'नीला चाँद'
इसके सबसे प्रभावशाली पात्रों और उस समय की ऐतिहासिक उथल-पुथल को थोड़ा विस्तार से समझते हैं:
1. मुख्य पात्र (Key Characters)
इस उपन्यास के पात्र केवल हाड़-मांस के पुतले नहीं हैं, बल्कि वे अलग-अलग विचारधाराओं के प्रतीक हैं:
राजा कीर्तिवर्मा: उपन्यास का नायक और चंदेल वंश का राजा। वह एक ऐसा योद्धा है जो युद्ध से ज्यादा अपनी प्रजा और संस्कृति की फिक्र करता है। उसका संघर्ष सत्ता के लिए कम और अपनी 'मिट्टी' के सम्मान के लिए ज्यादा है।
गोपाल: यह उपन्यास का सबसे बुद्धिमान पात्र है। वह कीर्तिवर्मा का सामंत और रणनीतिकार है। उसकी कूटनीति ही काशी को दुश्मनों से बचाने में ढाल का काम करती है।
सुगंधी: एक बेहद सशक्त स्त्री पात्र। वह केवल एक नर्तकी या प्रेमिका नहीं है, बल्कि वह गुप्तचर की भूमिका निभाती है और अपने साहस से कई बार युद्ध की दिशा बदल देती है।
अघोरेश्वर: ये उस समय की तांत्रिक शक्ति और आध्यात्मिक गहराई का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे दिखाते हैं कि कैसे धर्म और अध्यात्म का उपयोग राष्ट्र की रक्षा के लिए किया जा सकता है।
2. ऐतिहासिक संदर्भ (The Historical Context)
शिवप्रसाद सिंह ने 11वीं शताब्दी का जो खाका खींचा है, वह इतिहास के पन्नों में बहुत महत्वपूर्ण है:
कलचुरि और चंदेल संघर्ष: उस समय चेदि के कलचुरि राजा 'कर्ण' बहुत शक्तिशाली थे। उन्होंने काशी पर अधिकार कर लिया था। उपन्यास में कीर्तिवर्मा द्वारा काशी को पुनः प्राप्त करने के संघर्ष को दिखाया गया है।
गजनवी का साया: महमूद गजनवी के आक्रमणों के बाद का यह वह दौर था जब उत्तर भारत के मंदिर और नगर असुरक्षित थे। उपन्यास दिखाता है कि कैसे विदेशी आक्रांताओं ने भारतीय एकता में सेंध लगाई थी।
काशी का महत्व: उस समय भी काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, विज्ञान और धर्म का केंद्र थी। लेखक ने दिखाया है कि काशी पर अधिकार का मतलब था—संपूर्ण उत्तर भारत के मानस पर अधिकार।
3. उपन्यास की खास 'मूड' (Vibe)
लेखक ने 'अंधेरे' और 'रोशनी' के द्वंद्व को बहुत खूबसूरती से बुना है। जहाँ एक तरफ षडयंत्रों की काली रातें हैं, वहीं दूसरी तरफ 'नीला चाँद' (शिव) की शीतल चांदनी है, जो विश्वास दिलाती है कि न्याय की जीत होगी।
एक रोचक तथ्य: इस उपन्यास को लिखने के लिए शिवप्रसाद सिंह ने वर्षों तक बनारस की गलियों और वहां के इतिहास पर शोध किया था, इसलिए इसमें दी गई जानकारी बहुत प्रामाणिक लगती है।
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