शिवप्रसाद सिंह द्वारा रचित 'नीला चाँद' उपन्यास सारांश

शिवप्रसाद सिंह द्वारा रचित 'नीला चाँद' हिंदी साहित्य का एक मील का पत्थर उपन्यास है। यह उपन्यास भारतीय इतिहास के मध्यकाल (विशेषकर 11वीं शताब्दी) के काशी (बनारस) की पृष्ठभूमि पर आधारित है।

यहाँ इस उपन्यास का संक्षिप्त सारांश दिया गया है:


'नीला चाँद' का कथानक सारांश

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह उपन्यास 11वीं सदी के भारत का चित्रण करता है, जब देश बाहरी आक्रमणों (विशेषकर तुर्क आक्रमणकारियों) और आंतरिक सामंती कलह से जूझ रहा था। केंद्र में काशी नगरी है, जो उस समय सांस्कृतिक और धार्मिक अस्मिता का प्रतीक थी।

2. मुख्य नायक: राजा कीर्तिवर्मा

कहानी चंदेल वंश के राजा कीर्तिवर्मा के इर्द-गिर्द घूमती है। उपन्यास में दिखाया गया है कि कैसे कीर्तिवर्मा ने अपनी खोई हुई सत्ता को वापस पाने और काशी को विदेशी आक्रांताओं तथा कलचुरी राजा कर्ण के प्रभुत्व से मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया।

3. सामाजिक और सांस्कृतिक चित्रण

उपन्यास केवल युद्धों की कथा नहीं है, बल्कि यह उस समय की सामाजिक संरचना को भी गहराई से उकेरता है:

  • तांत्रिक साधना: इसमें उस दौर की अघोर और तांत्रिक परंपराओं का जीवंत वर्णन है।

  • सामंती कुरीतियाँ: समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, सामंती विलासिता और जातिगत जटिलताओं को भी लेखक ने निर्भीकता से दिखाया है।

  • अस्मिता की रक्षा: यह उपन्यास 'भारतीयता' और 'सनातन संस्कृति' की रक्षा के संकल्प को दर्शाता है।

4. प्रतीक: 'नीला चाँद'

उपन्यास का शीर्षक 'नीला चाँद' भगवान शिव का प्रतीक है। शिव, जो काशी के अधिपति हैं, संघर्ष और संहार के साथ-साथ सृजन और शांति के भी प्रतीक हैं। नीला चाँद उस धुंधली लेकिन अटूट आशा का प्रतीक है जो घोर अंधकार और युद्ध के बीच भी चमकती रहती है।


उपन्यास की मुख्य विशेषताएँ

विशेषताविवरण
भाषातत्सम प्रधान और गंभीर हिंदी, जिसमें ऐतिहासिक वातावरण जीवंत हो उठता है।
पात्रकीर्तिवर्मा, गोपाल, सुगंधी और श्रीहर्ष जैसे पात्र वीरता और बुद्धिमत्ता का संगम हैं।
पुरस्कारइस कृति के लिए शिवप्रसाद सिंह को 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' (1990) से सम्मानित किया गया था।

निष्कर्ष

'नीला चाँद' एक ऐसा उपन्यास है जो पाठक को सीधे 11वीं शताब्दी की काशी की गलियों में ले जाता है। यह वीरता, त्याग, और अपनी जड़ों को बचाने की एक महागाथा है। यह हमें याद दिलाता है कि इतिहास केवल तारीखों का खेल नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और संघर्षों का निचोड़ है।

 

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