सुधियाँ उस चंदन के वन की (संस्मरण) विष्णुकांत शास्त्री, सारांश, पात्र और 50+ MCQs इकाई-10: UPESSC UPHESC

 सुधियाँ उस चंदन के वन की सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार और विद्वान विष्णुकांत शास्त्री द्वारा रचित हिंदी साहित्य का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण संस्मरण-संग्रह है। इसका प्रकाशन वर्ष 1992 है।   (इकाई-10: UPESSC UPHESC जैसी उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह कृति विशेष महत्त्व रखती है।


कृति का सामान्य परिचय:

  • विधा: संस्मरण (Memoir)

  • रचनाकार: विष्णुकांत शास्त्री

  • शीर्षक की सार्थकता: इस पुस्तक का शीर्षक प्रसिद्ध कवि गिरिजाकुमार माथुर की कविता की पंक्ति "सुधियाँ उस चंदन के वन की" से लिया गया है। यहाँ 'चंदन का वन' उन महान साहित्यकारों, गुरुओं और विभूतियों के सान्निध्य का प्रतीक है, जिनकी स्मृतियाँ (सुधियाँ) लेखक के मन में चंदन की सुगंध की तरह हमेशा महकती रहती हैं।

मूल संवेदना और मुख्य वर्ण्य-विषय:
इस कृति में विष्णुकांत शास्त्री जी ने अपने समकालीन और पूर्ववर्ती उन महान साहित्यकारों तथा सांस्कृतिक विभूतियों के संस्मरण लिखे हैं, जिनके साथ उनका गहरा आत्मीय और बौद्धिक जुड़ाव रहा। लेखक ने केवल इन विभूतियों के बाहरी जीवन का खाका नहीं खींचा है, बल्कि उनके व्यक्तित्व की आंतरिक परतों, उनके मानवीय गुणों, संघर्षों और साहित्य के प्रति उनके समर्पण को उजागर किया है।

संस्मरणों में चित्रित प्रमुख विभूतियाँ:
इस संग्रह में कई महत्वपूर्ण साहित्कारों पर संस्मरणात्मक आलेख शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विभूतियों के व्यक्तित्व के अनछुए पहलुओं को उभारा गया है:

  1. आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी: शास्त्री जी द्विवेदी जी के प्रकांड पांडित्य, उनकी उदारता और उनके फक्कड़पन को अत्यंत श्रद्धाभाव से याद करते हैं।

  2. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय': अज्ञेय जी के गंभीर, अनुशासित और अंतर्मुखी व्यक्तित्व के साथ-साथ उनके भीतर छिपे एक संवेदनशील इंसान का सूक्ष्म चित्रण इस कृति में मिलता है।

  3. महादेवी वर्मा: महादेवी जी की करुणा, उनके विशाल हृदय और नए रचनाकारों को प्रश्रय देने की उनकी प्रवृत्ति का बहुत मार्मिक उल्लेख किया गया है।

  4. रामधारी सिंह 'दिनकर': दिनकर जी की ओजस्विता, उनकी राष्ट्रीय चेतना और मित्रों के प्रति उनके गहरे लगाव को लेखक ने सजीव कर दिया है।

  5. धर्मवीर भारती: भारती जी के साथ अपने आत्मीय संबंधों और उनकी रचनात्मक बेचैनी को शास्त्री जी ने बहुत ही सहज ढंग से प्रस्तुत किया है।

इनके अलावा भी कृति में कई अन्य साहित्यिक और सांस्कृतिक मित्रों के संस्मरण शामिल हैं।

साहित्यिक विशेषताएँ एवं महत्त्व:

  • श्रद्धा और वस्तुनिष्ठता का समन्वय: संस्मरण लिखते समय शास्त्री जी पूरी तरह से श्रद्धावनत रहते हैं, लेकिन वे इन महापुरुषों को 'देवता' नहीं बनाते, बल्कि उनकी मानवीय कमजोरियों और यथार्थ को भी पूरी ईमानदारी से प्रस्तुत करते हैं।

  • तत्सम प्रधान एवं प्रांजल भाषा: शास्त्री जी की भाषा अत्यंत परिमार्जित, तत्सम शब्दावली से युक्त और प्रवाहमयी है, जो संस्मरणों को एक वैचारिक और दार्शनिक गहराई प्रदान करती है।

  • सांस्कृतिक चेतना: यह पुस्तक केवल व्यक्तियों का स्मरण नहीं है, बल्कि यह स्वाधीनता के बाद के हिंदी साहित्य के उस 'स्वर्ण युग' का एक सांस्कृतिक और साहित्यिक दस्तावेज़ भी है।
विष्णुकांत शास्त्री ने 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' की भूमिका (प्राक्कथन) में मुख्य रूप से संस्मरण लेखन की अपनी दृष्टि, शीर्षक की पृष्ठभूमि और अपने पूर्ववर्ती व समकालीन साहित्यकारों के प्रति गहरी कृतज्ञता को स्पष्ट किया है। इसकी भूमिका की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

  • शीर्षक का मूल स्रोत: भूमिका में लेखक ने सबसे पहले यह स्पष्ट किया है कि इस कृति का शीर्षक प्रख्यात कवि गिरिजाकुमार माथुर की कविता की एक पंक्ति से लिया गया है। शास्त्री जी ने बताया है कि उनके जीवन में आए महान साहित्यकार और गुरु 'चंदन के वन' के समान हैं, और उनकी स्मृतियाँ (सुधियाँ) आज भी उनके मन को चंदन की तरह सुवासित और प्रेरित करती हैं।

  • स्मृति का महत्त्व और संबल: शास्त्री जी ने भूमिका में 'स्मृति' (यादों) को एक मूल्यवान आध्यात्मिक और मानसिक धरोहर माना है। उन्होंने लिखा है कि जीवन के संघर्षों और वर्तमान की विसंगतियों के बीच, जब मन निराश होता है, तब इन महान विभूतियों के साथ बिताए गए पलों की यादें उन्हें एक आंतरिक ऊर्जा और संबल प्रदान करती हैं।

  • श्रद्धा और यथार्थ का संतुलन (वस्तुनिष्ठता): लेखक ने स्वीकार किया है कि जिन साहित्यकारों (जैसे आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, अज्ञेय, दिनकर, महादेवी वर्मा) पर उन्होंने लिखा है, उनके प्रति उनके मन में अपार श्रद्धा है। परंतु भूमिका में वे यह स्पष्ट करते हैं कि इस श्रद्धा ने उन्हें 'अंधभक्त' नहीं बनाया है। उन्होंने उनके व्यक्तित्व का यथार्थपरक, तटस्थ और मानवीय मूल्यांकन करने का प्रयास किया है, जिसमें महापुरुषों की सहज मानवीय कमज़ोरियाँ भी शामिल हैं।

  • सांस्कृतिक ऋण-स्वीकार: शास्त्री जी इस पुस्तक को केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि अपने अग्रजों, गुरुओं और समकालीनों के प्रति एक 'विनम्र ऋण-स्वीकार' मानते हैं। भूमिका में वे कृतज्ञता प्रकट करते हैं कि उनके स्वयं के वैचारिक, साहित्यिक और चारित्रिक निर्माण में इन विभूतियों का कितना अमूल्य योगदान रहा है।

  • संस्मरण की प्रकृति: भूमिका में वे संस्मरण विधा की प्रकृति पर भी विचार करते हैं। उनके अनुसार, संस्मरण केवल अतीत का गुणगान या घटनाओं का ब्यौरा नहीं है, बल्कि यह अपने समय के श्रेष्ठतम बौद्धिक और सांस्कृतिक परिवेश को सहेजने का एक माध्यम है।

संक्षेप में, इस कृति की भूमिका एक ऐसे संवेदनशील रचनाकार का आत्म-वक्तव्य है जो अपने से बड़ों के प्रति असीम श्रद्धा रखता है और उनकी स्मृतियों को अपनी सबसे बड़ी पूँजी मानता है।
विष्णुकांत शास्त्री कृत 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' (1992) में जिन प्रमुख साहित्यिक और सांस्कृतिक विभूतियों (पात्रों) पर संस्मरण लिखे गए हैं, उनका विवरण इस प्रकार है:
संस्मरण का विषय (पात्र)व्यक्तित्व / साहित्य में पहचानकृति में वर्णित मुख्य पहलू / चित्रण
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदीशीर्षस्थ निबंधकार, आलोचक, उपन्यासकार और विद्वानइनका प्रकांड पांडित्य, असीम उदारता, सहज मानवीयता, फक्कड़पन और लेखक के प्रति उनका गहरा वात्सल्य भाव।
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'प्रयोगवाद और नई कविता के शलाका पुरुषउनके व्यक्तित्व का कठोर अनुशासन, अंतर्मुखी स्वभाव, बाह्य गंभीरता और भीतर छिपी गहरी संवेदनशीलता।
महादेवी वर्माछायावाद की प्रमुख स्तंभ, कवयित्री एवं गद्यकारउनका विशाल और उदार हृदय, भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी निष्ठा, करुणा और नवोदित रचनाकारों को प्रश्रय देने की प्रवृत्ति।
रामधारी सिंह 'दिनकर'राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा के ओजस्वी कविउनका ओजस्वी व प्रभावशाली व्यक्तित्व, प्रखर राष्ट्रीय चेतना, स्पष्टवादिता और मित्रों के प्रति उनका अगाध स्नेह।
धर्मवीर भारतीप्रसिद्ध कवि, उपन्यासकार एवं 'धर्मयुग' के संपादकउनके गहरे रचनात्मक सरोकार, वैचारिक उद्वेलन और शास्त्री जी के साथ उनके प्रगाढ़ आत्मीय और मैत्रीपूर्ण संबंध।
परशुराम चतुर्वेदीसंत साहित्य और भक्तिकाल के मूर्धन्य विद्वान व शोधकर्ताउनका शांत, सात्विक और आडंबरहीन जीवन, ज्ञान की गहराई और एक निस्पृह कर्मयोगी जैसा व्यक्तित्व।
सुमित्रानंदन पंतप्रकृति के सुकुमार कवि (छायावाद के प्रमुख स्तंभ)उनका कोमल, सौंदर्यप्रेमी व्यक्तित्व, भाषा की लालित्यपूर्ण समझ और उनकी दार्शनिक काव्य-दृष्टि का प्रभाव।
गिरिजाकुमार माथुरतार सप्तक के प्रमुख कवि और प्रतिष्ठित साहित्यकारउनका आत्मीय व्यवहार और काव्यात्मक संवेदना (इन्हीं की प्रसिद्ध काव्य पंक्ति "सुधियाँ उस चंदन के वन की" पर इस पुस्तक का शीर्षक आधारित है)।
विष्णुकांत शास्त्री जी का जीवन एक विस्तृत साहित्यिक और सांस्कृतिक परिवेश (विशेषकर कलकत्ता विश्वविद्यालय के अकादमिक जगत) से जुड़ा रहा, इसलिए इस ग्रंथ में कुछ अन्य समकालीन विद्वानों और आत्मीय जनों का भी मार्मिक स्मरण किया गया है। बचे हुए अन्य उल्लेखनीय पात्रों (विभूतियों) का विवरण इस प्रकार है:

संस्मरण का विषय (पात्र)साहित्य/समाज में पहचानकृति में वर्णित मुख्य पहलू / चित्रण
विद्यानिवास मिश्रमूर्धन्य ललित निबंधकार और प्रगाढ़ मित्रशास्त्री जी के इनके साथ गहरे पारिवारिक और वैचारिक संबंध थे। कृति में इनके साथ बिताए गए साहित्यिक क्षणों, इनके संस्कृत-प्रेम और आत्मीय वार्ताओं का सजीव चित्रण है।
भवानी प्रसाद मिश्रसादगी और सहजता के अप्रतिम कविइनका फक्कड़पन, गांधीवादी जीवन-दृष्टि, सरलता और शास्त्री जी के साथ उनके आत्मीय पत्राचार व मुलाकातों का वर्णन।
कन्हैयालाल सेठियाराजस्थानी व हिंदी के प्रसिद्ध कविकलकत्ता प्रवास के दौरान शास्त्री जी के निकट सहयोगी। सेठिया जी की रचनाधर्मिता और उनके साथ हुए गहरे वैचारिक विमर्श का उल्लेख।
शिवमंगल सिंह 'सुमन'प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख कविसुमन जी की उदारता, उनके विराट व्यक्तित्व और उनकी कविताओं की तरह ही उनके जीवन की उर्जस्विता का स्मरण।
कलकत्ता के अन्य अकादमिक साथीकलकत्ता विश्वविद्यालय के प्राध्यापक व मित्रशास्त्री जी ने लंबे समय तक कलकत्ता में अध्यापन किया। इस कृति में वहाँ के कुछ स्थानीय विद्वानों और बंगाली साहित्यकारों के साथ उनके आत्मीय संबंधों की झलक भी मिलती है, जिन्होंने उनके 'चंदन के वन' (स्मृतियों) को समृद्ध किया।
 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' (1992) में विष्णुकांत शास्त्री जी ने अपने समकालीन और पूर्ववर्ती साहित्यकारों के व्यक्तित्व का बड़ा ही सूक्ष्म और मार्मिक विश्लेषण किया है।  (इकाई-10)  UPESSC, UPHESC परीक्षाओं के दृष्टिकोण से इस संस्मरण की सबसे महत्त्वपूर्ण और प्रतिनिधि पंक्तियाँ (कथन) इस प्रकार हैं:

1. भूमिका और स्मृति के संदर्भ में (स्वयं लेखक के विचार)

  • "स्मृतियाँ जीवन की रिक्तता को भरती हैं। मेरे लिए मेरे इन अग्रजों और गुरुओं की स्मृतियाँ उस चंदन वन के समान हैं, जिसकी सुवास मेरे मन को कभी निराश और एकाकी नहीं होने देती।"

  • "मैंने इन महापुरुषों को देवता बनाकर नहीं, बल्कि उनकी मानवीय दुर्बलताओं और उनकी महानताओं के यथार्थ रूप में देखा है।"

2. आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के संदर्भ में

  • "उनका प्रकांड पांडित्य कभी उनके सहज मनुष्य को नहीं ढंक पाया। वे ज्ञान के हिमालय थे, लेकिन उनके भीतर का एक फक्कड़ और भावुक मनुष्य हमेशा जीवित रहा।"

  • "वे केवल अतीत के व्याख्याता नहीं थे, बल्कि भारतीय संस्कृति की निरंतर बहने वाली जीवंत धारा थे। उनके सान्निध्य में बैठना एक वटवृक्ष की छाँव में बैठने जैसा था।"

3. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' के संदर्भ में

  • "अज्ञेय जी का मौन उनके शब्दों से कहीं अधिक अर्थवान और मुखर था।"

  • "बाहर से वे जितने कठोर और अनुशासित दिखते थे, उनका वह अनुशासन उनके भीतर की गहरी करुणा और संवेदनशीलता का केवल एक रक्षा-कवच मात्र था।"

  • "वे जितने अंतर्मुखी थे, उनका रचनात्मक और वैचारिक संसार उतना ही विराट और विस्तृत था।"

4. महादेवी वर्मा के संदर्भ में

  • "महादेवी जी की वेदना केवल उनके काव्य की विषयवस्तु नहीं थी; वह उनकी संपूर्ण जीवन-दृष्टि थी।"

  • "उनका हृदय इतना विशाल था कि वह नवोदित रचनाकारों के लिए एक सुरक्षित आश्रय और ममता का केंद्र बन गया था। वे साक्षात् करुणा की मूर्ति थीं।"

5. रामधारी सिंह 'दिनकर' के संदर्भ में

  • "दिनकर केवल शब्दों के शिल्पी नहीं थे, वे अपने युग के चारण थे। उनके कंठ में जो ओज और विद्रोह था, वही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी सच्चाई थी।"

  • "मित्रों के प्रति उनका प्रेम और उनकी भावुकता यह सिद्ध करती थी कि आग उगलने वाले कवि के भीतर भी एक बहुत कोमल हृदय धड़कता है।"

6. परशुराम चतुर्वेदी के संदर्भ में

  • "उनका जीवन सादगी, ज्ञान और निस्पृहता का ऐसा विरल उदाहरण था, जिसे देखकर सहज ही लगता था कि जैसे मध्यकाल का कोई सच्चा संत-साधक हमारे बीच आ गया हो।"

7. भवानी प्रसाद मिश्र के संदर्भ में

  • "उनकी कविता की तरह ही उनका जीवन भी जटिलताओं से मुक्त, एकदम पारदर्शी और गांधीवादी सादगी से भरा हुआ था।"

(नोट: परीक्षाओं में अक्सर ये पंक्तियाँ देकर पूछा जाता है कि "विष्णुकांत शास्त्री ने यह कथन किस साहित्यकार के संदर्भ में कहा है?")
'सुधियाँ उस चंदन के वन की' (विष्णुकांत शास्त्री) पर आधारित 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' के रचयिता कौन हैं?
    (A) विद्यानिवास मिश्र
    (B) कुबेरनाथ राय
    (C) विष्णुकांत शास्त्री
    (D) नामवर सिंह

  2. 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' किस गद्य विधा की रचना है?
    (A) आत्मकथा
    (B) जीवनी
    (C) रेखाचित्र
    (D) संस्मरण

  3. इस संस्मरण कृति का प्रथम प्रकाशन वर्ष क्या है?
    (A) 1985
    (B) 1992
    (C) 1998
    (D) 2001

  4. इस पुस्तक का शीर्षक किस कवि की प्रसिद्ध कविता की पंक्ति से लिया गया है?
    (A) भवानी प्रसाद मिश्र
    (B) सुमित्रानंदन पंत
    (C) गिरिजाकुमार माथुर
    (D) धर्मवीर भारती

  5. 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' में 'चंदन का वन' किसका प्रतीक है?
    (A) हिमालय के प्राकृतिक सौंदर्य का
    (B) महान साहित्यकारों व गुरुओं के सान्निध्य का
    (C) कलकत्ता के सांस्कृतिक परिवेश का
    (D) बचपन की स्मृतियों का

  6. इनमें से किस साहित्यकार का संस्मरण 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' में शामिल नहीं है?
    (A) हजारीप्रसाद द्विवेदी
    (B) अज्ञेय
    (C) महादेवी वर्मा
    (D) मुंशी प्रेमचंद

  7. विष्णुकांत शास्त्री ने अपनी इस कृति की भूमिका में संस्मरण लेखन का मुख्य उद्देश्य क्या बताया है?
    (A) अपनी विद्वता का प्रदर्शन
    (B) समकालीन साहित्यकारों की आलोचना
    (C) अपने अग्रजों व गुरुओं के प्रति विनम्र ऋण-स्वीकार
    (D) आत्मकथा लिखना

  8. "मैंने इन महापुरुषों को देवता बनाकर नहीं, बल्कि उनकी मानवीय दुर्बलताओं... के यथार्थ रूप में देखा है।" यह कथन किसका है?
    (A) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
    (B) विष्णुकांत शास्त्री
    (C) दिनकर
    (D) अज्ञेय

  9. आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के व्यक्तित्व के किस पहलू को शास्त्री जी ने सबसे अधिक उभारा है?
    (A) केवल उनका कड़ा अनुशासन
    (B) उनका अंतर्मुखी स्वभाव
    (C) उनका प्रकांड पांडित्य और फक्कड़पन
    (D) उनकी राजनीतिक चेतना

  10. "उनका प्रकांड पांडित्य कभी उनके सहज मनुष्य को नहीं ढंक पाया।" यह पंक्ति किसके संदर्भ में कही गई है?
    (A) परशुराम चतुर्वेदी
    (B) विद्यानिवास मिश्र
    (C) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
    (D) दिनकर

  11. किस साहित्यकार को शास्त्री जी ने 'भारतीय संस्कृति की निरंतर बहने वाली जीवंत धारा' कहा है?
    (A) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
    (B) सुमित्रानंदन पंत
    (C) रामविलास शर्मा
    (D) अज्ञेय

  12. अज्ञेय के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता शास्त्री जी को सर्वाधिक प्रभावित करती थी?
    (A) उनका फक्कड़पन
    (B) उनका बाह्य अनुशासन और मौन
    (C) उनका अत्यधिक बोलना
    (D) उनकी हास्य वृत्ति

  13. "उनका वह अनुशासन उनके भीतर की गहरी करुणा और संवेदनशीलता का केवल एक रक्षा-कवच मात्र था।" यह किसके लिए कहा गया है?
    (A) महादेवी वर्मा
    (B) दिनकर
    (C) अज्ञेय
    (D) भवानी प्रसाद मिश्र

  14. किसके 'मौन' को शब्दों से अधिक अर्थवान और मुखर बताया गया है?
    (A) अज्ञेय
    (B) हजारीप्रसाद द्विवेदी
    (C) धर्मवीर भारती
    (D) परशुराम चतुर्वेदी

  15. महादेवी वर्मा के संस्मरण में उनके किस भाव की सर्वाधिक चर्चा हुई है?
    (A) विद्रोह
    (B) करुणा और ममता
    (C) श्रृंगारिकता
    (D) वैराग्य

  16. "उनकी वेदना केवल उनके काव्य की विषयवस्तु नहीं थी; वह उनकी संपूर्ण जीवन-दृष्टि थी।" यह कथन किसके लिए है?
    (A) सुभद्रा कुमारी चौहान
    (B) मीराबाई
    (C) महादेवी वर्मा
    (D) शिवानी

  17. शास्त्री जी ने नए और नवोदित रचनाकारों के लिए 'सुरक्षित आश्रय' किसे माना है?
    (A) दिनकर
    (B) महादेवी वर्मा
    (C) अज्ञेय
    (D) पंत

  18. 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' में दिनकर को किस रूप में याद किया गया है?
    (A) छायावादी सौंदर्य के कवि
    (B) प्रयोगवादी कवि
    (C) युग के चारण और ओजस्वी कवि
    (D) हास्य-व्यंग्य के कवि

  19. "वे केवल शब्दों के शिल्पी नहीं थे, वे अपने युग के चारण थे।" यह पंक्ति किस कवि के लिए है?
    (A) दिनकर
    (B) भवानी प्रसाद मिश्र
    (C) गिरिजाकुमार माथुर
    (D) धर्मवीर भारती

  20. आग उगलने वाले कवि के भीतर का 'कोमल हृदय और भावुकता' शास्त्री जी ने किस कवि में देखी?
    (A) अज्ञेय
    (B) शिवमंगल सिंह 'सुमन'
    (C) दिनकर
    (D) सुमित्रानंदन पंत

  21. धर्मवीर भारती के साथ शास्त्री जी के कैसे संबंध वर्णित हैं?
    (A) कटु और आलोचक वाले
    (B) प्रगाढ़ आत्मीय और मैत्रीपूर्ण
    (C) पूर्णतः अपरिचित
    (D) केवल व्यावसायिक

  22. 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' में संत-साहित्य के किस मूर्धन्य शोधकर्ता का संस्मरण शामिल है?
    (A) रामचंद्र शुक्ल
    (B) पीतांबर दत्त बड़थ्वाल
    (C) परशुराम चतुर्वेदी
    (D) माताप्रसाद गुप्त

  23. परशुराम चतुर्वेदी के जीवन को शास्त्री जी ने किसके समान बताया है?
    (A) आधुनिक राजनेता
    (B) मध्यकाल के किसी सच्चे संत-साधक
    (C) विदेशी दार्शनिक
    (D) घुमक्कड़ यात्री

  24. भवानी प्रसाद मिश्र के जीवन को शास्त्री जी ने कैसा बताया है?
    (A) गांधीवादी सादगी और पारदर्शी
    (B) रहस्यमयी
    (C) कूटनीतिक
    (D) विलासितापूर्ण

  25. "उनकी कविता की तरह ही उनका जीवन भी जटिलताओं से मुक्त... था।" यह किसके लिए प्रयुक्त है?
    (A) अज्ञेय
    (B) भवानी प्रसाद मिश्र
    (C) महादेवी वर्मा
    (D) दिनकर

  26. इनमें से किस ललित निबंधकार मित्र का आत्मीय स्मरण इस कृति में किया गया है?
    (A) कुबेरनाथ राय
    (B) विद्यानिवास मिश्र
    (C) विवेकी राय
    (D) डॉ. सम्पूर्णानंद

  27. सुमित्रानंदन पंत को विष्णुकांत शास्त्री ने किस रूप में प्रस्तुत किया है?
    (A) यथार्थवादी और कठोर
    (B) सौंदर्यप्रेमी और दार्शनिक
    (C) मार्क्सवादी विचारक
    (D) विद्रोही कवि

  28. "स्मृतियाँ जीवन की रिक्तता को भरती हैं।" यह विचार कृति के किस भाग में उल्लिखित है?
    (A) भूमिका (प्राक्कथन)
    (B) अज्ञेय के संस्मरण में
    (C) उपसंहार में
    (D) दिनकर के संस्मरण में

  29. विष्णुकांत शास्त्री का अधिकांश अकादमिक और प्राध्यापकीय जीवन किस विश्वविद्यालय से जुड़ा रहा, जिसकी झलक संस्मरणों में मिलती है?
    (A) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
    (B) दिल्ली विश्वविद्यालय
    (C) कलकत्ता विश्वविद्यालय
    (D) इलाहाबाद विश्वविद्यालय

  30. 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' में राजस्थान के किस प्रसिद्ध कवि का उल्लेख है, जो शास्त्री जी के मित्र थे?
    (A) सूर्यमल्ल मिश्रण
    (B) कन्हैयालाल सेठिया
    (C) विजयदान देथा
    (D) चंद्रप्रकाश देवल

  31. प्रगतिशील धारा के किस कवि की 'उदारता और उर्जस्विता' का उल्लेख इस संस्मरण में है?
    (A) नागार्जुन
    (B) त्रिलोचन
    (C) शिवमंगल सिंह 'सुमन'
    (D) केदारनाथ अग्रवाल

  32. हजारीप्रसाद द्विवेदी जी के सान्निध्य को लेखक ने किसके समान बताया है?
    (A) तपती धूप के समान
    (B) वटवृक्ष की सुखद छाँव के समान
    (C) बहती नदी के समान
    (D) हिमालय के शिखर के समान

  33. 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' संस्मरण UGC NET हिंदी के किस इकाई (Unit) का भाग है?
    (A) इकाई 6 (उपन्यास)
    (B) इकाई 7 (कहानी)
    (C) इकाई 9 (निबंध)
    (D) इकाई 10 (अन्य गद्य विधाएँ)

  34. अज्ञेय का स्वभाव बाहर से कैसा प्रतीत होता था?
    (A) बहुत चंचल
    (B) फक्कड़ और लापरवाह
    (C) कठोर और अनुशासित
    (D) भावुक और क्रोधी

  35. "वे जितने अंतर्मुखी थे, उनका रचनात्मक और वैचारिक संसार उतना ही विराट था।" यह पंक्ति किसके लिए है?
    (A) अज्ञेय
    (B) हजारीप्रसाद द्विवेदी
    (C) परशुराम चतुर्वेदी
    (D) भवानी प्रसाद मिश्र

  36. दिनकर की कौन सी चेतना लेखक को सर्वाधिक प्रभावित करती थी?
    (A) रहस्यवादी चेतना
    (B) प्रखर राष्ट्रीय चेतना
    (C) आंचलिक चेतना
    (D) प्रयोगवादी चेतना

  37. विष्णुकांत शास्त्री ने अपने संस्मरणों में मुख्य रूप से किस भाषा-शैली का प्रयोग किया है?
    (A) ठेठ ग्रामीण अवधी
    (B) तत्सम प्रधान प्रांजल और साहित्यिक हिंदी
    (C) उर्दू मिश्रित हिंदुस्तानी
    (D) अंग्रेजी मिश्रित हिंदी

  38. परशुराम चतुर्वेदी की किस विशेषता का लेखक ने सर्वाधिक आदर किया है?
    (A) उनकी वाक्पटुता
    (B) उनकी राजनीतिक पहुँच
    (C) उनकी निस्पृहता और आडंबरहीनता
    (D) उनका अर्थ-प्रेम

  39. किस साहित्यकार की 'रचनात्मक बेचैनी' (Creative Restlessness) का वर्णन इस कृति में है?
    (A) महादेवी वर्मा
    (B) हजारीप्रसाद द्विवेदी
    (C) धर्मवीर भारती
    (D) विद्यानिवास मिश्र

  40. 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' कविता के मूल रचयिता (गिरिजाकुमार माथुर) किस सप्तक के कवि हैं?
    (A) तार सप्तक
    (B) दूसरा सप्तक
    (C) तीसरा सप्तक
    (D) चौथा सप्तक

  41. शास्त्री जी ने किनके व्यक्तित्व को 'साक्षात् करुणा की मूर्ति' कहा है?
    (A) सुभद्रा कुमारी चौहान
    (B) महादेवी वर्मा
    (C) शिवानी
    (D) मन्नू भंडारी

  42. इनमें से कौन सा गुण आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के संस्मरण से संबंधित नहीं है?
    (A) प्रकांड पांडित्य
    (B) असीम उदारता
    (C) कठोर अंतर्मुखी स्वभाव
    (D) सहज मानवीयता

  43. यह कृति हिंदी साहित्य के किस कालखंड का एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक दस्तावेज़ मानी जाती है?
    (A) भारतेंदु युग
    (B) द्विवेदी युग
    (C) स्वाधीनता के बाद का युग (स्वतंत्र्योत्तर काल)
    (D) भक्तिकाल

  44. दिनकर के व्यक्तित्व का कौन सा विरोधाभास लेखक ने रेखांकित किया है?
    (A) वे अमीर थे पर गरीब दिखते थे
    (B) वे बाहर से ओजस्वी और विद्रोही थे, पर भीतर से अत्यंत भावुक मित्र थे
    (C) वे ज्ञानी थे पर मौन रहते थे
    (D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

  45. शास्त्री जी ने अपनी स्मृतियों को क्या माना है?
    (A) दुख का कारण
    (B) समय की बर्बादी
    (C) आध्यात्मिक और मानसिक धरोहर
    (D) केवल कल्पना

  46. 'चंदन' शब्द इस कृति में क्या अभिव्यक्त करता है?
    (A) शीतलता और पावन सुवास (प्रेरक स्मृतियाँ)
    (B) लकड़ी का व्यापार
    (C) दक्षिण भारत की यात्रा
    (D) जंगल का सौंदर्य

  47. विष्णुकांत शास्त्री मूलतः हिंदी साहित्य में किस रूप में प्रतिष्ठित हैं?
    (A) उपन्यासकार
    (B) आलोचक और निबंधकार
    (C) नाटककार
    (D) कहानीकार

  48. कृति में वर्णित कलकत्ता विश्वविद्यालय के परिवेश में शास्त्री जी का साथ किनसे था?
    (A) स्थानीय बंगाली साहित्यकारों और हिंदी विद्वानों से
    (B) केवल राजनेताओं से
    (C) केवल विदेशी छात्रों से
    (D) उपर्युक्त सभी से

  49. 'सुधियाँ उस चंदन के वन की' में लेखक का दृष्टिकोण अपने अग्रजों के प्रति कैसा रहा है?
    (A) आलोचक का
    (B) निंदक का
    (C) श्रद्धानत किंतु वस्तुनिष्ठ
    (D) पूर्णतः अंधभक्त

  50. इनमें से कौन सा संस्मरण विष्णुकांत शास्त्री का है?
    (A) पथ के साथी
    (B) अतीत के चलचित्र
    (C) सुधियाँ उस चंदन के वन की
    (D) स्मृति की रेखाएं

उत्तर तालिका (Answer Key)

  1. (C) विष्णुकांत शास्त्री

  2. (D) संस्मरण

  3. (B) 1992

  4. (C) गिरिजाकुमार माथुर

  5. (B) महान साहित्यकारों व गुरुओं के सान्निध्य का

  6. (D) मुंशी प्रेमचंद

  7. (C) अपने अग्रजों व गुरुओं के प्रति विनम्र ऋण-स्वीकार

  8. (B) विष्णुकांत शास्त्री

  9. (C) उनका प्रकांड पांडित्य और फक्कड़पन

  10. (C) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

  11. (A) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

  12. (B) उनका बाह्य अनुशासन और मौन

  13. (C) अज्ञेय

  14. (A) अज्ञेय

  15. (B) करुणा और ममता

  16. (C) महादेवी वर्मा

  17. (B) महादेवी वर्मा

  18. (C) युग के चारण और ओजस्वी कवि

  19. (A) दिनकर

  20. (C) दिनकर

  21. (B) प्रगाढ़ आत्मीय और मैत्रीपूर्ण

  22. (C) परशुराम चतुर्वेदी

  23. (B) मध्यकाल के किसी सच्चे संत-साधक

  24. (A) गांधीवादी सादगी और पारदर्शी

  25. (B) भवानी प्रसाद मिश्र

  26. (B) विद्यानिवास मिश्र

  27. (B) सौंदर्यप्रेमी और दार्शनिक

  28. (A) भूमिका (प्राक्कथन)

  29. (C) कलकत्ता विश्वविद्यालय

  30. (B) कन्हैयालाल सेठिया

  31. (C) शिवमंगल सिंह 'सुमन'

  32. (B) वटवृक्ष की सुखद छाँव के समान

  33. (D) इकाई 10 (अन्य गद्य विधाएँ)

  34. (C) कठोर और अनुशासित

  35. (A) अज्ञेय

  36. (B) प्रखर राष्ट्रीय चेतना

  37. (B) तत्सम प्रधान प्रांजल और साहित्यिक हिंदी

  38. (C) उनकी निस्पृहता और आडंबरहीनता

  39. (C) धर्मवीर भारती

  40. (A) तार सप्तक

  41. (B) महादेवी वर्मा

  42. (C) कठोर अंतर्मुखी स्वभाव

  43. (C) स्वाधीनता के बाद का युग (स्वतंत्र्योत्तर काल)

  44. (B) वे बाहर से ओजस्वी और विद्रोही थे, पर भीतर से अत्यंत भावुक मित्र थे

  45. (C) आध्यात्मिक और मानसिक धरोहर

  46. (A) शीतलता और पावन सुवास (प्रेरक स्मृतियाँ)

  47. (B) आलोचक और निबंधकार

  48. (A) स्थानीय बंगाली साहित्यकारों और हिंदी विद्वानों से

  49. (C) श्रद्धानत किंतु वस्तुनिष्ठ

  50. (C) सुधियाँ उस चंदन के वन की

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सुधियाँ उस चंदन के वन की (संस्मरण) विष्णुकांत शास्त्री, सारांश, पात्र और 50+ MCQs इकाई-10: UPESSC UPHESC

  सुधियाँ उस चंदन के वन की सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार और विद्वान विष्णुकांत शास्त्री द्वारा रचित हिंदी साहित्य का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण स...