UPHESC (इकाई-8) के पाठ्यक्रम में निर्धारित सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी की इन कालजयी कविताओं का विवरण नीचे दी गई तालिका (Chart) में प्रस्तुत है:
| रचना का नाम | प्रकाशन वर्ष / संग्रह | मुख्य विषय (Central Theme) |
| राम की शक्ति पूजा | 1936 ('अनामिका' के दूसरे संस्करण में) | राम-रावण युद्ध के माध्यम से अन्याय पर न्याय की विजय और राम के भीतर के मानवीय द्वंद्व एवं 'शक्ति' की मौलिक कल्पना। |
| जागो फिर एक बार (भाग 2) | 1930 ('परिमल' संग्रह) | भारत की सुप्त जनता को उनके गौरवशाली अतीत (जैसे गुरु गोविंद सिंह) की याद दिलाकर राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता के लिए जाग्रत करना। |
| भारती जय विजय करे | 1920 के आसपास ('गीतिका' संग्रह) | भारत माता की वंदना और राष्ट्र-प्रेम। इसमें देश के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक गौरव का गान करते हुए विजय की कामना की गई है। |
| वर दे वीणा वादिनी वर दे | 1936 ('गीतिका' संग्रह) | माँ सरस्वती से प्रार्थना कि वे भारत में ज्ञान का नया प्रकाश फैलाएं, पुराने बंधनों को काटें और देश में नव-चेतना का अमृत-मंत्र भर दें। |
इन रचनाओं की मुख्य विशेषताएँ:
राम की शक्ति पूजा: इसे हिंदी साहित्य की सबसे शक्तिशाली 'लंबी कविता' माना जाता है। निराला ने इसमें दिखाया है कि जब अधर्म (रावण) शक्तिशाली हो जाए, तो धर्म (राम) को भी 'शक्ति' की मौलिक साधना करनी पड़ती है।
जागो फिर एक बार: यह एक ओजपूर्ण कविता है जो भारतीयों को उनकी वीरता की याद दिलाती है ताकि वे अंग्रेजों की दासता से मुक्त हो सकें।
वर दे वीणा वादिनी: यह केवल एक सरस्वती वंदना नहीं है, बल्कि देश के पुनरुत्थान और वैचारिक स्वतंत्रता की पुकार है।
1. राम की शक्ति पूजा
यह निराला जी की सबसे कठिन और उत्कृष्ट रचना मानी जाती है।
मुख्य प्रसंग: युद्ध के दौरान जब राम देखते हैं कि अन्याय और अधर्म की तरफ खड़ी शक्ति (देवी) रावण की सहायता कर रही है, तो वे हताश हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि "अन्याय जिधर, है उधर शक्ति!"
समाधान: जामवंत उन्हें परामर्श देते हैं कि यदि रावण 'अशुद्ध' होकर भी शक्ति को पा सकता है, तो तुम 'शुद्ध' मन से शक्ति की मौलिक कल्पना करो।
सीख: यह कविता सिखाती है कि कठिन समय में केवल शारीरिक बल नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और साधना की आवश्यकता होती है। जब राम अपनी एक आँख (नीलकमल) चढ़ाने को तैयार होते हैं, तब देवी प्रकट होकर उन्हें विजय का आशीर्वाद देती हैं।
2. वर दे वीणा वादिनी वर दे
यह माँ सरस्वती की वंदना के माध्यम से राष्ट्र के नव-निर्माण की पुकार है।
अमृत-मंत्र: निराला जी चाहते हैं कि भारत में दासता (गुलामी) के विचार खत्म हों और स्वतंत्रता का 'अमृत-मंत्र' गूँजे।
अंध-उर के बंधन स्तर: यहाँ 'अंधेरे' का अर्थ अज्ञानता और रूढ़िवादिता है। वे चाहते हैं कि ज्ञान के प्रकाश से पुराने और गलित बंधन कट जाएँ।
नव गति, नव लय: वे केवल पुरानी परंपराओं को नहीं दोहराना चाहते, बल्कि आधुनिक भारत के लिए नई गति और नया स्वर चाहते हैं।
3. जागो फिर एक बार (भाग 2)
इसमें निराला जी ने वीर रस का प्रयोग किया है। वे कहते हैं कि शेर की माँद (गुफा) में घुसकर उससे उसके बच्चे कोई नहीं छीन सकता, तो फिर हम भारतीय इतने साहसी पूर्वजों की संतान होकर भी अंग्रेजों के गुलाम क्यों हैं? यह स्वाभिमान को जगाने वाली कविता है।
4. भारती जय विजय करे
यह एक प्रयाण गीत (Marching Song) जैसा है। इसमें भारत की भौगोलिक सुंदरता (हिमालय और गंगा) को माँ भारती के शृंगार के रूप में दिखाया गया है और उनके चरणों में शीश झुकाते हुए देश की विजय की कामना की गई है।
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