UPHESC (इकाई-9) के पाठ्यक्रम में निर्धारित कहानियों के पत्रिका प्रकाशन से जुड़ी जानकारी

 UPHESC (इकाई-9) के पाठ्यक्रम में निर्धारित कहानियों  के पत्रिका प्रकाशन से जुड़ी जानकारी नीचे दिए गए चार्ट में दी गई है। हिंदी साहित्य में पत्रिकाओं का बहुत महत्व रहा है क्योंकि अधिकांश कालजयी कहानियाँ सबसे पहले इन्हीं पत्रिकाओं के माध्यम से पाठकों तक पहुँची थीं:

प्रमुख कहानियाँ और उनकी प्रकाशन पत्रिकाएँ

कहानी का नामलेखकप्रकाशन पत्रिकाप्रकाशन वर्ष
दुनिया का अनमोल रत्नमुंशी प्रेमचंदज़माना (उर्दू पत्रिका)1907
कफनमुंशी प्रेमचंदचाँद1936
कानों में कँगनाराजा राधिकारमण प्रसाद सिंहइन्दु1913
ताईविश्वंभरनाथ शर्मा 'कौशिक'सरस्वती1920
उसने कहा थाचंद्रधर शर्मा गुलेरीसरस्वती1915
आकाशदीपजयशंकर प्रसादइन्दु1928
पत्नीजैनेंद्र कुमारविशाल भारत1934
लालपान की बेगमफणीश्वरनाथ रेणुकहानी1956
रसप्रियाफणीश्वरनाथ रेणुजनयुग1955
रोज (गैंग्रीन)अज्ञेयविशाल भारत1934
शरणदाताअज्ञेयप्रतीक1947
चीफ की दावतभीष्म साहनीकहानी1956
वापसीउषा प्रियंवदाकल्पना1960
परिंदेनिर्मल वर्माहंस1960
दिल्ली में एक मौतकमलेश्वरसारिका1963
जहाँ लक्ष्मी कैद हैराजेंद्र यादवहंस1957
मलबे का मालिकमोहन राकेशसारिका / कहानी1956

विशेष तथ्य:

  1. सरस्वती: आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपादन वाली इस पत्रिका ने 'उसने कहा था' जैसी महान कहानी को जन्म दिया।

  2. ज़माना: कानपुर से निकलने वाली इस उर्दू पत्रिका में प्रेमचंद 'नवाब राय' के नाम से लिखते थे।

  3. इन्दु: यह प्रसाद जी के परिवार द्वारा निकाली जाती थी, जिसमें छायावाद और ऐतिहासिक कहानियों को प्रमुखता मिली।

  4. हंस: प्रेमचंद द्वारा शुरू की गई इस पत्रिका को बाद में राजेंद्र यादव ने पुनर्जीवित किया और 'नयी कहानी' आंदोलन को दिशा दी।

  5. विशाल भारत: इसके संपादक बनारसीदास चतुर्वेदी थे और इसमें जैनेंद्र तथा अज्ञेय की मनोवैज्ञानिक कहानियाँ अक्सर छपती थीं।

 

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