'नदी के द्वीप' उपन्यास के चारों मुख्य पात्रों की विशेषताओं को नीचे दी गई सारणी (Table) के माध्यम से समझा जा सकता है:
पात्रों की तुलनात्मक सारणी
| पात्र का नाम | मुख्य भूमिका | चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ | प्रतिनिधित्व (Symbolism) |
| भुवन | नायक (वैज्ञानिक) | बौद्धिक, विचारशील, अंतर्मुखी और तर्कवादी। वह भावनाओं को विज्ञान और दर्शन की दृष्टि से देखता है। | स्थिरता और विवेक का प्रतीक। |
| रेखा | नायिका | स्वतंत्र चेतना वाली, साहसी, गरिमामयी और त्याग की प्रतिमूर्ति। वह अपने दुखों को अकेले सहने की शक्ति रखती है। | संवेदना और आत्म-बलिदान का प्रतीक। |
| गौरा | भुवन की शिष्या | सरल, निश्छल, मर्यादित और भारतीय संस्कारों से युक्त। उसके प्रेम में ठहराव और समर्पण है। | परंपरा और पवित्रता का प्रतीक। |
| चंद्रमाधव | पत्रकार (नकारात्मक छवि) | ईर्ष्यालु, कुंठित, अनैतिक और अवसरवादी। वह बौद्धिक होकर भी मानसिक रूप से अस्थिर है। | बौद्धिक पतन और भटकाव का प्रतीक। |
पात्रों के बीच का अंतर्संबंध:
भुवन और रेखा: इनका संबंध बौद्धिक और भावनात्मक प्रगाढ़ता का है, जिसमें सामाजिक मर्यादाओं से अधिक महत्व वैयक्तिक सत्य को दिया गया है।
भुवन और गौरा: यह संबंध गुरु-शिष्या से शुरू होकर एक गहरे, शांत और सम्मानजनक प्रेम तक पहुँचता है।
चंद्रमाधव का प्रभाव: वह उपन्यास में द्वंद्व पैदा करता है। रेखा के प्रति उसका आकर्षण और भुवन के प्रति उसकी ईर्ष्या कथा में तनाव उत्पन्न करती है।
एक संक्षिप्त विश्लेषण:
अज्ञेय ने इन पात्रों के माध्यम से यह दिखाया है कि समाज में रहते हुए भी हर व्यक्ति अपने आप में एक 'द्वीप' है। जहाँ भुवन और रेखा अपनी निजता को बचाने का संघर्ष करते हैं, वहीं गौरा समाज के भीतर रहकर अपनी गरिमा बनाए रखती है। दूसरी ओर, चंद्रमाधव यह दर्शाता है कि यदि व्यक्ति अपनी आंतरिक नैतिकता खो दे, तो वह कैसे बिखर जाता है।
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