संप्रेषण (Communication) प्रक्रिया

 संप्रेषण (Communication) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से हम अपने विचारों, संदेशों और भावनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। यह केवल बोलना या सुनना नहीं है, बल्कि एक व्यवस्थित चक्र है।

संप्रेषण की प्रक्रिया के मुख्य सात तत्व होते हैं:


संप्रेषण प्रक्रिया के मुख्य चरण

क्रमतत्व (Element)विवरण
1प्रेषक (Sender)वह व्यक्ति जो संदेश भेजने की शुरुआत करता है।
2संदेश (Message)वह जानकारी या विचार जिसे साझा किया जाना है।
3कूटलेखन (Encoding)विचारों को शब्दों, संकेतों या चित्रों में बदलना।
4माध्यम (Channel)जिस रास्ते से संदेश भेजा जाता है (जैसे: फोन, ईमेल, आमने-सामने)।
5कूटवाचन (Decoding)प्राप्तकर्ता द्वारा संदेश को समझने की प्रक्रिया।
6प्राप्तकर्ता (Receiver)वह व्यक्ति जिसे संदेश भेजा गया है।
7प्रतिपुष्टि (Feedback)प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया, जिससे पता चलता है कि संदेश सही पहुँचा या नहीं।

यह प्रक्रिया कैसे काम करती है?

  1. विचार का जन्म: प्रेषक के मन में एक विचार आता है।

  2. इनकोडिंग: वह उस विचार को भाषा या संकेतों में ढालता है।

  3. प्रेषण: माध्यम (जैसे हवा, इंटरनेट या कागज़) का उपयोग करके संदेश भेजा जाता है।

  4. डिकोडिंग: प्राप्तकर्ता उस संदेश को अपने ज्ञान के अनुसार समझता है।

  5. फीडबैक: अंत में, प्राप्तकर्ता उत्तर देता है, जिससे संप्रेषण का चक्र पूरा होता है।

विशेष नोट: इस पूरी प्रक्रिया में 'शोर' (Noise) एक बाधा के रूप में काम कर सकता है, जो संदेश को स्पष्ट रूप से पहुँचने से रोकता है।


 

संप्रेषण (Communication) मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है।  

1. शाब्दिक संप्रेषण (Verbal Communication)

जब हम विचारों के आदान-प्रदान के लिए शब्दों का प्रयोग करते हैं, तो इसे शाब्दिक संप्रेषण कहते हैं। इसके दो उप-प्रकार हैं:

  • मौखिक संप्रेषण (Oral Communication): इसमें बोलकर संदेश दिया जाता है।

    • उदाहरण: आमने-सामने बातचीत, फोन पर बात करना, भाषण, मीटिंग।

    • फायदा: इसमें प्रतिक्रिया (Feedback) तुरंत मिल जाती है।

  • लिखित संप्रेषण (Written Communication): इसमें लिखकर जानकारी साझा की जाती है।

    • उदाहरण: पत्र, ईमेल, रिपोर्ट, व्हाट्सएप मैसेज, नोटिस।

    • फायदा: इसका भविष्य के लिए रिकॉर्ड रखा जा सकता है।


2. अशाब्दिक संप्रेषण (Non-Verbal Communication)

अक्सर हम बिना बोले भी बहुत कुछ कह जाते हैं। जब शब्दों का प्रयोग किए बिना केवल संकेतों और शारीरिक हाव-भाव से बात की जाए, तो उसे अशाब्दिक संप्रेषण कहते हैं।

  • शारीरिक भाषा (Body Language): आपके बैठने का तरीका, हाथों का हिलना।

  • चेहरे के हाव-भाव (Facial Expressions): मुस्कुराहट (खुशी), माथे पर बल (गुस्सा या चिंता)।

  • नेत्र संपर्क (Eye Contact): आँखों में देखकर बात करना आत्मविश्वास दर्शाता है।

  • स्पर्श (Touch): जैसे हाथ मिलाना या पीठ थपथपाना।

  • संकेत और चिह्न: जैसे ट्रैफिक लाइट या 'थम्स अप' का इशारा।


एक नज़र में तुलना

प्रकारमाध्यमप्रभाव
मौखिकवाणी/आवाज़व्यक्तिगत और त्वरित
लिखितकागज़/डिजिटलऔपचारिक और स्थायी
अशाब्दिकहाव-भाव/संकेतभावनाओं को दर्शाने में प्रबल

 

संप्रेषण की बाधाएं (Barriers to Communication) वे तत्व हैं जो संदेश को सही रूप में प्राप्तकर्ता तक पहुँचने से रोकते हैं। इनके कारण अक्सर गलतफहमियाँ पैदा होती हैं।

मुख्य बाधाओं को हम इन चार श्रेणियों में बाँट सकते हैं:

1. भाषा संबंधी बाधाएं (Semantic Barriers)

जब प्रेषक और प्राप्तकर्ता शब्दों या भाषा के अर्थ को अलग-अलग समझते हैं।

  • गलत शब्द चयन: एक ही शब्द के अलग-अलग अर्थ होना।

  • अस्पष्ट शब्द: तकनीकी शब्दों (Jargon) का अधिक उपयोग करना जो सामने वाले को न पता हों।

  • खराब अनुवाद: यदि संदेश का अनुवाद सही ढंग से न किया गया हो।

2. मनोवैज्ञानिक बाधाएं (Psychological Barriers)

यह प्रेषक या प्राप्तकर्ता की मानसिक स्थिति पर निर्भर करती हैं।

  • समय से पूर्व मूल्यांकन: संदेश पूरा होने से पहले ही उसका निष्कर्ष निकाल लेना।

  • ध्यान न देना: जब प्राप्तकर्ता का मन कहीं और हो और वह आपकी बात न सुन रहा हो।

  • अविश्वास: यदि प्रेषक और प्राप्तकर्ता एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते, तो संदेश का सही प्रभाव नहीं पड़ता।

3. संगठनात्मक बाधाएं (Organizational Barriers)

ये बाधाएं किसी कंपनी या संस्था के नियमों के कारण आती हैं।

  • जटिल नियम: बहुत अधिक नियमों के कारण जानकारी ऊपर से नीचे तक पहुँचने में देरी होना।

  • पद का अंतर: उच्च अधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारी के बीच संकोच के कारण खुलकर बात न हो पाना।

  • दूरी: कार्यालयों का अलग-अलग शहरों या मंजिलों पर होना।

4. भौतिक बाधाएं (Physical Barriers)

ये बाहरी वातावरण से संबंधित होती हैं।

  • शोर (Noise): कारखाने की आवाज़, फोन में नेटवर्क की खराबी या ट्रैफिक का शोर।

  • तकनीकी खराबी: इंटरनेट का न चलना या माइक खराब होना।

  • दूरी: प्रेषक और प्राप्तकर्ता का बहुत दूर होना।


इन बाधाओं को दूर करने के उपाय:

  • सरल और स्पष्ट भाषा का प्रयोग करें।

  • एक अच्छे श्रोता (Good Listener) बनें।

  • संदेश भेजने के बाद 'फीडबैक' जरूर लें।

  • सही समय और सही माध्यम का चुनाव करें।

 

प्रभावी संप्रेषण (Effective Communication) के 7 Cs सात ऐसे सिद्धांत हैं, जिनका पालन करने पर आपका संदेश स्पष्ट, प्रभावशाली और पेशेवर बनता है।

यहाँ इन 7 सिद्धांतों का विवरण दिया गया है:


1. स्पष्टता (Clarity)

आपका उद्देश्य और संदेश एकदम स्पष्ट होना चाहिए। एक बार में एक ही बात कहें ताकि प्राप्तकर्ता भ्रमित न हो।

  • क्या करें: सरल भाषा और छोटे वाक्यों का प्रयोग करें।

2. संक्षिप्तता (Conciseness)

कम से कम शब्दों में अपनी बात कहें। फालतू की बातें संदेश को उबाऊ बना देती हैं।

  • क्या करें: मुख्य मुद्दे पर टिके रहें और दोहराव से बचें।

3. पूर्णता (Completeness)

संदेश में पूरी जानकारी होनी चाहिए। अधूरा संदेश गलतफहमी पैदा करता है।

  • क्या करें: सुनिश्चित करें कि प्राप्तकर्ता को क्या, कब, कहाँ और कैसे (5Ws) का उत्तर मिल गया है।

4. यथार्थता/ठोसपन (Concreteness)

अपनी बात को तथ्यों और आंकड़ों के साथ कहें, न कि काल्पनिक बातों के आधार पर।

  • क्या करें: विशिष्ट जानकारी दें (जैसे: "हमारी सेल 20% बढ़ी" न कि "हमारी सेल बहुत बढ़ी")।

5. शिष्टता (Courtesy)

संप्रेषण के दौरान भाषा विनम्र और सम्मानजनक होनी चाहिए। यह प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच अच्छे संबंध बनाती है।

  • क्या करें: सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करें और प्राप्तकर्ता की भावनाओं का सम्मान करें।

6. शुद्धता (Correctness)

संदेश में व्याकरण (Grammar), स्पेलिंग और तथ्यों की कोई गलती नहीं होनी चाहिए।

  • क्या करें: जानकारी भेजने से पहले उसे दोबारा जांचें।

7. निरंतरता/संगति (Consideration)

संदेश प्राप्तकर्ता के नजरिए से तैयार किया जाना चाहिए (इसे 'You' दृष्टिकोण भी कहते हैं)।

  • क्या करें: प्राप्तकर्ता की शिक्षा, मानसिकता और जरूरतों को ध्यान में रखकर बात करें।


निष्कर्ष: यदि आप इन 7 नियमों का पालन करते हैं, तो आपके संदेश के गलत समझे जाने की संभावना न के बराबर हो जाती है।

 

संगठन या संस्था में संप्रेषण के प्रवाह के आधार पर इसे दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है: औपचारिक (Formal) और अनौपचारिक (Informal)


1. औपचारिक संप्रेषण (Formal Communication)

यह वह संप्रेषण है जो संस्था द्वारा बनाए गए नियमों और पदानुक्रम (Hierarchy) के अनुसार चलता है। इसमें संदेश एक तय रास्ते से होकर गुजरता है।

  • विशेषताएँ:

    • यह लिखित और आधिकारिक होता है।

    • इसमें रिकॉर्ड रखा जाता है।

    • यह काम से संबंधित होता है (जैसे: आदेश, रिपोर्ट, ईमेल)।

  • प्रवाह के प्रकार:

    • अधोगामी (Downward): ऊपर के अधिकारी से नीचे के कर्मचारी तक (जैसे: ऑर्डर देना)।

    • उपरिगामी (Upward): नीचे के कर्मचारी से ऊपर के अधिकारी तक (जैसे: शिकायत या रिपोर्ट)।

    • क्षैतिज (Horizontal): समान पद वाले लोगों के बीच बातचीत (जैसे: दो मैनेजरों के बीच चर्चा)।


2. अनौपचारिक संप्रेषण (Informal Communication)

इसे ही अक्सर 'अंगूरीलता संप्रेषण' (Grapevine Communication) कहा जाता है। यह संस्था के आधिकारिक नियमों का पालन नहीं करता। यह कर्मचारियों के बीच उनके आपसी सामाजिक संबंधों और दोस्ती के कारण विकसित होता है।

अंगूरीलता (Grapevine) क्यों कहते हैं?

जिस तरह अंगूर की बेल का कोई निश्चित आकार नहीं होता और वह किसी भी दिशा में फैल जाती है, वैसे ही यह संप्रेषण भी किसी भी दिशा में और बहुत तेजी से फैलता है।

  • विशेषताएँ:

    • यह बहुत तेज़ होता है (अफवाहें इसी से फैलती हैं)।

    • इसका कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं होता।

    • इसमें जानकारी का स्रोत (Source) पता लगाना मुश्किल होता है।


औपचारिक बनाम अनौपचारिक: एक संक्षिप्त तुलना

आधारऔपचारिक संप्रेषणअनौपचारिक (अंगूरीलता)
गतिधीमी (प्रक्रिया के कारण)बहुत तेज़
प्रमाणलिखित और प्रामाणिकमौखिक और अविश्वसनीय
उद्देश्यसंगठनात्मक लक्ष्य पूरा करनासामाजिक संबंध और जिज्ञासा
त्रुटियाँकम होने की संभावनाजानकारी बिगड़ने की अधिक संभावना

अंगूरीलता संप्रेषण (Grapevine) के फायदे और नुकसान

  • फायदे: इससे फीडबैक बहुत जल्दी मिलता है और कर्मचारी तनाव मुक्त महसूस करते हैं।

  • नुकसान: यह गलत जानकारी या अफवाहें फैला सकता है, जिससे संस्था के माहौल पर बुरा असर पड़ सकता है।

 'सार्वजनिक भाषण' (Public Speaking)  

जब एक व्यक्ति बहुत बड़े समूह को संबोधित करता है, तो उसे सार्वजनिक भाषण कहते हैं। यहाँ संप्रेषण की प्रक्रिया थोड़ी अलग और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।


प्रभावी सार्वजनिक भाषण (Effective Public Speaking) के गुर

एक अच्छा वक्ता बनने के लिए आपको निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए:

  1. विषय की तैयारी: आपको पता होना चाहिए कि आप क्या बोल रहे हैं। बिना तैयारी के बोलना आत्मविश्वास को कम करता है।

  2. श्रोताओं को समझना: अपनी बात उनके मानसिक स्तर और भाषा के अनुसार कहें।

  3. शारीरिक भाषा (Body Language): सीधे खड़े हों, लोगों की आँखों में देखकर बात करें और उचित हाथों के संकेतों का प्रयोग करें।

  4. आवाज़ का उतार-चढ़ाव (Modulation): एक ही स्वर में न बोलें। महत्वपूर्ण बातों पर ज़ोर दें और ज़रूरत पड़ने पर रुकें (Pause)।


संप्रेषण के आधुनिक माध्यम (Modern Tools of Communication)

आज के समय में संप्रेषण के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। अब हम पारंपरिक चिट्ठियों से आगे बढ़कर इन माध्यमों का उपयोग करते हैं:

  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग: Zoom, Google Meet और Teams के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से आमने-सामने बात करना।

  • सोशल मीडिया: Twitter (X), LinkedIn और Instagram के माध्यम से अपनी बात लाखों लोगों तक पहुँचाना।

  • इंस्टेंट मैसेजिंग: WhatsApp और Telegram जैसे ऐप्स ने संप्रेषण की गति को 'रियल-टाइम' बना दिया है।


संप्रेषण का एक पूरा चक्र (The Full Cycle)

संप्रेषण केवल जानकारी भेजना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि संदेश वैसा ही समझा गया जैसा प्रेषक चाहता था। नीचे दिए गए चित्र से आप पूरी प्रक्रिया को एक बार में समझ सकते हैं:


 

नौकरी के साक्षात्कार (Job Interview) में संप्रेषण या कम्युनिकेशन ही वह चाबी है, जो आपकी काबिलियत को साबित करती है।  

1. साक्षात्कार से पहले (Preparation)

  • कंपनी के बारे में शोध करें: उनकी वेबसाइट और हालिया उपलब्धियों को पढ़ें। जब आप उनके बारे में बात करते हैं, तो यह दिखाता है कि आप गंभीर हैं।

  • परिचय तैयार करें: "अपने बारे में बताएं" (Tell me about yourself) प्रश्न का उत्तर संक्षिप्त और प्रभावशाली रखें।

2. अशाब्दिक संप्रेषण (Non-Verbal Communication)

साक्षात्कारकर्ता आपकी बातों से पहले आपके व्यवहार को देखता है:

  • वेशभूषा (Attire): साफ-सुथरे और औपचारिक (Formal) कपड़े पहनें।

  • मुद्रा (Posture): सीधे बैठें, लेकिन शरीर को बहुत कड़ा न रखें। हल्का झुकना यह दिखाता है कि आप बात सुनने में रुचि रखते हैं।

  • आई कॉन्टैक्ट (Eye Contact): आँखों में देखकर बात करें। यदि पैनल में एक से अधिक लोग हैं, तो उत्तर देते समय सभी की ओर बारी-बारी से देखें।

  • मुस्कुराहट: एक स्वाभाविक मुस्कान तनाव को कम करती है और आपको मिलनसार दिखाती है।

3. मौखिक संप्रेषण (Verbal Communication)

  • स्पष्टता: शब्दों को चबाएं नहीं। अपनी आवाज़ की गति मध्यम रखें—न बहुत तेज़, न बहुत धीमी।

  • सक्रिय श्रवण (Active Listening): प्रश्न को पूरा सुनें। यदि समझ न आए, तो विनम्रता से दोबारा पूछ लें—गलत उत्तर देने से बेहतर है स्पष्टीकरण मांगना।

  • तथ्यात्मक उत्तर: अपनी उपलब्धियों को बताते समय उदाहरण दें (जैसे: "मैंने पिछले साल सेल्स में 15% की वृद्धि की" न कि "मैं एक अच्छा सेल्समैन हूँ")।


साक्षात्कार में उपयोग होने वाली एक विशेष तकनीक: STAR Method

जब आपसे आपके पिछले अनुभव या चुनौतियों के बारे में पूछा जाए, तो इस तकनीक का पालन करें:

अक्षरअर्थविवरण
SSituation (स्थिति)उस घटना का संक्षिप्त संदर्भ दें।
TTask (कार्य)आपकी क्या जिम्मेदारी थी?
AAction (कार्रवाई)आपने उस स्थिति में क्या किया?
RResult (परिणाम)आपके कार्य का क्या सकारात्मक परिणाम निकला?

कुछ सामान्य गलतियाँ जिनसे बचें:

  • पिछले नियोक्ता (Employer) की बुराई करना।

  • "हाँ" या "ना" में बहुत छोटे उत्तर देना।

  • बीच में टोकना।

  • अत्यधिक तकनीकी शब्दों का प्रयोग करना, जिसे समझना कठिन हो।

 

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