हिंदी उपन्यास

हिंदी उपन्यास 

DEVKANT SINGH
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प्रश्न 1 -निम्नलिखित को क्रम से लगाओ ?
  1. महाकाल ,अमृत और विष ,मानस का हंस  ,खंजन नयन 
  2. अमृत और विष ,मानस का हंस,खंजन नयन ,महाकाल 
  3. अमृत और विष ,महाकाल ,खंजन नयन ,मानस का हंस 
  4. अमृत और विष ,खंजन नयन ,महाकाल ,मानस का हंस 
प्रश्न 2 -150 वर्ष पूर्व संक्रमणकालीन भारत की संस्कृति को जानने के लिए इससे बेहतर उपन्यास नहीं हो सकता किस उपन्यास के बारे में यह कथन है ?
  1. परीक्षा गुरु 
  2. गोदान 
  3. देवरानी  जेठानी की कहानी 
  4. मैला आँचल 
प्रश्न 3 -"नहीं चाहिए हमे ऐसी अलमारी। घर   का सारा आलतू -फालतू सामान मेरे लिए। अपने लिए कैसा बढ़िया कमरा ,कैसी बढ़िया अलमारी।"किस उपन्यास का कथन है ? 
  1. झूठा सच 
  2. मानस का हंस 
  3. आपका बंटी 
  4. बाणभट्ट की आत्मकथा 
प्रश्न 4 --निम्नलिखित को क्रम से लगाओ ?
  1. गोदान , शेखर एक जीवनी , झूठा सच ,मानस का हंस
  2. गोदान ,झूठा सच ,शेखाए एक जीवनी ,मानस का हंस 
  3. गोदान ,मानस  हंस ,झूठा सच ,शेखर रक जीवनी 
  4. शेखर एक जीवनी ,मानस का हंस,गोदान ,झूठा सच 
प्रश्न 5 'तमस' उपन्यास में कितने दिन की कथा है ?
  1. 25 
  2. 15 
  3. 35 
  4. 5 
प्रश्न6  -इनमें कौन से उपन्यास जीवनी परक उपन्यास है ?
  1. मानस का हंस 
  2. शेखर एक जीवनी 
  3. पहला गिरमिटिया 
  4. मैला आँचल 
  1. - 1 ,3 
  2. -1 ,3 ,4 
  3. -1 ,4 
  4. -1 ,,2 

प्रश्न 7 -यशपाल के उपन्यास 'झूठा सच' में दौलतराम आजाद किस राजनितिक  सदस्य था ?
  1. कांग्रेस 
  2. कम्युनिस्ट पार्टी 
  3. मुस्लिम लीग 
  4. जनसंघ 
प्रश्न 8 -निम्नलिखित में से क्या 'तमस' उपन्यास में सांप्रदायिक भावना निर्माण में सहायक नहीं है ?
  1. साम्प्रदायिक पूर्वाग्रह 
  2. विभिन्न सम्प्रदायों का एक स्थान पर वास 
  3. वर्गीय पूर्वाग्रह 
  4. अतीत की गौरव -गाथाएँ 
प्रश्न 9 -निम्नलिखित में किस उपन्यास में राम और काम का द्वन्द चित्रित  हुआ है ?
  1. अमृत और विष 
  2. खंजन नयन 
  3. मानस  का हंस 
  4. नाच्यो बहुत गोपाल 
प्रश्न 10 -मन्नू भण्डारी अपनी आत्मकथा में 'आपका बंटी' उपन्यास  विभिन्न समीक्षाओ में से किस पक्ष को मानती है ?
  1. खंडित बचपन को 
  2. बच्चे के पालन पोषण का आर्थिक पक्ष 
  3. बाल -मनोवैज्ञानिक पक्ष 
  4. मुख्य स्त्री पात्र -स्त्रीत्व 
प्रश्न 11 -अगर प्रेम खूंखार शेर है तो मैं  उससे दूर ही रहूंगी। मैंने तो उसे गाय ही समझ रखा था। मैं प्रेम को संदेह से ऊपर समझती हूँ। वह देह की वस्तु नहीं ,आत्मा की वस्तु है। संदेह का वहाँ जरा भी स्थान नहीं और हिंसा तो संदेह का  परिणाम है। वह सम्पूर्ण आत्मसमर्पण है। ये पंक्तियाँ गोदान उपन्यास में किस पात्र द्वारा कही गई है ?
  1. गोविंदी 
  2. सोना 
  3. सिलिया 
  4. मालती 
प्रश्न 12 -'सेवासदन' उपन्यास उर्दू में किस नाम से प्रकाशित  था ?
  1. चौगाने हस्ती 
  2. किशना 
  3. असरारे मआविद 
  4. बाजरे हुस्न 
प्रश्न 13 -निम्नलिखित को क्रम से लगाओ ?
  1. कर्मभूमि ,गबन ,निर्मला ,रंगभूमि 
  2. निर्मला ,गबन ,रंगभूमि ,कर्मभूमि 
  3. रंगभूमि ,निर्मला ,गबन ,कर्मभूमि 
  4. कर्मभूमि ,रंगभूमि , गबन ,निर्मला 
प्रश्न 14 -'बाणभट्ट की आत्मकथा ' उपन्यास किस समय की पृष्ठभूमि पर आधारित है ?
  1. औपनिवेशिक काल 
  2. छठी -सातवीं शताब्दी 
  3. पहली -दूसरी शताब्दी 
  4. बारहवीं -तेरहवी शताब्दी 
प्रश्न 15 -निम्नलिखित को क्रम से लगाओ ?
  1. झरोखे ,तमस ,वसंती ,कुंतो 
  2. तमस ,कुंतो ,वसंती ,झरोखे 
  3. तमस ,वसंती ,कुंतो ,झरोखे 
  4. तमस ,झरोखे ,वसंती ,कुंतो 
प्रश्न 16 -निम्नलिखित को क्रम से लगाओ ?
  1. यादों का पहाड़ ,आधा पुल ,कभी न छोड़े खेत ,घास गोदाम 
  2. आधा पुल ,घास गोदाम ,यादों का पहाड़ ,कभी न छोड़े खेत 
  3. घास गोदाम ,आधा पुल ,कभी न छोड़े खेत ,यादों का पहाड़ 
  4. कभी न छोड़े खेत ,घास गोदाम ,यादों का पहाड़ ,आधा पुल 
प्रश्न 17 -'यादों का पहाड़' किसका उपन्यास है ?
  1. कृष्णा सोबती 
  2. मन्नू भण्डारी 
  3. जगदीशचंद्र 
  4. काशीनाथ सिंह 
प्रश्न 18 -"भेद इतना ही है की उनमे सामाजिक ऊँचनीय का ऐसा भेद नहीं है। जहाँ भारत वर्ष के समाज में एक सहस्त्र स्तर है वहाँ  समाज में कठिनाई से दो तीन होंगे।" किस उपन्यास का कथन है ?
  1. धरती धन न अपना 
  2. बाणभट्ट की आत्मकथा 
  3. गोदान 
  4. झूठा सच 
प्रश्न 19 -'धरती धन न अपना' उपन्यास का दूसरा भाग किस नाम से प्रकाशित हुआ ?
  1. बीच की दीवार 
  2. नरकुण्ड में वास 
  3. लाट की वापसी 
  4. जमीन तो अपनी थी 
प्रश्न 20 -इनमें से कौन आंचलिक उपन्यास नहीं है ?
  1.  धरती धन न अपना 
  2. मैला आँचल 
  3. गोदान 
  4. मानस का हंस
  1. - 1 ,3 
  2. -1 ,3 ,4 
  3. -3  ,4 
  4. -1 ,,2 
प्रश्न 21 -कौन से उपन्यास पर आंचलिकता को लेकर विवाद है ?
  1. गोदान 
  2. मैला आँचल 
  3. राग दरबारी 
  4. धरती धन न अपना 
प्रश्न 22 -इनमें  से किस उपन्यास को हिंदी साहित्य का प्रथम आंचलिक उपन्यास माना जाता है ?
  1. धरती धन न  अपना 
  2. देहाती दुनिया 
  3. जिंदगीनामा 
  4. परती परिकथा 
प्रश्न 23 -गोपाल राय  ने हिंदी का प्रथम उपन्यास किसे माना है ?
  1. परीक्षा गुरु 
  2. देवरानी जेठानी  की कहानी
  3. रानी केतकी की कहानी  
  4. ठेठ हिंदी का  ठाठ 
प्रश्न 24 -देवरानी जेठानी की कहानी उपन्यास  प्रकाशन वर्ष ?
  1. 1870 
  2. 1877 
  3. 1882 
  4. 1890 
प्रश्न 25 -परीक्षा गुरु उपन्यास  प्रकाशन वर्ष ?
  1. 1870 
  2. 1877 
  3. 1882 
  4. 1890 
प्रश्न 26 -फणीश्वर नाथ रेणु का पहला उपन्यास कौन सा है ?
  1. परती परिकथा 
  2. मैला आँचल 
  3. उपसंहार 
  4. पहला गिरमिटिया 
प्रश्न 27 -'तमस' उपन्यास को कब साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला ?
  1. 1973 
  2. 1974 
  3. 1975 
  4. 1976 
प्रश्न 28 -'जिंदगीनामा' उपन्यास को कब साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला ?
  1. 1979 
  2. 1980 
  3. 1981 
  4. 1982 
प्रश्न 29 -'पहला गिरमिटिया' उपन्यास किसका है ?
  1. प्रेमचंद 
  2. जगदीशचंद्र 
  3. गिरिराज किशोर 
  4. रमेशचंद शाह 
प्रश्न 30 -आत्मपरक शैली में लिखा गया उपन्यास कौन से है ?
  1. शेखर एक जीवनी 
  2. गोदान 
  3. त्याग पत्र 
  4. काशी का अस्सी 
  1. - 1 ,3 
  2. -1 ,3 ,4 
  3. -3  ,4 
  4. -1 ,,2 
प्रश्न 31 -गोदान का गोबर किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है ?
  1. सामंतशाही को चुपचाप सहन करने वाले वर्ग का 
  2. रूढ़ि विरोधी नयी पीढ़ी के किसान -युवक का 
  3. रूढ़िवादी परम्परा को मानने वाले वर्ग का 
  4. समाज सेवा करने वाले वर्ग का 
प्रश्न 32 -गोदान का कौन सा पात्र प्रेमचंद के प्रगतिशील विचारो का वाहक माना जाता है ?
  1. होरी 
  2. मिस्टर खन्ना 
  3. प्रोफेसर मेहता 
  4. ओंकारनाथ 
प्रश्न 33 -हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित निम्नांकित कृतियों में से कौन सी कृति उपन्यास विधा से सम्बन्ध नहीं है ?
  1. चारुचंद्र लेख  
  2. बाणभट्ट की आत्मकथा 
  3. अनामदास का पोथा 
  4. कुटज 
प्रश्न 34 -स्त्री की सफलता पुरुष को बांधने में है ,किन्तु सार्थकता पुरुष की मुक्ति में है। बाणभट्ट  आत्मकथा में यह कथन किसका है ?
  1. भट्टिनी 
  2. निपुणिका 
  3. महामाया 
  4. सुचरिता 
प्रश्न 35 -बाणभट्ट की आत्मकथा है एक .... 
  1. प्रेम कथा 
  2. संघर्ष कथा 
  3. मनोविज्ञान कथा 
  4. जीवन मूल्यों पर आधारित उदात्त प्रेम कथा 
प्रश्न 36 -गोदान उपन्यास को गद्य प्रस्तुत महाकाव्य कहा जाता है ,क्योंकि उसमे .... 
  1. भारतीय जनजीवन का यथार्थ चित्रण है 
  2. सामान्य आदमी  अच्छाइयों का विवेचन है 
  3. सामाजिक संस्कार का सूक्ष्म अभिनिवेश है 
  4. इनमे से सभी 
प्रश्न 37 -यशपाल के झूठा सच उपन्यास की लोकप्रियता का क्या कारण है ?
  1. उसमे झूठ  को सच के रूप में दिखाया गया है। 
  2. उसमे भारत विभाजन की वेदना की यथार्थ प्रस्तुति है। 
  3. उसमे मनुष्यता को हारते हुए दिखाया गया है। 
  4. उसमें रचनाकार  कुछ भी अपनी और से नहीं कहता। 
प्रश्न 38 -निम्नलिखित  में से किस उपन्यास में उत्तर प्रदेश  पूर्वांचल के एक कस्बानुमा गाँव शिवपाल गंज की कहानी वर्णित है ?
  1. रागदरबारी 
  2. आधा गाँव 
  3. मैला आँचल 
  4. गली आगे मुड़ती है 
प्रश्न 39 -शकुन और डॉ जोशी के अंतर सम्बन्धों पर आधारित कथानक किस उपन्यास में प्रस्तुत  किया गया है ?
  1. आपका बंटी 
  2. महाभोज 
  3. टुटा हुआ इंद्रधनुष 
  4. तिरछी बौछार 
प्रश्न 40 -लाला ब्रजकिशोर और मुंशी चुन्नीलाल निम्नलिखित में से किस उपन्यास के पात्र है ?
  1. भाग्यवती 
  2. देवरानी जेठानी की कहानी 
  3. नूतन ब्रह्मचारी 
  4. परीक्षा गुरु 
प्रश्न 41 -तमस उपन्यास के पात्र है 
  1. कनक 
  2. रिचर्ड 
  3. लिजा 
  4. सेल्मा 
1 -1 और  2 
2 -2 और 4 
3 -2 और 3 
4 -1 और 4 

प्रश्न 42 -करम बीबी और सरफराज निम्न में से किस उपन्यास के पात्र है ?
  1. जिंदगीनामा 
  2.  सूरजमुखी अँधेरे में 
  3.  डार से बिछड़ी 
  4. यारो  के यार 
प्रश्न 43 -मन्नू भंडारी द्वारा रचित उपन्यास नहीं है। 
  1. महाभोज 
  2.  आपका बंटी 
  3. शैलूष 
  4. बसंती 
1 -1 और  3  
2 -2 और 3  
3 -4  और 3 
4 -1 और 2  

प्रश्न 44 -सांप्रदायिक विद्वेष और विभाजन की त्रासदी पर आधारित उपन्यास है। 
  1. आवारा मसीहा 
  2. महाभोज 
  3. तमस 
  4. झूठा सच 
1 -1 और  2 
2 -2 और 4 
3 -2 और 3 
4 -3 और 4 

प्रश्न 45 -प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित उपन्यासों का सही अनुक्रम है। 
A -वामा शिक्षक 
B -निस्सहाय हिन्दू 
C-भाग्यवती 
D -देवरानी जेठानी की कहानी  

  1. D,A,C,B
  2. A,B,C,D
  3. B,C,D,A
  4. C,D,A,B
प्रश्न46  - झूठा सच उपन्यास के पात्र है -
  1. तारा , जयदेव 
  2. रणवीर ,देवव्रत 
  3. सोमराज ,रावत 
  4. रुप्पन बाबू ,सनीचर 
1 -1 और  3  
2 -2 और 4 
3 -2 और 3 
4 -1 और 2 ,3 

प्रश्न 47 -लक्ष्मी दासिन निम्नलिखित में से  किस उपन्यास  की पात्र है ?
  1. मैला आँचल 
  2.  परती परिकथा 
  3. जूलूस 
  4. कितने चौराहे 
प्रश्न 48 -माता पिता के सम्बन्ध विछेद से विच्छेद से  प्रभावित बालक के त्रस्त जीवन को कथा पर आधारित उपन्यास है ?
  1. एक इंच मुस्कान 
  2. अनुगूँज 
  3. आपका बंटी 
  4. बेघर 
प्रश्न 49 -रागदरबारी उपन्यास के पात्र है -
  1. मदन मोहन और बाबू बैजनाथ 
  2. मास्टर मोतीराम और रामाधीन 
  3. मास्टर शिंभूदयाल और पुरुषोत्तमदास 
  4. काशीशाह और गंडा सिंह 
प्रश्न 50 -गोदान उपन्यास  होरी  अवध प्रान्त के किस गाँव का रहने वाला किसान था ?
  1. बेलारी 
  2. गंगौली 
  3. सेमरी 
  4. पांडेयपुर 
 


उत्तरमाला 

उत्तरमाला 

  1. a 
  2. c 
  3. c 
  4. a 
  5. d 
  6. a 
  7. b 
  8. b 
  9. c 
  10. d 
  11. d 
  12. d 
  13. c 
  14. b 
  15. a 
  16. a 
  17. c 
  18. b 
  19. b
  20. c 
  21. c 
  22. b 
  23. b 
  24. a 
  25. c 
  26. b 
  27. c 
  28. b 
  29. c 
  30. a
  31. -1
  32. -3
  33. -4
  34. -3 
  35. -4
  36. -4
  37. -2
  38. -1
  39. -1
  40. -4
  41. -3
  42. -1
  43. -3
  44. -4
  45. -1
  46. -1
  47. -1
  48. -3
  49. -2
  50. -1
हिंदी साहित्य सम्बन्ध को सहयोग करने लिए ऊपर दिए गये नंबर पर संपर्क करे. सहयोग राशि 10 रूपए से अपनी इच्छा अनुसार कुछ भी हो सकता है.

अनुसन्धान अभिक्षमता research apptitude


अनुसन्धान अभिक्षमता 

प्रदत्तों का विश्लेषण +किसी समस्या का विश्वसनीय समाधान 
नवीन तथ्यों की खोज +नविन सत्यो का प्रतिपादन 
प्राचीन प्रत्ययों तथ्यों +नवीन अर्थापन 

प्रयोगनात्मक शोध कार्य -प्रभाव सहसम्बन्ध 
सर्वेक्षण शोध -सामान्य सहसम्बन्ध 
विकासात्मक शोध -चारो की प्रभावशीलता का अध्ययन 
ऐतिहासिक शोध -नविन तथ्यों की खोज 

मेकग्रेथ तथा वाटसन के अनुसार -अनुसन्धान एक प्रक्रिया है , जिसमे खोज प्राविधि का प्रयोग किया जाता है जिसके निष्कर्षो की उपयोगिता हो ,ज्ञान वृद्धि की जाये ,प्रगति के लिए प्रोत्साहित करे ,समाज के लिए सहायक हो तथा मनुष्य को अत्यधिक प्रभावशाली बना सके। 
समाज तथा मनुष्य अपनी समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से हल कर सके। 

प्रत्यक्षवाद 


अनुसन्धान के प्रकार 


  1. बौद्धिक 
  2. व्यावहारिक 
बौद्धिक कारन का सम्बन्ध मनुष्य की जिज्ञासा की प्रवृति तथा ज्ञानार्जन से प्राप्त संतुष्टि की भावना से है। 

व्यावहारिक कारन का सम्बन्ध मनुष्य की उस इच्छा से है जिसके द्वारा वह ज्ञान प्राप्त करके अन्य कार्यो को अधिक कुशलतापूर्वक कर सके। 

 बौद्धिक अनुसन्धान को मूलभूल अनुसन्धान भी कहा जाता है। 

मुलभुत अनुसन्धान -ऐसे अनुसन्धान जिनके निष्कर्षो द्वारा किसी विशेष वैज्ञानिक नियमो का प्रतिपादन हो ,इस वर्ग में आते है मुलभुत अनुसन्धान का मुख्या उद्देश्य नई प्ररचनाओ का निर्माण करना है। 

व्यवहृत अनुसन्धान -जिनके द्वारा किसी समस्या -विशेष का समाधान  आवश्यक हो। 


अनुसन्धान के सोपान 

  1. समस्या का चयन 
  2. परिकल्पना का प्रतिपादन 
  3. शोध की रूपरेखा 
  4. प्रदत्तों का संकलन 
  5. प्रदत्तों का विश्लेषण 
  6. सामान्यीकरण तथा निष्कर्षो का प्रतिपादन 

अनुसन्धान की विधियाँ 

  1. ऐतिहासिक 
  2. वर्णात्मक 
  3. प्रयोगनात्मक 
  4. मात्रात्मक 
  5. गुणात्मक 
ऐतिसाहिक शोध -ऐतिहासिक समस्याओ का वैज्ञानिक विश्लेषण भूत ,वर्तमान तथा भविष्य का सम्बन्ध स्थापन 
शिक्षा तथा मनोविज्ञान  के लिए वैज्ञानिक आधार
 

ऐतिहासिक अनुसन्धान के पद 

आकंड़ो का संग्रह 
आकड़ो का विश्लेषण 
उपर्युक्त के आधार पर तथ्यों के विश्लेषण एवं रिपोर्ट 

ऐतिहासिक अनुसन्धान का क्षेत्र 
बड़े शिक्षाशास्त्रीय एवं मनोवैज्ञानिक के विचार 
संस्थानों एवं प्रयोगशालाओं द्वारा किए गए कार्य 
विभिन्न कालो में शैक्षिक एवं मनोवैज्ञानिक विचारों के विकास की स्थिति 
एक विशेष प्रकार की विचारधारा का प्रभाव और उसके और उसके स्रोत 
शिक्षा के लिए संवैधानिक व्यवस्था 
पुस्तक सूचि तैयार करना


ऐतिहासिक अनुसन्धान में नियंत्रण सम्बन्धी कठिनाई 


  1. ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करना ,जिसका पता न लगा हो। 
  2. पुराने अनुसन्धान का संशोधन  

वर्णात्मक तथा विवरणात्मक शोध 

इसका सम्बन्ध किसी व्यक्ति से न होकर सम्पूर्ण जनसँख्या से होता है। 

ऐतिहासिक शोध का सम्बन्ध भूतकाल से होता है 
वर्णात्मक का सम्बन्ध वर्तमान से 
प्रयोगनात्मक का सम्बन्ध भविष्य से 

गुणात्मक शोध 

  1. गुणात्मक शोध गहन साक्षात्कार ,दस्तावेजों की समीक्षा करता है 
  2. मुख्यतः आगमन विधि का प्रयोग होता है 
  3. विषयनिष्ठ होता है। 
  4. गुणात्मक या वर्णन आधारित होता है। 
  5. मानवीय व्यवहारों का अध्ययन करता है। 

मात्रात्मक शोध 

  1. मात्रात्मक या परिणात्मक सांख्यिकी सूचनाओं ,सर्वेक्षण ,संरचना साक्षात्कार ,प्रेक्षण रिकॉर्ड्स और रिपोर्ट 
  2. मुख्यतः निगमन  प्रयोग 
  3. वस्तुनिष्ट 
  4. संख्या आधारित 

शोध नैतिकता 

  1. सत्यनिष्ठा 
  2. ईमानदारी 
  3. वैधता 
  4. गैर भेदभाव 
  5. सामाजिक जिम्मेदारी 

प्रत्यक्षवाद 

अगस्त कॉम्ट 
जन्म -1798 
मृत्यु -1857 

तीन स्तरीय नियम 
  1. धार्मिक स्तर 
  2. तात्विक स्तर 
  3. वैज्ञानिक स्तर 
धार्मिक स्तर के तीन भेद 
  1. जीवित सत्तावाद 
  2. बहुदेववाद 
  3. अद्वैतवाद 
प्रत्यक्षवाद की तकनीक 
  1. निरिक्षण 
  2. प्रयोगात्मक 
  3. तुलनात्मक 
  4. ऐतिहासिक 
  5. वर्गीकरण 
यथार्थवादी विचारधारा 
समाजशास्त्रीय शोध 
वैज्ञानिक विधि से सत्य की खोज 
तथ्यवाद 
विज्ञानवाद 

प्रत्यक्षवाद केवल उन घटनाओ की व्याख्या करता है जिसे हम प्रत्यक्ष रूप से अनुभव व् निरिक्षण कर सकते है। 

प्रत्यक्षवाद की प्रवृति 
  1. वस्तुनिष्ठता 
  2. तार्किक विश्लेषण 
  3. कार्य -कारन सम्बन्ध 
  4. वैज्ञानिक दृष्टिकोण 
  5. यथार्थवादी प्रकृति 
  6. सकारात्मकता 

उत्तर प्रत्यक्षवाद 

तार्किक प्रक्रिया +व्यक्तिगत अनुभव 

जहाँ प्रत्यक्षवाद सिद्धांत की व्याख्या वैज्ञानिक विधि से करता है ,वही उत्तर प्रत्यक्षवाद समस्या का गहन विश्लेषण करके कारणों की खोज व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर करता है। 

प्रत्यक्षवाद अवलोकन ,निरिक्षण पर बल देता है। उत्तर प्रत्यक्षवाद अवलोकन ,निरिक्षण को अस्थिर मानता है। क्योंकि यह व्यक्तिगत दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। 

उत्तर प्रत्यक्षवाद व्यक्तिवादी है वस्तुनिष्ठ नहीं 

उत्तारप्रत्यक्षवाद ज्ञान को विनिमय की वस्तु नहीं मानता। 

परायी प्यास का सफर -आजमशाह खान -parayi pyas ka safar- aajmshah khan

परायी प्यास का सफर -आजमशाह खान 

आजमशाह खान राजस्थानी धरती के समृद्ध साहित्यिक परिवेश से आते है। उनके कथा साहित्य में निम्नवर्गीय और मध्यवर्गीय व्यक्तियों की विडंबनाओं को दर्शाया गया है। आजमशाह की पहली कहानी संग्रह 'परायी प्यास का सफर' है। इनके द्वारा रचित कहानी संग्रह की संख्या 5 है। 
  1. पराई प्यास का सफर  
  2. किराये की कोख 
  3. एक और सीता 
  4. एक गधे की जन्मकुंडली 
  5. सांसो का रेवड़ 
अंतिम कहानी -हम वतन है -सम्बोधन पत्रिका में प्रकाशित 

कमर मेवाड़ी का कथन -
                                    आलमशाह खान हिंदी कथा साहित्य का ऐसा नक्षत है जिसका प्रकाशन कभी धुंधला नहीं पड़ेगा। प्रेमचंद की परम्परा को विकसित करने में उनका योगदान सराहनीय है। 

परायी प्यास का सफर 

  • पात्र -दो लड़के लखना और बड़के 
  • लखना का सौतेला पिता उसकी माँ और बहन 
  • बड़के की माँ 
  • दुकान का मालिक  
बालमजदूरी का चित्रण 
बालक का शारीरिक और मानसिक शोषण 
सौतेले पिता के द्वारा किया गया अत्याचार 
बाल मनोविश्लेषण 

कहानी का सारांश 

कहानी की  शुरुवात एक दुकान में लखना का सेठ से आदेश  लेकर बार -बार  सीढ़ियों पर ऊपर नीचे करने से होता है। कहानी में लखना ऊपर -नीचे  जाने में नहीं थकता लेकिन उस से एक काम के बाद दूसरा काम दे दिया जाता है। लड़का नशे का भी आदि  हो चूका है १२ वर्ष की उम्र में वह बीड़ी पीता है। उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है। माता दूसरे व्यक्ति  शादी कर लेती है। लखना का सौतेला पिता उसे इसी दुकान में काम पर लगा देता है। 15 रुपए मजदूरी पर लखना वहां  काम करता है। 

'पंद्रह रुपया महीना ,रोटी कपडा और चाय -बीड़ी'
 
लखना का सौतेला पिता उसकी माँ को पीटता है और उसकी बहन को भी पीटता है। लखना उन्ही लोगों  के लिए यहाँ पर काम करता है एक दिन लखना का सौतेला पिता आता है। उससे पैसे मांगने लगता है लखना जवाब देता है. -

'वो कॉलेज के लड़के आने लगे है इधर। इस तेन के चार चम्मच उड़ा ले गए ----एक के सूट पर चाय छलक गयी मुझसे। पांच रूपए यू  कट गए। 

लखना का सौतेला पिता उस पर गुस्सा होने लगता है तेरी एक बहन भी हुई है। तेरी माँ को कमजोरी आ गई है तू काम नहीं करेगा तो खर्चा कैसे चलेगा।  उसका उत्तर देते हुए लखना कहता है। -

'दिन और साँझ की अपनी चाय कट करके मैं टूट -फूट भर दूँगा।' 

लखना और बड़के दोनों एक ही दुकान पर काम करते है वह बात करते है की एक फिल्म बॉबी लगी है। जिसे देखना उन्हें अच्छा लगा। उसे वह पूरा नहीं देख पाए इंटर्वल के बाद का ही हिस्सा देखा है। यहाँ पर लड़को के शारीरिक शोषण का जिक्र है जिससे गार्ड उन्हें फिल्म देखने देता है। 

तू जानता है ,वो सिनेमा की गेट वाला गफूर अपना यार है आजकल ----- ..
यार हाँ जानता हूँ 
फिर 
तू मुझ से उड़ मत  मुझे पता है ,उससे तेरी यारी कैसी है ?
तो क्या हुआ ----थोड़ा गाल -बाल पर दाँत -बात लगा देता है ---और क्या ?
और वो ताले चाबी का खेल नहीं होता ?
होता है ----तो क्या बिगड़ता है कुछ ----फिर फिल्म भी तो दिखता है। 
मैंने भी इंटरवल देखा है बॉबी का। 
तेरे को भी गफूर ने दिखाया है न ?मुझे भी तेरा सब पता है। 

शारीरिक शोषण सिर्फ स्त्रियों का न होकर बच्चों का भी होता है इसे आजमशाह खान ने सफलता पूर्वक चित्रित किया है। किस प्रकार हम किसी चीज का लालच देकर दूसरे व्यक्ति को आकर्षित करते है। शारीरिक शोषण सिर्फ जबरदस्ती ही नहीं होता इसे ऐसे भी सम्पन्न किया जा सकता है इसे बखूबी दर्शाया गया है। जिस व्यक्ति के पास उसका आभाव हो जिसे वह पाना चाहता है और प्रबल इच्छाशक्ति है उस वस्तु को पाने की वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो तो वैसे व्यक्ति का भी शारीरिक शोषण उसी प्रकार किया जाता है जिस से वह व्यक्ति विरोध भी न कर पाए और काम भी सध जाये खैर ..----

लखना और बड़के को उनकी मजदूरी मिली है। लखना को खाना बनाने की इच्छा  नहीं है लेकिन बड़का चाहता है  बने उन्हें आज मजूरी मिली है। लखना कहता है -

'अपने किस काम की। दिन चढ़ते न चढ़ते नया बाप आ मरेगा और टेंट में सब खोसकर ले जायेगा। 
वो तेरा बाप तो कल आएगा ,मेरी महतारी तो एडवांस ले भी गयी।' 

 लखना और बड़के खाने के लिए बाहर होटल में चले जाते है  बड़का मना करता है की अगर इस पैसे को तू खा लेगा तो तेरा बाप आएगा तो उसे क्या देगा 'लखना कहता है  की रहूँगा तभी तो। बड़का कहता है -

'तेरी माँ और टुनिया को भी सताएगा।' 

होटल में जाने पर वह पूछते है यहाँ क्या -क्या है। उन्ही का हमउम्र लड़का कई प्रकार के भोज्य पदार्थ का नाम बता देता है यह फिर कहते है पहले पानी लाओ वास्तव में इन्हे कुछ समझ नहीं आता की उसमे क्या ऐसा है खाने का सबसे अच्छा तभी होटल का मालिक  पूछता  है की ऐसे ही आ गए या  कुछ पैसे भी है। लखना दस का नोट हवा में लहराता है ,मालिक कहता है  ये जो मांगे इनके लिए ले आओ। वह सबसे अच्छी सब्जी और रोटी  मंगाते है। उसके बाद गुलाब जामुन। 

वह वापस आ कर लेट जाते है तभी उन्हें प्यास का एहसास होता है और वह एक दूसरे से पानी लाने को कहते है पानी न लखन लाता है  न ही बड़का तभी सेठ लखना को पानी  लाने के लिए बुलाता है लखना तुरंत जाता है और उसे पानी दे कर वापस आता है और वापस लेट जाता है तभी बड़का कहता है अकेले अकेले पानी पी  गया मेरे लिए नहीं  लाया वह कहता है मैंने खुद भी पानी नहीं पिया और उसके  साथ ही कहानी की समाप्ति हो जाती है। 

'प्यासा तो मैं अब भी हूँ ,पर आर्डर सेठ का था ,सो उसे पीला दिया ----मुझे पानी पीने की याद ही नहीं रही। रोज आर्डर देने वाला खाता -पीता है ना। अपन लोग तो बस --- . . 

 समाप्त  


देवरानी जेठानी की कहानी- पंडित गौरी दत्त

गौरीदत्त का जन्म -1836 
देवरानी जेठानी  की कहानी -1870 

गोपाल राय ने पंडित गौरीदत्त के इस उपन्यास को प्रकाशन वर्ष 1870 के हिसाब से हिंदी का पहला उपन्यास माना है  इस उपन्यास में तात्कालिक समाज जीवंत हो उठता है मसलन बाल विवाह , विवाह में फिजूलखर्ची ,स्त्रियों की आभूषण प्रियता, बटवारा वृद्धजनों की समस्याएं स्त्री शिक्षा जैसे सामाजिक मुद्दों के चित्रण में यह उपन्यास कभी नहीं चूकता।      

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 देवरानी जेठानी की कहानी  उपन्यास के प्रमुख पात्र                                    

  1. सर्व सुख मुंशी
  2.  टिकट नारायण                                                                                  
  3.  हरसहाय काबली 
  4. पार्वती
  5.  सुखदेव
  6.  दौलत राम 
  7. छोटेलाल

सर्वप्रथम यह उपन्यास 1870 ई में मेरठ के एक लिथोप्रेस  'छापाखाना ए जीयाई' में प्रकाशित हुआ और इसकी 500 कृतियां प्रकाशित की गई थी और मूल्य केवल 12 आने था। 

 गोपाल राय ने  देवरानी जेठानी की कहानी को हिंदी साहित्य का प्रथम उपन्यास माना है। 

 छोटे आकार क्राउन  साइज के मात्र 35 पृष्ठों की इस छोटी-सी औपन्यासिक कृति  में तत्कालीन सामाजिक समस्याओं को इतने सूक्ष्म दृष्टि से इतने बहुआयामी रूप में संदर्भित किया गया है कि हिंदी के प्रथम उपन्यास में ही यह  कौशल देखकर आश्चर्य होता है।  बाल विवाह,  विवाह में फिजूलखर्ची, स्त्रियों की आभूषण प्रियता की वृत्ति , परिवार में अलगौझा  की समस्या के साथ बड़े कौशल के साथ नारी शिक्षा के साथ अन्तर्ग्रहीत  है। 

 जब सांयकाल   को सारे दिन का हारा थका  घर आता ,नून -तेल का झींकना  ले बैठती।  कभी कहती मुझे गहना बना दो ,रोती -झींकती ,लड़ती भिड़ती।  उसे रोटी न करके देती। कहती की फैलाने की  बहू को देख,गहने में लद  रही है। उसका मालिक नित नयी  चीज लावे है मेरे तो घर में आकर भाग फूट गए वह कहता  जाने भगवान रोटियों की क्यों कर गुजारा कर रहे हैं तुझे गहने - पाते की सूझ रही है। 

इसकी रोचकता और समाज सुधार की दृष्टि से ही प्रभावित हो पश्चिम देशाधिकारी श्री लेफ्टिनेंट गवर्नर बहादुर ने 24 जून 1870 के पत्र द्वारा पंडित गौरीदत्त को ₹100 के पुरस्कार से प्रोत्साहित किया। 

  बच्चन सिंह ने अपनी 'हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास '  में देवरानी जेठानी की कहानी वामा शिक्षक और भाग्यवती के साथ रखकर इसे  'स्त्री जनोचित शिक्षा' ग्रन्थ  कहकर चलता कर देते हैं इसमें औपन्यासिकता  का अभाव देखते हैं। 

हिंदी भाषा और उसका विकास

प्रश्न 1- हिंदी दिवस कब मनाया जाता है ?
  1. 15 सितंबर 
  2. 11 नवंबर 
  3. 14 नवंबर
  4.  14 सितंबर 
प्रश्न २ -भारतीय संविधान के किस भाग में भाषा से संबंधित नियम है ?
  1. 8 
  2. 12
  3.  17 
  4. 22 
प्रश्न3  -विश्व हिंदी दिवस कब मनाया जाता है ?
  1. 10 जनवरी 
  2. 30 जनवरी 
  3. 22 फरवरी 
  4. 22 मार्च 
प्रश्न 4- संविधान की किस अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता प्रदान की गई है ?
  1. 8 
  2. 12 
  3. 17 
  4. 22 
प्रश्न 5- आठवीं अनुसूची में किसे भाषा को सम्मिलित नहीं किया गया? 
  1. मैथिली 
  2. मालवी
  3. मलयालम
  4.  मणिपुरी 
प्रश्न6 - आठवीं अनुसूची में किस भाषा को सम्मिलित नहीं किया गया ?
  1. कन्नड़ 
  2. कन्नौजी 
  3. कश्मीरी
  4.  कोंकड़ी 
प्रश्न7 - आठवीं अनुसूची में किस भाषा को सम्मिलित नहीं किया गया?
  1.  अंग्रेजी 
  2. उर्दू  
  3.  संस्कृत
  4.   हिंदी
 प्रश्न8 - सिंधी भाषा को आठवीं अनुसूची में किस संशोधन द्वारा सम्मिलित किया गया?
  1.  21 वा 
  2. 42 वा 
  3. 71 वा 
  4. 92वा  
प्रश्न9 - 71वां संविधान संशोधन में किस भाषा को नहीं जोड़ा गया ?
  1.  कोंकणी
  2.  संथाली 
  3. मणिपुरी
  4.  नेपाली
 प्रश्न10 -92 वा संविधान संशोधन में किस भाषा को नहीं जोड़ा गया ?
  1.  बोडो 
  2. बांगरू 
  3. डोगरी
  4.  मैथिली
प्रश्न11 -इनमें से कौन सी बोली बिहारी हिंदी वर्ग में नहीं आती है 
  1. भोजपुरी
  2. मैथिली
  3.  छत्तीसगढ़ी
  4. मगही   
 प्रश्न12 - निम्नलिखित में से पश्चिमी हिंदी की बोली नहीं है
  1.  ब्रजभाषा
  2. कन्नौजी
  3.  बुंदेली 
  4. मगही 
प्रश्न13 -निम्नलिखित में से किस भाषा का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ 
  1. गुजराती 
  2. पंजाबी
  3.  मराठी 
  4. सिंधी 
प्रश्न14 -इनमें से किस बोली  का बिहारी हिंदी से संबंध नहीं है 
  1. अवधी  
  2. मगही 
  3. भोजपुरी 
  4. मैथिली
प्रश्न15 -पश्चिमी हिंदी की दो बोलियां का सही युग्म है
  1.  कन्नौजी- अवधी
  2.  ब्रज- बघेली
  3.  छत्तीसगढ़ी- बांगरू
  4.  खड़ी बोली- बुंदेली 
प्रश्न16 -अर्द्धमागधी अपभ्रंश  से विकसित बोली है?
  1.  बांगरू
  2.  बघेली 
  3. ब्रजभाषा 
  4. भोजपुरी 
प्रश्न17 -निम्नलिखित में से किस भाषा को संविधान के अष्टम सूची में सम्मिलित नहीं किया गया है ?
  1. डोगरी
  2.  मणिपुरी
  3.  मैथिली
  4.  छत्तीसगढ़ी 
प्रश्न18 -अवधी भाषा का विकास किस अपभ्रंश से हुआ है  
  1. महाराष्ट्रीय 
  2.  शौरसेनी 
  3. अर्द्धमागधी 
  4. मागधी 
प्रश्न 19 - इनमें से किस को संविधान के अष्टम अनुसूची में सम्मिलित नहीं किया गया
  1.  डोगरी
  2.  मैथिली 
  3.  ब्रज 
  4. असमिया
प्रश्न20 -भाषा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के किस धातु से हुई है?
  1. भाष 
  2. भव 
  3. भाषात 
  4. इनमे से कोई नहीं 
  
 प्रश्न21 -  हिंदी की उत्पत्ति किस अपभ्रंश से मानी जाती है?
  1.  मागधी  
  2. शौरसेनी  
  3. ब्राचड़  
  4. खस
प्रश्न22 -निम्न  भाषाओं के कालक्रम  के अनुसार कौन सा विकल्प सही है 
  1. संस्कृत, पाली , प्राकृत ,अपभ्रंश
  2.  पाली, संस्कृत, अपभ्रंश,  प्राकृत
  3.  अपभ्रंश ,पाली ,प्राकृत ,संस्कृत 
  4. अपभ्रंश, प्राकृत, पाली, संस्कृत 
प्रश्न23-खड़ी बोली का एक अन्य नाम क्या है?
  1.  कोरवी 
  2. कन्नौजी
  3.  बांगरू
  4.  कुमाऊनी 
प्रश्न24-मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, किस बोली के क्षेत्र में आते हैं?
  1.  खड़ी बोली 
  2. ब्रजभाषा 
  3. कन्नौजी 
  4. अवधि 
प्रश्न25 - इनमें से कौन सी राजस्थान की बोली नहीं है 
  1. मारवाड़ी 
  2. बुंदेली
  3.  मेवाती
  4.  मालवी
प्रश्न26 - इनमें से कौन -सी पश्चिमी हिंदी की बोली नहीं है
  1.  ब्रजभाषा 
  2. बघेली
  3.  कन्नौजी
  4.  बुंदेली
प्रश्न27 - 'सिंधी' भाषा का विकास किस अपभ्रंश से हुआ है
  1.  ब्राचड़ 
  2. पैशाची 
  3. शौरसेनी 
  4. मागधी 

प्रश्न28 - राजभाषा अधिनियम  'क' वर्ग में कौन- सा एक राज्य नहीं है?
  1.  पंजाब
  2.  उत्तर प्रदेश
  3.  मध्य प्रदेश
  4.  हरियाणा
प्रश्न29 - इनमें से कौन- सा हिंदी भाषी राज्य नहीं है?
  1.  पंजाब
  2.  हरियाणा 
  3. राजस्थान
  4.  दिल्ली
प्रश्न30 -किस अनुच्छेद में वर्णित है कि जब तक संसद विधि द्वारा उपबंध ना करें तब तक उच्चतम न्यायालय तथा प्रत्येक उच्च न्यायालय मेरे सब तरह की कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी ?
  1. अनुच्छेद 342
  2.  अनुच्छेद 344
  3.  अनुच्छेद 346 
  4. अनुच्छेद 348 
प्रश्न31 -भारतीय संविधान ने हिंदी को कब मान्यता प्रदान की ?
  1. 14 सितंबर 1948 
  2. 14 सितंबर 1949
  3.  14 सितंबर 1950
  4.  12 सितंबर 1949
प्रश्न 32 -राजभाषा आयोग ,1955 के अनुसार निम्नलिखित सुझाव दिए गए है। 
A -हिंदी  सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है ,यही सारे भारत का एक माध्यम हो। 
b -चौदह वर्ष की उम्र तक भारत के प्रत्येक विद्यार्थी को हिंदी का ज्ञान करा देना चाहिए। 
c -भारत सर्कार के प्रकाशन अधिक से अधिक अंग्रेजी में किये जाये। 
d -उच्च न्यायलय में क्षेत्रीय भाषाओं का व्यव्हार होना चाहिए। 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए -
  1. a,b,c
  2. a,b,d
  3. b,c,d
  4. a,c,d
प्रश्न 33 -निम्नलिखित में तालव्य वर्ण है -
a -च 
b -त 
c -ट 
d -ज

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए -
  1. a,b,c
  2. b,c,d
  3. a,c,d
  4. a,,d
प्रश्न 34 -निम्नलिखित में कौन -सा शब्द तद्भव नहीं है ?
  1. काज 
  2. आखर 
  3. कान 
  4. वायु 
प्रश्न 35 -निम्नलिखित में से कौन -सा शब्द यौगिक है ,रूढ़ नहीं ?
  1. जलद 
  2. नाक 
  3. कान 
  4. पर 
प्रश्न 36 -निम्नलिखित भाषाओं को विकास के उनके क्रम में व्यवस्थित कीजिये। 
a -शौरसेनी 
b -पहली प्राकृत 
c -वर्तमान हिंदी 
d -पूर्वी हिंदी 

नीचे दिए विकल्पों में सही उत्तर चुनिए -
  1. a,b,c,d
  2. b,a,d,c
  3. d,a,b,c
  4. c,a,b,d
प्रश्न 37 -तारीख निम्नलिखित में से किस भाषा का मूल शब्द है ?
  1. पोर्चुगीज 
  2. अरबी 
  3. तुर्की 
  4. हिंदी 
प्रश्न 38 -निम्नलिखित में से कौन -सी भाषा  आर्यभाषाओं में शामिल नहीं है ?
  1. संस्कृत 
  2. प्राकृत 
  3. तुर्की 
  4. अंग्रेजी 
प्रश्न 39 -निम्नलिखित में से कौन -सा शब्द फ़ारसी का है -
  1. दाग 
  2. औरत 
  3. नीलम 
  4. फीस 
प्रश्न 40  -निम्नलिखित भाषाओं को विकास के उनके क्रम में व्यवस्थित कीजिये। 
a -प्राचीन संस्कृत 
b -शौरसेनी  
c -लौकिक संस्कृत  
d -पश्चिमी हिंदी  

नीचे दिए विकल्पों में सही उत्तर चुनिए -
  1. a,,c,b ,d
  2. a,b,c,d
  3. b,c,a,d
  4. c,d,a,b
प्रश्न 41 -निम्नलिखित में दन्त्य वर्ण है -
a -ड 
b -ढ 
c -द 
d -ध 

नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर चुनिए 
  1. a,b,c
  2. b,c,d
  3. a,b,d
  4. c,d
प्रश्न 42 -हिंदी शब्दानुशासन के रचनाकार है ?
  1. कामता प्रसाद गुरु 
  2. श्यामसुन्दर दास 
  3. भगवती प्रसाद वाजपेयी 
  4. किशोरीदास वाजपेयी 
प्रश्न 43 -अपभ्रंश के उत्तरकालीन अवस्था का नाम है -
  1. संस्कृत 
  2. प्राकृत 
  3. पालि 
  4. अवहट्ठ 
प्रश्न 44 -सिंधी भाषा का जन्म किस अपभ्रंश से हुआ है ?
  1. शौरसेनी 
  2. मागधी 
  3. अर्द्ध मागधी 
  4. ब्राचड़ 
प्रश्न 45 -निम्नलिखित में से कौन -सी रचना अपभ्रंश की नहीं है ?
  1. पउम चरिउ 
  2. पाहुड दोहा 
  3. भविसयत कहा 
  4. चित्रावली 
प्रश्न 46 -संविधान के किस अनुछेद के अनुसार हिंदी भारत की राजभाषा है 
  1. 373
  2. 347
  3. 343
  4. 350
प्रश्न 47 -निम्नलिखित में से मानक हिंदी का आदर्श क्षेत्र है 
  1. हरियाणा 
  2. मेरठ 
  3. दिल्ली 
  4. हिमांचल प्रदेश 
प्रश्न 48 -निम्नलिखित में से कौन अवधी भाषा का कवि नहीं है -
  1. जायसी 
  2. कुतुबन 
  3. उसमान 
  4. नंददास 
प्रश्न 49 -निम्नलिखित में से पश्चिमी हिंदी की बोली कौन -सी नहीं है -
  1. खड़ी बोली 
  2. ब्रज भाषा 
  3. कन्नौजी 
  4. बघेली 
प्रश्न 50 -अपभ्रंश और ब्रजभाषा के योग से कौन सी भाषा बनती है ?
  1. पिंगल 
  2. डिंगल 
  3. अवधी 
  4. अवहट्ठ 

उत्तरमाला 

  1. -4-14सितम्बर 
  2. -3- 17 
  3. -1--10जनवरी 
  4. -1- 8अनुसूची 
  5. -2-मालवी
  6. -2- कनौजी 
  7. -1-अंग्रेजी  
  8. -1-21वा 
  9. -2-संथाली 
  10. -2-बांगरू 
  11. -3-छत्तीसगढ़ी 
  12. -4-मगही
  13. -1- गुजरती 
  14. -1-अवधी 
  15. -4-खड़ीबोली -बुंदेली 
  16. -2-बघेली 
  17. -4-छत्तीसगढ़ी 
  18. -3-अर्द्धमागधी 
  19. 3-ब्रज 
  20. -1-भाष 
  21. -2-शौरसेनी 
  22. --1-संस्कृत 
  23. -1-कौरवी 
  24. -1-खड़ीबोली 
  25. -2-बुंदेली 
  26. -2-बघेली
  27. -1-ब्राचड 
  28. -1-पंजाब 
  29. -1-पंजाब 
  30. -4-348 
  31. -2-14सितम्बर  1949
  32. -2
  33. -4
  34. -4
  35. -1
  36. -2
  37. -2
  38. -3
  39. -1
  40. -1
  41. -4
  42. -4
  43. -4
  44. -4
  45. -4
  46. -3
  47. -2
  48. -4
  49. -4
  50. -1

 

 

नाखून क्यों बढ़ते हैं


                                       नाखून क्यों बढ़ते हैं

 विधा - निबंध

रचनाकार- हजारी प्रसाद द्विवेदी

  निबंध संग्रह कल्पलता से निबंध लिया गया है। 

 निबंध की मुख्य पंक्तियाँ 

 नाखून क्यों बढ़ते हैं निबंध में हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने मनुष्य के हिंसात्मक प्रवृत्ति के बढ़ने तथा प्रेम संबंधों के कटु होने का वर्णन व्यंग्यात्मक तथा ललित ढंग से किया है निबंध के शुरुआत में ही द्विवेदी जी ने रचनात्मक ढंग से इस निबंध की शुरुआत करते हैं कि बच्चे के पूछने पर के नाखून क्यों बढ़ते हैं एक पुत्र द्वारा पूछे जाने पर पिता इसका उत्तर देने में लोग असमर्थ दिखाई देता है। प्राचीन काल में नाखून रखने का महत्व भी वे दिखाते हैं कि पहले मनुष्य जानवर था उसे अपनी रक्षा के लिए अपने नाखूनों का इस्तेमाल करना होता था मगर आज वह अपने बाहरी नाखूनों को तो काट लेता है लेकिन जो उसके अंदर हिंसात्मक प्रवृत्ति है उसे नहीं मिटाता नाखूनों का स्थान अब हथियारों  ने ले लिया है।  हथियार दिन- प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं यह मनुष्य को पशुता की ओर ही अग्रेषित करना है। 

इंडिपेंडेंस का अर्थ है अनधीनता या किसी अधीनता का अभाव स्वाधीनता शब्द का अर्थ है अपने अधीन रहना। 

  सोचना तो क्या उसे इतना भी पता नहीं चलता कि उसके भीतर नख  बढ़ा लेने की जो सहजात प्रवृत्ति है, वह उसके पशुत्व का प्रमाण है उन्हें काटने की जो प्रवृत्ति है, वह उसकी मनुष्यता की निशानी है और यद्यपि पशुत्व  के चिन्ह उसके भीतर रह गए हैं, पर वह पशुत्व को छोड़ चुका है पशु बनकर आगे नहीं बढ़ सकता। उसे कोई रास्ता खोजना चाहिए अस्त्र बढ़ाने की प्रवृत्ति मनुष्यता की विरोधिनी है

  मैं ऐसा तो नहीं मानता कि जो कुछ हमारा पुराना है, जो कुछ हमारा विशेष है, उससे हम चिपटे ही रहे।  पुराने का मोह सब समय वांछनीय ही नहीं होता। मरे बच्चे को गोद में दबाए रहने वाली बंदरिया मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती परंतु ऐसा भी नहीं सोचा जा सकता कि हम नई अनुसन्धित्सा के नशे में चूर होकर अपना  सर्वस्व खो  दें। 

  कालिदास ने कहा था कि सब पुराने अच्छे नहीं होते, सब नए खराब नहीं होते।भले लोग दोनों की जांच कर लेते हैं ,जो हितकर होता है, उसे ग्रहण करते हैं और मूढ़ लोग दूसरों के इशारे पर भटकते रहते हैं। सो हमें परीक्षा करके हितकर वस्तु निकल आए, तो इससे बढ़कर और क्या हो सकता है। 

  मनुष्य पशु से किस बात में भिन्न है ,आहार- निद्रा आदि पशु- सुलभ स्वभाव उससे ठीक वैसे ही है, जैसे अन्य प्राणियों के लेकिन वह फिर भी पशु से भिन्न है उसमें संयम है, दूसरे के सुख-दुख के प्रति संवेदना है श्रद्धा है तब है त्याग है।  यह मनुष्य के स्वयं के उद्बभावित बंधन है। इसलिए मनुष्य झगड़े टंटे को अपना आदर्श नहीं मानता, गुस्से में आकर चढ़ दौड़ने वाली अविवेकी को बुरा समझता है और वचन , मन और शरीर से किए गए असत्याचरण को गलत आचरण मानता है। 

 बृहत्तर जीवन में अस्त्र -शस्त्रों का बढ़ने देना मनुष्य की पशुता की निशानी है और उसे नहीं बढ़ने देना मनुष्यत्व का तकाजा है।  मनुष्य में जो घृणा  है, वह अनायास बिना सिखाया जाती है वह सतपुरा  अशोक तंवर का घोतक है और अपने को संयत रखना दूसरे के मनोभाव का आदर करना मनुष्य का स्वधर्म है

उर्वशी के सम्बन्ध में मुख्य कथन

उर्वशी 

रचनाकार -रामधारी सिंह दिनकर रचना काल -1961 
रचनाकार का जन्म -1908 

रचना के लिए ज्ञानपीठ से सम्मानित  वर्ष -1972

उर्वशी कृति पर भगवतशरण उपाध्याय के लेख से विवाद शुरू हुआ जिसमे अनेक आलोचक सम्मिलित हुए नामवर सिंह के शब्दों में -
                                        जनवरी 1964 की कल्पना पत्रिका में प्रकाशित उर्वशी -परिचर्चा ऐसा ऐतिहासिक दस्तावेज है जिससे समकालीन साहित्य में मूल्यों की सीधी टक्कर का पता चलता है। उर्वशी के निमित्त इस चर्चा में विभिन्न पीढ़ियों और विचारो के इतने कवि -आलोचक का भाग लेना एक घटना थी। 


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  •   भगवतशरण जी बहार से भीतर की यात्रा के पूर्व या अनन्तर यदि सावधानी से भीतर से बाहर की यात्रा भी कर लेते तो उनकी आलोचना में कमजोरियाँ न आ पाती। -मुक्तिबोध 
निसंदेह प्राचीन संस्कृति के सम्बन्ध में मेरा ज्ञान अत्यंत सीमित है। किन्तु जहाँ तक मुझे मालूम है प्राचीन आध्यात्मिक ,सांस्कृतिक और कलात्मक जगत में ,परम तत्व के साक्षात्कार के लिए काम -मार्ग नहीं चुना गया और यह सिद्धों और तांत्रिकों की ,और उनसे प्रभावित अन्य मार्गों की देन  है। -मुक्तिबोध 

कौन सी वह मूल वृत्ति है जिसके फलस्वरूप उन्हें प्राचीन और मध्ययुगीन उत्सों की और जाना पड़ा ?वह है दुर्मम ,एश्वर्य -पूर्ण -काम -विलास  की व्याकुल इच्छा ,और उसकी तृप्ति के औचित्य की स्थापना की आकांक्षा। चूँकि इस प्रकार की इच्छापूर्ति के औचित्य का सर्वोच्य विधान आध्यात्मिक रहस्यवाद ही हो सकता है , इसलिए उन्होंने महासुखवाद   का पल्ला पकड़ा।  -मुक्तिबोध 

उर्वशी एक बृहद कल्पना -स्वप्न है ,जिसके द्वारा और जिसके माध्यम से ,लेखक अपनी कामात्मक स्पृहाओं का आदर्शीकरण करता है और उन्हें एक सर्वोच्च आध्यात्मिक औचित्य प्रदान करता है। कथानक की ऐतिहासिकता केवल एक भ्रम है। -मुक्तिबोध 

उर्वशी की रचना इतिहास -शास्त्रीय दृष्टिकोण से नहीं की गयी है। ---वह एक ऐसा काव्य है ,जिसमे प्राचीन जीवन के मनोहर वातावरण की कवि -प्रणीत कल्पना को बृहद रूप देने का प्रयत्न किया गया है। -मुक्तिबोध 

उर्वशी का कवि 'संस्कृति के चार अध्याय' नमक पुस्तक का लेखक होने के कारण अपने को इतिहासशास्त्री बनाने का आडम्बर भी तो करता है।  -मुक्तिबोध 

सामाजिक प्रतिष्ठा और प्रभाव के परिचालन -द्वारा साहित्यिक प्रतिष्ठा और प्रभाव के विकास और प्रसार के दृश्य हिंदी साहित्य में खूब ही है।  मुक्तिबोध 

उर्वशी के तथाकथित ऐतिहासिक पक्ष की भगवतशरण जी ने जो आलोचना की है वह महत्वपूर्ण और अत्यंत उपयोगी है। -मुक्तिबोध 

उर्वशी का मूल दोष यह है की वह एक कृत्रिम मनोविज्ञान पर आधारित है। -मुक्तिबोध 

हमारा समाज इस समय न मोहनजोदड़ो के युग में है न व्रजयानियों के युग में ,जहाँ अनुभव के क्षणों को धार्मिक -मनोवैज्ञानिक रूप दिया जा सके। -मुक्तिबोध 

कौन है वे प्रज्ञावान भोगी जिन्हे रति -सुख की चरम परिणीति से अतीन्द्रिय सत्ता से साक्षात्कार होता है।-  मुक्तिबोध 

सांस्कृतिक ध्वनियों और प्रतिध्वनियों का निनाद करते है ,मानो पुरुरवा और उर्वशी के रतिकक्ष में भोंपू लगे हो जो शहर बाजार में रति -कक्ष के आडंबरपूर्ण कामात्मक संलाप का प्रसारण -विस्तारण कर रहे हो। -मुक्तिबोध 

वैसे तो में कल्पना भी नहीं कर सकता की रति -सुख की विविध संवेदनाओं की बारीकियाँ और गहराइयाँ नर और नारी के बीच चर्चा का विषय हो सकती है।-मुक्तिबोध  

सच तो यह है की लेखक को ,सिर्फ एक बात छोड़कर ,और कोई खास बात नहीं कहनी है। उसके पास कहने के लिए ज्यादा कुछ है भी नहीं। और जो कहना है वह यही की कामात्मक अनुभव के माध्यम से आध्यात्मिक प्रतीति सिद्ध हो सकती है। किन्तु यह कहने के लिए उसने व्यापक आयोजन किया है ,वह उसे पुरे समारोह के साथ ,अपना समय लेते हुए कहना चाहता है। -मुक्तिबोध 


कल्पना की पुनरावृति होती है ,और प्रतीति होता है की लेखक किसी मनोवैज्ञानिक काम -ग्रंथि से पीड़ित है। -मुक्तिबोध 


पुरुरवा की विवाहिता स्त्री  तपस्या का उपदेश दिया गया किन्तु उसके प्रति दिनकर के ह्रदय में विशेष करुणा नहीं है -मुक्तिबोध 


किसी भी कृति के मूल्य के सम्बन्ध में जितने माथे उतने मत हो सकते है ,लेकिन कोई -न -कोई इतनी निरपेक्ष कसौटी तो होनी ही चाहिए जिस पर उसे कसा जा सके और जिसे सब स्वीकार करें। किसी भी कृति के सम्बन्ध में कम -से -कम इस बात पर मतैक्य होना ही चाहिए की वह साहित्यिक कृति है या नहीं। मतभेद इस बात पर हो सकता है की वह उत्कृष्ट है या नहीं। - नामवर सिंह 


उस रचना को काव्य नहीं  ,इतिहास का ग्रन्थ मानकर उसका मूल्य आँका जाना बिलकुल अनर्गल बात है।  -रघुवीर सहाय

वास्तव में उस लेख की कमी यह है की उन्होंने एक काव्यकृति की समीक्षा उस मनोभूमि से की है जो काव्य की समीक्षा के उपयुक्त ही नहीं है। -धर्मवीर भारती


उपाध्यायजी ने पूरे उर्वशी काव्य को एक दृष्टि की समग्रता में,अंतर्योजना ,मूल्य -साँचे से सम्पृक्ति के आधार पर नहीं जाँचा। वे कभी तो कथा स्रोतों की खोजबीन करके बहुत -कुछ चोरी का मॉल सबित करने पर तुलते है तो कभी कवि के भाषा -सम्बन्धी अज्ञान का मजाक उड़ाने लगते है। कभी वे छंद की चर्चा करते है तो कभी असंगत बिम्ब- विधान की।  उनकी समीक्षा शैली पुराने खानेदार आलोचना से बहुत कुछ भिन्न नहीं है। यहाँ आलोचना और आलोच्य में संवेदनागत धरातल की एक विचित्र एकता है। -देवीशंकर अवस्थी

उर्वशी :दर्शन और काव्य  -गजानन माधव मुक्तिबोध 
मूल्यों का टकराव :'उर्वशी' विवाद - नामवर सिंह 

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उर्वशी के सम्बन्ध में मुख्य कथन 

सहायक ग्रन्थ 

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रीतिकाल ritikal

 रीतिकाल 

समय सीमा -संवत 1700 से 1900 

रीतिकाल के प्रथम कवि 

केशवदास -डॉ नगेन्द्र 
चिंतामणि - रामचंद्र शुक्ल

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रीतिकाल के अन्य नाम 

रीतिकाव्य -डॉ. जार्ज ग्रियर्सन 
अलंकृतकाल - मिश्रबन्धु 
रीतिकाल -रामचंद्र शुक्ल 
श्रृंगारकाल -विश्वनाथ प्रसाद मिश्र 
कला काल -डॉ. रमाशंकर शुक्ल रसाल 
अन्धकारकाल - त्रिलोचन 

मिश्रबन्धु तीन भाई थे -श्याम बिहारी मिश्र ,सुखदेव बिहारी , गणेश बिहारी मिश्र 

रीतिकालीन कवियों का जन्म 

  1. चिंतामणि -1609
  2. भूषण -1613
  3. मतिराम -1617
  4. बिहारी -1595
  5. रसनिधि -1603
  6. जसवंत सिंह -1627
  7. कुलपति मिश्र  -1630
  8. देव -1673
  9. नृप सम्भु -1657
  10. घनानंद -1689
  11. रसलीन -1699
  12. सोमनाथ -1700
  13. भिखारीदास -1705
  14. पद्माकर -1753
  15. ;ग्वाल कवि -1791
  16. द्विजदेव -1820
  17. सेनापति -1589
  18. केशवदास -1560
  19. ठाकुर -1766 

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मुख्य कथन 

हिंदी में  लक्षण ग्रंथों की परिपाटी पर रचना करने वाले जो सैकड़ो कवि हुए है। वे आचार्य के कोटि में नहीं आ सकते। वे वास्तव में कवि ही थे।- रामचंद्र शुक्ल 

इन्होंने शास्त्रीय मत को श्रेष्ठ और अपने मत को गौण मान लिया ,इसलिए स्वाधीन चिंतन के प्रति अवज्ञा का भाव आ गया। -हजारीप्रसाद द्विवेदी 

हिंदी के रीती आचार्य निश्चय ही किसी नवीन सिद्धांत का आविष्कार नहीं कर सके। किसी ऐसे व्यापक आधारभूत सिद्धांत का जो काव्य चिंतन को एक नई दिशा प्रदान करता है ,सम्पूर्ण रीतिकाल में आभाव है। -डॉ. नगेन्द्र 

संस्कृत में अलंकार को लेकर जैसी सूक्ष्म विवेचना हो रही थी ,उसकी कुछ भी झलक इसमें नहीं पाई जाती। शास्त्रीय विवेचना तो बहुत कम कवियों को इष्ट थी ,वे तो लक्षणों को कविता करने का बहाना भर समझते थे। वे इस बात की परवाह नहीं करते थे की उनका निर्दिष्ट कोई अलंकार किसी दूसरे में अंतर्भुक्त हो जाता है ,या नहीं। -       हजारीप्रसाद द्विवेदी 

 रीतिकाल का कोई भी कवि भक्तिभावना से हीन नहीं है -हो भी नहीं सकता था ,क्योंकि भक्ति उसके लिए मनोवैज्ञानिक आवश्यकता थी। भौतिक रस की उपासना करते हुए उनके विलास जर्जर मन में इतना नैतिक बल नहीं था की भक्ति रस में अनास्था प्रकट करें अथवा सैद्धांतिकी निषेध कर सके। - डॉ. नगेंद्र 

रीतिकाल में एक बड़े भाव की पूर्ति हो जनि चाहिए थी पर वह नहीं हुई। भाषा जिस सैकड़ों कवियों द्वारा परिमार्जित हो कर प्रौढ़ता  को पहुंची ,उसी समय व्याकरण द्वारा उसकी व्यवस्था होनी चाहिए थी। ... यदि शब्दों के रूप स्थिर हो जाते और शुद्ध रूपों के प्रयोग पर जोर दिया जाता , तो शब्दों को तोड़ -मरोड़कर विकृत करने का साहस कवियों को न होता , पर इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं हुई ,जिससे भाषा में बहुत कुछ  गड़बड़ी बनी रही। -रामचंद्र शुक्ल 

भाषा के लक्षक और व्यंजक बल की सीमा कहाँ तक है ,इसकी पूरी परख इन्ही को थी। -रामचंद्र शुक्ल (घनांनद के लिए )

प्रेममार्ग का ऐसा प्रवीण और धीर पथिक तथा जवादानी का ऐसा दवा रखने वाला ब्रजभाषा का दूसरा कवि नहीं हुआ - रामचंद्र शुक्ल (घनांनद के लिए )

घनानंद ने न तो बिहारी की तरह तप को बाहरी पैमाने से मापा है , न बाहरी उछल- कूद  दिखाई देती है। जो कुछ हलचल है ,वह भीतर की है ,बाहर से वह वियोग प्रशांत और गम्भीर है। रामचंद्र शुक्ल (घनांनद के लिए )

प्रणय विभोर मन की ऐसी कोई वृत्ति नहीं है जिसका सहज स्वाभाविक चित्रण घनानंद ने न किया हो। रामचंद्र शुक्ल (घनांनद के लिए )

इनकी सी विशुद्ध ,सरस और शक्तिशाली ब्रजभाषा लिखने में और कोई कवि समर्थ नहीं हुआ। रामचंद्र शुक्ल (घनांनद के लिए )

ठाकुर ने लोकोक्तियों  प्रयोग द्वारा ,रसखान ने मुहावरों द्वारा ,आनंदघन ने लक्षणा , मुहावरों व्याकरण -शुद्धि आदि गुणों से भाषा का स्वरुप को सुसंस्कृत बनाया। -डॉ मोहन लाल गौण

केशव को कवि ह्रदय नहीं मिला था। उनमे वह सहृदयता और भावुकता न थी जो एक कवि में होनी चाहिए। कवी कर्म में सफलता के लिए  भाषा पर जैसा अंधकार चाहिए वैसा उन्हें न प्राप्त था। केशव केवल उक्ति वैचित्र्य एवं शब्द क्रीड़ा के प्रेमी थे। -रामचंद्र शुक्ल

रीतिकाल के प्रतिनिधि कवियों में पद्माकर को छोड़ और किसी कवि में मतिराम सी चलती भाषा और सरल व्यंजना नहीं मिलती। उनकी भाषा में नाद सौंदर्य भी विद्यमान है। -रामचंद्र शुक्ल (मतिराम के सम्बन्ध में )

इन दो वीरों का जिस उत्साह के साथ सारी हिन्दू जनता स्मरण करती है,उसी की व्यंजना भूषण ने की है। वे हिन्दू जाती के प्रतिनिधि कवि है।

 जिस कवि में कल्पना की समाहार शक्ति के साथ भाषा की समास शक्ति जितनी ही अधिक होगी उतना ही वह मुक्तक की रचना में सफल होगा। यह क्षमता बिहारी में पूर्णरूप से विद्यमान थी।- रामचंद्र शुक्ल

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आपहुदरी

आपहुदरी 

लेखिका -रमणिका गुप्ता
जन्म -1930
मृत्यु -2019
प्रकाशन वर्ष -2016
विधा -आत्मकथा 

स्त्री आत्मकथा लेखन इस समय जोरों  पर है। 1990 के दशक के बाद महिला आत्मकथाओं की एक क़तार सी लग गई। जिसमें महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचारों का वर्णन था। वह अपने अधिकार को पाना चाहती थी। उन्हें लड़कों से नीचा देखना , गर्भ में ही मार देना।  ऐसे ही अनेक परिस्थितियों से एक नारी को गुजरना पड़ता था। ऐसे में कई नारी को उनके अधिकारों को प्रेरित करने वाली साहित्यिक रचनाये लिखी गई। उसमे सबसे सशक्त रूप में उभरा आत्मकथा लेखन जो स्त्री की एक सच्ची कथा थी। जो उन लोगों को भी जवाब देती थी जो यह नहीं मानते थे की स्त्रियों के साथ गलत नहीं होता। काफी लेखिकाएँ तो शादी जैसी दाम्पत्य जीवन का सफल निर्वाह करने वाले कारकों को ही गलत ठहराने में लग गई। ऐसी ही लेखिकाओं में है -रमणिका गुप्ता जो शारीरिक यौन संबंधो का कही शिकार हुई तो कही इसके रास्ते वह कई जगह पहुंची। उनके लिए एक से अधिक शारीरिक सम्बन्ध बनाना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने अपने जीवन में अनेक शारीरिक सम्बन्ध बनाए। उन्ही सम्बन्धों की दास्तान  है आपहुदरी। यहाँ उन्होंने उन पारिवारिक रिश्तों को भी खंगाला है जो पवित्र कहलाता है लेकिन अगर वही सम्बन्ध अपवित्र हो जाये तो क्या करे? उन पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है।

रमणिका गुप्ता की पहली आत्मकथा है 'हादसे' जिसमे उनके राजनैतिक ,सामाजिक यथार्थ को दिखाया गया है।
वही आपहुदरी उसके पारिवारिक जीवन की कथा है।

आपहुदरी का अर्थ होता है 'स्वछंद' यह पंजाबी भाषा का शब्द है। लेखिका कहती है -
                                                                                                       
                                                                                                                     " मैं औरत के लिए स्वछंद शब्द को स्वतंत्र से बेहतर मानती हूँ. मैं स्वछन्द होना श्रेयस्कर समझती हूँ चूँकि इसमें छद्म नहीं है , दम्भ भी नहीं है।"

रमणिका गुप्ता अपने वयःसंधि का वर्णन करते हुए बताती है।
                                                                                         "कभी -कभी मैं स्वयं अपने शरीर में होते बदलाव को देखती छूती और अपने अंगो को सहलाती। मुझे कुछ बदला -बदला नजर आता।"

                   "अपने वक्ष को देखकर मुस्कराती। कनखियों से अपने उभार को देखती।"

बलराम रमणिका गुप्ता का पहला प्यार था। वह उसके द्वारा उसके प्यार का अहसास करती है।
                                                                                                                                            "उस दिन मानों  किसी ने हमारी पोर -पोर में बलराम लिख दिया। यह हम दोनों के लिए प्रेम का पहला एहसास था।"

रमणिका गुप्ता का बचपन से ही शारीरिक शोषण होता है। उसका नौकर रामू ही ऐसा करता है।
                                                                                                                                            "मुझे रात भर ऐसा लगता रहा था , जैसे कोई साँप मुझे लपेटे जा रहा है। एक डर -सा मन में समा गया। अगले दिन मैंने जिद्द ठान ली थी कि मैं बीबी जी के पास सोऊंगी ,रामु के पास नहीं।"

एक शिक्षक का दर्जा हमारी संस्कृति और समाज में हमेशा आदर के पात्र रहा है। माता -पिता के बाद गुरु का स्थान  ही सर्वोपरि है।  भक्तिकाल में गुरु को  समाज का सच्चा रूप दिखानेवाला , परमात्मा से साक्षात्कार करवाने वाला माना गया है।

                "सतगुरु की महिमा अनंत ,अनंत किया उपगार।
                 लोचन अनंत उघाड़िया , अनंत दिखावण हार।"

कबीर ने इस दोहे में उन्हें नेत्रों को खोलने वाला बताया है।  सत्य से साक्षात्कार की बात की है।  वही पूज्य समझे जाने वाले गुरु में , ऐसे भी गुरु छुपे हुए है जो अपने स्वार्थों में लिप्त है। हवस के पुजारी है जिन्हें समय मिलने पर वह किसी भी औरत और लड़की को बस एक ही निगाह से देखते है। अपनी यौन इच्छा पूरी करने की ललक उनमे हमेशा समाहित रहती है। रमणिका गुप्ता ने ऐसे ही सत्य को उजागर किया है। यह सह शिक्षक को रमणिका गुप्ता के माता -पिता से ही मिला। वह उनके सामने भी रमणिका गुप्ता के साथ रजाई में बैठ जाता था।

                                                                                                                "वह पापा जी और बीबी जी  की नाक तले मेरी रजाई में घुसकर बैठ जाता था पर उस मास्टर पर पापा जी और बीबी जी का इतना विश्वास था की अगर मैं उसके बारे में कुछ बोलती भी ,तो वह झूठ माना जाता।  उसके खिलाफ बोलने का मतलब था मार खाना।"

यौन इच्छा अब लेखिका की खुद की भी चाह बन गई थी। अब वह इन्ही ख्यालों में खोई रहती थी।
                                                                                                                                        "फिर मास्टर का चेहरा गौण होता गया और रह गया साँप। तब से मैं बिना चेहरे वाली उस हरकत में इतना लिप्त हो गयी की वह एक आदत बन गयी ,जो छूटती न थी।"

लेखिका का यह कथन इस आत्मकथा को और प्रमाणित करता है। आत्मकथा के मुख्य लक्ष्य उसकी सत्यता उसे उजागर करता है की लेखिका ने अपने मन की बात को भी दिखाया है जो मनोवैज्ञानिक सच्चाई है।

रमणिका गुप्ता अपने पारिवारिक सच्चाई  को भी उजागर करती है कि  पिता  , माँ के बाद भी अन्य स्त्रियों से सम्बन्ध रखते थे । वह संतरा नाम के एक हरियाणवी स्त्री के सम्बन्ध में बताती है। संतरा की शादी को 10 साल हो गए थे उसका बच्चा भी नहीं था। घर वाले उसे इसके लिए प्रताड़ित करते थे वह हिस्टीरिया रोग से ग्रसित हो गई। वह ईलाज करने इनके पिता के पास आने लगी।  लेखिका उनके इस सम्बन्ध को यौन सम्बन्ध से जोड़ती हुई दिखाती है।
                   "सुई लगवा के आती हूँ ,कह कर वह पापा जी के कमरे में घुस जाती थोड़ी देर में बाहर आती ,तो चोली बांधती या घघरी संभालती। उसका हिस्टीरिया और बाँझपन दोनों खत्म हो गए।"

वह अपने नाना और मौसी के सम्बन्ध को भी समझ नहीं पाती है की वह कैसा सम्बन्ध है। रमणिका गुप्ता की मौसी शादी के बाद पति को छोड़कर मायके ही रहती है। -
                                                                                    "मुझे नहीं भूलता कभी मौसी का नाना के बाहर वाले कमरे में चुपचाप चले जाना और सलवार टूंगते या गाल पोछते बाहर आना।"

बच्चों के उनके परिवेश का असर उन पर पड़ता है। माता- पिता के सम्बन्ध उनके सामने उनके मनोवैज्ञानिक रूप से निर्माण में सहायक होते है। अगर उनके सामने थोड़ा खुलापन होता है तो उसका नकारात्मक असर बच्चे पर पड़ता है।  'आपका बंटी' उपन्यास में भी यह दिखाया गया है। बंटी अपने माँ और डॉक्टर के कमरे में चला जाता है। तब उसे एक अलग सा अहसास होता है। वही  इसका जिक्र 'शेखर एक जीवनी' में भी है। ऐसे ही स्थिति में 'रमणिका गुप्ता' का भी मनोवैज्ञानिक धरातल तैयार हो रहा था। एक सामान्य खेल है जो अधिकांशतः बच्चे खेलते है बचपन में -शादी का खेल। उसी खेल का जिक्र रमणिका गुप्ता करती है। उस खेल का मनोवैज्ञानिक धरातल हमारा कहा से बना होता है। वही जो हम घर में देखते है क्योंकि इसका खुलापन आपकी गलियों में नहीं होता , न ही हमे 5 क्लास तक ऐसा कुछ पढ़ाया जाता है। यह संस्कार हमे घर से ही प्राप्त होते है। जिसमे गलत सही का ज्ञान नहीं होता बस करने की इच्छा होती है और घर वाले कर रहे है तो अच्छा ही होगा। लेखिका यह खेल अपनी दोस्त खातून के साथ खेलती है।
                                                                 "हमसे तो आपने हमारी कच्छी खुलवा ली ,अब आपकी बारी है। अपनी सलवार खोलो। खातून की सलवार भी मैंने खोल दी। कुछ खास  फर्क न था। सिर्फ बाल उग आये थे। 'यह बनेगी मम्मी' मैं बोली -बीबी जी जब नहाती है तो उनके बाल भी ऐसे होते है।"

रमणिका गुप्ता ने अपनी शादी अपने मन पसंद लड़के से की। जिसका नाम है  वेदप्रकाश , वेदप्रकाश सहायक एम्प्लॉयमेंट ऑफिसर है। रमणिका गुप्ता अपने परिवार से विद्रोह करके अंतर्जातीय विवाह करती है। वेदप्रकाश जाती से बनिया है और रमणिका गुप्ता राजपूत। लेकिन इनका भी परिवार नहीं चल पाया। दोनों एक दूसरे पर शक करते थे।  रमणिका गुप्ता बताती है की वेदप्रकाश अपने छोटे भाई और रमणिका गुप्ता का सम्बन्ध बताते है। लेखिका कहती  है  -

                                        "यशपाल तो मुझे बच्चे जैसा नजर आता था।  मेरे सामने उसके व्यक्तित्व का कोई अंश नहीं था ,जो मेरे अनुरूप या समकक्ष हो। मैं फुट -फुटकर रोई  थी उस दिन।"

वही लेखिका वेदप्रकाश गुप्ता का  सम्बन्ध  उनकी भाभी से जोड़ती है। वह यहाँ तक कह देती है की उनकी भाभी की छोटी लड़की वेदप्रकाश गुप्ता की ही है।

                                                                          "भी प्रकाश के कॉलेज से आने की  राह  ताकती रहती। उनके आते ही चुपचाप टेबल पर चाय लेकर रख देती थी। स्नेह से नाश्ता भी परोस देती थी। कभी प्यार से मुँह में खिला देती और उनका जूठन खुद खा लेती। भाभी के पति बाहर ही रहते थे। उनके पास प्रकाश ही होता था। भाभी की छोटी बेटी तो प्रकाश की ही बेटी थी।"

यहाँ से शुरू होती है रमणिका गुप्ता के शारीरिक इच्छा पूर्ति की दास्तान जो शुरू हुई और अलग अलग लोगो से बनती भी रही। कभी अपने नृत्य शिक्षक के साथ , आहूजा के साथ , और जो भी उन्हें अच्छा लगा उनके साथ चाहे अच्छी उपाधि प्राप्त करनी हो तो मुख्यमंत्री या फिर कैबिनेट मंत्री के साथ।

आहूजा के साथ बनाए गए सम्बन्ध के बारे में लेखिका बताती है-                         
                                                                                                   "अपने को पहचानने , अपनी पहचान बनाने और कुछ कर गुजरने के इरादे से लैस ,लक्ष्य स्पष्ट नहीं था पर कुछ छटपटाहट थी ,एक असंतोष था ,एक बौखलाहट भी और कुछ हासिल करने की ललक ,हदे छू रही इच्छा। यह इच्छा ही मेरे जीने की इच्छा शक्ति थी। शायद जो अच्छे ,बुरे सब रास्ते टटोलने से गुजर नहीं सकती थी।"

वही लेखिका यह भी दिखती है की आहूजा किस प्रकार उनके अंगो की व्याख्या करता था। -
                                                                                                                                           "वह मेरे एक- एक अंग  की व्याख्या करता , एक -एक अंग का एहसास मुझे कराता उसकी तेज साँस मुझे छूती और मेरी साँसे पी जाती।"   

बिहार के मुख्यमंत्री के साथ बनाये सम्बन्ध के बारे में बताती है।      
                                                                                           "तुम कॉंग्रेस पार्टी का काम करो। मेरा मन तो तुमने जीत  ही लिया है। यह कहते हुए उन्होंने मुझे आगोश में लेकर चुम लिया। मैं विरोध नहीं कर सकी या शायद में अपना देख रही थी।"

रमणिका गुप्ता की  आत्मकथा कितना सार्थक प्रभाव डालेगी यह में नहीं कह सकता। यह आत्मकथा बचपन तक के दौर में काफी प्रभावी है। लेकिन जैसे यह शादी के बाद अपने अन्य सम्बन्धों के स्तर पर  गलत होती है और लेखिका उसी का पल्ला पकड़ कर ऊपर चढ़ी है। मेरा तो उनसे यह प्रश्न है की वो आपहुदड़ी है तो तब उनका स्वर कहा चुप हो जाता है जब उनका शिक्षक उनके साथ गलत करता है ,रामू उनके साथ गलत करता है। यहाँ रमणिका गुप्ता की इच्छा ही सम्बन्ध बनाना है जो  वह अलग -अलग व्यक्तियों से सम्बन्ध बनाती है लेकिन इनकी इसी सच्चाई से दूसरी तरफ वह भी पुरुष नग्न होता है जो स्त्रियों को इसी दृष्टि से देखते है।

अंततः यह आत्मकथा मेरे हिसाब से उन पारिवारिक जीवन मूल्यों की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। इस आत्मकथा को लोगों को मनोरंजन के लिए पढ़ने के लिए सही है। अपने जीवन पर लागु करने के लिए नहीं। कुछ चीजे सिखने लायक है ,मगर पुरे आत्मकथा को देखने पर यह अन्य  दैहिक स्वतंत्रता की माँग करने वाली आत्मकथा है। नेट के पाठ्यक्रम में लगने वाली तो कतई नहीं।

आपहुदड़ी आत्मकथा के बारे में कथन -

  • आपहुदड़ी एक दिलचस्प और दिलकश आत्मकथा है। यह एक स्त्री की आत्मकथा है। इसमें विभाजन के समय दंगे दर्ज है , इसमें बिहार राजनेताओं के चेहरे की असलियत दर्ज है। इसमें संवादधर्मिता और नाटकीयता दोनों है।  आत्मकथा इसलिए भी  विशिष्ट है की रमणिका जी ने जैसा जीवन जिया महसूस किया है , वैसा ही लिखा। -      मैनेजर पाण्डेय 

  • एक पाठक के तौर पर में इस आत्मकथा को एक स्त्री की मुक्ति या आजादी के तौर पर नहीं देखता। यह स्त्री वैचारिकी भी नहीं है। आत्मकथा में अद्भुत अपूर्व स्मृतिया है। इस आत्मकथा के माध्यम से अपने साहस की कथा कही है।आपहुदड़ी आत्मकथा के रूप में एक मोड़ भी है।  -लीलाधर मंडलोई 

  • आपबीती के इस बयां में ऐसा है क्या जो मुझे स्तब्ध कर रहा है -नैतिक निर्णयों को इसका ठेंगा ,इसका तथा कथित पारिवारिक पवित्रता के ढकोसलों का उद्धघाटन ,इसकी बेबाकबयानी ,इसकी निसंकोच निडरता ,सच बोलने का इसका आग्रह और साहस या अपने बचाव पक्ष के प्रति लापरवाही। -अर्चना वर्मा 

देवकांत सिंह -मोबाईल न-9555935125 

नेट / जे. आर. एफ

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जामुन का पेड़

जामुन का पेड़ 

व्यंग रचना 

लेखक -कृष्ण चन्दर 

जन्म- 1914 

देहावसान -1977 

प्रकाशन वर्ष -1960 के दशक  में 

लोकतांत्रिक ढांचे में शासन प्रशासन में व्याप्त भ्र्ष्टाचार को उजागर करने वाली व्यंग रचना 

जामुन का पेड़ व्यंग्यात्मक रचना एक जामुन के पेड़ के नीचे दबे व्यक्ति का दर्द , जो अंततः शासन , प्रशासन के लापरवाही के कारण दम तोड़ देता है।  उसकी कथा है कहानी की शुरुवात होती है व्यक्ति के जामुन के पेड़ के नीचे दबने से जो सेक्रेटेरिएट के लॉन में लगी हुई थी।  माली जब एक व्यक्ति को उसके नीचे दबा हुआ देखता है तो वह दौड़ता हुआ चपरासी के पास जाता है।  चपरासी क्लर्क के पास और क्लर्क सुपरिंटेंडेंट के पास।  सभी लोग फिर उस व्यक्ति को देखने आते है। देखने पर क्लर्क उस व्यक्ति के दबने का ध्यान न  देकर वह जामुन के पेड़ के प्रति अपना दर्द बयान करते है।
                            "बेचारा जामुन का पेड़ कितना फलदार था। पहला क्लर्क" 

दूसरे क्लर्क को जामुन का रसीलापन याद आता है। 

                                "इसकी जामुन कितनी रसीली होती थी। दूसरा क्लर्क" 

तीसरे क्लर्क को अपने साथ अपने बच्चों की भी याद आ गयी की कितने खुशी से वह जामुन खाते थे।

"मैं फलों के मौसम में झोली भर के ले जाता था।  मेरे बच्चे इसकी जामुन कितनी खुसी से कहते थे।  तीसरा क्लर्क यह कहते हुए उसका गला भर आया।" 

माली सबको जामुन से ध्यान हटाकर उसके नीचे दबे व्यक्ति के प्रति केंद्रित करता है। तब सुपरिंटेंडेंट,  अंडर सेक्रेटरी के पास ,अंडर सेक्रेटरी ,डिप्टी सेक्रेटरी के पास ,डिप्टी सेक्रेटरी , जॉइंट सेक्रेटरी के पास जॉइंट सेक्रेटरी चीफ सेक्रेटरी के पास जाते है।  इन सब कामों में ही वह अपना आधा दिन बिता देते है। 

इसे वाणिज्य विभाग से , कृषि विभाग को भेजा जाता है क्योंकि यह खेती बाड़ी से सम्बंधित है।  वह यह कहकर इसे हार्टिकल्चर विभाग में भेज देते है की इस पर फल लगा हुआ है इसका आदेश वही से मिलेगा की इसका क्या करना है।  

तीसरे दिन हार्टिकल्चर विभाग अपना सन्देश देते है। 

                                                                     "हैरत है , इस समय जब पेड़ उगाओ स्किम बड़े पैमाने पर चल रही है , हमारे मुल्क में ऐसे सरकारी अफसर मौजूद है। जो पेड़ काटने की सलाह दे रहे है। वह भी फलदार पेड़ को !और वह भी जामुन के पेड़ को !जिसके फल जनता बड़े चाव से खाती है हमारा विभाग किसी भी हालत में पेड़ को काटने की इजाजत नहीं दे सकता।" 

 एक मनचले व्यक्ति ने आदमी को काट कर निकलने की बात कही और बाद में प्लास्टिक सर्जरी के जरिये जोड़ने की। 

                  "आप जानते नहीं है।  आजकल प्लास्टिक सर्जरी के जरिये धड़ की जगह से , इस आदमी को फिर से जोड़ा जा सकता है।"

इसे बिच से काट कर फिर से जोड़ने पर यह जिन्दा रहेगा या नहीं इस लिए रिपोर्ट मेडिकल डिपार्टमेंट में भेजी जाती है। 
बाद में पता चलता है की पेड़ के नीचे दबा हुआ व्यक्ति कवि है। उसने 'ओस के फूल' कविता लिखी है।  फिर वहाँ कवियों का जमावड़ा लग जाता है।  वहाँ कविता होने लगती है।  

अंततः फॉरेस्ट डिपार्टमेंट वाले आरी ले कर उसे काटने आते है। 

                                                                                "दूसरे दिन जब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में आदमी आरी कुल्हाड़ी लेकर चहुंचे तो उनको पेड़ काटने से रोक दिया गया।  विदेश विभाग से हुक्म आया की इसे न कटा जाये।" 

पेड़ को न काटने का कारण था -
                                                 "इस पेड़ को दस साल पहले पिटोनिया राज्य के प्रधानमंत्री ने सेक्रेटेरिएट के लॉन में लगाया था।"  

अंत में जब आदेश आता है तब सुपरिटेंडेंट उस व्यक्ति को बताने जाता है की कल तुम्हे बचा लिया जायेगा तब तक वह
व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त हो चूका होता है।

                                                       "सुनते हो ?आज तुम्हारी फाइल मुक्कमल हो गई है। सुप्रीटेंडेट ने शायर के बाजू  को हिलाकर कहा मगर शायर का हाथ सर्द था।  आँखों की पुतलियाँ बेजान थी और चीटियों की एक लम्बी कतार उसके मुँह में जा रही थी।"
"उसकी जिंदगी की फाइल भी मुकम्मल हो चुकी थी।"

अन्य जानकारी 

आई सी एस सी  के पाठ्यक्रम से इसे 2020 में हटा दिया गया। 
यह 2015  से उनके पाठ्यक्रम में लगी हुई थी।

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पत्नी कहानी का सारांश, जैनेंद्र कुमार की पत्नी कहानी, Patni kahani summary.

  'पत्नी' हिंदी के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार जैनेंद्र कुमार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुचर्चित कहानी है। यह कहानी भारतीय समाज...