UGC NET के पाठ्यक्रम की इकाई-10 (आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य विधाएँ) सबसे विविध इकाई है। इसमें संस्मरण, रेखाचित्र, आत्मकथा, जीवनी और यात्रा वृत्तांत जैसी विधाएँ शामिल हैं। यहाँ से लेखकों के जन्म स्थान, रचनाओं के पात्र और उनके प्रकाशन वर्ष के मिलान वाले प्रश्न बहुत आते हैं।
यहाँ पूरी सूची और महत्वपूर्ण विवरण दिया गया है:
इकाई-10: आत्मकथा, जीवनी एवं अन्य विधाएँ
| क्रम | रचना | लेखक | विधा | प्रकाशन वर्ष | विशेष तथ्य |
| 1 | माटी की मूरतें | रामवृक्ष बेनीपुरी | रेखाचित्र | 1946 | इसमें 12 रेखाचित्र हैं (जैसे: रज़िया, बलदेव, सरजू भैया) |
| 2 | ठकुरी बाबा | महादेवी वर्मा | रेखाचित्र/संस्मरण | 1943 | 'स्मृति की रेखाएं' संग्रह से संकलित |
| 3 | मुर्दहिया | तुलसीराम | आत्मकथा | 2010 | दलित आत्मकथा (आजमगढ़ के धरमपुर गाँव की कथा) |
| 4 | प्रेमचंद घर में | शिवरानी देवी | जीवनी | 1944 | पत्नी द्वारा लिखी गई प्रेमचंद की जीवनी |
| 5 | आवारा मसीहा | विष्णु प्रभाकर | जीवनी | 1974 | शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन पर आधारित |
| 6 | क्या भूलूँ क्या याद करूँ | हरिवंश राय बच्चन | आत्मकथा | 1969 | बच्चन जी की आत्मकथा का प्रथम भाग (कुल 4 भाग) |
| 7 | आपहुदरी | रमणिका गुप्ता | आत्मकथा | 2015 | एक स्त्री के संघर्ष और विद्रोह की कथा |
| 8 | भोलाराम का जीव | हरिशंकर परसाई | व्यंग्य | - | भ्रष्टाचार और नौकरशाही पर करारा प्रहार |
| 9 | जामुन का पेड़ | कृष्ण चंदर | व्यंग्य | - | प्रशासनिक लेटलतीफी पर व्यंग्य |
| 10 | संस्कृति के चार अध्याय | रामधारी सिंह दिनकर | भारतीय संस्कृति | 1956 | इसके लिए दिनकर को साहित्य अकादमी मिला |
| 11 | एक साहित्यिक की डायरी | मुक्तिबोध | डायरी | 1964 | वैचारिक और समीक्षात्मक डायरी |
| 12 | मेरी तिब्बत यात्रा | राहुल सांकृत्यायन | यात्रा वृत्तांत | 1937 | तिब्बत की सामाजिक-सांस्कृतिक यात्रा |
| 13 | अरे यायावर रहेगा याद | अज्ञेय | यात्रा वृत्तांत | 1953 | स्वदेश यात्रा (भारत के विभिन्न क्षेत्रों का वर्णन) |
| 14 | ऋणजल धनजल | फणीश्वरनाथ 'रेणु' | रिपोर्ताज | 1977 | बिहार के सूखे और बाढ़ का मार्मिक वर्णन |
प्रमुख पात्र और महत्वपूर्ण बिंदु (Exam Notes)
मुर्दहिया (तुलसीराम): इसमें मुर्दहिया (गाँव का श्मशान) को केंद्र बनाकर दलित समाज के अंधविश्वास और संघर्ष को दिखाया गया है। प्रमुख पात्र: तुलसीराम (स्वयं), मुन्नेसर, सुग्गी (दादी)।
आवारा मसीहा (विष्णु प्रभाकर): यह तीन पर्वों में विभाजित है— 1. दिशाहारा, 2. पाथेय, 3. दिशा की खोज।
क्या भूलूँ क्या याद करूँ: इसमें बच्चन जी के पूर्वजों, उनकी पहली पत्नी श्यामा और उनकी मृत्यु का मर्मस्पर्शी वर्णन है।
ठकुरी बाबा (महादेवी वर्मा): एक कल्पक और ग्रामीण कलाकार की कहानी जो स्वाभिमानी और संवेदनशील है।
अरे यायावर रहेगा याद (अज्ञेय): इसका पहला अध्याय 'परशुराम से तुर्खम' बहुत प्रसिद्ध है।
महत्वपूर्ण पंक्तियाँ और कथन
"भ्रष्टाचार की शुरुआत तो ऊपर से होती है, नीचे तो वह मजबूरी बन जाता है।" - भोलाराम का जीव।
"शरतचंद्र में एक अजीब आकर्षण था, वे दुखों के सौदागर नहीं, सुखों के खोज़ी थे।" - आवारा मसीहा।
"साहित्यिक डायरी वह नहीं है जिसमें तारीखवार घटनाओं का ब्यौरा हो, बल्कि वह है जहाँ विचारों की टकराहट हो।" - एक साहित्यिक की डायरी।
"सांस्कृतिक मेलजोल ही भारत की नियति है।" - संस्कृति के चार अध्याय (दिनकर)।
UGC NET के लिए 'प्रो-टिप' (इकाई-10):
राहुल सांकृत्यायन और अज्ञेय के यात्रा वृत्तांतों के 'अध्यायों' के नाम याद रखें।
दलित आत्मकथाओं (मुर्दहिया, आपहुदरी) के सामाजिक परिवेश को समझें।
आवारा मसीहा के तीनों भागों के नाम क्रम से रट लें।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें