प्रेमचंद अपने युग की नवीन चेतना से प्रभावित थे, वह स्वयं उसके निर्माता थे। अनेक राजनीतिज्ञों की तुलना में वह वर्तमान और भविष्य - दोनों को ज्यादा स्पष्टता से देखते थे। फिर भी संयुक्त परिवार से उन्हें मोह था। इस मोह के बावजूद इस प्राचीन परिवार- प्रथा के दोषों का जैसा विशद चित्रण उन्होंने किया है, वैसा किसी दूसरे कलाकार ने नहीं।176

15 प्रेमाश्रम और गोदान:कुछ अन्य समस्याए

प्रेमाश्रम में विशुद्ध भारतीय शिक्षा-पध्दति का कोई प्रतिनिधि है ही नहीं, इसलिए उसमें भारतीय शिक्षा और पाश्चात्य शिक्षा की टक्कर के चित्रण की कल्पना करना व्यर्थ है।191

गांधीजी पर अंग्रेज लेखक रस्किन और रूसी लेखक तोल्स्तोय का गहरा असर था। अहिंसा और निष्क्रिय प्रतिरोध के जरिए सामाजिक समस्याएँ हल की जाएँ, वर्ग संघर्ष को वर्ग-सहयोग में बदल दिया जाए, इस तरह की विचारधारा का प्रसार भारत से बाहर अधिक था। भारतीय जनमानस पर रामायण और महाभारत का गहरा असर है। राम और कृष्ण इन दो महानायकों में अहिंसावादी कोई नहीं है। 191

ट्रस्टीशिप का सिद्धान्त भारतीय नहीं है, इसलिए भारतीय और पश्चिमी जीवन-दृष्टियों की बात करना व्यर्थ है।-196

 प्रेमचंद ने प्रेमाश्रम में लिखा था, "सत्याग्रह में अन्याय का दमन करने की शक्ति है, यह सिद्धान्त भ्रांतिपूर्ण सिद्ध हो गया।"। कह सकते है कि प्रेमाश्रम गाँधीवाद की विफलता चित्रित करने वाला उपन्यास है।-198

मैं भी औरत हूँ -अनुसूया त्यागी 2011 

अनसूया त्यागी ने अपने इस उपन्यास के अंतर्गत दो जननांग विकारों से ग्रसित दो लड़कियों की दशा को बया किया है जिनका नाम रोशनी और मंजुला है। इनके शारीरिक विकारो के बारे में उनके परिवार जन माता -पिता को बाद में पता चलता है। उपन्यास में डॉक्टर द्वारा ऑपरेशन कर योनि विकसित करना इसका कमजोर पार्ट है। उनके शारीरिक विकार को बचपन से नहीं देख पाना और उन्हें पहचान न पाना , बचपन से किशोरावस्था तक नहीं पता चलना अविश्वसनीय है। इससे रचनाकार द्वारा यह कहना संदिग्ध प्रतीत होता है की यह वास्तविक घटना से प्रेरित है और रचनाकार का इस घटना से व्यक्तिगत भी सरोकार है। पेशे से चिकित्सक लेखिका ने एक तथ्यात्मक भूल की और ध्यान नहीं दिया है -थर्ड जेंडर वाले बच्चे का जन्म आनुवांशिक विकार के कारण नहीं ,हार्मोन के असंतुलन के कारण  होता है। अतः एक ही परिवार में दो ऐसे बच्चों का जन्म मात्र संयोग ही कहा जा सकता है। लेकिन उपन्यास का अन्य कथानक उपन्यास को जनजीवन से जोड़कर उनकी सार्थकता प्रदान करता है। इस उपन्यास में मास्टर साहब ने अपनी बेटियों को अपने प्यार से वंचित नहीं किया उन्होंने न ही भगवान को कोसा बल्कि उनका उपचार कराने का निर्णय किया। समाज का भय भी उन्हें नहीं छुवा उन्होंने अपने बच्चों को दुत्कारा नहीं। उसे सहज स्वीकार किया है। 

मास्टर साहब द्वारा लिया गया निर्णय समाज में एक अत्यंत प्रेरणा देने वाला निर्णय है। वह अपने पिता जी से पैसे ले कर चुपचाप अपनी बेटियों को उपचार के लिए ले कर चले जाते है। जिस से बाद में उनकी लड़कियों को एक सुरक्षित और सम्मानित जीवन प्राप्त होता है। उनका उज्जवल भविष्य उनके सामने बाहें फैलाये खड़ी हो जाती है। अपनी दोनों लड़की मंजुला और रोशनी को उच्च शिक्षा दिलाते है। मंजुला अपने पूर्ण स्वरुप को प्राप्त करती है उसे पति साथ- साथ मातृत्व भी प्राप्त होता है। रोशनी एक प्रसिद्ध कम्पनी की सी.ई.ओ  बनी। रोशनी को ओंकार का साथ मिलता है वह उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करती है। दोनों विवाह करते है ,सेरोगेट मदर के  द्वारा संतान उत्पति का प्रयास करते है ,धोखा खाते है ,एक बच्ची गोद लेते है ,रसे बाद बेटे को  पाते है ,दशक पुत्री से उसका विवाह करते है। 
इस उपन्यास के माध्यम से लेखक ने चिकत्साशात्र का महत्व प्रतिपादित किया है की किस प्रकार सही समय से उपचार द्वारा हम शारीरिक विकार से ग्रस्त बच्चों को सम्मानित जिंदगी दे सकते है।यह उपन्यास एक स्टीरियो टाइप से अलग औरत की छवि बनाता है की स्त्री मात्र गर्भाशय  नहीं है। वह जीवन प्रदायिनी तो है लेकिन सिर्फ वही उसका अस्तित्त्व नहीं है। उसके जीवन में और भी तत्व है उसका  निस्पंदन है। 
लेखिका ने इस उपन्यास में शारीरिक विकार के इतर भी अन्य महत्वपूर्ण स्थितियों को आगे किया है। बहार शौच के लिए जाने वाली स्त्रियों का हमेशा भय बने रहना या शारीरिक शोषण से गुजरना। नकुल और सौरभ द्वारा रोशनी का त्याग ,यौन शुचिता का प्रश्न। यहाँ लेखिका यह भी सिद्ध करती है यदि पुरुष सभी रूपों में मानवीय गरिमा के साथ उपस्थित हो -जैसे मास्टर तुलसीराम ,डॉ. विपिन ,दादा जी और ओंकार तो कोई भी स्त्री समाज में स्वयं को असुरक्षित और हिन अनुभव नहीं करेगी। 

किन्नर कथा -महेंद्र भीष्म 2014 

बुंदेला रियासत को केंद्र में रखकर सामाजिक कार्यकर्ता और न्याय व्यवस्था से सम्बद्ध लेखक महेंद्र भीष्म ने किन्नर विमर्श को उठाया। उनके अनुसार यह उपन्यास सत्य घटनाओ पर आधारित है। ऐतिहासिकता और प्रमाणिकता को सत्यापित करने के लिए तिथियों का भी उल्लेख किया गया है। उपन्यास दो उच्च कुल में उत्पन्न तारा और सोना की कथा कहता है जिसमे बीच -बीच में थर्ड -जेंडर पर सैद्धांतिक विवेचन गुथा है जो कथा में संवेदना जगाने की जगह बोझिल बना देता है।उपन्यास में किन्नर  परिचय देना उसे डॉक्यूमेंट्री का रूप  प्रदान  कर देता है। लेखक को कथा सूत्र को  विकसित करना चाहिए था मगर किन्नरों की विशेषताओ के कारण नीरस बन गया है। परन्तु ये सब होने के बावजूद इस उपन्यास का अपना महत्व है जिसमे  लेखक किन्नरों की पारिवारिक अवहेलना झेलते दंश को बखूबी चित्रित किया है। जगतसिंह को जब पता चलता है की सोना थर्ड जेंडर है तब वह उसे मारने के लिए दीवान को भेजता है परन्तु  का मनुष्यत्व जग जाता है और वह उसे नहीं मरता। यह सब सुचना तारा को मिलती है तब वही सोना का पालन  करती है। वह एक अत्यंत निर्भीक किन्नर है और सही निर्णय लेने वाली भी। वह सिर्फ मांग कर खाने पर आश्रित न होकर खेती बाड़ी करती है उनके यहाँ आने वाले किन्नर को वह चिकत्स्कीय सुविधा भी मुहैया कराती है। अगर कोई भी चिकत्स्कीय सुविधा द्वारा ठीक हो सकता है उसे अपने खर्चे पर उसका  इलाज भी करवाती है। 
सोना उर्फ़ तारा को नृत्य में दिलचस्पी है वह इसमें पारंगत  भी है। तारा जैतपुर कभी नहीं जाती लेकिन जब तारा की मृत्यु हो जाती है उसके पाश्चात्य इस चीज से अनभिज्ञ सोना जैतपुर के आमंत्रण पर वह चली जाती है। जैतपुर पहुंचकर उसे अपने बचपन की स्मृतिया याद आ जाती है और वह नृत्य के दौरान गिर जाती है। एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत वह अपने पुरे परिवार के साथ रहने लगती है। 
महेंद्र  भीष्म ने इस उपन्यास में जगतसिंह का ह्रदय परिवर्तन दिखाकर उपन्यास को अंततः सुखांत बना दिया है। कुंवर द्वारा स्थिति को समझे बगैर गोली चलने के बाद भी चंदा को लम्बे आपरेशन के बाद जीवनदान मिलता है। चंदा का उपचार होने के बाद वह भी सामान्य जीवन व्यतीत करती है। 
इस उपन्यास में पुरुष द्वारा चंदा को प्यार करने की भी झलक दिखलाई गई है। तारा  का भतीजा मनीष  सब स्थितियों को जानते हुए भी वह चंदा  करता है। यह उपन्यास की एक नयी पहल है क्युकी देखने को यही मिलता है की स्त्री पुरुष का जीवन व्यापन तो स्वाभाविक होता है परन्तु  तृतीय जेंडर के साथ स्थिति दूसरी बनी रहती है। वह इन सब सुखो से  वंचित रहते है। 
यहाँ लेखक ने यह चित्रित किया   किसी भी थर्ड जेंडर को अगर चिकित्सा किया जा सके तो उसे  करना चाहिए। समाज की मानसिक जकड़बंदी को तोड़कर उन्हें इनके दर्द से अवगत करना चाहिए यह कार्य केवल शिक्षा द्वारा ही सम्भव हो सकता है। हम अपने पूर्वाग्रहों को त्यागना चाहिए और नए समाज का निर्माण करना चाहिए जिसमे समतामूलक स्थिति की प्रधानता हो। 

मैं पायल हूँ -महेंद्र भीष्म 2014 

महेंद्र भीष्म की मैं पायल हूँ उपन्यास थर्ड जेंडर पर इनका दूसरा उपन्यास है जिसे पाठको द्वारा काफी सराहा गया। यह एक वास्तविक चरित्र पायल  सिंह के जीवन पर आधारित रचना है जिसमे उनके जीवन संघर्ष को सहज ही उकेरा गया है। यह उपन्यास  जीवनी परक उपन्यास की श्रेणी में आता है। इसलिए यह हमारे समाज का  सच्चा दस्तावेज है जो समाज के नग्न यथार्थ को  प्रदर्शित करता है। इस उपन्यास में समाज के मानवीय और  पक्षों को उजागर किया गया है। 
यह कथा पायल सिंह उर्फ़ जुगनी की कथा है जिसे अपने पारिवारिक  दंश को झेलकर घर से  बाहर निकलना पड़ता है। घर से बाहर का संसार और भी निर्मम क्रूर होता है लेकिन उसके साथ साथ उसमे मधुरता को कोमलता भी है जो इन्हे मरने नहीं देती। वह रेलवे स्टेशन ,रेलवे में प्रौढ़ व्यक्तियों द्वारा शोषण का शिकार बनती है। वह अपनी बुद्धिमत्ता के कारण  अपनी वास्तविकता को छुपाकर ,पंडित जी के यहाँ  नौकरी कर लेती है। सिनेमा के अंदर  हुए  नौकरी करते हुए उसे और भी अमानवीय चेहरे दिखाई देते है। प्रमोद के छेड़खानी करने के दौरान पायल सिंह की असलियत सबके सामने उजागर हो जाती है लेकिन संतोष सिंह जैसे व्यक्ति उसे दूसरी जगह नौकरी भी दिलवाते है। 
पायल के भीतर निरंतर अग्रसित होने की भावना इतनी बलवती है की वह अपने से निरंतर आगे बढ़ती रहती है। वह गेट कीपर से प्रोजेक्टर रूम ऑपरेटर बन जाती है वह गायन में भी अच्छी है और मिमिक्री करने में भी। वह लखनऊ जाकर अपना करियर बनाना  परन्तु किन्नरों द्वारा पकड़ ली जाती है। एक दुखत घटनाकर्म पायल को  तन और मन दोनों से  कर देता है। वह  कानपुर वापस आ जाती  शारीरिक रूप से भी अधिक बलवती होती है।  लखनऊ में आकाशवाणी के अंदर नौकरी मिल जाती है और वह  प्रसिद्धि प्राप्त करती है। पायल को प्रेम भी अशोक के रूप  प्राप्त होता है लेकिन उसके द्वारा हिंसा किए जाने पर वह पायल से पायल गुरु  जाती है। आगे चलकर वह इंटरनेट और यूट्यूब का उपयोग करना भी सिख जाती है। 

उपन्यास में यह प्रदर्शित किया गया है की किन्नरों को ,समाज बदलने नहीं देता। मगर किन्नरों का साहस उन्हें इस क्षेत्र में निरन्तर आगे बढ़ने को भी खुल जायेगा जब सभी किन्नर अपने दृढ संकल्प के साथ ,आत्मविश्वास लिए अपने लिए रोजगार की तलाश करेंगे। यह शुरुवात आने वाले किन्नरों को भी प्रोत्साहित करेगा। जरुरत है किन्नरों को समाजिक तथा मानसिक रूप से  मजबूत होने की। 

पोस्ट बॉक्स न. 203 नाला सोपारा -चित्रा मृदुगल 

नाला सोपारा उपन्यास किन्नरों के जीवन पर लिखा गया अति विशिष्ट उपन्यास है जिसमे किन्नरों के  जीवन का वास्तविक रूप उकेरा गया है। इसमें लेखिका ने कोई दवा नहीं किया की यह किसी व्यक्ति की वास्तविक  घटना पर आधारित है लेकिन इसे पढ़ने के बाद लगता है की यह उपन्यास उसके जीवन का सच्चा दस्तावेज है। चित्रा मृदुगल के साक्षात्कार के दौरान पूछने पर वह इस और संकेत करती है की नाला सोपारा की प्रवास यात्रा के दौरान उन्होंने ऐसे नायको को देखा और उसे घर में भी स्थान दिया। इसी लिए वह इसकी वास्तविकता  पचड़े में न पड़कर पाठको के समक्ष प्रस्तुत कर देती है। 
उपन्यास को सहज तरीके से समझने के लिए इसे समाचार दो से  पढ़ना चाहिए जिसमे एक किन्नर की लाश बरामद होती है और उसका सम्बन्ध अंडरवर्ल्ड से माना जाता है। या समाचार साधारण नहीं होता यह राजनितिक जीवन को भी हिला कर रख देता है। यह लाश बिन्नी उर्फ़ विनोद की है। विधायक जी जान चुके थे की विनोद उनके हाथो की कठपुतली नहीं बनेगा। क्योंकि वह किन्नरों के जाग्रति की बात करता है उनके स्वविवेक की न की आरक्षण की सिर्फ। दूसरी घटना विधायक जी के भतीजे और उसके मित्रो द्वारा पूनम जोशी के साथ  सामूहिक  बलात्कार  की होती है। विधायक जी विनोद और पूनम जोशी के स्नेहिल सम्बन्ध को जानते गई इसीलिए वह चंडीगढ़ के नेताओ के साथ मिलकर जल्दबाजी में वहाँ एक कार्यक्रम का आयोजन कर देते है। दिल्ली आने पर भी विनोद को उस से दुरी  बनाये रखी जाती  उसकी वास्तविकता का खुलासा न हो जाये इसलिए विनोद  अन्य स्थानीय कार्यक्रमों में उलझा कर रखा जाता है।  विनोद का बम्बई जाना  विधायक जी के लिए अच्छा अवसर होता है और विनोद की हत्या कर  दी जाती है। 
विनोद की पढाई चौदह वर्ष तक परिवार के साथ रह कर ही  होती है वह गणित में तेज होता हैं और भविष्य में गणितज्ञ बनना चाहता है। शुरुवाती दौर में तो चम्पाबाई को  मंजुल को दिखाकर पीछा छुड़ा लिया जाता है। परन्तु भविष्य में ऐसा होने पर उसे एक अपरचित संसार की तरफ रुख करना पड़ता है। जिसमे निराशा और आत्मग्लानि का भार से बोझिल जीवन व्यतीत करना होता है। परिवार वाले अपने घर को बेचकर कही चले जाते है तथा परिवार और स्कूल में विनोद के मरने की खबर बता दी जाती है। सिद्धार्थ बाद में भी इस भय से मुक्त नहीं हो पाता और अपने संतान के समय भी डरा हुआ रहता है। मंजुल को भी ऐसे मानसिक स्थितियों से ग्रस्त जीवन को व्यापन करना पड़ता है। वंदना बेन अंतिम समय में समाज की जकड़बन्दियों से विद्रोह पर उतर आती  परन्तु उस समय देर हो चुकी होती है। 
वंदना बेन जब सार्वजनिक रूप से उसे अपनाना चाहती है तब तक गन्दी राजनीती के दलदल में फंस कर उसमे डूब  जाता है और उसके संसार का सूरज वही ध्वस्त हो जाता है। 

चित्रा जी ने उपन्यास के माध्यम से सभी पहलुओ को बारीकी से देखा है और उन सभी व्यक्ति ,संस्थाओ को कटघरे में ला खड़ा किया है जो समाज में सिर्फ दिखावा करते है। उन्होंने सबसे पहले पारिवारिक पहलुओ पर प्रकाश डाला है की शुरुवात क्यों न घर से ही हो। जब परिवार इन बच्चो को अपनाने के लिए आगे आएगा तो समाज उन्हें प्रताड़ित करने में संकोच करेगा।  मगर जब घर से ही पड़ताड़ना का शिकार बच्चा होता है तब उसकी स्थिति जानवर से भी बदतर हो जाती है और उसे हर जगह दुत्कारा ही जाता है। जब इन्हे भी शिक्षा का अधिकार है और परिवार वाले उसके लिए संघर्ष करे तो कोई शिक्षा संस्थान कैसे इनकी अवहेलना करेगी। राजनितिक पार्टिया तब इन्हे सिर्फ वोट बैंक न समझकर इन नागरिक समझने लगेंगी और इनके अधिकारों और इनके स्वअस्तित्व की बात होने लगेगी। लेखिका यह स्पष्ट मानती है की यह खुद ही ऐसा आने वाली पीढ़ियों के लिए भविष्य का निर्माण करते है। वह जो झेलते है उसे आगे आने वाले किन्नरों के लिए भी वैसा ही रहने देते है अगर यह चाहते की इसमें उधर हो तो आज तक कितना कुछ परिवर्तित हो गया होता मगर इन्हे अपनी शक्ति का विस्तार करना अच्छा लगता है। नए किन्नरों पर यह राज करना चाहते है। इन्हे यह निर्णय परिवार के ऊपर ही छोड़ देना चाहिए की बच्चा  परिवार के साथ रहेगा या किन्नरों के डेरे पर। अगर  किन्नर गुरु स्वयं यह निर्णय ले ले की अगर कोई भी यहाँ किन्नर आएगा तो उसके शिक्षा  व्यवस्था की जाएगी और समाज के मुकाबले के साथ वह खड़ा रहे। तब सायास यह परिवर्तन दिखेगा की किन्नर आत्मसम्मान से जी सकेंगे फिर उन्हें किसी के आगे हाथ फैलाकर खाने की जरुरत नहीं पड़ेगी  का खाना खाएंगे। यह वर्ग समाज की एक सार्थक इकाई की तरह अपना अस्तित्व कायम कर सकेगा। 
लेखिका यह बताना चाहती  है की इसके लिए  एक दो पीढ़ी को अपना कर्तव्य पालन करना पड़ेगा तभी समाज में परिवर्तन आ सकेगा। अपनी पूर्वाग्रहों को छोड़कर इन्हे नए विचारो का अनुशीलन करना  पड़ेगा। तब कही जाकर समाज में इन्हे भी समतामूलक  अंग माना जायेगा। 

जिंदगी 50 -50 -भगवंत अनमोल 2017 

भगवंत अनमोल का यह  उपन्यास उनके द्वारा रचित यह तीसरा उपन्यास है जिसमे किन्नरों का चित्र अंकित किया गया है। यह खुद भी साहित्य  विद्यार्थी न होकर 27 वर्षीय इंजीनिर है। इस रचना लेखक इस दृष्टि को उजागर करता है की कोई भी व्यक्ति के जीवन में एक से अधिक बार ऐसा अवसर आता है की वह वहाँ से मुड़ने पर सफलता की सीढ़ी चढ़ सकता है। उसे गवाने के बाद कठिनाइयों का सामना। 
नायक अनमोल के जीवन के दो छोर है पहला भाई हर्षिता दूसरा बेटा सूर्या। इस उपन्यास में नायिका अनाया जन्मजात चेहरे पर दाग है जिस से उसे अनमोल का पहले उपेक्षा सहना पड़ता है परन्तु बाद में वह प्रेम में परवर्तित  हो जाता है। लेखक यह भी प्रदर्शित करना चाहता है की जब जन्मजात दाग व्यक्ति प्रेम पात्र बन सकता है तो जननांग विकार से ग्रसित व्यक्ति क्यों नहीं। अनमोल पिता का आड़ लेकर अनाया से शादी नहीं करता। अनमोल के पिता हर्षा को अपने साथ ही रखते है उसकी शिक्षा दीक्षा पूरी  करते है। एक अपरचित व्यक्ति द्वारा हर्षा का शारीरिक शोषण  करने पर  हर्षा को ही दोषी ठहराते है।  इस चीज से हर्षा आहत होकर कस्तूरी के डेरे पर चली जाती है और उन्ही के अनुरूप अपना जीवन ढाल लेती है। बस में  मांगने के दौरान उसके पिता के आँखों में आंसू को देखकर वह मुंबई की  तरफ अपना रुख करती है। जहाँ  उसका भाई अनमोल रहता है वह शहरी परिवेश में ढल चूका है। पिता से उपेक्षित हर्षा अपने को देह व्यापार में संलग्न कर एड्स का शिकार हो जाता है। स्वयं आत्महत्या कर काल के गाल में समाहित जाता है।  
अनमोल हर्षा के डायरी लेखन से परिचित है  मृत्यु पर्यन्त जब वह डायरी पढता है तो उसमे लिखा  है की में फिर आउंगी और होता यही। पत्नी आंशिक का जब बच्चा होता है तो वह भी शारीरिक विकार से ग्रस्त होता है। हर्षा का अनुभव अनमोल को सूर्या के पालन -पोषण में सहायक होता है। वह  समाज के सामने सूर्या के लिए ढाल बन कर खड़ा हो जाता है।सामान्य बच्चों के जन्मोत्सव की तरह उसका  जन्मोत्सव मनाया जाता है। पड़ोसियों के बोलने पर अनमोल उनकी भी कलई खोलने लगता है। 

अनमोल को हर्षा के मरने के पाश्चात्य मिली डायरी सूर्या  के जीवन को सवारने का काम आता है। जीवन के हर मोड़ पर अनमोल दीवार तरह खड़ा रहता है। उसका पालन -पोषण सामान्य बच्चों की तरह  ही करता है। सूर्या का लड़की की तरह सजने सवरने की इच्छा को भी वह पूरा करने देता है। क्योंकि  सूर्या की इस मानसिक आवश्यकता की तुष्टि जरुरी है। 

यमदीप -नीरजा 

नीरजा माधव का उपन्यास अपने शीर्षक की सार्थकता को दर्शाता है की यमदीप की भांति किन्नरों को भी यह निर्णय लेना होगा की अपने द्वारा सुधार की पहल करने पर ही सुधार निश्चित होगा। 
उपन्यास में दो -नाजबीबी और सोना तथा मानवी और आनंद की कथाएं समानांतर चलती है। कही -कही यह दोनों कहानी एक दूसरे के सामने से गुजरती है। मानवी ग्रामीण जीवन से शहरी परिवेश में आती है। शहर में आ कर  नौकरी भी करती है। वह पत्रकारिता जगत में नौकरी करती है और उसमे निहित भ्रष्टाचार को बखूबी पहचानती है। मानवी गरीबो ,शोषितों और वंचितों की आवाज बनती है। उसे कई बार अपने पारिवारिक रूढ़ियों के लिए भी परिवार के  जंग करना पड़ता है और वह उसके साथ ईर्ष्या का भाव भी रखने  लगते है। 
नाजबीबी  किन्नर होते हुए अत्यधिक साहसिक है वह समाज में तो उपेक्षित है परन्तु सामाजिक न्याय के लिए संघर्षरत भी रहती है। नाजबीबी अपने साथियों के साथ ही  पगली के भी प्रसव पीड़ा में सहायता करती है तथा उसके मर  जाने पर उसके बच्चे का पालन पोषण स्वयं करती है। उसका बच्चे के प्रति प्रेम अतल गहराइयों से होता है इसलिए वह सामान्य अभिभावक की तरह ही उसका देख रेख करती है।  नाज बीबी ,छेलू के साथ मिलकर सोना के लिए हर संभव सुविधा जुटाने का प्रयास करती है।पुलिस से बचकर ही वह उसका संरक्षण करते है। अपने कई महत्वपूर्ण सामानों को वह गिरवी रखने में भी नहीं सकुचाते और उसकी सुविधाओं का उचित ध्यान रखते है। नंदरानी  स्वयं एक  परिवार में  पाली बढ़ी थी मगर -बाई बहनो के मध्य उसे उपेक्षा से देखा जाना एक दमघोटू वातावरण का निर्माण करता है। नंदरानी ने स्वयं ही घर से निष्काषित होने का निर्णय लिया। इसी से वह सोना का ध्यान संस्कारित तरीके से रखती है। वह शिक्षा के महत्व को जानते हुए नंदरानी सोना को शिक्षित होने के लिए स्कूल भी भेजती है। नंदरानी कुछ बातो से अनभिज्ञ भी है इसीलिए वह सोना का मासिक आने पर अपने नजदीकी डॉक्टर के पास ले जाती है। डॉक्टर के द्वारा पुलिस को सुचना देने पर सोना का जीवन अस्त -व्यस्त हो जाता है। लेखिका अंत में सुखांत करने के लिए सत्यम शिवम् सुंदरम की अवधारणा को अपना कर सब कुछ सही हो जाता है। इसके लिए  मानवी और डी.एम आनंद कुमार को माध्यम बनाया गया। नाज बीबी और मानवी का सम्बन्ध स्नेहिल था उसकी का विकास होता है। मानवी निर्भीक स्त्री है वह एक नीडर पत्रकार है  तभी वह सोना के लिए संघर्ष भी कर पाती है अन्यथा वह नहीं कर पाती। उसके सहयोगी पत्रकार भी उसे छोड़कर चले जाते है। उसे भ्रष्ट पुलिस और नेताओ से भी भिड़ना  पड़ता है। पूरी व्यवस्था से वह स्वयं टकरा जाती है और सफलता भी हासिल करती है। 
इस उपन्यास  में लेखिका सिर्फ तृतीय लिंग की चर्चा ही नहीं करती बल्कि उनके जीवन का सूक्ष्म अवलोकन करके उसका समाधान निकलने की भी कोशिश करती है। समाज के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों को भी उद्घाटित करती है। नाज बीबी का मानवीयता ने एक श्रेष्ट धर्म अपनाया जैसे सोना जैसे चरित्र का जीवन सहज ,सम्मानित और सरल बना। महताब गुरु के माध्यम से किन्नर समाज के बारे में कई अन्धविश्वास ध्वस्त होते दीखते है। उपन्यास इसके साथ साथ पुलिस ,नेता और मिडिया जगत की सच्चाई को भी उजागर करता है। 

तीसरी ताली -प्रदीप सौरभ 2011 

तीसरी ताली उपन्यास में शारीरिक विकार से ग्रस्त प्राणी के मानसिक ,सामाजिक और पारिवारिक और शारीरिक सम्बन्धो की कहानी है जिसमे समलेंगिकता,और किन्नरों के चित्र को उजागर किया गया है। जननांग विकार से ग्रसित लोगो को असामान्य यौन संबंध बनाए पर समाज की अवहेलना को झेलना पड़ता है। लेखक पेशे से पत्रकार है उसने स्वयं धरातल पर उतर कर उनकी सत्यता को जाना है और उपन्यास में अंकित किया है। इसमें कोई अतिश्योक्ति के पुट को कही उपन्यासकार ने छुआ  नहीं है। 
लेखक ने जन्मजात विकार से युक्त और परिस्थिति का शिकार होकर बने हिजड़ो दोनों के अनुभवों की विविधता और समानता को दर्शाया गया है। लेखन नवीन जानकारियों को लेकर पाठक के समक्ष प्रस्तुत होता है। यह उपन्यास विनीता ,राजा उर्फ़ रानी ,ज्योति ,मंजू और विजय  की कहानी है। जिसे लेखक ने अपने रचनात्मक कौशल द्वारा लिपिबद्ध किया है। 
विनीत को जननांग दोष का हर्जाना भरना पड़ता है की उसे सामाजिक उपेक्षा को सहन करना पड़ता है। उसे  स्कूल से भी वंचित रहना पड़ता है लेकिन पिता द्वारा प्रतिष्ठित संसथान से ब्यूटिशन का कोर्स करवाने का निर्णय उसे भविष्य की सफलता की तरफ ले जाता है। वह स्वयं 'गे पार्लर' का निर्माण करती है और वही उसके प्रसिद्धि का कारण बनता है। 
किन्नर गुरु के यहाँ के अमानवीयता को  लेखक ने  दिखाया है की किस प्रकार मंजू और डिंपल के प्रेम सम्बन्ध को स्वीकार नहीं करती। उनके प्रेम सम्बन्ध से मंजू गर्भवती हो  जाती है लेकिन यह बात किन्नर गुरु स्वीकार नहीं है और वह मंजू का गर्भच्छेदन करा दिया जाता है। राजा के साथ भी लिंगछेदन करा कर उसे भी किन्नर समुदाय का अंग बना दिया जाता है। 
यह उपन्यास किन्नर समुदाय के जीवन के मानवीय और अमानवीय सम्बन्धो को  उजागर किया गया है। लेखक  कुशलता के साथ गलत बातो के प्रति अतिक्रमण किया है और सकारत्मक पक्षों के प्रति वह अनुकरणीय स्थिति को उत्तपन्न करते है। अंततः यह उपन्यास किन्नरों के जीवन विडंबना को चित्रित किया है।    
                                     

मुर्दहिया 

लेखक - तुलसीराम 
जन्म -1  जुलाई 1949 
माता का नाम - धीरजा 

मुर्दहिया हमारे गाँव धरमपुर आजमगढ़ की बहुउद्देशीय कर्मस्थली थी। चरवाही से लेकर हरवाही तक के सारे रास्ते वही से गुजरते थे। इतना ही नहीं स्कूल से दुकान ,बाजार हो या मंदिर यहाँ तक की मजदूरी के लिए कलकत्ता वाली रेलगाड़ी पकड़ना हो तो भी मुर्दहिया से गुजरना पड़ता था। हमारे गांव के जिओ पॉलटिक्स यानि भू -राजनीती में दलितों के लिए एक सामरिक केंद्र जैसी थी। जीवन से लेकर मरण तक की सारी गतिविधिया मुर्दहिया समेट लेती थी। सबसे रोचक तथ्य यह है की मुर्दहिया मानव और पशु में कोई फर्क नहीं करती थी। 

मुर्दहिया सही मायनो में हमारी दलित बस्ती की जिंदगी थी। इस जिंदगी को मुर्दहिया से खोदकर लेन का पूरा श्रेय तद्भव के मुख्य संपादक अखिलेश को जाता है। 

प्रवासी मजदूरों से ही पता चला की मुर्दहिया से होकर जाने वाली सड़क ने हमारे गांव को तीन जिलों -आजमगढ़ ,गाजीपुर तथा बनारस से जोड़ दिया है। ..... सम्भवतः मुर्दहिया से सड़क निकल जाने के कारण वहाँ के भूत -पिशाचो का भी पलायन अवश्य हो गया होगा। जाहिर है ,अब पहले जैसी उनकी पूजा नहीं होती। बढ़ते हुए शरीकरण ने हर एक के जीवन को प्रभावित किया है। भूत भी इससे अछूते नहीं है। 

मुर्दहिया को सात  अध्याय में विभक्त किया गया है। 

  1. भूतही पारिवारिक पृष्टभूमि 
  2. मुर्दहिया तथा स्कूली जीवन 
  3. अकाल में अन्धविश्वास 
  4. मुर्दहिया के गिद्ध तथा लोकजीवन 
  5. भूतिनिया नागिन 
  6. चले बुद्ध की राह 
  7. आजमगढ़ की फाकाकशी 
                                                          1 
लगभग 23 सौ वर्ष पूर्व यूनान देश से भारत आए मिनांदर ने कहा की आम भारतीयों को लिपि का ज्ञान नहीं है ,इस लिए वह पढ़ लिख नहीं सकते। 
सदियों पुरानी इस अशिक्षा का परिणाम यह हुआ की मूर्खता और मूर्खता के चलते अंधविश्वासों का बोझ मेरे पूर्वजों के  सिर से  कभी नहीं हटा। 

शुरुवात अगर दादाजी से करूँ  जी के अनुसार उन्हें एक भूत ने लाठियों से पीट- पीटकर मार डाला था। 

 माँ ने बताया था की उसके कई बच्चे पैदा हुए किन्तु थोड़ा बड़ा हो -होकर सबके सब मरते चले गए।  इसलिए जब में पैदा हुआ तो पिताजी मुझे अपनी गोद में लेकर गाँव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक शिव मंदिर ,जिसे शेरपुर कुटी कहते थे ,पहुंचे और मंदिर के महंत हरिहर दास से आशीर्वाद देने  के लिए विनती की। 

भारत के अन्धविश्वास समाज में ऐसे व्यक्ति अशुभ की श्रेणी के लिए सूचीबद्ध हो जाता है। ऐसी श्रेणी में मेरा प्रवेश मात्र तीन वर्ष की अवस्था में हो गया। अतः घर से लेकर बाहर तक सबके लिए मैं अपशगुन बन गया। 

बारह गांव के चमारो के चौधरी -सोम्मर  - तुलसी राम के पिता के 5 भाइयो में सबसे बड़े 

तीसरे नंबर के नग्गर जो बोहोत गुस्सैल स्वाभाव के थे और मुझे कनवा कह कर पुकारते। 

बारह गांव के चौधरी के समक्ष जो समस्याए लाई जाती ,उनमे दो मामले बड़े विचित्र ढंग से सुलझाए जाते थे। इनमे से एक मामला होता था किसी युवती का गांव के किसी अन्य व्यक्ति के साथ यौन -सम्बन्ध या उसका बिन विवाह गर्भवती होना तथा दूसरा था किसी चमार द्वारा मरे हुए पशु [गाय ,बैल या भैंस ] माँस खाया जाना। 

डांगर -मर हुए  पशुओ का माँस 

                                                                      2 

 

 यमदीप 

यमदीप नीरजा माधव  कृत  किन्नर केंद्रित उपन्यास है जिसमे किन्नरों की अमानवीय स्थितियों  अंकन किया गया है। जहाँ पारिवारिक दायित्वबोध अपने दायित्व से मुँह मोड़ लेते है और एक बालक को दूसरी परिस्थितियों के हवाले कर देते है। जहाँ उसे निरंतर हीनताबोध से ग्रसित होना पड़ता है। सामाजिक उपेक्षा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है। वही सामाजिक दृष्टिकोण उन्हें देह -व्यापर की और भी आकृष्ट करता है उसी के माध्यम से उनका जीवन व्यापन होता है। यमदीप उपन्यास में इन्ही विषयों को व्यावहारिक रूप से पाठक को साक्षात्कार कराता है। लेखक का शीर्षक चयन उनके शब्द कौशल का परिणाम है जहाँ वह मिथकीय ग्रंथो के अनुसार ही इसका शीर्षक यमगाथा रखते है। यम का मतलब मृत्यु के देवता यमराज से है यह चौदह माने जाते है। दीपावली के एक दिन पूर्व नरक चतुर्दशी के रात चौदह दीप जलाने का प्रचलन है जिसमे से एक दीप को किसी उपेक्षित जगह पर रखा जाता है जैसे कूड़े के ढेर पर या बाहर किसी ऐसी जगह जहाँ नजर न पड़े। किन्नरों का जीवन भी उसी दीप के सामान हो चुकी है उन्हें उपेक्षा की दृष्टि से देखा जाता है। अगर कोई व्यक्ति शारीरिक विकलांग हो तो परिवार वाले उसे घर से निष्काषित नहीं करते अपितु अगर कोई किन्नर जन्म ले तो वह सबसे पहले अपने पारिवारिक अवहेलना को ही सहता है। उसका निष्कासन पूर्वागमन के किये नहीं होता अपितु जीवन भर छुटकारे के लिए होता है। सामान्य लिंग जो की प्रायः सिर्फ स्त्रीलिग  और पुलिंग को ही माना जाता है इन बच्चों को थोड़ी देर कही आने में लग जाती है तो पूरा घर व्याकुल हो उठता है वह इतनी बेचैनी से काम लेते है की पूरा मोहल्ला जान जाता है माँ तुरंत विलाप करने लगती है। लेकिन वही परिवार किन्नर बच्चे को  घर से बाहर कर देते है। यह दोहरा मापदंड क्यों जबकि वह भी उसी माँ की कोख से जन्मा बच्चा है। क्या उसके जन्म लेने में उसका खुद का कोई योगदान है की वह किन्नर न जन्म ले पाए बिलकुल नहीं। फिर इसकी सजा उसे क्यों दी जाती है क्यों नहीं उसकी सजा के लिए उनके माता पिता को जिम्मेदार ठहराया जाता। क्योकि इसमें उनकी भी कोई जानकारी नहीं होती और ऐसी स्थिति में इसका भागीदार कौन होगा। इस उपन्यास में नंदरानी मुख्य नायिका के रूप में है जिसका शारीरिक विकास  होने पर स्त्रिगुण के साथ -साथ चेहरे पर बाल भी आने लगते है। इस स्थिति से घर वालो को उसके बारे में चिंता होने लगती है - 'कक्षा आठ में पहुंचते -पहुँचते उसके अन्य स्त्रियोचित्य अंगो के उभार और विकास के साथ ही चेहरे पर श्याम वर्ण के रोये भी उभरने लगते थे। सब कुछ छिपकर सामान्य जीवन जी सकने  की उसकी और माता -पिता की कल्पना चकनाचूर होने लगी थी।' उसके परिवार ने उसे पढ़ा लिखाकर एक उज्जवल भविष्य का जो ताना -बना कल्पित किया था उसके यो धराशाही होना समाज को किन्नरों के प्रति उपेक्षित बर्ताव को ही दृष्टिगत करता है।  माँ उसे कहती है की ऐसे मत चला कर नहीं तो किन्नर अपनी बस्ती में तुझे ले जायेंगे- 'तुम कैसी चलती हो ,हम लोगों की तरह चलो. हिजड़े देख लेंगे तो तुम्हे भी वही समझ लेंगे।'  एक बार जब किन्नर उसे देख लेते है तब  उसे अपने साथ ले जाने का आग्रह करते है लेकिन उसकी माँ उन्हें उन लोगों को नहीं सौपती।   
नंदरानी को समय के साथ अवहेलना का शिकार होना पड़ता है। उसके कारण घर परिवार की बदलती परिस्थितियों को भी वह गहनता से अनुभूत करती है उसे यह भी पता चलता है की उसके कारण उसकी बहन नंदिनी के विवाह में अड़चन पैदा हो रही है। उसे स्वम अपने से ग्लानि की अनुभूति  होती है और वह किन्नर की बस्ती में जाने का मन बना लेती है। नंदरानी की माँ उसे भले ही अपने बर्ताव में बदलाव की बात करती है परन्तु किन्नरों के निवेदन करने पर वह साफ मना कर देती है। नंदरानी अपने मन में चल रहे द्वन्द के कारण एक रात को  बिन बताये घर से चली जाती है। किन्नरों की बस्ती में वह  महताब से साक्षात्कार करती है और उन्ही से दीक्षा लेती है।  महताब गुरु  उसकी पुरानी  यादो को विस्मृत करने को कहते है जिस से आगामी भविष्य उसे पीछे की यादो में न समेटे अपितु  एक नए जीवन को सृजित करे।  उसके इस नए जीवन के आरम्भ करने के लिए उसका नाम भी बदल  दिया जाता है उसका नया नाम नाजबीबी  रखा जाता है। 
घर से निर्वासन के पश्चात नाजबीबी को अपने घर की याद् विचलित करती रहती है। वह अपनी यादो को विस्मृत नहीं कर पाती उसका मन अधिक खिन्न तथा निरंतर उद्वेलित रहता है। एक दिन इन्ही यादो की गुथिया उसे पुनः अपने घर फ़ोन करने पर विवश कर देती है और वह अपने घर पर फ़ोन करती है। फ़ोन भाई द्वारा उठाया जाता है और प्रयुत्तर स्वरुप यहाँ फ़ोन नहीं करने का उचित आदेश देता है। भाई द्वारा यह सुनकर की तुम्हारा इस घर से कोई सम्बन्ध नहीं है नाजबीबी क्षुब्ध होती है। मगर निराशा के साथ आशा  तब जागृत होते है जब वह फिर से फ़ोन मिलाती है और इस बार फ़ोन मक द्वारा उठाया जाता है। उसे अपनी माँ से उचित तरीके का बर्ताव करना भाव विभोर कर  देता है और वह संतुष्ट हो जाती है। समय अपने साथ हो रहे अन्याय को नाजबीबी द्वारा किन्नर दशा को दर्शाता रहता है। एक दिन माँ उसके पिता से मिलने उसके बस्ती में आती है जहाँ नाजबीबी के साथ अन्य किन्नरों के मन में भी ख़ुशी की लहार दौड़ती है। उसकी माँ उसके हल- चाल जानती है  तथा घर वापसी की बात कहती है पिता द्वारा िस्बत का विरोध होता है। माता की ममता अपने बच्चे को इस तरह देख कर क्यों नहीं विचलित होगी पर समाज की जकड़बन्दियों ने पिता के  दिए और वह उन्ही जंजीरो को दौड़ने में असक्षम हो जाते है। किसी पिता को विकलांग बच्चा होने पर वह अपनी पिता के कर्तव्य से विचलित नहीं होता परन्तु इस किन्नर होने से वह क्यों विचलित हो जाता है।-हिजड़े के बाप कहलाना न आप बर्दाश्त कर पाएंगे और न आपके परिवार के लोग। लूली -लंगड़ी होती या कानि -कातरी  होती तो भी आप इसे साथ रख सकते थे ... इसलिए इसे अब अपने हाल पर छोड़ दीजिये। आदिवासी ,अल्पसंख्यक तथा अनुसूचित जाती के लिए लोग नारे लगाने लगते है उन्हें पढ़ाने की बात करने लगते है  परन्तु उन्हें कभी किन्नरों की दशा का ज्ञान नहीं होता उनकी बुद्धि इनके प्रति मंद कैसे हो जाती है क्या ये  समाज के अंग नहीं है। जिन लोगो को हम न्याय दिला रहे है उन वर्गो के द्वारा भी क्या इन्हे उपेक्षा की दृष्टि से नहीं देखा जाता। समाज आज भी इनके नौकरी की बात नहीं करता छोड़ दिया है इन्हे नाचने गाने पर और मजबूर कर दिया है रत को किसी के साथ सोने पर। यह नाचना इनकी स्वेछा नहीं अपितु अपने रोजगार चलाने का एक जरिया है। जिस से यह जीवन व्यापन कर सके। इस उपन्यास में इन्ही बिंदुओं को दृष्टिगत किया गया है - 'कोई आगे नहीं आएगा की हिजड़ो को पढ़ाओ ,लिखाओ नौकरी दो ,जैसे कुछ जातियों के लिए सरकार कर रही है ,हमारे लिए वो भी नहीं। माता -पिता ,घर -परिवार सबसे छुड़ाकर इस बस्ती में नाचने गाने के लिए फेक आती है  किस्मत।'
   नाजबीबी को अपने माँ की बहुत याद आती है वह हमेशा उन्ही के बारे में सोचती रहती है। एक  बार जब वह अपनी माँ को फ़ोन करती है तब उनका फ़ोन भाभी उठाती है और बताती  है की माँ को कैंसर हो गया है वह अत्यधित इस रोग से पीड़ित है। इससे नाजबीबी विचलित होती है और माँ से मिलने कानपुर स्थित अपने आवास पर पहुँचती है वहां पता चलता है की माँ का देहांत हो चूका है वह श्मशान घाट जाती है और वहां भाई द्वारा उपेक्षा  बनती है। इससे वह बहुत विचलित भी होती है  उसका मन बेहद निराश होता है। नाजबीबी  आग्रह करती है की माँ की अनुपस्थिति में उनके यादो को सजोने के लिए में उनकी राख का अंश चाहती हूँ और वह जलती चिता से उनके दाँत को ले जाती है। 
नाजबीबी बेहद संवेदनशील और ममतामयी किन्नर है। एक प्रसव पीड़िता की वह किस प्रकार निश्छल भाव से सेवा करती है और उसके प्राण त्याग देने की स्थिति में वह उस पुत्री को अपनी पुत्री की तरह उसका पालन पोषण  करती है। वह उसे विद्या ग्रहण के लिए स्कूल भी भेजती है। स्कूल में किन्नर के जाते ही किस प्रकार वातावरण बदल जाता है इसका भी उसमे चित्रण है। वह विरोध नहीं करती क्योकि वह जानती है कितनी जगह इन विरोधो का  पड़ेगा। वह अगर आवाज उठाती भी है तो उसके आवाज को दबा दिया जायेगा। किन्नर हर एक परिस्थितियों से परचित भी होते है वह व्यक्ति के तिरछी मुस्कान को भी समझते है और उनके बोलने के तरीके को भी किस प्रकार  रहा है। सोना के पालन -पोषण में उसे किन्नरों का विरोध भी झेलना पड़ता है क्योंकि ऐसी परिस्थिति में उसका चोर समझा जाना स्वाभाविक है।पुलिस ऐसी परिस्थितियों में  कोई कसर नहीं छोड़ती है। नाजबीबी का साहस उसे एक विचारवान व्यक्तित्व दिलाता है जिस से वह सभवतः हर परिस्थितियों में खड़ी रहती है। 
किन्नर के प्रति अपराधी दृष्टिकोण हमारे समाज की देन है की किस प्रकार समाज एक विचार बनता है और उसे व्यक्ति के ऊपर इस तरह हावी कर दिया जाता है की वह उसे ही सत्य मान बैठता है। उसके किसी को देख कर हसने की वस्तु मानना भी इसी के अंदर निहित है।किन्नरों के बारे में अफवाहे भी हमेशा समाज में हावी रहती है जो उन्हें सामन्य मनुष्य न मानने को बाध्य करती  रहती है।  जब पत्रकार मानवी इसके ऊपर दोषारोपण करते हुए पूछती है -किन्नर युवको को बहला -फुसलाकर कब्जे में लेते और फिर ओपरेशन करके हिजड़ा बना देते है।'
इस दोष को ख़ारिज करते हुए महताब गुरु इसका उत्तर देते है -हमारी बस्ती में जल्दी कोई इंसान का पूत घुसता ही नहीं है.... किसी के आते ही हम ओप्रशन कर देंगे पकड़कर ?डॉक्टरी खोल बैठे है क्या ?इसी कोठारिया  में क्या ?यह देखो है हमारा अंग कोई कटा है या अल्ला रसूल भेजा है।' 
संस्कृति, सभ्यता और  राष्ट्र मनुष्य की अमूल्य धरोहर है जिसे हर व्यक्ति अपने मन में सजोये रखता है। जहाँ इनका आभाव  होता है वह राष्ट्र खतरे का शिकार बना रहता है जहां व्यक्ति अपने समस्त जीवन को न्याय अन्याय की कसौटी में नहीं कस पाता। नाजबीबी भी एक किन्नर है जिसमे राष्ट्र प्रेम विद्यमान है। वह उतनी  ही समाज हितेषी किन्नर भी है। मानवी द्वारा जातिगत और धार्मिकऔर  लिंग के आधार पर उठाये गए प्रश्न का नाजबीबी सरलता से जवाब देती है। वह कहती है  जब हम आधारों पर विभेद करते है तब तब हम अपने गौरवपूर्ण  का क्षरण कर किसी के गुलाम या दास बनते है। हारी एकता हमारी शाकलटी है और अलगाव हमारी कमजोरी। नाजबीबी किन्नरों के ईमानदारी और राष्ट्र प्रेम को इन शब्दों में बया करती है - 'सबक लेना है तो हम हिजड़ो से सबक ले। न हम लोग गद्दार है, न ही हम लोग गद्दारी करेंगे। आपस में हम लोग प्रेम से रहते है और हम किसी से नफरत क्यों करे ?हम लोग इंसान थोड़े ही है की आपस में नफरत करेंगे।'
    नाजबीबी का सोना के साथ आत्मीय  चूका है परन्तु पुलिस को इस चीज का पता चलते ही वे वहां से सोना को निकाल कर उद्धार -गृह भेज देते है। जब नाजबीबी को यह पता चलता है की वहां पर लड़कियों के साथ डरा धमकाकर यौन -सम्बन्ध बनाये जाते है तब वह सोना को वहां से बचने तथा इस अन्याय को उजागर करने के  लिए प्रतिबद्ध होती है। मगर निराशा तब हाथ लगती है जब  यह वहां पहुँचती है और सोना खुद इसे पहचानने से इंकार कर देती है। 
इस उपन्यास में नाजबीबी ने किन्नरों के साथ अन्याय के साथ स्त्रियों के साथ हो रहे अन्याय को भी उजागर किया है की किस उनका शारीरिक और मानसिक शोषण होता है। वह अपने को पुरुष अपराधियों से बचाये फिरती है की कोई  चील की नजर वाला पुरुष उन्हें नोचने के लिए तैयार न बैठा हो। वह एकांत में अपने पुरे स्वरुप में उभर कर आ जाता है और नौच डालता है स्त्री के साथ स्त्री अस्तित्व को भी।  नाजबीबी ऐसे प्रश्नो से अवगत है इसलिए वह कहती भी है - 'सोच रही हूँ मैम साहब ,भगवान ने मुझे हिजड़ा बना कर ठीक ही किया है। अगर यह न बनाता तो जरूर मुझे औरत बनाता और तब यह सरे अत्याचार मुझे ही झेलने पड़ते।'
समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार व्यक्ति को आतंरिक और बाह्य दोनों रूप से झकझोर देता है। यहाँ की सभी गलियाँ भ्रष्टाचार की अतिरेक से उपजी है उस से गुजरने वाला हर  व्यक्ति उसी का अनुगामी बन कर भ्रष्टाचार को निरंतर आगे बढ़ाता है। मानवी देश के राजनितिक भ्रष्टाचार से आतंकित है वह नाजबीबी को इसके उतरने  की कही से कुछ बदलाव तो संभव हो क्योकि लोग राजनेता इसलिए बनते है की उनकी आने वाली पीढ़िया भी सुरक्षित हो सके इतना धन संचय किया जा सके। नाजबीबी भी इस बात से अवगत है और वह इस लड़ाई में शामिल होने से पीछे नहीं हटती अपने समाज और देश को सार्थक प्रगति देने के लिए स्वयं को भी आगे करना जरुरी है। वह मन्ना बाबू के खिलाफ  भी पर्चा भी भरती है।   किन्नरों का उत्तराधिकार  ग्रहण करने के लिए कोई व्यक्ति नहीं होता तो वह किस के लिए धन संचय करेंगे। उनका सारा ध्यान सभ्य  अनुशासित समाज का निर्माण करने में लगेगा। 
अंततः यह उपन्यास किन्नरों के व्यथा को उजागर करने वाला उपन्यास है की किस प्रकार नंदरानी ,नाजबीबी बन जाती है। किन्नरों की जीवन दशा के वर्णन के साथ साथ उनके सुधर के उपायों का भी जिक्र है।

मैं भी औरत हूँ :अनसूया त्यागी 

यह एक ऐसा उपन्यास है जिसमे किन्नरों को उचित समय पर दिए गए इलाज से वह सामान्य जीवन जी सकते है तथा अगर वह माँ न भी बन पाए तो भी समाज में उनकी स्वीकृति शादी के लिए हो। उनका भी दिल होता है जो प्रेम -प्रसंग  धड़कता है।  इस उपनेस के अंदर मंजुला और रौशनी नाम की दो बहने होती है। 15 वर्ष की आयु में उनका मासिक धर्म न आना उनके घर वालो के लिए चिंता का विषय बनता है और वह चिकित्सक के पास जाते है। वह पता चलता है की इनका पूर्णतः जननांग का विकास नहीं हो पाया है। मंजुला में गर्भाशय औरयोनि का विकास नहीं हुआ है जबकि रोशनी का गर्भाशय नहीं है और योनि अर्धविकसित है। इन दोनों का ओप्रशन किया जाता है जिससे मंजुला पूर्णतः स्त्रीत्व के गुण को प्राप्त कर लेती है। उसकी विपिन से शादी भी होती है और बच्चा भी होता है। रोशनी  पढ़ने में काफी कुशल है वह हमेशा परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होती है। वह दिल्ली आई.आई. टी  में पढ़ने जाती है। वहां उतरीं हो कर वह एक नामी कंपनी में सीईओ के  नियुक्त हो जाती है उसी कंपनी में कार्यरत ओंकार उस से प्रभावित होकर शादी का प्रस्ताव रखता है। रोशनी अपनी सच्चाई उसके आमने बया करती  जिससे वह मायूस न होकर  प्रस्ताव को निरस्त नहीं करता बल्कि उसे अपनाता है - 'यह  ने तुम्हारे साथ क्रूर मजाक किया है पर फिर भी भगवान को धन्यवाद दो की उन्होंने तुम्हे अच्छा दिमाग ,इतना सुन्दर चेहरा व् इतना सूंदर दिल दिया है। अरे क्या हुआ जो उसने तुम्हे गर्भाशय नहीं दिया।  हम उस,समस्या को आसानी से हल कर सकते है फिर तुम जो कहोगी मैं करने को तैयार हूँ।'
रोशनी को जब बच्चे की आवश्यकता का अनुभव होता है तब वह सोरेगेसी के द्वारा बच्चा करने की सलाह देती है। इसके लिए वह इला सावंत को चुनते है।   

डेस्क और बैग 

 रमेश कल स्कूल में देर से जाने के कारण डांट सुनने के बाद आज सुबह जल्दी ही जग गया। उसने कहा आज में सबसे पहले क्लास में जाऊंगा ,क्लास क्या स्कूल में सबसे पहले। मम्मी जल्दी लंच दो  मुझे जाना है। अभी तुम्हारे स्कूल का समय कहा हुआ बगल में ही तो है चले जाना समय से जब प्रार्थना शुरू होने वाला होगा। प्रार्थना का नाम  सुनकर रमेश को गुस्सा आ जाता है ये क्या स्कूल में जाते ही ग्राऊंड में खड़े हो कर गाते रहो गाना। ये प्रार्थना बाद में नहीं कराइ जा सकती। जब गेम का पीरियड हो उस से पहले उसके बाद खेलने का मजा ही कुछ और है, और हम खेलते समय गाते ही तो है। अचानक उसे याद आया नहीं मुझे जाना है सबसे पहले ,मम्मी आप दीदी से खाना भिजवा देना में जा रहा हूँ। अरे सुनो तो कुछ खा तो लो। नहीं मम्मी ,नही.... रमेश को बस जाने की धुन सवार थी। कल उसके डेस्क पर मोहन कैसे बैठ गया था और मेरे बोलने पर सर से शिकायत भी कर दी। इतने पर ही सर ने मुझे इतना डाँटा तुम  जल्दी नहीं आओगे तो बैठना जहाँ सीट मिले। आज देखता हूँ कैसे सीट नहीं मिलती। स्कूल के चौकीदार ने कहा क्या बात है रमेश बाबू आज तो बड़ी जल्दी आ गए स्कूल। रमेश का घर पास होने के कारण रमेश को चौकीदार अच्छी तरह जानता था वह अक्सर दिन में कई बार इसी रास्ते से गुजरता है। रमेश  ने चौकीदार की बात पर ध्यान दिए बिना अपने जल्दी आने के गर्व से फुला नहीं समा रहा था। क्लास में कोई भी बच्चा नहीं है रमेश एक डेस्क पर बैठा। तभी अचानक डेस्क ने रमेश के बैग से बात करनी शुरू कर दी। आज बड़ी जल्दी आ गए तुम्हारी तो नीद भी पूरी नहीं हुई होगी। हा मेरी तो नहीं हुई मगर कोई नहीं यहाँ आ कर तुम्हारे सर पर तो बैठ गया। वैसे आज तुम्हारा वजन कैसे कम हो गया। टिपिन भैया को नहीं लाये क्या साथ। नहीं ये जनाब कल की डांट सुनकर आज उन्हें छोड़ कर ही आ गए। डेस्क ने कहना शुरू किया मेरे बिना तो क्लास होना ही मुश्किल है देखो कैसे ठाट से आ कर बैठ गए मेरे ऊपर। बैग को यह बात असहनीय लगी वह तुरंत बोल पड़ा। मेरे बिना तो ये कभी आ ही नहीं पाएंगे स्कूल में इतने सारे कॉपी किताबो का भार डाले मेरे साथ चल देते है ,डेस्क ने सुनते ही कहा वो भार डाल कर वहां से ला कर पटक देते है मेरे छाती पर छह घंटे से पहले नहीं उठते। रविवार को ही बस  चैन की साँस लेता हूँ। बैग बोल पड़ा तब तो तुम्हे गर्मी की छुट्टियों में आराम मिलता होगा मुझे तो वह भी नहीं मिलता। डेस्क अचानक सोच में पड़ गया और बोला  नहीं गर्मी की छुट्टी में  मेरा भी मन नहीं लगता। अकेले धूल फाकते रहो यहाँ की तब तो यही इंतजार होता है की कब हँसते मुस्कुराते चेहरे इस क्लास में कदम रखेंगे और में तुम्हे फिर से अपने ऊपर बैठा हुआ पाउँगा। बैग ने भी कहा हां यार मुझे भी तुम्हारी याद आती है। हम सभी लोगो का अपना -अपना महत्व है और हम साथ में ही मिलकर खुश है। तभी दरवाजे की खड़कने की आवाज आई। मोहन क्लास में आ गया। रमेश ने उसे कहा आओ साथ में ही बैठते है। मोहन पास्ता लाया है रमेश और मोहन उसे खाने लगते है। 

 समाप्त  

  

 उत्तरमाला 

  1. a ,आकाशदीप 
  2. b ,अपना अपना भाग्य ,
  3. b ,तीसरी कसम 
  4. d,परिंदे 
  5. c -इंदुमती 
  6. a ,उसने कहा था 
  7. d ,परिंदे 
  8. a ,दुनिया का सबसे अनमोल रत्न 
  9. b ,आकाशदीप 
  10. b ,अमृतसर आ गया 
  11. c बादलों के घेरे 
  12. c ,पूस की रात ,राही ,परिंदे ,इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर 
  13. c ,-1 ,4 
  14. a ,-1 ,3 
  15. a -1 ,3 
  16. c -प्रेमचंद ,जयशंकर प्रसाद ,सुभद्रा कुमारी चौहान ,भीष्म साहनी 
  17. c -किशोरीलाल गोस्वामी ,राजेन्द्रबाला घोष ,जैनेन्द्र ,अज्ञेय 
  18. d -चंद्रदेव से मेरी बातें 
  19. d -उसने कहा था 
  20. b -लालपान की बेगम 
  21. c -उसने कहा था 
  22. b -अमृतसर आ गया 
  23. d -दुलाईवाली 
  24. b -कानो में कँगना 
  25. a -राजा निरबंसिया 
  26. c-1982
  27. b -1948
  28. b -1975 
  29. b -1931 
  30. c -1965 
  31. a -a और c 
  32. a -चंपा 
  33. c -राजा निरबंसिया 
  34. c -मन्नू भंडारी 
  35. b -उद्धत और चंचल 
  36. b -दुल्हिन की डोली 
  37. b -वापसी 
  38. b -उसने कहा था ,आकाशदीप ,ईदगाह ,परिंदे 
  39. c  -लालची 
  40. a -भारत विभाजन पर 

हिंदी कहानी

हिंदी कहानी 


DEVKANT SINGH
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प्रश्न 1 -" भगवान ! मेरे पथ -भ्र्ष्ट नाविक को अंधकार में ठीक पथ पर ले चलना।" 

  1. आकाशदीप 
  2. अपना अपना भाग्य  
  3. राही 
  4. लाल पान की बेगम 
प्रश्न 2 "-बहुत कुछ निरुद्देश्य घूम चुकने पर हम सड़क के किनारे की एक बैंच पर बैठ गए। नैनीताल की संध्या धीरे -धीरे उतर  रही थी। रुई के रेशे से भाप -से बदल हमारे सिरों को छू -छूकर बेरोक -टोक घूम रहे थे। हल्के प्रकाश और अंधियार से रंगकर कभी वे नील दीखते कभी सफ़ेद और फिर देर में अरुण पड़ जाते। वे जैसे हमारे साथ खेलना चाह रहे थे।"
  1. रोज 
  2. अपना  अपना भाग्य 
  3. कोसी का घटवार 
  4. परिंदे 
प्रश्न 3 -चार खेप सीमेंट और कपडे की गाठों जोगबनी में विराटनगर और फारबिसगंज का हर चोर व्यापारी उसको पक्का गाड़ीवान मानता था। 
  1. कोसी का घटवार 
  2. तीसरी  कसम 
  3. लालपान की बेगम 
  4. रोज 

प्रश्न 4 -नामवर सिंह के अनुसार नयी कहानी की प्रथम कहानी कौन सी है ?

  1. उसने कहा था 
  2. चीफ की दावत 
  3. इंदुमती 
  4. परिंदे 
प्रश्न 5 -आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार हिंदी की प्रथम कहानी कौन सी है ?

  1. उसने कहा था 
  2. चीफ की दावत 
  3. इंदुमती 
  4. परिंदे 
प्रश्न 6 -राजेंद्र यादव ने किस कहानी को हिंदी की प्रथम प्रौढ़ कहानी माना है ?
  1. उसने कहा था 
  2. चीफ की दावत 
  3. इंदुमती 
  4. परिंदे 
प्रश्न 7 -"होम सिक्नेस ही एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं है ?"
  1. उसने कहा था 
  2. चीफ की दावत 
  3. रोज  
  4. परिंदे 
प्रश्न 8 -दिलफिगार किस कहानी का पात्र है ?
  1. दुनिया का सबसे अनमोल रत्न 
  2. चीफ की दावत 
  3. इंदुमती 
  4. परिंदे 
प्रश्न 9 -मणिभद्र किस कहानी का पात्र है ?
  1. एक टोकरी भर मिटटी 
  2. आकाशदीप 
  3. चद्रदेव से मेरी बातें  
  4. दुलाईवाली 
प्रश्न 10 -दुबला बाबू किस कहानी में है ?
  1. दुलाईवाली 
  2. अमृतसर आ गया 
  3. अपना अपना भाग्य 
  4. इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर 
प्रश्न 11 -तपेदिक की मरीज मन्नो की कथा किस कहानी में चित्रित है ?
  •  अपना अपना भाग्य 
  • इस्पेक्टर मातादीन चाँद पर  
  • बादलों के घेरे 
  • राही 
प्रश्न 12 -  प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित कहानियो का अनुक्रम है ?
  • परिंदे , पूस की रात ,राही ,  मातादीन चाँद पर  
  • मातादीन चाँद पर ,पूस की रात ,राही ,परिंदे 
  •   पूस की रात ,रही। परिंदे।,मातादीन चाँद पर 
  • रही ,  पूस की रत ,परिंदे ,मातादीन चाँद पर 
प्रश्न 13 -निम्नलिखित में से कौन -कौन प्रेमचंद की कहानियों के पात्र नहीं है ?
  • लहना सिंह 
  • माधव 
  • अमीना 
  • अनीता 
  1. - 1 ,3 
  2. -1 ,3 ,4 
  3. -1 ,4 
  4. -1 ,,2 
प्रश्न 14 -निम्नलिखित में से कौन फणीश्वर नाथ रेणु के कहानी का पात्र नहीं है ?
  • अलगू चौधरी 
  • जंगी 
  • दुखी चमार 
  • चम्पिया 
  1. - 1 ,3 
  2. -1 ,3 ,4 
  3. -1 ,4 
  4. -1 ,,2 
प्रश्न 15 --निम्नलिखित में से कौन जयशंकर प्रसाद  के कहानी का पात्र  है ?
  •  मणिभद्र 
  • गिरीश 
  • चंपा 
  • शामनाथ 
  1. - 1 ,3 
  2. -1 ,3 ,4 
  3. -1 ,4 
  4. -1 ,,2 
प्रश्न 16 -  प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित रचनाकारों का अनुक्रम है ?
  1. जयशंकर प्रसाद ,प्रेमचंद ,सुभद्रा कुमारी चौहान ,भीष्म साहनी 
  2. जयशंकर प्रसाद ,सुभद्रा कुमारी चौहान ,प्रेमचंद ,भीष्म   साहनी 
  3. प्रेमचंद ,जयशंकर प्रसाद ,सुभद्रा कुमारी चौहान ,भीष्म साहनी 
  4. जयशंकर प्रसाद ,भीष्म साहनी ,सुभद्रा कुमारी चौहान ,प्रेमचंद 
प्रश्न 17 - प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित रचनाकारों का अनुक्रम है ?
  1. राजेंद्रबाला घोष , किशोरीलाल गोस्वामी ,जैनेन्द्र ,अज्ञेय 
  2. राजेंद्र बाला घोष ,जैनेंद्र ,किशोरीलाल गोस्वामी ,अज्ञेय 
  3. किशोरीलाल गोस्वामी ,राजेंद्र बाला घोष ,जैनेन्द्र ,अज्ञेय 
  4. राजेंद्र बाला घोष ,अज्ञेय ,किशोरीलाल गोस्वामी ,जैनेन्द्र 
प्रश्न 18 -"मैंने तो आपसे इतनी बातें  कही ,पर खेद है ,आपने अपने अनुकूल या प्रतिकूल एक बात का भी उत्तर न दिया। परन्तु आपके इस मौनावलम्ब को मैं स्वीकार का सूचक समझती हूं। अच्छा ,तो मेरी प्रार्थना को कबुल करके एक दफा यहाँ आइएगा जरूर।" ये पंक्ति किस कहानी की है ?"
  1. परिंदे 
  2. रोज 
  3. लालपान की बेगम 
  4. चंद्रदेव से मेरी बातें  

 प्रश्न19   -अपने सूखी लकड़ी के तख्तों पर उसे सुलाते हो ,आप कीचड़ में पड़े रहते हो। कही तुम न मांदे पड़ जाना। जाड़ा क्या  है,मौत है और निमोनिया से मरने वाले को मुरब्बा नहीं  मिला करते -किस कहानी की पंक्ति है?

  •  1 -कानो में कंगना 
  •  2 -तीसरी कसम
  •  3 -अपना अपना भाग्य 
  • 4 -उसने कहा था 

प्रश्न20   -"पहले से किसी बात का मनसूबा नहीं बांधना चाहिए किसी को। भगवान ने मनसूबा तोड़ दिया। उसे सबसे पहले भगवान से पूछना है भोले बाबा" --

  • 1 - तीसरी कसम 
  • 2 -लाल पान की बेगम
  • 3 -उसने कहा था
  •  4 -कोशी का घटवार 

प्रश्न21   -मृत्यु के कुछ पहले स्मृति बहुत साफ हो जाती है। जन्म -भर की घटनाएँ एक -एक करके सामने आती है। सारे दृश्यों के रंग साफ होते है ,समय की धुंध बिल्कुल उनपर से हट जाती है। -पंक्ति है  -

  • 1 - तीसरी कसम
  •  2 -लाल पान की बेगम
  •  3 -उसने कहा था
  •  4 -कोशी का घटवार

प्रश्न 22  -बोझिल अनिश्चित -से वातावरण में सफर कटने लगा। रात गहराने लगी थी। -पंक्ति है

  •  1  - तीसरी कसम
  •  2 -अमृतसर आ गया
  •  3 -उसने कहा था 
  • 4 -कोशी का घटवार

प्रश्न 23 -उनकी हँसी से और किससे !हँसी ठट्टा भी रह में अच्छी लगती है। उनकी हँसी मुझे नहीं भाती। ये पंक्ति किस कहानी की है ?

  1. लालपान की  बेगम 
  2. तीसरी कसम 
  3. कोसी का घटवार 
  4. दुलाईवाली 
प्रश्न 24 -चढ़ा नशा उतर गया बातें सूझ गई -आँखों की पट्टी खुल पड़ी ,लेकिन हाय खुली भी तो उसी समय जब जीवन में केवल अंधकार ही रह गया। किस कहानी की पंक्ति है ?
  1. परिंदे 
  2. कानो में कँगना 
  3. उसने कहा था 
  4. कोसी का घटवार 
प्रश्न २५ -इतनी छोटी जान पहचान में तुम मर्दो के घर में न रहते घुस कर बैठ सकते हो ?तुम तो उलटे पेरो लौट आओगे। किस कहानी की पंक्ति है ?
  1. राजा निरबंसिया 
  2. कानो में कँगना 
  3. उसने कहा था 
  4. कोसी का घटवार 
प्रश्न 26 -'इंस्पेक्टर मातादीन चाँद' पर  कहानी का प्रकाशन  वर्ष क्या है ?
  1. 1962 
  2. 1972 
  3. 1982 
  4. 1992 
प्रश्न 27 -'सिक्का बदल गया' कहानी का प्रकाशन वर्ष क्या है  ?
  1. 1947 
  2. 1948 
  3. 1934 
  4. 1958 
प्रश्न 28 -'अमृतसर आ गया' कहानी का प्रकाशन वर्ष क्या है ?
  1. 1972 
  2. 1975 
  3. 1957 
  4. 1957 
प्रश्न 29 -'अपना- अपना भाग्य' कहानी का प्रकाशन वर्ष क्या है ?
  1. 1929
  2. 1931
  3. 1933
  4. 1948
प्रश्न 30 -'पिता' कहानी का प्रकाशन वर्ष क्या है ?
  1. 1957
  2. 1958
  3. 1965 
  4. 1972
प्रश्न 31 -निम्नलिखित में से कौन -कौन सी रचनाये भारतीय प्रशासन व्यवस्था पर सटीक व्यंग करती है ?
  1. भोलाराम का जीव 
  2. सिक्का बदल गया 
  3. जामुन का पेड़ 
  4. पिता 
 नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
1 -a और c
२-a ,b और c
3 -b ,c और d
4 -a ,c और d


प्रश्न 32 -क्या स्त्री होना पाप है ?
उपर्युक्त संवाद किस पात्र द्वारा कहा गया है 
  1. चंपा 
  2. मालती 
  3. लतिका 
  4. हीराबाई 
प्रश्न 33 -बचन सिंह सिहर -सा गया और उसके हाथों की अभ्यस्त निठुराई को जैसे किसी मानवीय कोमलता ने छू लिया
उपर्युक्त कथन किस कहानी का है ?
  1. अमृतसर आ गया 
  2. सिक्का बदल गया 
  3. राजा निरबंसिया 
  4. उसने कहा था 
प्रश्न 34 -'यही सच है' की कहानीकार कौन है ?
  1. कृष्णा सोबती 
  2. उषा प्रियंवदा 
  3. मन्नू भंडारी 
  4. मृदुला गर्ग 
प्रश्न 35 -गेंग्रीन कहानी की मालती बचपन में कैसी लड़की थी ?
  1. सरल और शांत लड़की थी 
  2. उद्धत और चंचल लड़की थी 
  3. पुस्तक पढ़ने की शौकीन लड़की थी 
  4. चोरी से क्लास से भागने वाली लड़की थी 
प्रश्न 36 -तीसरी कसम का गाड़ीवान ने कौन -सा सामान न लादने की कसम नहीं खाई थी 
  1. कंपनी की औरत 
  2. दुल्हिन की डोली 
  3. चोरी बाजार का सामान 
  4. बाँस 
प्रश्न 37 -निम्नलिखित में से किस कहानी में नौकरी के सिलसिले में बाहर रहने के कारण गजाधर बाबू की लम्बी अनुपस्थिति उन्हें परिवार के ढांचे से बाहर कर देती है ?
  1. चीफ की दावत 
  2. वापसी 
  3. दोपहर का भोजन 
  4. बूढी काकी 
प्रश्न 38 -प्रकाशन काल के अनुसार निम्नलिखित कहानियों का सही अनुक्रम है ?
  1. परिंदे ,ईदगाह ,आकाशदीप ,उसने कहा था 
  2. उसने कहा था ,आकाशदीप ,ईदगाह ,परिंदे 
  3. आकाशदीप ,परिंदे ,उसने कहा था ,ईदगाह 
  4. ईदगाह ,आकाशदीप ,परिंदे ,उसने कहा था 
प्रश्न 39 -"चीफ की दावत कहानी"  शामनाथ का चरित्र किस प्रवृत्ति की ओर अग्रसर है ?
  1. दयालु 
  2. मिलनसार 
  3. लालची 
  4. शांत 
प्रश्न 40 - अमृतसर आ गया कहानी किस परिदृश्य पर लिखी गई है ?
  1. भारत विभाजन पर 
  2. आपातकाल पर 
  3. उत्तरप्रदेश  के विभाजन पर 
  4. शहरीकरण पर 

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 उत्तरमाला 

  1. a ,आकाशदीप 
  2. b ,अपना अपना भाग्य ,
  3. b ,तीसरी कसम 
  4. d,परिंदे 
  5. c -इंदुमती 
  6. a ,उसने कहा था 
  7. d ,परिंदे 
  8. a ,दुनिया का सबसे अनमोल रत्न 
  9. b ,आकाशदीप 
  10. b ,अमृतसर आ गया 
  11. c बादलों के घेरे 
  12. c ,पूस की रात ,राही ,परिंदे ,इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर 
  13. c ,-1 ,4 
  14. a ,-1 ,3 
  15. a -1 ,3 
  16. c -प्रेमचंद ,जयशंकर प्रसाद ,सुभद्रा कुमारी चौहान ,भीष्म साहनी 
  17. c -किशोरीलाल गोस्वामी ,राजेन्द्रबाला घोष ,जैनेन्द्र ,अज्ञेय 
  18. d -चंद्रदेव से मेरी बातें 
  19. d -उसने कहा था 
  20. b -लालपान की बेगम 
  21. c -उसने कहा था 
  22. b -अमृतसर आ गया 
  23. d -दुलाईवाली 
  24. b -कानो में कँगना 
  25. a -राजा निरबंसिया 
  26. c-1982
  27. b -1948
  28. b -1975 
  29. b -1931 
  30. c -1965 
  31. a -a और c 
  32. a -चंपा 
  33. c -राजा निरबंसिया 
  34. c -मन्नू भंडारी 
  35. b -उद्धत और चंचल 
  36. b -दुल्हिन की डोली 
  37. b -वापसी 
  38. b -उसने कहा था ,आकाशदीप ,ईदगाह ,परिंदे 
  39. c  -लालची 
  40. a -भारत विभाजन पर 
  
 

अनुसन्धान अभिक्षमता 

ॐ इंस्टिट्यूट आजादपुर दिल्ली 

प्रश्न 1 -अनुसन्धान की दृष्टि से निम्नलिखित में क्या तर्कसंगत नहीं है ?

  1. शोध विवेचन में पुनरुक्ति अवश्य होनी चाहिए। 
  2. शोध पद्यति स्पष्ट और सुनिश्चित होनी चाहिए। 
  3. शोध प्रबंध में पाद टिप्पणी विधिवत होनी चाहिए। 
  4. शोध कार्य सुनियोजित ,सुव्यवस्थित ,और क्रमबद्ध होनी चाहिए।  
प्रश्न 2 -वस्तुपरक शोध पद्यति का मूल सिद्धांत क्या है ?
  1. शोधकर्ता मनमाने ढंग से तथ्यों को नियंत्रित करे। 
  2.  शोधक तथ्यों का शासन करे। 
  3. शोधक तथ्यों की भावपरक व्याख्या करे। 
  4. तथ्य ही शोधक का अनुशासन करे। 
प्रश्न 3 -इनमे कौन- सी शैली अनुसन्धान के लेखन के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती ?
  1. व्यक्तिगत 
  2. वस्तुगत 
  3. व्यक्ति -निरपेक्ष 
  4. तथ्य परक 
प्रश्न 4 -इनमे से कौन -सा कर्तव्य -कर्म अनुसन्धान के लिए आवश्यक नहीं माना जाता है ?
  1. नए तथ्यों की खोज 
  2. व्याख्या-विश्लेषण 
  3. प्रभाव -ग्रहण और उसकी अभिव्यक्ति 
  4. मूल्याङ्कन अथवा निर्णय 
प्रश्न 5 -निम्नलिखित में से कौन -सी शोध पद्यति नहीं है ?
  1. सर्वेक्षण पद्यति और शास्त्रीय पद्यति 
  2. तुलनात्मक और समस्यामूलक पद्यति 
  3. क्षेत्रीय और वर्गीय अध्ययन पद्यति 
  4. व्यव्हार और विचार पद्यति 
प्रश्न 6 -शोध विषय के  चयन में निम्नलिखित अपेक्षाए महत्वपूर्ण होती है ?
  1. विषय की मौलिकता 
  2. मूल और सहायक सामग्री के पर्याप्त भाषा में मिलने की आश्वस्ति 
  3. शोधार्थी की रूचि ,प्रकृति ,पूर्वज्ञान तथा शोध -प्रक्रिया सम्बंधित पूर्व प्रशिक्षण 
  4. उपरोक्त सभी 
प्रश्न 7 -शोध का आशय है ?
  1. शोध विषय  समग्र समीक्षात्मक परिक्षण है। 
  2. शोध का लक्ष्य नए तथ्यों  की खोज तथा नए तथ्यों की तर्कसंगत विवेचना है। 
  3. स्थापित मान्यताओं ,सिद्धांतो और नियमों की बारीकी से जाँच करके उनमे आवश्यकता अनुसार परिवर्तन संशोधन करना भी शोध का लक्ष्य है। 
  4. उपरोक्त सभी 
प्रश्न 8 -शोध में चाक्षुष पद्यति का सर्वप्रथम दोष कौन -सा है ,जिसके कारण अध्ययन का परिणाम वास्तविकतापरक नहीं रह पाता ?
  1. अतिशय प्रश्नाकुलता 
  2. असीमितता 
  3. आत्मपरकता 
  4. योजनाबद्धता 
प्रश्न 9 -निम्नलिखित में से कौन -सी शोध पद्यति साहित्य सम्बन्धी शोध के लिए उपयुक्त नहीं है ?
  1. ऐतिहासिक 
  2. विवरणात्मक 
  3. नैदानिक 
  4. विश्लेषणात्मक 
प्रश्न 10 -शोध का उद्देश्य नहीं है ?
  1. नए त्तथ्यो की खोज 
  2. पुरानी स्थापनाओं का परिमार्जन 
  3. प्रचलित स्थापनाओं पर पुनर्विचार 
  4. आध्यात्मिक उन्नति 
प्रश्न 11 -शोध में परिकल्पना क्या है ?
  1. शोध में लेखक द्वारा की जाने वाली कल्पना 
  2. शोध में शोधार्थी द्वारा दिया जानेवाला उद्धरण 
  3. शोध में उपयोग किया जानेवाला एक महत्वपूर्ण छंद 
  4. शोध में सिद्धांत या निष्कर्ष तक पहुँचने का साधन 
प्रश्न 12 -शोध -प्रारूप में शामिल नहीं है ?
  1. अध्यायों की रूपरेखा 
  2. विषय की प्राकल्पना 
  3. चयनित विषय पर पहले से किये गए अध्ययन का संज्ञान 
  4. शोध की प्रकाशन की संभावनाएं 
प्रश्न 13 - A -किसी कृति का बहिरंग परिक्षण अथवा तथ्यान्वेषण ही अनुसन्धान की सीमा नहीं है ,आलोचनात्मक विश्लेषण भी अनुसन्धान है। 
b -आलोचनात्मक प्रतिभा के बिना उत्कृष्ट अनुसन्धान संभव नहीं है। 

  1. a और b दोनों गलत 
  2. a सही b गलत 
  3. a और b दोनों सही 
  4. a गलत b सही 
प्रश्न 14 -शोध आचार नीति के संदर्भ में निम्नलिखित में से किसे सबसे अधिक असुरक्षित चरण माना जाता है ?
  1. अध्ययन के उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र को परिभाषित करना।  
  2. समग्र एवं प्रतिदर्श पद्यति को परिभाषित करना। 
  3. प्रदत्तों का विश्लेषण ,उनकी व्याख्या तथा परिणाम की जानकारी 
  4. शोध के साधनों का चरण ,चाहे वे गुणात्मक अथवा मात्रात्मक हो। 
प्रश्न 15 -निम्नलिखित में से किस क्रम में मात्रात्मक प्रतिमान का उपयोग करते हुए शोध के चरणों को सही ढंग से दर्शाया  गया है ?
  1. परिकल्पना का निर्माण ,परिकल्पना परिक्षण और प्रतिवेदन लेखन 
  2. शोध समस्या का निर्धारण ,परिकल्पना  का निर्माण ,परिकल्पना परिक्षण ,सामान्यीकरण एवं निष्कर्ष तथा परिणामों के निहितार्थ 
  3. समस्या की पहचान ,प्रतिदर्श का चयन ,शोध  अभिकल्प को विकसित करना और फील्डवर्क 
  4. समस्या को परिभाषित करना ,सम्बंधित अध्ययनों का सर्वेक्षण ,प्रतिदर्श ,प्रतिचयन ,प्रदत्तों का संग्रहण और प्रदत्तों का विश्लेषण 
प्रश्न 16  -निम्नलिखित में से किस शोध विधि में चर परिवर्त में हेरफेर और नियंत्रण तथा प्रतिदर्श  यादृच्छीकरण दो मुख्य अपेक्षाएं है ?
  1. कार्येत्तर शोध 
  2. वर्णात्मक शोध 
  3. व्यष्टि अध्ययन 
  4. प्रयोगनात्मक 
प्रश्न 17 -नीचे दो सेट दिए गए है जिनमे सेट -1 में शोध प्रकार का उल्लेख है जबकि सेट -2 में उनका वर्णन है। 

शोध के प्रकार                                                                    वर्णन 

  1. मौलिक शोध                                         1 - विशिष्टताओ पर केंद्रित गहन अध्ययन 
  2. व्यवहृत शोध                                         2 -हस्तक्षेप आधारित सुधारनात्मक पहल 
  3. क्रियात्मक शोध                 3 - नयी परिस्थितियों में सत्य सिद्धांत के अनुप्रयोग की संभावनाओं को तलाशना 
  4. व्यक्ति अध्ययन शोध                               4 -प्रभाव जानने हेतू प्रभाव अध्ययन 
  5.                                                              5 -सिद्धांत निर्माण के माध्यम से ज्ञानकोष में अभिवृति  
प्रश्न 18 -निम्नलिखित में से किस कारण के आधार पर शोध में सूचना और सम्प्रेषण प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग सर्वाधिक उपयोगी है। 
  1.  शोध की लागत काम करने के लिए   
  2. आकादमिक अलंकरण हेतु 
  3. शोध के प्रदत्तों की उपलब्धता की गुंजाईश में विस्तार हेतु 
  4. संवादात्मक अंतःक्रिया के संवर्धन हेतु   
प्रश्न 19 -भारतीय तर्कशास्त्र में ज्ञान के किस साधन से दो वस्तुओ के बीच समानता प्राप्त की जाती है ?
  1. तुलना 
  2. अनुमिति 
  3. प्रत्यक्षण 
  4. निहितार्थ  
प्रश्न 20 -प्रत्यक्षवाद की विशेषता नहीं है ?
  1. वस्तुनिष्टता 
  2. कार्य कारण सम्बन्ध 
  3. वैज्ञानिक दृष्टिकोण 
  4. अनुभव  
प्रश्न 21 -प्रत्यक्षवाद की तकनीक नहीं है ?
  1. निरिक्षण 
  2. तुलनात्मक 
  3. ऐतिहासिक 
  4. भावना
प्रश्न 22 -इनमे से किसका सम्बन्ध प्रत्यक्षवाद से है ?
  1. धार्मिक स्तर 
  2. तात्विक स्तर 
  3. वैज्ञानिक स्तर 
  4. सामूहिक स्तर 
प्रश्न 23 -शोध नैतिकता में शामिल है -
  1. किसी शोध प्रबंध का पूर्णतः अनुकरण करना 
  2. सत्यनिष्ठा 
  3. ईमानदारी 
  4. सामाजिक जिम्मेदारी 
प्रश्न 24 -गुणात्मक शोध में मुख्यतः किस विधि का प्रयोग किया जाता है ?
  1. आगमन 
  2. निगमन 
  3. सादृश्यपरक 
  4. निहितार्थ 
प्रश्न 25 -वर्णात्मक शोध का  सम्बन्ध किस समय से होता है -
  1. भूतकाल 
  2. वर्तमान 
  3. भविष्य 
  4. समयानुसार  

हिंदी उपन्यास

हिंदी उपन्यास 

DEVKANT SINGH
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प्रश्न 1 -निम्नलिखित को क्रम से लगाओ ?
  1. महाकाल ,अमृत और विष ,मानस का हंस  ,खंजन नयन 
  2. अमृत और विष ,मानस का हंस,खंजन नयन ,महाकाल 
  3. अमृत और विष ,महाकाल ,खंजन नयन ,मानस का हंस 
  4. अमृत और विष ,खंजन नयन ,महाकाल ,मानस का हंस 
प्रश्न 2 -150 वर्ष पूर्व संक्रमणकालीन भारत की संस्कृति को जानने के लिए इससे बेहतर उपन्यास नहीं हो सकता किस उपन्यास के बारे में यह कथन है ?
  1. परीक्षा गुरु 
  2. गोदान 
  3. देवरानी  जेठानी की कहानी 
  4. मैला आँचल 
प्रश्न 3 -"नहीं चाहिए हमे ऐसी अलमारी। घर   का सारा आलतू -फालतू सामान मेरे लिए। अपने लिए कैसा बढ़िया कमरा ,कैसी बढ़िया अलमारी।"किस उपन्यास का कथन है ? 
  1. झूठा सच 
  2. मानस का हंस 
  3. आपका बंटी 
  4. बाणभट्ट की आत्मकथा 
प्रश्न 4 --निम्नलिखित को क्रम से लगाओ ?
  1. गोदान , शेखर एक जीवनी , झूठा सच ,मानस का हंस
  2. गोदान ,झूठा सच ,शेखाए एक जीवनी ,मानस का हंस 
  3. गोदान ,मानस  हंस ,झूठा सच ,शेखर रक जीवनी 
  4. शेखर एक जीवनी ,मानस का हंस,गोदान ,झूठा सच 
प्रश्न 5 'तमस' उपन्यास में कितने दिन की कथा है ?
  1. 25 
  2. 15 
  3. 35 
  4. 5 
प्रश्न6  -इनमें कौन से उपन्यास जीवनी परक उपन्यास है ?
  1. मानस का हंस 
  2. शेखर एक जीवनी 
  3. पहला गिरमिटिया 
  4. मैला आँचल 
  1. - 1 ,3 
  2. -1 ,3 ,4 
  3. -1 ,4 
  4. -1 ,,2 

प्रश्न 7 -यशपाल के उपन्यास 'झूठा सच' में दौलतराम आजाद किस राजनितिक  सदस्य था ?
  1. कांग्रेस 
  2. कम्युनिस्ट पार्टी 
  3. मुस्लिम लीग 
  4. जनसंघ 
प्रश्न 8 -निम्नलिखित में से क्या 'तमस' उपन्यास में सांप्रदायिक भावना निर्माण में सहायक नहीं है ?
  1. साम्प्रदायिक पूर्वाग्रह 
  2. विभिन्न सम्प्रदायों का एक स्थान पर वास 
  3. वर्गीय पूर्वाग्रह 
  4. अतीत की गौरव -गाथाएँ 
प्रश्न 9 -निम्नलिखित में किस उपन्यास में राम और काम का द्वन्द चित्रित  हुआ है ?
  1. अमृत और विष 
  2. खंजन नयन 
  3. मानस  का हंस 
  4. नाच्यो बहुत गोपाल 
प्रश्न 10 -मन्नू भण्डारी अपनी आत्मकथा में 'आपका बंटी' उपन्यास  विभिन्न समीक्षाओ में से किस पक्ष को मानती है ?
  1. खंडित बचपन को 
  2. बच्चे के पालन पोषण का आर्थिक पक्ष 
  3. बाल -मनोवैज्ञानिक पक्ष 
  4. मुख्य स्त्री पात्र -स्त्रीत्व 
प्रश्न 11 -अगर प्रेम खूंखार शेर है तो मैं  उससे दूर ही रहूंगी। मैंने तो उसे गाय ही समझ रखा था। मैं प्रेम को संदेह से ऊपर समझती हूँ। वह देह की वस्तु नहीं ,आत्मा की वस्तु है। संदेह का वहाँ जरा भी स्थान नहीं और हिंसा तो संदेह का  परिणाम है। वह सम्पूर्ण आत्मसमर्पण है। ये पंक्तियाँ गोदान उपन्यास में किस पात्र द्वारा कही गई है ?
  1. गोविंदी 
  2. सोना 
  3. सिलिया 
  4. मालती 
प्रश्न 12 -'सेवासदन' उपन्यास उर्दू में किस नाम से प्रकाशित  था ?
  1. चौगाने हस्ती 
  2. किशना 
  3. असरारे मआविद 
  4. बाजरे हुस्न 
प्रश्न 13 -निम्नलिखित को क्रम से लगाओ ?
  1. कर्मभूमि ,गबन ,निर्मला ,रंगभूमि 
  2. निर्मला ,गबन ,रंगभूमि ,कर्मभूमि 
  3. रंगभूमि ,निर्मला ,गबन ,कर्मभूमि 
  4. कर्मभूमि ,रंगभूमि , गबन ,निर्मला 
प्रश्न 14 -'बाणभट्ट की आत्मकथा ' उपन्यास किस समय की पृष्ठभूमि पर आधारित है ?
  1. औपनिवेशिक काल 
  2. छठी -सातवीं शताब्दी 
  3. पहली -दूसरी शताब्दी 
  4. बारहवीं -तेरहवी शताब्दी 
प्रश्न 15 -निम्नलिखित को क्रम से लगाओ ?
  1. झरोखे ,तमस ,वसंती ,कुंतो 
  2. तमस ,कुंतो ,वसंती ,झरोखे 
  3. तमस ,वसंती ,कुंतो ,झरोखे 
  4. तमस ,झरोखे ,वसंती ,कुंतो 
प्रश्न 16 -निम्नलिखित को क्रम से लगाओ ?
  1. यादों का पहाड़ ,आधा पुल ,कभी न छोड़े खेत ,घास गोदाम 
  2. आधा पुल ,घास गोदाम ,यादों का पहाड़ ,कभी न छोड़े खेत 
  3. घास गोदाम ,आधा पुल ,कभी न छोड़े खेत ,यादों का पहाड़ 
  4. कभी न छोड़े खेत ,घास गोदाम ,यादों का पहाड़ ,आधा पुल 
प्रश्न 17 -'यादों का पहाड़' किसका उपन्यास है ?
  1. कृष्णा सोबती 
  2. मन्नू भण्डारी 
  3. जगदीशचंद्र 
  4. काशीनाथ सिंह 
प्रश्न 18 -"भेद इतना ही है की उनमे सामाजिक ऊँचनीय का ऐसा भेद नहीं है। जहाँ भारत वर्ष के समाज में एक सहस्त्र स्तर है वहाँ  समाज में कठिनाई से दो तीन होंगे।" किस उपन्यास का कथन है ?
  1. धरती धन न अपना 
  2. बाणभट्ट की आत्मकथा 
  3. गोदान 
  4. झूठा सच 
प्रश्न 19 -'धरती धन न अपना' उपन्यास का दूसरा भाग किस नाम से प्रकाशित हुआ ?
  1. बीच की दीवार 
  2. नरकुण्ड में वास 
  3. लाट की वापसी 
  4. जमीन तो अपनी थी 
प्रश्न 20 -इनमें से कौन आंचलिक उपन्यास नहीं है ?
  1.  धरती धन न अपना 
  2. मैला आँचल 
  3. गोदान 
  4. मानस का हंस
  1. - 1 ,3 
  2. -1 ,3 ,4 
  3. -3  ,4 
  4. -1 ,,2 
प्रश्न 21 -कौन से उपन्यास पर आंचलिकता को लेकर विवाद है ?
  1. गोदान 
  2. मैला आँचल 
  3. राग दरबारी 
  4. धरती धन न अपना 
प्रश्न 22 -इनमें  से किस उपन्यास को हिंदी साहित्य का प्रथम आंचलिक उपन्यास माना जाता है ?
  1. धरती धन न  अपना 
  2. देहाती दुनिया 
  3. जिंदगीनामा 
  4. परती परिकथा 
प्रश्न 23 -गोपाल राय  ने हिंदी का प्रथम उपन्यास किसे माना है ?
  1. परीक्षा गुरु 
  2. देवरानी जेठानी  की कहानी
  3. रानी केतकी की कहानी  
  4. ठेठ हिंदी का  ठाठ 
प्रश्न 24 -देवरानी जेठानी की कहानी उपन्यास  प्रकाशन वर्ष ?
  1. 1870 
  2. 1877 
  3. 1882 
  4. 1890 
प्रश्न 25 -परीक्षा गुरु उपन्यास  प्रकाशन वर्ष ?
  1. 1870 
  2. 1877 
  3. 1882 
  4. 1890 
प्रश्न 26 -फणीश्वर नाथ रेणु का पहला उपन्यास कौन सा है ?
  1. परती परिकथा 
  2. मैला आँचल 
  3. उपसंहार 
  4. पहला गिरमिटिया 
प्रश्न 27 -'तमस' उपन्यास को कब साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला ?
  1. 1973 
  2. 1974 
  3. 1975 
  4. 1976 
प्रश्न 28 -'जिंदगीनामा' उपन्यास को कब साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला ?
  1. 1979 
  2. 1980 
  3. 1981 
  4. 1982 
प्रश्न 29 -'पहला गिरमिटिया' उपन्यास किसका है ?
  1. प्रेमचंद 
  2. जगदीशचंद्र 
  3. गिरिराज किशोर 
  4. रमेशचंद शाह 
प्रश्न 30 -आत्मपरक शैली में लिखा गया उपन्यास कौन से है ?
  1. शेखर एक जीवनी 
  2. गोदान 
  3. त्याग पत्र 
  4. काशी का अस्सी 
  1. - 1 ,3 
  2. -1 ,3 ,4 
  3. -3  ,4 
  4. -1 ,,2 
प्रश्न 31 -गोदान का गोबर किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है ?
  1. सामंतशाही को चुपचाप सहन करने वाले वर्ग का 
  2. रूढ़ि विरोधी नयी पीढ़ी के किसान -युवक का 
  3. रूढ़िवादी परम्परा को मानने वाले वर्ग का 
  4. समाज सेवा करने वाले वर्ग का 
प्रश्न 32 -गोदान का कौन सा पात्र प्रेमचंद के प्रगतिशील विचारो का वाहक माना जाता है ?
  1. होरी 
  2. मिस्टर खन्ना 
  3. प्रोफेसर मेहता 
  4. ओंकारनाथ 
प्रश्न 33 -हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित निम्नांकित कृतियों में से कौन सी कृति उपन्यास विधा से सम्बन्ध नहीं है ?
  1. चारुचंद्र लेख  
  2. बाणभट्ट की आत्मकथा 
  3. अनामदास का पोथा 
  4. कुटज 
प्रश्न 34 -स्त्री की सफलता पुरुष को बांधने में है ,किन्तु सार्थकता पुरुष की मुक्ति में है। बाणभट्ट  आत्मकथा में यह कथन किसका है ?
  1. भट्टिनी 
  2. निपुणिका 
  3. महामाया 
  4. सुचरिता 
प्रश्न 35 -बाणभट्ट की आत्मकथा है एक .... 
  1. प्रेम कथा 
  2. संघर्ष कथा 
  3. मनोविज्ञान कथा 
  4. जीवन मूल्यों पर आधारित उदात्त प्रेम कथा 
प्रश्न 36 -गोदान उपन्यास को गद्य प्रस्तुत महाकाव्य कहा जाता है ,क्योंकि उसमे .... 
  1. भारतीय जनजीवन का यथार्थ चित्रण है 
  2. सामान्य आदमी  अच्छाइयों का विवेचन है 
  3. सामाजिक संस्कार का सूक्ष्म अभिनिवेश है 
  4. इनमे से सभी 
प्रश्न 37 -यशपाल के झूठा सच उपन्यास की लोकप्रियता का क्या कारण है ?
  1. उसमे झूठ  को सच के रूप में दिखाया गया है। 
  2. उसमे भारत विभाजन की वेदना की यथार्थ प्रस्तुति है। 
  3. उसमे मनुष्यता को हारते हुए दिखाया गया है। 
  4. उसमें रचनाकार  कुछ भी अपनी और से नहीं कहता। 
प्रश्न 38 -निम्नलिखित  में से किस उपन्यास में उत्तर प्रदेश  पूर्वांचल के एक कस्बानुमा गाँव शिवपाल गंज की कहानी वर्णित है ?
  1. रागदरबारी 
  2. आधा गाँव 
  3. मैला आँचल 
  4. गली आगे मुड़ती है 
प्रश्न 39 -शकुन और डॉ जोशी के अंतर सम्बन्धों पर आधारित कथानक किस उपन्यास में प्रस्तुत  किया गया है ?
  1. आपका बंटी 
  2. महाभोज 
  3. टुटा हुआ इंद्रधनुष 
  4. तिरछी बौछार 
प्रश्न 40 -लाला ब्रजकिशोर और मुंशी चुन्नीलाल निम्नलिखित में से किस उपन्यास के पात्र है ?
  1. भाग्यवती 
  2. देवरानी जेठानी की कहानी 
  3. नूतन ब्रह्मचारी 
  4. परीक्षा गुरु 
प्रश्न 41 -तमस उपन्यास के पात्र है 
  1. कनक 
  2. रिचर्ड 
  3. लिजा 
  4. सेल्मा 
1 -1 और  2 
2 -2 और 4 
3 -2 और 3 
4 -1 और 4 

प्रश्न 42 -करम बीबी और सरफराज निम्न में से किस उपन्यास के पात्र है ?
  1. जिंदगीनामा 
  2.  सूरजमुखी अँधेरे में 
  3.  डार से बिछड़ी 
  4. यारो  के यार 
प्रश्न 43 -मन्नू भंडारी द्वारा रचित उपन्यास नहीं है। 
  1. महाभोज 
  2.  आपका बंटी 
  3. शैलूष 
  4. बसंती 
1 -1 और  3  
2 -2 और 3  
3 -4  और 3 
4 -1 और 2  

प्रश्न 44 -सांप्रदायिक विद्वेष और विभाजन की त्रासदी पर आधारित उपन्यास है। 
  1. आवारा मसीहा 
  2. महाभोज 
  3. तमस 
  4. झूठा सच 
1 -1 और  2 
2 -2 और 4 
3 -2 और 3 
4 -3 और 4 

प्रश्न 45 -प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित उपन्यासों का सही अनुक्रम है। 
A -वामा शिक्षक 
B -निस्सहाय हिन्दू 
C-भाग्यवती 
D -देवरानी जेठानी की कहानी  

  1. D,A,C,B
  2. A,B,C,D
  3. B,C,D,A
  4. C,D,A,B
प्रश्न46  - झूठा सच उपन्यास के पात्र है -
  1. तारा , जयदेव 
  2. रणवीर ,देवव्रत 
  3. सोमराज ,रावत 
  4. रुप्पन बाबू ,सनीचर 
1 -1 और  3  
2 -2 और 4 
3 -2 और 3 
4 -1 और 2 ,3 

प्रश्न 47 -लक्ष्मी दासिन निम्नलिखित में से  किस उपन्यास  की पात्र है ?
  1. मैला आँचल 
  2.  परती परिकथा 
  3. जूलूस 
  4. कितने चौराहे 
प्रश्न 48 -माता पिता के सम्बन्ध विछेद से विच्छेद से  प्रभावित बालक के त्रस्त जीवन को कथा पर आधारित उपन्यास है ?
  1. एक इंच मुस्कान 
  2. अनुगूँज 
  3. आपका बंटी 
  4. बेघर 
प्रश्न 49 -रागदरबारी उपन्यास के पात्र है -
  1. मदन मोहन और बाबू बैजनाथ 
  2. मास्टर मोतीराम और रामाधीन 
  3. मास्टर शिंभूदयाल और पुरुषोत्तमदास 
  4. काशीशाह और गंडा सिंह 
प्रश्न 50 -गोदान उपन्यास  होरी  अवध प्रान्त के किस गाँव का रहने वाला किसान था ?
  1. बेलारी 
  2. गंगौली 
  3. सेमरी 
  4. पांडेयपुर 
 


उत्तरमाला 

उत्तरमाला 

  1. a 
  2. c 
  3. c 
  4. a 
  5. d 
  6. a 
  7. b 
  8. b 
  9. c 
  10. d 
  11. d 
  12. d 
  13. c 
  14. b 
  15. a 
  16. a 
  17. c 
  18. b 
  19. b
  20. c 
  21. c 
  22. b 
  23. b 
  24. a 
  25. c 
  26. b 
  27. c 
  28. b 
  29. c 
  30. a
  31. -1
  32. -3
  33. -4
  34. -3 
  35. -4
  36. -4
  37. -2
  38. -1
  39. -1
  40. -4
  41. -3
  42. -1
  43. -3
  44. -4
  45. -1
  46. -1
  47. -1
  48. -3
  49. -2
  50. -1
हिंदी साहित्य सम्बन्ध को सहयोग करने लिए ऊपर दिए गये नंबर पर संपर्क करे. सहयोग राशि 10 रूपए से अपनी इच्छा अनुसार कुछ भी हो सकता है.

अनुसन्धान अभिक्षमता research apptitude


अनुसन्धान अभिक्षमता 

प्रदत्तों का विश्लेषण +किसी समस्या का विश्वसनीय समाधान 
नवीन तथ्यों की खोज +नविन सत्यो का प्रतिपादन 
प्राचीन प्रत्ययों तथ्यों +नवीन अर्थापन 

प्रयोगनात्मक शोध कार्य -प्रभाव सहसम्बन्ध 
सर्वेक्षण शोध -सामान्य सहसम्बन्ध 
विकासात्मक शोध -चारो की प्रभावशीलता का अध्ययन 
ऐतिहासिक शोध -नविन तथ्यों की खोज 

मेकग्रेथ तथा वाटसन के अनुसार -अनुसन्धान एक प्रक्रिया है , जिसमे खोज प्राविधि का प्रयोग किया जाता है जिसके निष्कर्षो की उपयोगिता हो ,ज्ञान वृद्धि की जाये ,प्रगति के लिए प्रोत्साहित करे ,समाज के लिए सहायक हो तथा मनुष्य को अत्यधिक प्रभावशाली बना सके। 
समाज तथा मनुष्य अपनी समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से हल कर सके। 

प्रत्यक्षवाद 


अनुसन्धान के प्रकार 


  1. बौद्धिक 
  2. व्यावहारिक 
बौद्धिक कारन का सम्बन्ध मनुष्य की जिज्ञासा की प्रवृति तथा ज्ञानार्जन से प्राप्त संतुष्टि की भावना से है। 

व्यावहारिक कारन का सम्बन्ध मनुष्य की उस इच्छा से है जिसके द्वारा वह ज्ञान प्राप्त करके अन्य कार्यो को अधिक कुशलतापूर्वक कर सके। 

 बौद्धिक अनुसन्धान को मूलभूल अनुसन्धान भी कहा जाता है। 

मुलभुत अनुसन्धान -ऐसे अनुसन्धान जिनके निष्कर्षो द्वारा किसी विशेष वैज्ञानिक नियमो का प्रतिपादन हो ,इस वर्ग में आते है मुलभुत अनुसन्धान का मुख्या उद्देश्य नई प्ररचनाओ का निर्माण करना है। 

व्यवहृत अनुसन्धान -जिनके द्वारा किसी समस्या -विशेष का समाधान  आवश्यक हो। 


अनुसन्धान के सोपान 

  1. समस्या का चयन 
  2. परिकल्पना का प्रतिपादन 
  3. शोध की रूपरेखा 
  4. प्रदत्तों का संकलन 
  5. प्रदत्तों का विश्लेषण 
  6. सामान्यीकरण तथा निष्कर्षो का प्रतिपादन 

अनुसन्धान की विधियाँ 

  1. ऐतिहासिक 
  2. वर्णात्मक 
  3. प्रयोगनात्मक 
  4. मात्रात्मक 
  5. गुणात्मक 
ऐतिसाहिक शोध -ऐतिहासिक समस्याओ का वैज्ञानिक विश्लेषण भूत ,वर्तमान तथा भविष्य का सम्बन्ध स्थापन 
शिक्षा तथा मनोविज्ञान  के लिए वैज्ञानिक आधार
 

ऐतिहासिक अनुसन्धान के पद 

आकंड़ो का संग्रह 
आकड़ो का विश्लेषण 
उपर्युक्त के आधार पर तथ्यों के विश्लेषण एवं रिपोर्ट 

ऐतिहासिक अनुसन्धान का क्षेत्र 
बड़े शिक्षाशास्त्रीय एवं मनोवैज्ञानिक के विचार 
संस्थानों एवं प्रयोगशालाओं द्वारा किए गए कार्य 
विभिन्न कालो में शैक्षिक एवं मनोवैज्ञानिक विचारों के विकास की स्थिति 
एक विशेष प्रकार की विचारधारा का प्रभाव और उसके और उसके स्रोत 
शिक्षा के लिए संवैधानिक व्यवस्था 
पुस्तक सूचि तैयार करना


ऐतिहासिक अनुसन्धान में नियंत्रण सम्बन्धी कठिनाई 


  1. ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करना ,जिसका पता न लगा हो। 
  2. पुराने अनुसन्धान का संशोधन  

वर्णात्मक तथा विवरणात्मक शोध 

इसका सम्बन्ध किसी व्यक्ति से न होकर सम्पूर्ण जनसँख्या से होता है। 

ऐतिहासिक शोध का सम्बन्ध भूतकाल से होता है 
वर्णात्मक का सम्बन्ध वर्तमान से 
प्रयोगनात्मक का सम्बन्ध भविष्य से 

गुणात्मक शोध 

  1. गुणात्मक शोध गहन साक्षात्कार ,दस्तावेजों की समीक्षा करता है 
  2. मुख्यतः आगमन विधि का प्रयोग होता है 
  3. विषयनिष्ठ होता है। 
  4. गुणात्मक या वर्णन आधारित होता है। 
  5. मानवीय व्यवहारों का अध्ययन करता है। 

मात्रात्मक शोध 

  1. मात्रात्मक या परिणात्मक सांख्यिकी सूचनाओं ,सर्वेक्षण ,संरचना साक्षात्कार ,प्रेक्षण रिकॉर्ड्स और रिपोर्ट 
  2. मुख्यतः निगमन  प्रयोग 
  3. वस्तुनिष्ट 
  4. संख्या आधारित 

शोध नैतिकता 

  1. सत्यनिष्ठा 
  2. ईमानदारी 
  3. वैधता 
  4. गैर भेदभाव 
  5. सामाजिक जिम्मेदारी 

प्रत्यक्षवाद 

अगस्त कॉम्ट 
जन्म -1798 
मृत्यु -1857 

तीन स्तरीय नियम 
  1. धार्मिक स्तर 
  2. तात्विक स्तर 
  3. वैज्ञानिक स्तर 
धार्मिक स्तर के तीन भेद 
  1. जीवित सत्तावाद 
  2. बहुदेववाद 
  3. अद्वैतवाद 
प्रत्यक्षवाद की तकनीक 
  1. निरिक्षण 
  2. प्रयोगात्मक 
  3. तुलनात्मक 
  4. ऐतिहासिक 
  5. वर्गीकरण 
यथार्थवादी विचारधारा 
समाजशास्त्रीय शोध 
वैज्ञानिक विधि से सत्य की खोज 
तथ्यवाद 
विज्ञानवाद 

प्रत्यक्षवाद केवल उन घटनाओ की व्याख्या करता है जिसे हम प्रत्यक्ष रूप से अनुभव व् निरिक्षण कर सकते है। 

प्रत्यक्षवाद की प्रवृति 
  1. वस्तुनिष्ठता 
  2. तार्किक विश्लेषण 
  3. कार्य -कारन सम्बन्ध 
  4. वैज्ञानिक दृष्टिकोण 
  5. यथार्थवादी प्रकृति 
  6. सकारात्मकता 

उत्तर प्रत्यक्षवाद 

तार्किक प्रक्रिया +व्यक्तिगत अनुभव 

जहाँ प्रत्यक्षवाद सिद्धांत की व्याख्या वैज्ञानिक विधि से करता है ,वही उत्तर प्रत्यक्षवाद समस्या का गहन विश्लेषण करके कारणों की खोज व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर करता है। 

प्रत्यक्षवाद अवलोकन ,निरिक्षण पर बल देता है। उत्तर प्रत्यक्षवाद अवलोकन ,निरिक्षण को अस्थिर मानता है। क्योंकि यह व्यक्तिगत दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। 

उत्तर प्रत्यक्षवाद व्यक्तिवादी है वस्तुनिष्ठ नहीं 

उत्तारप्रत्यक्षवाद ज्ञान को विनिमय की वस्तु नहीं मानता। 

पत्नी कहानी का सारांश, जैनेंद्र कुमार की पत्नी कहानी, Patni kahani summary.

  'पत्नी' हिंदी के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार जैनेंद्र कुमार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुचर्चित कहानी है। यह कहानी भारतीय समाज...