'वयम् रक्षामः' के प्रमुख पात्र

 'वयम् रक्षामः' उपन्यास के पात्रों को उनकी संस्कृति, भूमिका और स्वभाव के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। नीचे इसकी विस्तृत सारणी दी गई है:

'वयम् रक्षामः' के प्रमुख पात्रों की सारणी

श्रेणीपात्रसंक्षिप्त परिचय व भूमिका
रक्ष (प्रमुख)रावणउपन्यास का केंद्रबिंदु। प्रकांड विद्वान, 'रक्ष' संस्कृति का संस्थापक और लंकाधिपति।
मंदोदरीरावण की पत्नी। विवेकशील, दूरदर्शी और मय दानव की पुत्री।
विभीषणरावण का भाई। आर्य संस्कृति का समर्थक, जिसे लेखक ने 'घर का भेदी' के रूप में भी चित्रित किया है।
कुंभकर्णरावण का भाई। अत्यंत शक्तिशाली, जो अपनी संस्कृति के प्रति वफादार है पर युद्ध के पक्ष में नहीं।
शूर्पणखारावण की बहन। आर्य-अनार्य संघर्ष की तात्कालिक सूत्रधार।
आर्य (प्रमुख)राममर्यादा पुरुषोत्तम। आदर्शों के प्रतीक और बिखरी शक्तियों को जोड़ने वाले कुशल रणनीतिकार।
सीताजनक पुत्री (और रहस्यमयी मूल)। प्रखर चेतना और स्वाभिमान की प्रतीक।
लक्ष्मणराम के अनुज। उग्र स्वभाव के योद्धा और समर्पित रक्षक।
भरतत्याग और धर्म के प्रतीक, जिन्होंने सत्ता के मोह का त्याग किया।
ऋषि व मार्गदर्शकअगस्त्यदक्षिण में आर्य संस्कृति के विस्तार के मुख्य रणनीतिकार और रावण के वैचारिक प्रतिद्वंद्वी।
विश्वामित्रराम-लक्ष्मण के गुरु। उन्होंने ही राम को राक्षसी शक्तियों से युद्ध के लिए तैयार किया।
विश्रवारावण के पिता (आर्य ऋषि), जिनके माध्यम से आर्य-अनार्य रक्त का मेल दिखाया गया है।
अन्य जातियाँहनुमानवानर जाति के प्रतिनिधि। अत्यंत बुद्धिमान और राम के मुख्य सहयोगी।
सुग्रीव/बालीवानर संस्कृति के प्रमुख। सत्ता संघर्ष और राम के साथ गठबंधन के पात्र।
मय दानवमंदोदरी के पिता। स्थापत्य कला (Architecture) और मायावी विद्याओं के विशेषज्ञ।
कैकसीरावण की माता (दैत्य कन्या), जिन्होंने रावण में साम्राज्य विस्तार की महत्वाकांक्षा जगाई।

पात्रों का वर्गीकरण (संक्षेप में):

  1. वैचारिक पात्र: अगस्त्य और रावण (इनके बीच संस्कृति और विस्तारवाद का टकराव है)।

  2. भावनात्मक पात्र: सीता और मंदोदरी (जो अपने-अपने समाज की नैतिकता का प्रतिनिधित्व करती हैं)।

  3. शक्ति के पात्र: राम, लक्ष्मण और कुंभकर्ण।

यह उपन्यास केवल पात्रों की कहानी नहीं है, बल्कि इन पात्रों के माध्यम से विचारों के संघर्ष की कहानी है।

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

भूले-बिसरे चित्र उपन्यास भगवतीचरण वर्मा

भूले-बिसरे चित्र  उपन्यास का अंत केवल एक परिवार की कहानी का खत्म होना नहीं है, बल्कि यह एक युग के अवसान और दूसरे के उदय का बहुत ही मार्मिक ...