तमस' से संबंधित महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विचारों/कथनों का संकलन

 भीष्म साहनी द्वारा रचित 'तमस' विभाजन की त्रासदी, सांप्रदायिकता और मानवीय संवेदनाओं पर लिखा गया हिंदी साहित्य का एक कालजयी उपन्यास है। इसमें निहित कथन केवल संवाद नहीं, बल्कि कड़वी सच्चाई और समाज का आईना हैं।

यहाँ 'तमस' से संबंधित महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विचारों/कथनों का संकलन दिया गया है:


विभाजन और सांप्रदायिकता पर प्रहार

  1. "सांप्रदायिकता एक ऐसी आग है, जिसमें जलने वाला हाथ बाद में पहचानता है कि वह उसी का था।"

  2. "जब धर्म राजनीति का हथियार बन जाता है, तो सबसे पहले मानवता की बलि चढ़ती है।"

  3. "नफरत का बीज बोने वाले हाथ अक्सर पर्दे के पीछे छिपे रहते हैं।"

  4. "शहर में तनाव इतना था कि एक सूखी पत्ती गिरने की आवाज़ भी धमाके जैसी लगती थी।"

  5. "मजहब के नाम पर लड़ने वाले अक्सर यह भूल जाते हैं कि भूख और गरीबी का कोई धर्म नहीं होता।"

  6. "दंगों में मरने वाला केवल एक शरीर नहीं होता, एक पूरा परिवार और उसकी उम्मीदें होती हैं।"

  7. "नफरत की राजनीति हमेशा मासूमों के खून से सींची जाती है।"

  8. "भीड़ की कोई आँख नहीं होती, वह केवल आदेश और उन्माद जानती है।"

  9. "इंसानियत तब मर जाती है जब आदमी पड़ोसी के घर की आग देखकर अपनी रोटी सेंकने की सोचता है।"

  10. "विभाजन केवल नक्शे पर लकीर नहीं थी, वह दिलों के बीच की खाई थी।"

सत्ता और राजनीति का असली चेहरा

  1. "हुकूमतें हमेशा इस फिराक में रहती हैं कि अवाम आपस में उलझी रहे।"

  2. "रिचर्ड जैसे अफसर जानते थे कि फूट डालकर राज करना सबसे आसान नुस्खा है।"

  3. "राजनीति की शतरंज पर आम आदमी केवल एक प्यादा है, जिसे जब चाहे कुर्बान किया जा सकता है।"

  4. "ऊपर बैठे लोग शांति की अपील करते हैं, जबकि नीचे उनके प्यादे आग लगा रहे होते हैं।"

  5. "जब सत्ता खामोश होती है, तो समझो वह तबाही का इंतज़ार कर रही है।"

मानवीय संवेदना और लाचारी

  1. "नत्थू का डर पूरी व्यवस्था के खोखलेपन का प्रतीक है।"

  2. "गरीब के लिए पाप और पुण्य की परिभाषा रोटी के टुकड़े से शुरू होती है।"

  3. "अज्ञानता अक्सर अपराध की पहली सीढ़ी होती है।"

  4. "डर आदमी को हैवान बना देता है, या फिर बिल्कुल लाचार।"

  5. "तमस का अँधेरा केवल बाहर नहीं, इंसानी ज़मीर के अंदर भी था।"

  6. "अपराधबोध इंसान को अंदर ही अंदर दीमक की तरह चाट जाता है।"

  7. "बंटवारे ने लोगों को शरणार्थी नहीं, अपनी ही जमीन पर अजनबी बना दिया।"

समाज और धार्मिक कट्टरता

  1. "नारे बाजी से खुदा या भगवान खुश नहीं होते, बल्कि शैतान जाग उठता है।"

  2. "धर्म जब नफरत का पर्याय बन जाए, तो वह अफीम से भी खतरनाक है।"

  3. "जुनून की कैफियत में इंसान अपनी जड़ों को ही काटने लगता है।"

  4. "मंदिर और मस्जिद को बचाने वाले अक्सर इंसान को बचाना भूल जाते हैं।"

  5. "अतीत की कड़वाहट जब वर्तमान पर हावी होती है, तो भविष्य राख हो जाता है।"


उपन्यास के कुछ सारगर्भित विचार

  1. "तमस' केवल एक उपन्यास नहीं, इतिहास की वह चेतावनी है जिसे हम बार-बार अनदेखा करते हैं।"

  2. "अँधेरा (तमस) अज्ञान का है, जिसे ज्ञान की रोशनी से ही मिटाया जा सकता है।"

  3. "इतिहास गवाह है कि मजहबी उन्माद ने कभी किसी का भला नहीं किया।"

  4. "शांति की सफेद फाख्ता अक्सर खून से लथपथ होकर गिरती है।"

  5. "एक सूअर की लाश पूरे शहर की सभ्यता को दफन करने के लिए काफी थी।"

  6. "अफवाहें वह बारूद हैं जो किसी भी शहर को पल भर में राख कर सकती हैं।"

  7. "मानवीय मूल्यों का पतन ही विभाजन की सबसे बड़ी त्रासदी थी।"

  8. "अमन की बातें केवल वही करते हैं जो युद्ध की विभीषिका से दूर होते हैं।"

लघु और तीखे कथन

  1. "लाशें कभी नहीं बोलतीं, लेकिन वे सबसे कड़वा सच कहती हैं।"

  2. "मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, लेकिन सियासत सिखा देती है।"

  3. "इंसान मर जाता है, इंसानियत नहीं मरनी चाहिए।"

  4. "जहाँ तर्क खत्म होता है, वहाँ हिंसा शुरू होती है।"

  5. "अपराधी कोई एक नहीं, वह पूरी व्यवस्था थी।"

  6. "भीड़ में व्यक्ति की अपनी सोच खत्म हो जाती है।"

  7. "बंटवारा जमीन का हुआ, रूह का नहीं।"

  8. "इतिहास को भूलने वाले लोग उसे दोहराने के लिए अभिशप्त होते हैं।"

  9. "मजहब के नाम पर खून बहाना बहादुरी नहीं, बुजदिली है।"

  10. "शांति केवल संघर्ष विराम नहीं, बल्कि दिलों का मिलन है।"

  11. "नफरत की फसल काटना बहुत महंगा सौदा है।"

  12. "तमस का अंत तभी होगा जब हम एक-दूसरे को इंसान समझेंगे।"

  13. "अवाम हमेशा अमन चाहती है, लेकिन नेता अपनी रोटियां सेंकते हैं।"

  14. "सभ्यता के लिबास के नीचे आज भी आदिम वहशीपन छिपा है।"

  15. "भीष्म साहनी का 'तमस' आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 1947 में था।"


 'तमस' उपन्यास की एक बड़ी विशेषता यह है कि भीष्म साहनी ने इसमें व्यक्तिगत संवादों से कहीं अधिक 'नैरेटिव' (कथावाचक के विचार) और 'भीड़ के मनोविज्ञान' का सहारा लिया है। यहाँ महत्वपूर्ण कथनों को उनके बोलने वाले पात्रों और संदर्भों के साथ वर्गीकृत किया गया है:


1. नत्थू (चमार) के कथन

नत्थू वह पात्र है जिससे अनजाने में पाप (सूअर मारना) कराया जाता है। उसके कथन अपराधबोध और बेबसी से भरे हैं।

  • "मैंने तो उसे जानवर समझकर मारा था, मुझे क्या पता था कि यह पूरे शहर को मार डालेगा।" (जब दंगा भड़कता है)

  • "साहब, गरीब की रोटियाँ उसके लहू से सनी होती हैं।" (मुराद अली के प्रति अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए)

2. रिचर्ड (डिप्टी कमिश्नर) के कथन

रिचर्ड ब्रिटिश हुकूमत की 'फूट डालो और राज करो' की नीति का चेहरा है।

  • "लीज़ा, जब ये आपस में लड़ते हैं, तभी तो हम सुरक्षित रहते हैं।" (अपनी पत्नी लीज़ा से शहर के हालातों पर बात करते हुए)

  • "इतिहास को हम नहीं बनाते, इतिहास हमें बनाता है। हमें बस घटनाओं को सही दिशा देनी होती है।"

3. लीज़ा (रिचर्ड की पत्नी) के कथन

लीज़ा एक बाहरी व्यक्ति की नज़र से इस देश और यहाँ की हिंसा को देखती है।

  • "रिचर्ड, तुम इस शहर को जलता देख रहे हो और तुम्हें फर्क नहीं पड़ता? क्या तुम इंसान हो या पत्थर?"

  • "यहाँ की हवा में भी नफरत की गंध आती है।"

4. मुराद अली के कथन

वह दंगे भड़काने वाला मास्टरमाइंड और अंग्रेजों का पिट्ठू है।

  • "शहर में शांति बहुत दिनों से है, थोड़ा शोर होना ज़रूरी है।" (नत्थू को काम सौंपते वक्त)

  • "धर्म का नाम लो, लोग खुद-ब-खुद पागल हो जाएंगे।"

5. हरनाम सिंह और बंतो (सिख दंपति) के कथन

यह जोड़ा मानवीय गरिमा और विभाजन की पीड़ा का प्रतीक है।

  • "बंतो, घर केवल ईंट-पत्थरों का नहीं होता, उसमें हमारी यादें और जड़ें होती हैं।" (घर छोड़ते समय)

  • "इंसानियत मर गई है क्या? क्या कोई भी दरवाजा हमारे लिए नहीं खुलेगा?"

6. अन्य पात्र और सामूहिक विचार (कथावाचक)

भीष्म साहनी ने कई गहरे कथन लेखक की टिप्पणी के रूप में लिखे हैं, जो समाज पर चोट करते हैं:

  • कथावाचक: "सांप्रदायिकता वह जहर है जो सबसे पहले उसी प्याले को तोड़ता है जिसमें वह रखा जाता है।"

  • कथावाचक: "हवा में जहर घोलने वाले अक्सर खुद महलों में रहते हैं, और मरने वाले झोपड़ियों के मासूम होते हैं।"

  • बख्शी जी (कांग्रेस कार्यकर्ता): "हमें अमन की बात करनी चाहिए, लेकिन लोग सुनने को तैयार नहीं हैं।"

  • जरनैल (पागल पात्र): "सब मरेंगे, कोई नहीं बचेगा! यह शैतान का नाच है!" (वह अक्सर कड़वी सच्चाइयाँ चिल्लाकर बोलता था)


विशेष नोट:

'तमस' के अधिकांश प्रसिद्ध उद्धरण (जैसे "नफरत का बीज बोने वाले...") वास्तव में भीष्म साहनी जी के 'नैरेटिव' (Narrative) का हिस्सा हैं। वे एक निष्पक्ष पर्यवेक्षक की तरह दंगों के मनोविज्ञान का विश्लेषण करते हुए इन बातों को कहते हैं।

 

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