AEC (Ability Enhancement Course) के हिंदी पाठ्यक्रम में संवाद लेखन (Dialogue Writing) एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ाना और उन्हें विभिन्न स्थितियों में स्वाभाविक बातचीत करना सिखाना है।
यहाँ संवाद लेखन का विस्तृत विवरण दिया गया है:
संवाद लेखन क्या है?
जब दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच होने वाली बातचीत को लिखित रूप दिया जाता है, तो उसे संवाद लेखन कहते हैं। यह केवल साधारण बातचीत नहीं है, बल्कि इसमें पात्रों के स्वभाव, स्थिति और विषय की गंभीरता का ध्यान रखना अनिवार्य होता है।
संवाद लेखन की मुख्य विशेषताएँ
एक प्रभावी संवाद लिखने के लिए इन बिंदुओं का पालन किया जाता है:
स्वाभाविकता: बातचीत ऐसी होनी चाहिए जैसी असल जिंदगी में होती है। भारी-भरकम शब्दों के बजाय सरल और प्रचलित शब्दों का प्रयोग बेहतर रहता है।
पात्रानुकूल भाषा: संवाद बोलने वाले पात्र की शिक्षा, उम्र और स्थिति के अनुसार होने चाहिए। (जैसे: एक डॉक्टर और एक अनपढ़ मरीज़ की भाषा में अंतर होना चाहिए)।
संक्षिप्तता: संवाद बहुत लंबे और उबाऊ नहीं होने चाहिए। छोटे और चुटीले वाक्य प्रभाव छोड़ते हैं।
विषय की स्पष्टता: बातचीत जिस उद्देश्य के लिए शुरू हुई है, वह अंत तक स्पष्ट होनी चाहिए।
विराम चिह्नों का उचित प्रयोग: भावों को प्रकट करने के लिए प्रश्नवाचक (?), विस्मयादिबोधक (!) और अन्य चिह्नों का सही इस्तेमाल जरूरी है।
AEC पाठ्यक्रम में संवाद के कुछ संभावित विषय
परीक्षा में अक्सर निम्नलिखित विषयों पर संवाद लिखने को कहा जाता है:
सामाजिक मुद्दे: बढ़ती महंगाई पर दो गृहणियों के बीच बातचीत।
समसामयिक विषय: ऑनलाइन शिक्षा या सोशल मीडिया के प्रभाव पर दो मित्रों का संवाद।
व्यावसायिक/औपचारिक: नौकरी के लिए साक्षात्कार (Interview) या ग्राहक और दुकानदार के बीच बातचीत।
कॉलेज जीवन: पुस्तकालय (Library) में देरी से किताब लौटाने पर छात्र और लाइब्रेरियन के बीच संवाद।
संवाद लेखन का प्रारूप (Format)
संवाद लिखते समय पात्र का नाम बाईं ओर लिखकर डैश (—) या कोलन (:) लगाया जाता है।
उदाहरण (पर्यावरण प्रदूषण पर दो मित्रों की बातचीत):
रोहन: अरे सोहन, आज इतनी सुबह-सुबह मास्क लगाकर कहाँ जा रहे हो?
सोहन: क्या बताऊं रोहन, शहर में प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि बिना मास्क के सांस लेना मुश्किल है।
रोहन: तुम सही कह रहे हो, गाड़ियों के धुएं और पेड़ों की कटाई ने हालत खराब कर दी है।
सोहन: हमें मिलकर इसके लिए कुछ करना होगा, कम से कम हम पौधे तो लगा ही सकते हैं।
यहाँ संवाद लेखन के दो अलग-अलग उदाहरण दिए गए हैं—एक अनौपचारिक (Informal) और दूसरा औपचारिक (Formal)। इससे आपको AEC परीक्षा के लिए प्रारूप (Format) समझने में मदद मिलेगी।
उदाहरण 1: बढ़ती महंगाई पर दो पड़ोसियों के बीच संवाद (अनौपचारिक)
स्थान: बाज़ार से लौटते समय दो पड़ोसी मिलते हैं।
रमेश: अरे सुरेश भाई! थैले में सब्जियां तो कम दिख रही हैं, पर चेहरा बहुत उतरा हुआ है। क्या बात है?
सुरेश: क्या बताऊं रमेश जी, अब तो बाज़ार जाना किसी जंग पर जाने जैसा हो गया है। ₹500 लेकर निकलो, तो पता ही नहीं चलता कि पैसे कहाँ उड़ गए।
रमेश: सही कह रहे हैं आप। पिछले हफ्ते जो टमाटर ₹40 किलो थे, आज ₹80 पार कर गए हैं। मध्यम वर्गीय परिवार का तो बजट ही बिगड़ गया है।
सुरेश: केवल सब्जी ही नहीं, दाल और तेल के भाव भी आसमान छू रहे हैं। समझ नहीं आता कि बचत कैसे होगी।
रमेश: सरकार को इस पर लगाम लगानी चाहिए, वरना आम आदमी की थाली से पौष्टिक भोजन गायब हो जाएगा।
सुरेश: बिल्कुल सही! अब तो खर्चों में कटौती करना ही एकमात्र रास्ता बचा है।
उदाहरण 2: नौकरी के लिए साक्षात्कार (औपचारिक)
स्थान: कंपनी का ऑफिस (साक्षात्कार कक्ष)
उम्मीदवार: क्या मैं अंदर आ सकता हूँ, सर?
प्रबंधक (Manager): हाँ, आइये। बैठिये। क्या नाम है आपका?
उम्मीदवार: धन्यवाद सर! मेरा नाम विकास शर्मा है।
प्रबंधक: विकास, मैंने आपका बायोडाटा देखा है। आपने मार्केटिंग में अच्छा अनुभव हासिल किया है। आप हमारी कंपनी क्यों ज्वाइन करना चाहते हैं?
उम्मीदवार: सर, आपकी कंपनी इस क्षेत्र में बहुत तेजी से बढ़ रही है। मुझे लगता है कि यहाँ मुझे अपनी क्षमताओं को दिखाने और सीखने का बेहतरीन मंच मिलेगा।
प्रबंधक: आपकी सबसे बड़ी खूबी क्या है?
उम्मीदवार: मैं मुश्किल परिस्थितियों में भी धैर्य के साथ काम करना जानता हूँ और टीम के साथ मिलकर लक्ष्य प्राप्त करने में विश्वास रखता हूँ।
प्रबंधक: बहुत अच्छा विकास। हम अगले दौर के लिए आपको ईमेल के जरिए सूचित करेंगे।
उम्मीदवार: बहुत-बहुत धन्यवाद सर।
संवाद लिखते समय ध्यान देने योग्य बातें:
संवाद के बीच में भावों को ब्रैकेट (कोष्ठक) में लिखें, जैसे: (मुस्कुराते हुए) या (आश्चर्य से)।
वाक्य छोटे रखें ताकि पढ़ने में रोचक लगें।
बातचीत का अंत किसी तार्किक निष्कर्ष पर होना चाहिए।
'डिजिटल इंडिया और विद्यार्थी' विषय पर दो मित्रों के बीच संवाद का उदाहरण -
विषय: डिजिटल इंडिया के लाभ पर दो मित्रों के बीच संवाद
पात्र: आर्यन और सुमित (दोनों कॉलेज के विद्यार्थी हैं)
आयन: (लैपटॉप पर काम करते हुए) अरे सुमित! तुम अभी तक किताबों के ढेर में दबे हो? तुम्हें पता है, इस प्रोजेक्ट के लिए सारी नई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध है।
सुमित: हाँ आर्यन, मैं देख तो रहा हूँ। पर मुझे लगा कि लाइब्रेरी की किताबें ज़्यादा भरोसेमंद होती हैं।
आयन: तुम्हारी बात सही है, लेकिन 'डिजिटल इंडिया' की वजह से अब दुनिया भर की ई-बुक्स और रिसर्च पेपर्स हमारी पहुँच में हैं। अब हमें घंटों लाइब्रेरी में धूल झाड़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
सुमित: (सोचते हुए) यह तो मानना पड़ेगा। कल मुझे अपनी फीस भरनी थी, तो मैंने 'डिजिटल पेमेंट' के ज़रिए घर बैठे ही काम निपटा लिया। पहले तो पूरी दोपहर लाइन में खड़ी रहनी पड़ती थी।
आयन: बिल्कुल! यही तो बदलाव है। आज हम ऑनलाइन क्लास ले सकते हैं, दुनिया के बेहतरीन शिक्षकों से पढ़ सकते हैं और यहाँ तक कि सर्टिफिकेट कोर्स भी घर बैठे कर सकते हैं।
सुमित: लेकिन आर्यन, क्या तुम्हें नहीं लगता कि डिजिटल होने की वजह से विद्यार्थी अपनी एकाग्रता (concentration) खो रहे हैं? पढ़ाई के बहाने सोशल मीडिया पर वक़्त बहुत बर्बाद होता है।
आयन: (गंभीर होते हुए) यह तो हमारे विवेक पर निर्भर करता है सुमित। तकनीक एक औजार की तरह है; अगर सही इस्तेमाल करोगे तो प्रगति होगी, वरना समय की बर्बादी।
सुमित: तुम्हारी बात में दम है। तकनीक का सही इस्तेमाल ही हमें भविष्य के लिए तैयार करेगा। चलो, अब मुझे भी बताओ कि ऑनलाइन डेटा कैसे ढूँढना है।
आयन: (मुस्कुराते हुए) क्यों नहीं! आओ, पास बैठो, मैं तुम्हें कुछ बेहतरीन एजुकेशनल वेबसाइट्स दिखाता हूँ।
इस संवाद की खास बातें:
कोष्ठक (Brackets): पात्रों की क्रियाओं को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं—जैसे (सोचते हुए)।
तुलना: इसमें पुरानी स्थिति और नई डिजिटल स्थिति की तुलना की गई है, जो विषय को स्पष्ट करती है।
निष्कर्ष: अंत में एक सकारात्मक संदेश दिया गया है।
संवाद लेखन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. अभिव्यक्ति क्षमता का विकास (Development of Expression)
इसका प्राथमिक उद्देश्य विद्यार्थियों को यह सिखाना है कि वे अपने विचारों और भावों को स्पष्ट और प्रभावशाली तरीके से कैसे व्यक्त करें। यह आपकी "Communication Skills" को बेहतर बनाता है।
2. पात्रानुकूल भाषा का ज्ञान (Understanding Character-based Language)
संवाद लेखन से छात्र यह सीखते हैं कि अलग-अलग व्यक्तियों (जैसे: डॉक्टर, किसान, अध्यापक, बच्चा) की सामाजिक और शैक्षिक पृष्ठभूमि के अनुसार भाषा का चयन कैसे किया जाता है। इससे भाषा में विविधता आती है।
3. तर्क शक्ति का विकास (Enhancing Logical Thinking)
एक अच्छा संवाद वही होता है जिसमें तर्कपूर्ण बातें हों। किसी विषय के पक्ष और विपक्ष में बातचीत लिखवाकर छात्रों की तार्किक क्षमता (Logical Reasoning) को परखा जाता है।
4. स्वाभाविकता और सजीवता (Naturalness and Realism)
साहित्यिक या किताबी भाषा के बजाय, रोज़मर्रा की व्यावहारिक हिंदी का सही प्रयोग सिखाना इसका बड़ा उद्देश्य है। इससे विद्यार्थी सीखते हैं कि कैसे लिखित भाषा को भी सजीव और वास्तविक बनाया जा सकता है।
5. संक्षिप्तता और स्पष्टता (Brevity and Clarity)
कम शब्दों में अपनी बात पूरी कहना एक कला है। संवाद लेखन के माध्यम से यह सिखाया जाता है कि बिना किसी विस्तार के मुख्य मुद्दे पर कैसे बात की जाए।
6. मनोवैज्ञानिक समझ (Psychological Understanding)
संवाद लिखते समय विद्यार्थी को पात्र की मानसिक स्थिति (गुस्सा, ख़ुशी, डर, उत्साह) को समझना पड़ता है। इससे छात्रों में सहानुभूति (Empathy) और दूसरों के नजरिए को समझने की कला विकसित होती है।
निष्कर्ष (Summary Table)
| उद्देश्य | लाभ |
| व्यावहारिक उद्देश्य | रोज़मर्रा की बातचीत और इंटरव्यू आदि में निपुणता। |
| बौद्धिक उद्देश्य | विषय की गहराई को समझकर उस पर चर्चा करना। |
| भाषाई उद्देश्य | मुहावरों, विराम चिह्नों और सटीक शब्दों का प्रयोग सीखना। |
परीक्षा की दृष्टि से संवाद लेखन (Dialogue Writing) के कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण विषय यहाँ दिए गए हैं।
1. सामाजिक और समसामयिक मुद्दे (Social & Current Issues)
बढ़ती महंगाई: दो मध्यमवर्गीय नागरिकों या गृहणियों के बीच संवाद।
महिला सुरक्षा: महानगरों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दो मित्रों की चिंता।
बेरोजगारी की समस्या: डिग्री पूरी करने के बाद दो युवाओं के बीच भविष्य को लेकर चर्चा।
नशाखोरी/नशे की लत: युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर दो पड़ोसियों की बातचीत।
2. शिक्षा और विद्यार्थी जीवन (Education & Student Life)
नई शिक्षा नीति (NEP): कॉलेज के दो छात्रों के बीच नई शिक्षा पद्धति के लाभ पर संवाद।
ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन शिक्षा: दोनों के फायदे और नुकसान पर दो सहपाठियों की बहस।
परीक्षा का तनाव: बोर्ड या सेमेस्टर परीक्षा से पहले दो डरे हुए छात्रों के बीच बातचीत।
पुस्तकालय का महत्व: किताबों की उपयोगिता पर छात्र और शिक्षक का संवाद।
3. तकनीक और आधुनिकता (Technology & Modernity)
सोशल मीडिया का प्रभाव: फेसबुक/इंस्टाग्राम की लत पर दो मित्रों के बीच संवाद।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): भविष्य की नौकरियों पर AI के असर को लेकर दो सहकर्मियों की चर्चा।
डिजिटल पेमेंट: कैशलेस लेन-देन के फायदों पर दुकानदार और ग्राहक की बातचीत।
4. पर्यावरण और स्वास्थ्य (Environment & Health)
बढ़ता प्रदूषण: दिवाली के बाद प्रदूषण और स्मॉग पर दो मॉर्निंग वॉक करने वालों की चर्चा।
योग और व्यायाम: स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग के महत्व पर पिता और पुत्र का संवाद।
पानी की बर्बादी: मोहल्ले में पानी की बर्बादी को रोकने के लिए दो पड़ोसियों की योजना।
5. औपचारिक स्थितियाँ (Formal Situations)
नौकरी के लिए साक्षात्कार: नियोक्ता (Employer) और उम्मीदवार के बीच संवाद।
बैंक में खाता खोलना: ग्राहक और बैंक मैनेजर के बीच बातचीत।
डॉक्टर और मरीज: बीमारी के लक्षणों और उपचार को लेकर संवाद।
परीक्षा के लिए प्रो-टिप (Pro-Tip):
जब आप संवाद लिखें, तो विराम चिह्नों (जैसे: ?, !, ,) का बहुत ध्यान रखें। शिक्षक अक्सर यह देखते हैं कि आपने पात्रों के 'हाव-भाव' को कोष्ठक (brackets) में लिखा है या नहीं।
"नई शिक्षा नीति (NEP) और छात्रों का भविष्य" संवाद लेखन -
विषय: नई शिक्षा नीति (NEP) के प्रभाव पर दो कॉलेज मित्रों के बीच संवाद
पात्र: 1. आदित्य: जो नई नीति को लेकर उत्साहित है।
2. वरुण: जिसे नई व्यवस्था को लेकर थोड़े संदेह (doubts) हैं।
आदित्य: (हाथ में कॉलेज का नया प्रॉस्पेक्टस लिए हुए) वरुण, तुमने देखा? इस बार से हमारे कॉलेज में 'मल्टीपल एंट्री और एग्जिट' का विकल्प मिल रहा है। यह नई शिक्षा नीति का कमाल है!
वरुण: (थोड़ा संशय में) हाँ आदित्य, सुना तो मैंने भी है। लेकिन क्या तुम्हें नहीं लगता कि बार-बार पढ़ाई छोड़ने और फिर वापस आने से पढ़ाई की निरंतरता (continuity) टूट जाएगी?
आदित्य: मुझे ऐसा नहीं लगता। देखो, पहले अगर कोई आर्थिक कारणों से एक साल बाद पढ़ाई छोड़ता था, तो उसका पूरा साल बर्बाद हो जाता था। अब उसे कम से कम 'सर्टिफिकेट' तो मिलेगा। वह अपनी ज़रूरत पूरी करके वापस पढ़ाई शुरू कर सकता है।
वरुण: (सिर खुजलाते हुए) बात तो तुम्हारी सही है, पर ये 'स्किल बेस्ड' कोर्स का क्या चक्कर है? क्या हमें अब किताबी ज्ञान के बजाय सिर्फ काम सिखाया जाएगा?
आदित्य: (हँसते हुए) अरे नहीं भाई! इसका मतलब है कि अब हमें सिर्फ रटना नहीं होगा। अगर तुम्हें संगीत या कोडिंग में रुचि है, तो तुम उसे अपने मुख्य विषय के साथ पढ़ सकते हो। अब आर्ट्स और साइंस के बीच की दीवारें गिर रही हैं।
वरुण: अच्छा! तो इसका मतलब है कि मैं इतिहास के साथ-साथ कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भी सीख सकता हूँ?
आदित्य: बिल्कुल! यही तो इस नीति की सबसे बड़ी खूबी है—'लचीलापन' (Flexibility)। हम अपनी पसंद के विषय खुद चुन सकेंगे।
वरुण: (मुस्कुराते हुए) अगर ऐसा है, तो यह हम जैसे छात्रों के लिए बहुत बड़ा अवसर है। अब शायद डिग्री के साथ-साथ हमारे हाथ में कोई हुनर भी होगा।
आदित्य: सही पकड़े हो! अब रट्टू तोता बनने के बजाय हमें 'प्रैक्टिकल' इंसान बनने पर जोर देना होगा। चलो, अब कैंटीन चलते हैं और विस्तार से अपना सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन तय करते हैं।
वरुण: चलो! तुमने मेरी चिंता काफी कम कर दी।
इस उत्तर से सीखने योग्य बातें (Exam Tips):
विषय की जानकारी: संवाद में विषय (NEP) के मुख्य बिंदुओं जैसे 'मल्टीपल एग्जिट' और 'स्किल डेवलपमेंट' का जिक्र किया गया है।
प्रवाह (Flow): बातचीत कहीं भी अटकती नहीं है, एक पात्र सवाल पूछ रहा है और दूसरा उसका समाधान दे रहा है।
सकारात्मक अंत: संवाद का अंत हमेशा किसी सकारात्मक निष्कर्ष या सहमति पर होना चाहिए।
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