल गोस्वामी 

प्रश्न 48 -क्रम से लगाओ 

  1. धूमिल ,निर्मल वर्मा ,कुँवरनारायण ,मोहन राकेश 
  2. मोहन राकेश ,कुंवर नारायण ,निर्मल वर्मा ,धूमिल 
  3. धूमिल ,मोहन राकेश ,निर्मल वर्मा ,कुँवरनारायण 
  4. धूमिल ,निर्मल वर्मा ,मोहन राकेश ,कुंवर नारायण 

प्रश्न 49 -क्रम से लगाओ 

  1. भारतेन्दु ,बालकृष्ण भट्ट ,प्रतापनरायण  मिश्र ,श्रीधर पाठक 
  2. भारतेन्दु ,बालकृष्ण भट्ट ,श्रीधर पाठक ,प्रताप नारायण मिश्र 
  3. बालकृष्ण भट्ट ,भारतेन्दु,प्रतापनारायण मिश्र ,श्रीधर पाठक 
  4. भारतेन्दु ,श्रीधर पाठक ,प्रतापनारायण मिश्र ,बालकृष्ण भट्ट 

प्रश्न 50 -क्रम से लगाओ 

  1. मैथली शरण गुप्त ,माखनलाल चतुर्वेदी ,निराला ,पंत 
  2. माखनलाल चतुर्वेदी ,मैथलीशरण गुप्त ,पंत ,निराला 
  3. माखनलाल चतुर्वेदी ,मैथली शरणगुप्त ,निराला ,पंत 
  4. माखनलाल चतुर्वेदी ,निराला ,पंत ,मैथलीशरण गुप्त 
समाप्त 



















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कुछ प्रमुख रचनाये

कुछ प्रमुख रचनाये 

महादेवी वर्मा 

  • श्रृंखला की कड़ियाँ -1942 
  • क्षणदा -1957 
  • साहित्यकार की आस्था -1964 
  • सम्भाषण -1975 
  • भारतीय संस्कृति के स्वर -1984 
  • संकल्पिता -1964 
  • विवेचनात्मक गद्य 
हरिवंश राय बच्चन 
  • नये पुराने झरोखे -1962 
  • टूटी फूटी कड़िया -1973 
रामवृक्ष बेनीपुरी 
  • गेहूँ और गुलाब -1950 
  • वन्दे वाणी विनायको -1954 
विद्यानिवास मिश्र 
  • छितवन की छाँह -1953 
  • कदम की फूली डाल  -1956 
  • तुम चन्दन हम पानी -1957 
  • मैंने सिल पहुंचाई -1966 
  • मेरे राम का मुकुट भीग रहा हैं -1974 
  • कौन तू फुलवा बीनन हारी -1980 
कुबेरनाथ राय 
  • प्रिया नीलकण्ठी -1968 
  • रस आखेटक -1970 
  • गंध मादन -1972
  •  विषाद योग-1973 
  • पर्ण मुकुट -1978 
  • कामधेनु -1980 
  • मराल -1993 

दिनकर  
  • मिट्टी की ओर -1946 
  • अर्धनारीश्वरी -1952 
  • रेती के फूल -1954 
  • हमारी सांस्कृतिक एकता -1956 
  • वेणुवन -1958 
  • वट पीपल -1961 
  • आधुनिकता बोध -1973 
अज्ञेय 

नेट के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न

नेट के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न 


 प्रश्न१  -अपने सूखी लकड़ी के तख्तो पर उसे सुलाते हो ,आप कीचड़ में पड़े रहते हो। कही तुम न मांदे पड़ जाना। जाड़ा क्या  है,मौत है और निमोनिया से मरने वाले को मुरब्बा  मिला करते -किस कहानी की पंक्ति है 
1 -कानो में कगना 
2 -तीसरी कसम 
3 -अपना अपना भाग्य 
4 -उसने कहा था 

प्रश्न२  -ऐश्वर्य और निर्वासन दोनों साथ साथ चलते है। जिसे ऐश्वर्य सौपा जाना है। उसको निर्वासन पहले से बड़ा है जिन लोगो के बीच रहता हूँ ,वे सभी मगल नाना के नाती है। किस निबंध की पंक्ति है 
1 -मजदूरी और प्रेम 
2 मेरे राम का मुकुट भीग रहा है 
3 -उत्तर फाल्गुनी के आस पास 
4 -उठ जाग मुसाफिर 

प्रश्न ३ -ऐसा चाँद ,जिसके प्रकाश से संस्कृत कवियों  हुआ क्षयी नाम सार्थक होता है। और हवा ऐसी चल रही थी की बाणभट्ट की आशा में दंतवीणोपदेशाचार्य कहलाती है - पंक्ति है 
1 बाणभट्ट की आत्मकथा 
2 -जिंदगीनामा 
3 अमृतसर आ  गया 
4 उसने कहा था 

प्रश्न४  -पहले से किसी बात का मनसूबा नहीं बांधना चाहिए किसी को। भगवन ने मनसूबा तोड़ दिया। उसे सबसे पहले भगवन से पूछना है भोले बाबा --
1 - तीसरी कसम 
2 -लाल पान की बेगम 
3 -उसने कहा था 
4 -कोशी का घटवार 

प्रश्न५  -मृत्यु के कुछ पहले स्मृति बहुत साफ हो जाती है। जन्म -भर की घटनाएँ एक -एक करके सामने आती है। सारे दृश्यों के रंग साफ होते है ,समय की धुंध बिल्कुल उनपर से हट जाती है। -पंक्ति है 
 -1 - तीसरी कसम 
2 -लाल पान की बेगम 
3 -उसने कहा था 
4 -कोशी का घटवार

प्रश्न ६ -बोझिल अनिश्चित -से वातावरण में सफर कटने लगा। रात गहराने लगी थी। -पंक्ति है 
1  - तीसरी कसम 
2 -अमृतसर आ गया 
3 -उसने कहा था 
4 -कोशी का घटवार

प्रश्न ७ -मूल्य भी क्या तोड़ने की चीज है जो तोड़ोगे ?वह बदला जा सकता है तोडा नहीं जा सकता। -पंक्ति है 
1 -मजदूरी और प्रेम 
2 मेरे राम का मुकुट भीग रहा है 
3 -उत्तर फाल्गुनी के आस पास 
4 -उठ जाग मुसाफिर 

प्रश्न८  -न मालूम बेईमान मिट्टी में लेटे  हुए है या घास की पतियों में छुपे रहते है। 
1  - तीसरी कसम 
2 -अमृतसर आ गया 
3 -उसने कहा था 
4 -कोशी का घटवार

प्रश्न९  -मीठी छुरी  तरह महीन मर करती है। यदि कोई बुढ़िया बार बार चेतावनी देने पर भी लीक से नहीं हटती तो --
1  - तीसरी कसम 
2 -अमृतसर आ गया 
3 -उसने कहा था 
4 -कोशी का घटवार

प्रश्न१०  -दूध की तरह अपमान की ज्वाला में चित्त कूद पड़ने के लिए उफनता है और बच्चो की प्यारी और मासूम सूरत देखते ही उस पर पानी के छींटे पद जाते है ,उफान दब  है। 
1 -मजदूरी और प्रेम 
2 मेरे राम का मुकुट भीग रहा है 
3 -उत्तर फाल्गुनी के आस पास 
4 -उठ जाग मुसाफिर 

प्रश्न११  --- भाई ,हम तो हिंदुस्तानी भारतवर्ष की बात नहीं जानते। हम अपने गांव की बात जानते है। आप भला तो जग भला है। हम तो इसी गांव का कल्याण देखते है की सभी भाई ,क्या गरीब क्या अमीर सब भाई मिल कर एकता से रहे। 
1 -राग दरबारी 
2 -मैला आँचल 
3 -गोदान 
4 -बाणभट्ट की आत्मकथा 


उत्तर १ -4 
२ -2 
३- 4 
४ -2 
५ -3 
६ -2 
७ -3 
८ -3 
९ -3 
१० -2 
११ -2 

देवकांत सिंह 

नेट जे आर एफ 

नेट में लगे नाटककारों का जन्म

नेट में लगे नाटककारों का जन्म 

  • भारतेन्दु -1850 
  • जयशंकर प्रसाद -1889 
  • धर्मवीर भारती -1926 
  • लक्ष्मीनारायण लाल -1903 
  • मोहन राकेश -1925 
  • हबीब तनवीर -1923 
  • सर्वेश्वर दयाल सक्सेना -1927 
  • शंकर शेष -1933 
  • उपेन्द्रनाथ अश्क -1910 
  • मन्नु भण्डारी -1931 

देवकांत सिंह -मोबाईल न-9555935125 

नेट / जे. आर. एफ

blog -mukandpr.blogspot.com

आप हिंदी नेट / जे. आर. एफ की तैयारी करना चाहते है।
ऑनलाइन क्लासेज शुरू की जा रही है।
मात्र 1000  रु. मासिक में
डेमो क्लास के लिए सम्पर्क करे।
व्हाट्सप्प न.- 9555935125
                    7840890357
एक बैच में अधिकतम विद्यार्थियों की संख्या 15 होगी। 

सिंघलदीप खंड

सिंघलदीप  खंड 

राजै कहा दरस जौ पावौं । परबत काह, गगन कहँ धाावौं॥
जेहि परबत पर दरसन लहना । सिर सौं चढ़ौं, पाँव का कहना॥
मोहूँ भावै ऊँचै ठाऊँ । ऊँचै लेउँ पिरीतम नाऊँ॥
पुरुषहि चाहिय ऊँच हियाऊ । दिन दिन ऊँचे राखै पाऊ॥
सदा ऊँच पै सेइय बारा । ऊँचै सौं कीजिय बेवहारा॥
ऊँचे चढ़ै, ऊँच खंड सूझा । ऊँचै पास ऊँच मति बूझा॥
ऊँचे सँग संगति नित कीजै । ऊँचे काज जीउ पुनि दीजै॥

दिन दिन ऊँच होइ सो, झेहि ऊँचे पर चाउ।

ऊँचे चढ़त जो सखि परै, ऊँच न छाड़िय काउ॥5॥


सन्दर्भ -प्रस्तुत पंक्तियाँ पद्मावत के सिंघल द्वीप खंड से लिया गया है। इसके रचनाकार मालिक मोहम्मद जायसी  है। इसका रचनाकाल 1540 ई है। 

प्रसंग -इसमें कवि ने तोते द्वारा रत्नसेन को सिंघल द्वीप की राजकुमारी की सुंदरता का वर्णन किया है। हिरामन तोता रत्नसेन को  पद्मावती से मिलने के बारे में बताता है। 

व्याख्या -पद्मावती सिंघल द्वीप की राजकुमारी है। राजा रत्नसेन उस पर मोहित हो गया है। हिरामन ने उसके बारे में ऐसा वर्णन किया की वह अपना राज्य छोड़ कर उसके लिए यहाँ पर आ गया। हिरामन राजा से कहता है। की अगर आपको उसका दरसन करना है तो पर्वत पर जाना होगा। वह उच्चाई से आप दर्शन कर सकोगे। पुरुष को उच्च होना चाहिए।  व्यक्ति को अच्छा व्यव्हार भी करना चाहिए। उच्चा  संगती करनी चाहिए। उच्चे विचार रखने चाहिए। 
जो हमेशा दिन प्रतिदिन उच्चा होता है। अथार्थ अपने को उस योग्य बनाता है। वही अपने कार्यों में सदा सफल होता है। अगर उच्चै चढ़ने में गिर भी जाते है तो हमे फिर से पर्यटन करना चाहिए। उस से भागना नहीं चाहिए

काव्यगत विशेषता -
  •  नायक का नायिका के प्रति पूर्वानुराग 
  • अवधी भाषा  का प्रयोग 
  • दोहा -चौपाई   शैली का प्रयोग 
  • नीति की बातो का प्रयोग 
 

नेट में लगी कहानियों के पात्र

नेट में लगी कहानियों के पात्र 
उसने कहा था 

  • लहना सिंह 
  • सूबेदारनी 
  • सूबेदार 
  • हजारा सिंह 
  • बोधा 
  • वजीरा सिंह 
  • कीरत सिंह 
तीसरी कसम 
  • हीरामन 
  • हीराबाई 
लाल पान की बेगम -रेणु 
  • बिरजू 
  • माँ 
  • चंपिया 
  • जंगी की पतोहू 
चीफ की दावत 
  • शामनाथ 
  • बूढी माँ 
  • पत्नी 
परिंदे 
  • लतिका 
  • डॉक्टर मुखर्जी 
  • मिस्टर ह्यूबर्ट 
  • गिरीश 
  • फादर एलमंड 
  • मिस वुड 
ईदगाह 
  • हामिद 
  • अमीना 
  • मोहसीन 
  • सम्मी 
  • नूरे 
  • महमूद 
कफ़न 
  • घीसू 
  • माधव 
कोशी का घटवार 
  • गुसाई -मुख्य पात्र 
  • लक्ष्मा -नायिका 
  • रमुवा -लक्ष्मा का पति 
राजा निरबंसिया 
  • जगपति -मुख्या पात्र 
  • चंदा -जगपति की पत्नी  
  • बचन सिंह -कम्पाउंडर 
  • जमना सुनार 
  • मुंशीजी 

देवकांत सिंह -मोबाईल न-9555935125 

नेट / जे. आर. एफ

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बैच शुरू - 2  जुलाई   2020
एक बैच में अधिकतम विद्यार्थियों की संख्या 15 होगी। 


sindur ki holi ki pdf

सिंदूर की होली -लक्ष्मीनारायण मिश्र 

सिंदूर की होली -1934 

लक्ष्मीनारायण मिश्र -1903 

पात्र 

  • रजनीकांत 
  • मनोजशंकर 
  • मुरारीलाल -डिप्टी कलेक्टर 
  • माहिर अली -मुरारी का मुंशी 
  • भगवंत सिंह 
  • हरनन्दन सिंह 
  • चन्द्रकला -मुरारी लाल की बेटी 
  • मनोरमा 
  • डॉक्टर और कुछ अन्य जन 
मुख्य कथन 
  • आजकल का कानून ही ऐसा है। इसमें सजा उसको नहीं दी जाती जो की अपराध करता है ----सजा तो केवल उसको होती है। जो अपराध छिपाना नहीं जानता -मुरारी लाल ,महिराअली से 
  • प्रेम तो दो चार से हो नहीं सकता और अब प्रथम प्रदर्शन में प्रेम का समय भी नहीं रहा  युग दूसरा था ,जब ह्रदय का रस संचित रहता था और अनायास किसी और वह बाह उठता था। अब तो व्यय की मात्रा संचय से अधिक हो गई है। -चन्द्रकला ,मनोरमा से 
  • समय पर स्वादिष्ट भोजन और सुख की नीद ,सुन्दर वस्त्र --संसार का सुख तो इन्ही वस्तुओ में सीमित है। -मनोरमा ,मुरारीलाल से 
  • कानून और कला का साथ नहीं हो सकता न ?कानून दंड देगा ,कला क्षमा करेगी। कानून संदेह करेगा ,कला विश्वास करेगी। -मनोरमा ,मुरारीलाल से 
  • पुरुष आँख  लोलुप होते है , विशेषतः स्त्रियों  सम्बन्ध ,में मृत्यु सय्या   पर भी सुन्दर स्त्री इनके लिए सबसे बड़ा लोभ हो जाती है। -मनोरमा ,मुरारीलाल से 
  • जिसके लिए चोरी करे वही कहे चोर -मुरारीलाल ,मनोजशंकर से 
  • पुरुष का सबसे बड़ा रोग स्त्री है। और स्त्री का सबसे बड़ा रोग है पुरुष -मनोरमा ,मनोजशंकर से 
  • प्लेटो के प्रजातंत्र में कवि को कोई स्थान नहीं मिला था ---स्त्री की प्रेम तंत्र में बुद्धि और  ज्ञान को कोई स्थान नहीं मिला है -मनोजशंकर ,मुरारीलाल से 
  • प्रेम  करना विशेषतः स्त्री के लिए कभी बुराई नहीं --स्त्री जाती की स्त्रुति केवल इसलिए होती है। की वे प्रेम करती है। --प्रेम के लिए ही उनका जन्म होता है। --स्त्री चरित्र की सबसे बड़ी विभूति , उसका सबसे बड़ा तत्व प्रेम माना गया है। -मनोजशंकर मुरारी लाल से 
  • कवि और गायक भावुक जीव होते है। -डॉक्टर ,मनोजशंकर से 
  • स्वास्थ के कृत्रिम साधनो और बोतल की दवाओं ने स्वास्थ की जड़ काट दी। स्वास्थ तो आपलोगो की अलमारियों में बंद है। लेकिन यह बहुत दिन नहीं चलेगा प्रकृति अपना बदला लेगी। प्रकृति के रास्ते पर लौट आना। 
  • देहातों में अधिकांशः रोग पूजा पाठ और तंत्र मन्त्र से अच्छे किये जाते है।  इन चीजों का प्रभाव सीधा मस्तिष्क पर होता है। --रोगी की इच्छा शक्ति जग जाती है। और प्रकृति की शक्तियों को काम करने का अवसर मिलता है। -मनोजशंकर ,डॉक्टर से 
  • पुरुष के लिए प्राश्चित करना पड़ता है। स्त्री को। स्त्री जीवन का सबसे सुन्दर और सबसे कठोर सत्य यही है। स्त्री इसलिए दुखी है और पुरुष इसी को अधिकार समझता है। -मनोरमा ,मनोजशंकर से 

स्कंदगुप्त -1928

स्कंदगुप्त -1928 

जयशंकरप्रसाद 

पात्र 

  • स्कंदगुप्त -युवराज (विक्रमादित्य )
  • कुमार गुप्त -मगध का सम्राट 
  • गोविन्दगुप्त -कुमारगुप्त का भाई 
  • पर्णदत्त -मगध का महानायक 
  • चक्रपालित -पर्णदत्त का पुत्र 
  • बंधू वर्मा -मालवा का राजा 
  • भीमवर्मा -बंधुवर्मा का भाई 
  • मातृगुप्त -काव्यकर्ता कालिदास 
  • प्रपंच बुद्धि -बौद्ध कापालिक 
  • शर्वनाग -अंतर्वेद का विषयपति 
  • कुमारदास (धातुसेन )-सिंघल का राजकुमार 
  • पुरगुप्त -कुमारगुप्त का छोटा पुत्र 
  • भटार्क - नवीन महाबलाधिकृत 
  • पृथ्वीसेन -मंत्री कुमारामात्य 
  • खिगिल -हूण आक्रमणकारी 
  • मृदुगल -विदूषक 
  • प्रख्यातकीर्ति -लंकारज कुल का श्रमण ,महाबोध विहार -स्थविर 
अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन है। अपने को नियामक और कर्त्ता समझने की बलवती स्पृहा उससे बेगार करवाती है। 

स्त्री पात्र 
  • देवकी -कुमारगुप्त की बड़ी रानी ,स्कन्द की माता 
  • अनन्तदेवी -कुमारगुप्त की छोटी रानी पुरगुप्त की माता 
  • जयमाला -बंधुवर्मा की स्त्री ,मालवा की रानी 
  • देवसेना -बंधुवर्मा की बहन 
  • विजया -मालवा के धनकुबेर की कन्या 
  • कमला -भटार्क की जननी 
  • रामा -शर्वनाग की स्त्री 
  • मालिनी -मातृगुप्त की प्रणयनी 
मुख्य कथन 
  • राष्ट्रनीति ,दार्शनिकता और कल्पना  लोक नहीं है।  इस कठोर प्रत्यक्षवाद की समस्या बड़ी कठिन  है। -पर्णदत्त ,स्कंदगुप्त से 
  • शरणागत -रक्षा भी क्षत्रिय का धर्म है। -स्कंदगुप्त ,दूत से 
  • युद्ध करना ही पड़ता है। अपनी सत्ता बनाये रखने के लिए ये आवश्यक है -कुमारगुप्त ,धातुसेन से 
  • कविता करना अत्यंत पुण्य का फल है। -मातृगुप्त ,स्वयं से 
  • कवित्य -वर्णमय चित्र है। जो स्वर्गीय भावपूर्ण संगीत गया करता है। अंधकार का अलोक से ,असत का सत्य से ,जड़ का चेतन से और वाह्य जगत का अंतर जगत से सम्बन्ध कौन कराती है ?कविता ही न ?-मातृगुप्त ,मुदगल से
  • धर्म को बचाने के लिए तुम्हे राजभक्ति की आवश्यकता हुई। धर्म इतना निर्बल  है की वह पाशव बल के द्वारा सुरक्षित होगा। -धातुसेन ,ब्राम्हण से 
  • जो अपने कर्मो को ईश्वर का कर्म समझकर करता है ,वही ईश्वर का अवतार है। -कमला ,स्कंदगुप्त से 
  • आवश्यकता ही संसार के व्यवहारों की दलाल है। -विजया ,मृदुगल से 
  • कष्ट ह्रदय की कसौटी है ,तपस्या अग्नि है। -देवसेना ,स्कंदगुप्त से 
  • अपनी घोर आवश्यकताओं में कृत्रिमता बढ़ाकर ,सभ्य और पशु से कुछ उच्चा द्विपद मनुष्य पशु बनने से बच जाता है। -मृदुगल ,मातृगुप्त से 

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नेट में लगी कविताओं की मुख्य पंक्तियाँ 


आँसू (कविता )   1925 - जयशंकर प्रसाद 

इस करुणा कलित ह्रदय में 
अब विकल रागनी बजती 
क्यों हाहाकार स्वरों में 
वेदना असीम गरजती ?

मानस सागर के तट पर 
क्यों लोल लहर की घाते 
कल कल ध्वनि से कहती 
कुछ विस्मृत बीती बातें ?

आती है शून्य क्षितिज से 
क्यों लोट प्रतिध्वनि मेरी 
टकराती बिलखती सी 
पगली सी देती फेरी ? 

जो घनीभूत पीड़ा थी 
मस्तक में स्मृति सी छायी 
दुर्दिन में ऑंसू बनकर 
वह आज बरसने आयी 

रो रोकर सिसक सिसक कर 
कहता में करुण कहानी 
तुम सुमन नोचते सुनते 
करते जानी अनजानी 

झंझा झकोर गर्जन था 
बिजली सी नीरद माला 
पा कर इस शून्य ह्रदय की 
सब ने आ डेरा डाला। 

घिर जाती प्रलय घटाए 
कुटिया पर आ कर मेरी 
तम चूर्ण बरस जाता था 
छा जाती अधिक अँधेरी। 

तुम सत्य रहे चिर सुन्दर !
मेरे इस मिथ्या जग के 
थे केवल जीवन संगी 
कल्याण कलित इस मन के। 

गौरव था , नीचे आये 
प्रियतम मिलने को मेरे 
मैं इठला उठा अकिञ्चन 
देखे जो स्वप्न सबेरे। 

मैं अपलक इन नयनो से 
निरखा करता उस छवि को 
प्रतिभा डाली भर लाता 
कर देता दान सुकवि को। 


देवकांत सिंह 
नेट  जे आर एफ 

नेट में लगे हुए कवियों का जन्म

नेट में लगे हुए कवियों का जन्म 

  1. अमीर खुसरो -1255 
  1. विद्यापति -1360 
  1. कबीर -1398 
  1. जायसी -1492 
  1. सूरदास -1478 
  1. तुलसीदास -1532 
  1. बिहारी -1595 
  1. घनानंद -1689 
  1. मीरा -1503 
  1. अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध -1865 
  1. मैथिलीशरण गुप्त -1886 
  1. जयशंकर प्रसाद -1889 
  1. निराला -1896 
  1. सुमित्रानंदन पंत -1900 
  1. महादेवी वर्मा -1907 
  1. रामधारी सिंह दिनकर -1908 
  1. नागार्जुन -1911 
  1. सच्चिदानंद हीरानंद वात्सायन अज्ञेय -1911 
  1. भवानी प्रसाद मिश्र -1913 
  1. -मुक्तिबोध -1917 
  1. धूमिल -1936 

देवकांत सिंह -मोबाईल न-9555935125 

नेट / जे. आर. एफ

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पत्नी कहानी का सारांश, जैनेंद्र कुमार की पत्नी कहानी, Patni kahani summary.

  'पत्नी' हिंदी के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार जैनेंद्र कुमार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुचर्चित कहानी है। यह कहानी भारतीय समाज...