'नदी के द्वीप' के दो सबसे महत्वपूर्ण पात्र

 'नदी के द्वीप' के दो सबसे महत्वपूर्ण पात्र भुवन और रेखा हैं। इन दोनों का व्यक्तित्व अज्ञेय के 'व्यक्तिवाद' और 'अस्तित्ववाद' के दर्शन को पूरी तरह स्पष्ट करता है।

यहाँ इनका चरित्र-चित्रण विस्तार से दिया गया है:


1. भुवन: बौद्धिक और अंतर्मुखी व्यक्तित्व

भुवन उपन्यास का नायक है और पेशे से एक वैज्ञानिक है। उसका चरित्र आधुनिक, शिक्षित और आत्म-चिन्तन करने वाले व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।

  • बौद्धिक दृष्टिकोण: भुवन हर चीज को तर्क और विज्ञान की कसौटी पर कसता है। वह भावनाओं में बहने के बजाय उनके पीछे के कारणों को समझने की कोशिश करता है।

  • अस्तित्ववादी सोच: वह मानता है कि व्यक्ति को अपनी पहचान खुद बनानी चाहिए। वह भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय 'द्वीप' की तरह अकेला और स्वतंत्र रहना पसंद करता है।

  • भावनात्मक द्वंद्व: वह रेखा के प्रति आकर्षित है और उससे प्रेम करता है, लेकिन साथ ही वह गौरा की सरलता और निष्ठा का भी सम्मान करता है। वह अक्सर अपने कर्तव्यों और अपनी इच्छाओं के बीच फंसा रहता है।

  • स्थिरता का प्रतीक: भुवन का चरित्र गंभीर है। वह जीवन की उथल-पुथल में भी अपनी बौद्धिक गरिमा बनाए रखने का प्रयास करता है।


2. रेखा: स्वतंत्र और गरिमामय स्त्री

रेखा इस उपन्यास की सबसे जटिल और प्रभावशाली पात्र है। वह अज्ञेय की आधुनिक नारी की परिकल्पना है जो समाज के बंधनों से ऊपर अपनी पहचान खोजती है।

  • साहसी और स्वतंत्र: रेखा एक असफल विवाह के बोझ से बाहर निकलती है। वह अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेती है और समाज की परवाह किए बिना भुवन के साथ अपने संबंधों को स्वीकार करती है।

  • अगाध प्रेम और समर्पण: वह भुवन से निस्वार्थ प्रेम करती है। उसके प्रेम में वासना कम और आत्मीयता अधिक है। वह भुवन के बच्चे की माँ बनने वाली होती है, लेकिन वह भुवन पर कोई दबाव नहीं डालती।

  • त्याग की मूर्ति: रेखा का सबसे बड़ा गुण उसका त्याग है। जब उसे लगता है कि उसका साथ भुवन के भविष्य या उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा में बाधा बन सकता है, तो वह चुपचाप उसके जीवन से दूर चली जाती है। वह भुवन को 'मुक्त' कर देती है।

  • पीड़ा और गरिमा: रेखा के जीवन में बहुत दुख हैं, लेकिन वह कभी सहानुभूति की भीख नहीं माँगती। वह अपनी पीड़ा को अपनी शक्ति बना लेती है।


भुवन और रेखा के संबंधों का सार

इन दोनों का संबंध केवल शारीरिक आकर्षण नहीं, बल्कि दो आत्माओं का मिलन है। अज्ञेय ने इनके माध्यम से दिखाया है कि:

  1. प्रेम बंधन नहीं, बल्कि मुक्ति का मार्ग होना चाहिए।

  2. दो व्यक्ति एक-दूसरे के करीब आकर भी अपनी स्वतंत्र पहचान (Individual Identity) बनाए रख सकते हैं।

विशेष टिप्पणी: जहाँ भुवन 'विचार' का प्रतीक है, वहीं रेखा 'अनुभूति' और 'संवेदना' का प्रतीक है।


 

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