'नीला चाँद' उपन्यास के पात्र-परिचय

 'नीला चाँद' उपन्यास के पात्रों का जाल काफी विस्तृत है। लेखक ने ऐतिहासिक और काल्पनिक पात्रों का ऐसा मिश्रण तैयार किया है जो 11वीं सदी के काशी के सामाजिक और राजनैतिक ढांचे को पूरी तरह स्पष्ट कर देते हैं।

यहाँ प्रमुख पात्रों का एक व्यवस्थित चार्ट दिया गया है:

'नीला चाँद' पात्र-परिचय चार्ट

पात्र का नामश्रेणी/भूमिकासंक्षिप्त विवरण
कीर्तिवर्मानायक (चंदेल राजा)चंदेल वंश का प्रतापी राजा। धैर्यवान, साहसी और काशी की मुक्ति का संकल्प लेने वाला मुख्य योद्धा।
गोपालरणनीतिकार / सामंतकीर्तिवर्मा का दाहिना हाथ और सेनापति। कूटनीति और युद्ध कौशल में निपुण, उपन्यास का 'चाणक्य'।
सुगंधीप्रमुख स्त्री पात्रएक अत्यंत साहसी और बुद्धिमती स्त्री। वह गुप्तचर की भूमिका निभाती है और संघर्ष में कीर्तिवर्मा का साथ देती है।
राजा कर्णप्रतिनायक (विपक्षी)कलचुरी वंश का शक्तिशाली और अहंकारी राजा, जिसने काशी पर अधिकार कर लिया था।
अघोरेश्वरआध्यात्मिक गुरुतांत्रिक और अघोर पंथ के प्रतीक। वे राष्ट्र रक्षा के लिए गुप्त शक्तियों और जनमत को जागृत करते हैं।
शैलेंद्रयोद्धाएक निष्ठावान सैनिक और नायक का सहयोगी, जो कठिन परिस्थितियों में वीरता का परिचय देता है।
राजमातापरामर्शदाताकीर्तिवर्मा की माता, जो उन्हें विपरीत समय में नैतिक बल और राजनैतिक दिशा प्रदान करती हैं।
इंदीवरयुवा पात्रनई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाला पात्र, जो बदलाव और संघर्ष के लिए तत्पर रहता है।
भिक्षुणीसांस्कृतिक पात्रबौद्ध और हिंदू धर्म के समन्वय तथा उस समय की धार्मिक उथल-पुथल को दर्शाने वाली पात्र।

पात्रों का वर्गीकरण

उपन्यास के पात्रों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

  1. राजसी पात्र: कीर्तिवर्मा, राजा कर्ण, और विभिन्न सामंत जो सत्ता के संघर्ष में शामिल हैं।

  2. सांस्कृतिक/धार्मिक पात्र: अघोरेश्वर और अन्य विद्वान जो काशी की अस्मिता और धर्म की रक्षा की चिंता करते हैं।

  3. जनसाधारण/गुप्तचर: सुगंधी और अन्य पात्र जो समाज के निचले या गुप्त हिस्सों से आकर इतिहास की धारा बदलते हैं।

विशेष नोट: इस उपन्यास की एक खास बात यह है कि इसमें "काशी" स्वयं एक जीवित पात्र की तरह उभरती है। शहर की गलियाँ, घाट और मंदिर पूरी कहानी में एक सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

 

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