संप्रेषण (Communication) और संचार दोनों ही एक प्रक्रिया की ओर इशारा करते हैं जहाँ विचारों, सूचनाओं या भावनाओं का आदान-प्रदान होता है। अक्सर लोग इन दोनों शब्दों को एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनके बीच एक सूक्ष्म अंतर और गहरी प्रक्रिया छिपी है।
यहाँ इसका विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. संप्रेषण (Communication) क्या है?
संप्रेषण का अर्थ है— 'समान रूप से प्रेषित करना'। यह केवल जानकारी भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि प्राप्तकर्ता (Receiver) उस जानकारी को उसी अर्थ में समझे जिसमें प्रेषक (Sender) ने उसे भेजा है।
मूल उद्देश्य: समझ विकसित करना।
प्रक्रिया: इसमें फीडबैक (प्रतिपुष्टि) अनिवार्य है। यदि आपने कुछ कहा और सामने वाले ने उसे गलत समझा, तो वह पूर्ण संप्रेषण नहीं कहलाएगा।
2. संचार (Transmission) क्या है?
व्यापक अर्थ में, 'संचार' वह माध्यम या तंत्र है जिसके द्वारा संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचता है। यह तकनीक और फैलाव (Dissemination) पर अधिक केंद्रित होता है।
मूल उद्देश्य: सूचना का प्रसार करना।
प्रक्रिया: इसमें रेडियो, टीवी, इंटरनेट या समाचार पत्र जैसे माध्यमों का उपयोग करके सूचना को बड़े जनसमूह तक पहुँचाया जाता है (जैसे 'जनसंचार' या Mass Communication)।
मुख्य अंतर: एक नज़र में
| आधार | संप्रेषण (Communication) | संचार (Transmission/Media) |
| प्रकृति | यह एक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रक्रिया है। | यह एक तकनीकी और प्रक्रियात्मक शब्द है। |
| फीडबैक | इसमें दो-तरफा संवाद और फीडबैक जरूरी है। | यह अक्सर एक-तरफा (One-way) भी हो सकता है। |
| लक्ष्य | अर्थ की स्पष्टता और आपसी समझ। | सूचना का फैलाव और दूरी तय करना। |
| उदाहरण | दो दोस्तों के बीच बातचीत या इंटरव्यू। | टीवी पर समाचार देखना या रेडियो सुनना। |
प्रभावी प्रक्रिया के तत्व
एक सफल संप्रेषण या संचार के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना आवश्यक है:
प्रेषक (Sender): संदेश भेजने वाला।
संदेश (Message): जो जानकारी साझा करनी है।
माध्यम (Channel): जिस रास्ते से संदेश जाएगा (मौखिक, लिखित, डिजिटल)।
प्राप्तकर्ता (Receiver): जिसे संदेश मिल रहा है।
डिकोडिंग (Decoding): संदेश को समझना।
फीडबैक (Feedback): प्रतिक्रिया देना, जिससे पता चले कि संदेश सही पहुँचा है।
याद रखें: संचार एक 'साधन' है, जबकि संप्रेषण उस साधन का उपयोग करके 'समझ' पैदा करने की एक 'कला' है।
संप्रेषण (Communication) और संचार (Transmission) के अंतर को समझने के लिए आइए एक छोटी सी कहानी का सहारा लेते हैं।
कहानी: गाँव का मुनादी वाला और मास्टर जी
एक सुंदर सा गाँव था। एक दिन गाँव के मुखिया ने तय किया कि अगले रविवार को गाँव में 'स्वच्छता अभियान' चलाया जाएगा। इस सूचना को फैलाने के लिए दो तरीके अपनाए गए।
1. संचार (Sanchar - Transmission)
मुखिया ने गाँव के मुनादी वाले (ढोल पीटने वाले) को बुलाया और कहा, "पूरे गाँव में शोर मचा दो कि रविवार को सफाई होगी।"
मुनादी वाला ढोल पीटते हुए हर गली से गुजरा और चिल्लाया— "सुनो, सुनो, सुनो! रविवार को सुबह 8 बजे सबको चौक पर जमा होना है, गाँव की सफाई होगी!"
यहाँ क्या हुआ? सूचना एक जगह से दूसरी जगह पहुँच गई। मुनादी वाले ने अपना काम कर दिया। उसे इस बात से कोई मतलब नहीं था कि किसी ने सुना या नहीं, या किसी को कोई दिक्कत तो नहीं है। यह 'संचार' है, जहाँ मुख्य उद्देश्य सूचना का प्रसार (Spread) करना है।
2. संप्रेषण (Sampreshan - Communication)
उसी समय गाँव के मास्टर जी अपनी कक्षा में बच्चों को यही बात बता रहे थे। उन्होंने बच्चों से कहा, "बच्चों, रविवार को हमें गाँव साफ करना है।"
एक बच्चे ने पूछा, "सर, क्या हमें अपनी झाड़ू खुद लानी होगी?"
दूसरे ने पूछा, "अगर बारिश हुई तो क्या तब भी सफाई होगी?"
मास्टर जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "हाँ, झाड़ू अपनी लाना और अगर बारिश हुई तो हम अगले दिन करेंगे।"
यहाँ क्या हुआ? यहाँ केवल सूचना नहीं दी गई, बल्कि उस पर चर्चा हुई। मास्टर जी ने बच्चों के सवालों के जवाब दिए और यह सुनिश्चित किया कि बच्चे बात को पूरी तरह समझ गए हैं। इसे 'संप्रेषण' कहते हैं, जहाँ संदेश भेजने वाले और पाने वाले के बीच एक 'साझा समझ' विकसित होती है।
कहानी का सार: मुख्य अंतर
| स्थिति | क्या कहलाएगा? | क्यों? |
| मुनादी वाला (ढोल) | संचार | सूचना बस 'भेज' दी गई (One-way)। इसमें माध्यम (ढोल) और फैलाव महत्वपूर्ण था। |
| मास्टर जी और बच्चे | संप्रेषण | सूचना 'समझाई' गई (Two-way)। इसमें फीडबैक (सवाल-जवाब) शामिल था। |
निष्कर्ष
संचार एक पुल की तरह है जो दो किनारों को जोड़ता है।
संप्रेषण उस पुल पर चलकर एक-दूसरे से हाथ मिलाने और बात समझने की प्रक्रिया है।
संप्रेषण (Communication) और संचार (Transmission) के बारीक अंतर को और गहराई से समझने के लिए ये दो और कहानियाँ देखिए:
कहानी 1: ऑफिस का 'ईमेल' बनाम 'मीटिंग'
स्थिति A (संचार):
एक कंपनी के बॉस ने शनिवार की शाम को सभी 100 कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा: "कल रविवार को सुबह 10 बजे ऑफिस में एक जरूरी मीटिंग है, सबको आना अनिवार्य है।" ईमेल चला गया, सर्वर ने दिखा दिया कि 'Message Sent'।
यह संचार है: यहाँ तकनीक का उपयोग करके सूचना को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक पहुँचा दिया गया। बॉस को नहीं पता कि किसने ईमेल पढ़ा, किसने नहीं, या किसी को कोई गंभीर समस्या तो नहीं है।
स्थिति B (संप्रेषण):
वही बॉस सोमवार को टीम के साथ बैठकर कहता है, "हमें अगले प्रोजेक्ट के लिए रविवार को कुछ समय चाहिए, क्या आप लोग तैयार हैं?" कर्मचारी अपनी चिंताएं बताते हैं, बॉस उन्हें समझाता है कि यह क्यों जरूरी है, और अंत में सब मिलकर समय तय करते हैं।
यह संप्रेषण है: यहाँ संदेश के पीछे का भाव (Emotion) और उद्देश्य (Purpose) स्पष्ट हुआ। कर्मचारियों ने अपनी बात रखी (Feedback) और एक आम सहमति बनी।
कहानी 2: रेडियो की घोषणा और माँ की सीख
स्थिति A (संचार):
एक रेडियो स्टेशन से घोषणा होती है: "शहर में भारी बारिश की संभावना है, कृपया घर से बाहर निकलते समय छाता साथ रखें।" यह संदेश शहर के लाखों लोगों तक पहुँच गया।
यह संचार है: रेडियो ने 'Broadcasting' (प्रसारण) किया। माध्यम (Radio Waves) ने सूचना को फैला दिया, लेकिन रेडियो को यह नहीं पता कि आपने छाता लिया या नहीं, या आपने उसकी बात को गंभीरता से लिया या नहीं।
स्थिति B (संप्रेषण):
घर से निकलते समय माँ ने बेटे को रोका और उसकी आँखों में देखकर कहा, "बेटा, बाहर बादल बहुत काले हैं, भीग गए तो तबीयत खराब हो जाएगी, इसलिए यह छाता लेकर जाओ।" बेटे ने माँ की चिंता समझी और छाता उठा लिया।
यह संप्रेषण है: यहाँ माँ का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं था, बल्कि बेटे के व्यवहार में बदलाव लाना था। बेटे ने माँ की चिंता को 'डिकोड' (Decode) किया और अपनी सहमति दी।
इन कहानियों से हमने क्या सीखा?
माध्यम बनाम अर्थ: संचार 'माध्यम' (Medium) पर केंद्रित है, जबकि संप्रेषण 'अर्थ' (Meaning) पर।
मशीन बनाम मानव: संचार मशीनों के जरिए भी प्रभावी हो सकता है (जैसे आपका फोन सिग्नल), लेकिन संप्रेषण के लिए मानवीय समझ और संदर्भ (Context) जरूरी है।
फीडबैक का महत्व: बिना प्रतिक्रिया (Feedback) के संचार तो हो सकता है, लेकिन सफल संप्रेषण नहीं।
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