हिंदी भाषा के डिजिटल विकास में यूनिकोड (Unicode) का प्रयोग एक क्रांतिकारी बदलाव रहा है। इसने हिंदी को 'टाइपराइटिंग' के सीमित दायरे से निकालकर वैश्विक डिजिटल मंच पर स्थापित कर दिया है।
यहाँ हिंदी के संदर्भ में यूनिकोड के प्रयोग और उसके महत्व का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:
1. यूनिकोड क्या है?
पुराने समय में हिंदी के लिए अलग-अलग फॉन्ट्स (जैसे KrutiDev या Chanakya) का प्रयोग होता था। अगर सामने वाले के कंप्यूटर में वह विशेष फॉन्ट नहीं होता था, तो शब्द कचरा (Garbage text) की तरह दिखते थे। यूनिकोड ने दुनिया की हर भाषा के हर अक्षर को एक यूनिक नंबर दे दिया, जिससे भाषा फॉन्ट की मोहताज नहीं रही।
2. हिंदी में इसके प्रमुख लाभ
यूनिकोड के आने से हिंदी के प्रयोग में निम्नलिखित सुधार हुए हैं:
सार्वभौमिकता (Universal Compatibility): अब आप जो हिंदी अपने लैपटॉप पर लिखते हैं, वही आपके दोस्त के फोन या किसी टैबलेट पर बिल्कुल वैसी ही दिखाई देती है।
सर्च इंजन में सुगमता: गूगल या अन्य सर्च इंजन पर अब आप हिंदी में खोज (Search) कर सकते हैं। यह केवल यूनिकोड के कारण संभव हो पाया है।
डेटा शेयरिंग: ईमेल, व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हिंदी का बढ़ता प्रयोग यूनिकोड की ही देन है।
सरकारी कामकाज: अब भारत सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (जैसे- eOffice) में केवल यूनिकोड आधारित हिंदी (Mangal फॉन्ट आदि) का ही प्रयोग अनिवार्य है।
3. प्रमुख इनपुट टूल्स (Input Methods)
यूनिकोड में हिंदी टाइप करने के लिए कई तरीके उपलब्ध हैं:
InScript (इन्स्क्रिप्ट): यह भारत सरकार द्वारा प्रमाणित स्टैंडर्ड कीबोर्ड लेआउट है।
Phonetic (फोनेटिक): इसमें आप अंग्रेजी अक्षरों में टाइप करते हैं और वह हिंदी में बदल जाता है (जैसे: 'Namaste' टाइप करने पर 'नमस्ते' बन जाना)। Google Hindi Input इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।
Remington (रेमिंगटन): जो लोग पुराने टाइपराइटर के अभ्यस्त हैं, उनके लिए यूनिकोड आधारित रेमिंगटन लेआउट भी उपलब्ध है।
4. तकनीकी स्वरूप
यूनिकोड में हिंदी मुख्य रूप से Devanagari (देवनागरी) ब्लॉक के अंतर्गत आती है।
निष्कर्ष
आज के समय में अगर हिंदी इंटरनेट पर जीवित और समृद्ध है, तो उसका पूरा श्रेय यूनिकोड को जाता है। इसने भाषा को फॉन्ट की बेड़ियों से आजाद कर उसे एक वैश्विक पहचान दी है।
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