आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने 'वयं रक्षामः' में विशिष्ट यंत्रों और हथियारों का चार्ट है जिनका उपयोग रावण की सेना ने आर्यों के विरुद्ध किया था:

 आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने 'वयं रक्षामः' में रामायण के युद्ध को 'चमत्कारों' से हटाकर 'प्राचीन विज्ञान' के धरातल पर रखा है। उन्होंने रावण की सेना (रक्ष गण) के पास ऐसे यंत्रों और रसायनों का वर्णन किया है जो आज के आधुनिक हथियारों से मेल खाते हैं।

यहाँ उन विशिष्ट यंत्रों और हथियारों का चार्ट है जिनका उपयोग रावण की सेना ने आर्यों के विरुद्ध किया था:


'वयं रक्षामः' के विशिष्ट यंत्र और शस्त्र

यंत्र/शस्त्र का नामपारंपरिक विवरणचतुरसेन शास्त्री का वैज्ञानिक विवरणआधुनिक समकक्ष (Modern Equivalent)
पुष्पक विमानमन की गति से चलने वाला उड़न खटोला।पारा (Mercury) और वायु के दबाव से चलने वाला एक उन्नत विमान।विमान (Aircraft)
अग्निबाणआग उगलने वाला तीर।फॉस्फोरस और पेट्रोल जैसे रसायनों से युक्त प्रक्षेप्यास्त्र।मिसाइल / रॉकेट
धूम्रबाणधुआं फैलाने वाला तीर।जहरीली गैस छोड़ने वाला यंत्र जो शत्रु की आँखों और फेफड़ों पर वार करता था।गैस बम / स्मोक ग्रेनेड
मायावी शक्तिजादू से ओझल हो जाना।छलावरण (Camouflage) और धुएं के पर्दों का प्रयोग कर अपनी स्थिति छिपाना।स्टील्थ तकनीक
शतघ्नीएक बार में सौ लोगों को मारने वाला शस्त्र।धातु के भारी गोलों को तीव्र वेग से फेंकने वाला एक विशाल यंत्र।तोप (Cannon)
नागपाशसांपों का जाल।एक प्रकार का विद्युत जाल (Electric Net) या अत्यधिक चिपचिपा रसायनिक तार।इलेक्ट्रिक नेट / टेजर
मयन दुर्ग (लंका)सोने की नगरी।ऐसी वास्तुकला जिसमें चुंबकीय पत्थरों और शीशों का प्रयोग कर शत्रु को भ्रमित किया जाता था।स्मार्ट सिटी / फोर्ट्रेस

युद्ध उपकरणों का एक और महत्वपूर्ण पहलू: 'शस्त्र-शाखा'

चतुरसेन जी ने दिखाया है कि रावण की शक्ति केवल उसकी भुजाओं में नहीं, बल्कि उसके 'यंत्र-भवन' (Laboratory) में थी:

  • विद्युत (Electricity): लंका के महलों में प्रकाश के लिए मशालों की जगह रसायनों और धातुओं से उत्पन्न 'आलोक' (Light) का प्रयोग दिखाया गया है।

  • समुद्र सेतु सुरक्षा: रावण ने समुद्र के नीचे ऐसे यंत्र लगाए थे जो नौकाओं को खींच सकते थे या डूबा सकते थे (सोनार जैसी तकनीक का आभास)।

  • कुंभकर्ण का यंत्र-प्रेम: उपन्यास में कुंभकर्ण सोता नहीं था, बल्कि वह महीनों तक अपने 'गुप्त कारखाने' में नए हथियारों के निर्माण में व्यस्त रहता था।


निष्कर्ष

इन यंत्रों के माध्यम से लेखक यह बताना चाहते थे कि रावण की हार का कारण 'शक्ति' की कमी नहीं, बल्कि 'नैतिकता' और 'जनसमर्थन' की कमी थी। रावण विज्ञान में आगे था, लेकिन राम के पास लोक-संग्रह (Common People's Power) की शक्ति थी।

 

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