यूजीसी नेट हिंदी इकाई-9: हिंदी निबंध

 

यूजीसी नेट हिंदी इकाई-9: हिंदी निबंधों का ऐतिहासिक, वैचारिक और परीक्षा-उन्मुख व्यापक विश्लेषण

हिंदी साहित्य के विकास क्रम में गद्य की विधाओं का उद्भव और विकास आधुनिक काल की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। विशेष रूप से 'निबंध' विधा ने न केवल भाषाई परिपक्वता को दर्शाया, बल्कि यह भारतीय मनीषा के बौद्धिक विमर्श का प्रधान माध्यम भी बनी । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के पाठ्यक्रम में 'इकाई-9' के अंतर्गत शामिल हिंदी निबंधों का संग्रह भारतेंदु युग से लेकर समकालीन युग तक की वैचारिक यात्रा को समेटे हुए है ।   इस इकाई के सभी महत्वपूर्ण निबंधों, उनके लेखकों, वैचारिक पृष्ठभूमि और पिछले वर्षों में पूछे गए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का एक प्रामाणिक और विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

हिंदी निबंध का स्वरूप और ऐतिहासिक विकासक्रम

हिंदी निबंधों का विकास केवल साहित्यिक मनोरंजन के लिए नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे औपनिवेशिक दासता से मुक्ति, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और भाषाई अस्मिता के प्रश्न गहराई से जुड़े थे । भारतेंदु हरिश्चंद्र को हिंदी निबंधों का जनक माना जाता है, जिन्होंने अपनी पत्रिकाओं 'कविवचन सुधा' और 'हरिश्चंद्र मैगजीन' के माध्यम से गद्य की इस विधा को एक निश्चित दिशा प्रदान की

भारतेंदु युग के निबंधकारों ने जहाँ 'देशभक्ति और राजभक्ति' के द्वंद्व को अपने लेखन का विषय बनाया, वहीं द्विवेदी युग में निबंधों ने भाषा के परिष्कार और नैतिकता के मूल्यों को अपनाया । आचार्य रामचंद्र शुक्ल के आगमन के साथ हिंदी निबंध अपनी प्रौढ़ता के शिखर पर पहुँचा, जहाँ भाव और मनोविकार जैसे विषयों पर गंभीर चिंतन का मार्ग प्रशस्त हुआ

युगप्रमुख प्रवृत्तिप्रतिनिधि निबंधकार
भारतेंदु युगराष्ट्रीय चेतना, व्यंग्य, समाज सुधार

भारतेंदु, प्रतापनारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट

द्विवेदी युगभाषा परिष्कार, उपदेशात्मकता, ऐतिहासिकता

महावीर प्रसाद द्विवेदी, बालमुकुंद गुप्त, अध्यापक पूर्ण सिंह

शुक्ल युगमनोवैज्ञानिक विश्लेषण, गंभीर आलोचना

आचार्य रामचंद्र शुक्ल, बाबू गुलाबराय

शुक्लोत्तर युगवैयक्तिकता, ललित निबंध, सांस्कृतिक विमर्श

हजारी प्रसाद द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र, कुबेरनाथ राय

भारतेंदु हरिश्चंद्र: आधुनिकता के अग्रदूत और उनके निबंध

भारतेंदु हरिश्चंद्र के निबंधों में तत्कालीन भारत की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का दर्पण दिखाई देता है । उनके दो प्रमुख निबंध पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं: 'दिल्ली दरबार दर्पण' और 'भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है'

दिल्ली दरबार दर्पण (1877)

यह निबंध एक ऐतिहासिक रिपोर्ताज जैसा प्रतीत होता है, जिसमें लॉर्ड लिटन द्वारा आयोजित 1877 के दिल्ली दरबार का आंखों देखा विवरण प्रस्तुत किया गया है । इस निबंध के माध्यम से भारतेंदु ने ब्रिटिश सत्ता की भव्यता और भारतीय राजाओं की पराधीनता का सूक्ष्म चित्रण किया है

इस निबंध से संबंधित पिछले वर्षों के प्रश्नों का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि परीक्षक विवरणों की सूक्ष्मता पर अधिक ध्यान देते हैं

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) 

प्रश्न 1: 'दिल्ली दरबार दर्पण' निबंध के अनुसार किलात के खाँ को कुल कितनी कीमत की वस्तुएं तोहफे के रूप में प्राप्त हुई थीं?

  • (A) 20,000 रुपये

  • (B) 25,000 रुपये

  • (C) 30,000 रुपये

  • (D) 35,000 रुपये उत्तर: (B) 25,000 रुपये (UGC NET जून 2023, शिफ्ट 1)

प्रश्न 2: दिल्ली दरबार दर्पण में महारानी विक्टोरिया को कौन सी उपाधि देने के लिए दरबार का आयोजन किया गया था?

  • (A) क्वीन ऑफ एशिया

  • (B) कैसर-ए-हिंद (इम्प्रेस ऑफ इंडिया)

  • (C) भारत साम्राज्ञी

  • (D) विक्टोरिया मेमोरियल उत्तर: (B) कैसर-ए-हिंद (UGC NET पिछले वर्षों के प्रश्न संकलन)

भारतेंदु ने निबंध में स्पष्ट किया है कि किलात के खाँ को झंडा तो नहीं मिला, लेकिन उन्हें एक हाथी, जिस पर 4000 रुपये का हौदा था, जड़ाऊ गहने, घड़ी और अन्य वस्त्र दिए गए थे

भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है (1884)

यह निबंध वास्तव में बलिया के ददरी मेले के अवसर पर दिया गया एक व्याख्यान है । इसमें भारत की तत्कालीन जड़ता पर प्रहार करते हुए लेखक ने आलस्य को छोड़कर प्रगति के मार्ग पर चलने का आह्वान किया है । निबंध में 'रेलगाड़ी' का रूपक बहुत प्रसिद्ध है, जहाँ भारतीय जनता को डिब्बों के समान बताया गया है जिन्हें चलाने के लिए एक इंजन (कुशल नेतृत्व) की आवश्यकता होती है

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)  

प्रश्न 3: "हमारे हिंदुस्तानी लोग तो रेल की गाड़ी हैं।" यह प्रसिद्ध पंक्ति भारतेंदु के किस निबंध से उद्धृत है?

  • (A) दिल्ली दरबार दर्पण

  • (B) भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है

  • (C) स्वर्ग की विचार सभा

  • (D) वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति उत्तर: (B) भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है (UGC NET 2020)

प्रश्न 4: 'भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है' निबंध के अनुसार भारतवासियों ने अपनी कंगी और सलाई जैसी छोटी वस्तुएं भी किस देश की अपना ली हैं?

  • (A) फ्रांस

  • (B) जर्मनी

  • (C) अमेरिका

  • (D) इंग्लैंड/विलायत उत्तर: (B) जर्मनी (UGC NET 2022)

इस निबंध का वैचारिक महत्व इस बात में है कि यह स्वदेशी की भावना और जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता पर बल देता है । भारतेंदु ने व्यंग्य करते हुए कहा कि विलायती कोचवान भी खाली समय में अखबार पढ़ता है, जबकि भारतीय गप्पे लड़ाते हैं

बालमुकुंद गुप्त और 'शिवशंभु के चिट्ठे'

द्विवेदी युग के महत्वपूर्ण निबंधकार बालमुकुंद गुप्त ने 'भारत मित्र' पत्रिका में लॉर्ड कर्जन को संबोधित करते हुए व्यंग्यात्मक चिट्ठे लिखे । ये निबंध राजनीतिक चेतना और निर्भीकता के बेजोड़ उदाहरण हैं। शिवशंभु नामक एक काल्पनिक पात्र, जो भंग के नशे में रहता है, उसके माध्यम से गुप्त जी ने ब्रिटिश शासन की क्रूरता और वायसराय की नीतियों पर प्रहार किया है

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)  

प्रश्न 5: 'शिवशंभु के चिट्ठे' निबंध किसको संबोधित करके लिखे गए हैं?

  • (A) लॉर्ड रिपन

  • (B) लॉर्ड लिटन

  • (C) लॉर्ड कर्जन

  • (D) लॉर्ड डलहौजी उत्तर: (C) लॉर्ड कर्जन (UGC NET 2021)

प्रश्न 6: "आपने माई लॉर्ड! जब से भारतवर्ष में पधारे हैं, बुलबुलों का स्वप्न ही देखा है।" यह पंक्ति किस निबंध की है?

  • (A) भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है

  • (B) शिवशंभु के चिट्ठे

  • (C) मजदूरी और प्रेम

  • (D) कविता क्या है उत्तर: (B) शिवशंभु के चिट्ठे (UGC NET दिसंबर 2023)

इन निबंधों में 'बुलबुलों' का प्रतीकार्थ उन उम्मीदों से है जो भारतीयों ने कर्जन से लगाई थीं, परंतु अंततः उन्हें निराशा ही हाथ लगी 。 लेखक ने लॉर्ड रिपन की तुलना में कर्जन को एक दमनकारी शासक के रूप में चित्रित किया है

आचार्य रामचंद्र शुक्ल: 'कविता क्या है'

आचार्य शुक्ल का निबंध 'कविता क्या है' हिंदी आलोचना का प्रस्थान बिंदु माना जाता है । सर्वप्रथम 1909 में 'सरस्वती' पत्रिका में प्रकाशित यह निबंध शुक्ल जी के गहन चिंतन का परिणाम है । उन्होंने कविता को 'हृदय की मुक्तावस्था' के रूप में परिभाषित किया है, जो मनुष्य को शेष सृष्टि के साथ रागात्मक संबंध में जोड़ती है

शुक्ल जी के अनुसार, जिस प्रकार ज्ञान योग द्वारा आत्मा की मुक्तावस्था प्राप्त होती है, उसी प्रकार भाव योग द्वारा हृदय की मुक्तावस्था सिद्ध होती है, और वाणी का यही शब्द-विधान 'कविता' कहलाता है

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) प्रारूप और प्रामाणिक वर्ष:

प्रश्न 7: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने 'कविता क्या है' निबंध में 'हृदय की मुक्तावस्था' को क्या कहा है?

  • (A) अर्थ ग्रहण

  • (B) रसदशा

  • (C) बिंब ग्रहण

  • (D) भाव योग उत्तर: (B) रसदशा (UGC NET 2019)

प्रश्न 8: 'कविता क्या है' निबंध में कुल कितने खंड हैं?

  • (A) 10

  • (B) 11

  • (C) 12

  • (D) 13 उत्तर: (D) 13 (UGC NET जून 2023)

परीक्षार्थियों के लिए इन 13 खंडों के नाम और उनका क्रम याद रखना अनिवार्य है, क्योंकि परीक्षाओं में इनका अनुक्रम अक्सर पूछा जाता है

क्रमखंड का नाम (चुनिंदा)वैचारिक तत्व
1सभ्यता के आवरण और कविता

कविता कैसे सामाजिक बनावट को हटाकर मूल सत्य दिखाती है

2कविता और सृष्टि प्रसार

प्रकृति के साथ कविता का जुड़ाव

3मार्मिक तथ्य

कविता के भीतर छिपे गहरे सत्य

4काव्य और व्यवहार

काव्य का लोक-मंगलकारी स्वरूप

अध्यापक पूर्ण सिंह और 'मजदूरी और प्रेम'

द्विवेदी युग के एक और विशिष्ट निबंधकार अध्यापक पूर्ण सिंह हैं, जिन्होंने केवल छह निबंध लिखकर हिंदी साहित्य में अमरता प्राप्त की । उनका निबंध 'मजदूरी और प्रेम' (1912) श्रम की गरिमा और मनुष्यता के अंतर्संबंधों की व्याख्या करता है । लेखक का मानना है कि वास्तविक पूजा मंदिर-मस्जिद में नहीं, बल्कि मजदूर के पसीने और उसके द्वारा किए गए सृजन में है

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)  

प्रश्न 9: केवल छह निबंध लिखकर हिंदी जगत में ख्याति अर्जित करने वाले लेखक कौन हैं?

  • (A) बालमुकुंद गुप्त

  • (B) प्रतापनारायण मिश्र

  • (C) अध्यापक पूर्ण सिंह

  • (D) माधवप्रसाद मिश्र उत्तर: (C) अध्यापक पूर्ण सिंह (UPPSC LT ग्रेड 2018 / UGC NET संदर्भ)

प्रश्न 10: 'मजदूरी और प्रेम' निबंध के अनुसार हल चलाने वाले किसान का जीवन कैसा होता है?

  • (A) कोलाहलपूर्ण

  • (B) मौन जीवन

  • (C) दार्शनिक जीवन

  • (D) संघर्षपूर्ण जीवन उत्तर: (B) मौन जीवन (UGC NET 2021)

निबंध में आठ उपशीर्षक हैं, जिनमें 'हल चलाने वाले का जीवन', 'गड़रिये का जीवन', 'मजदूर की मजदूरी' और 'पश्चिमी सभ्यता का नया आदर्श' प्रमुख हैं । लेखक ने मशीनी सभ्यता पर प्रहार करते हुए कहा है कि ये काली मशीनें मनुष्यों का भक्षण करने के लिए मुख खोल रही हैं।

प्रतापनारायण मिश्र और 'शिवमूर्ति'

भारतेंदु मंडल के प्रमुख लेखक प्रतापनारायण मिश्र ने अपनी विशेष शैली (बैसवाड़ी रंगत) में 'शिवमूर्ति' निबंध की रचना की 。 यह निबंध धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से सामाजिक एकता और मानवीय गुणों की व्याख्या करता है 。 लेखक के अनुसार शिव की मूर्ति केवल पत्थर नहीं है, बल्कि वह हमारे और ईश्वर के बीच के दृढ़ संबंध का प्रतीक है

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) प्रारूप और प्रामाणिक वर्ष:

प्रश्न 11: "यह संसार की जातीय नीति है कि हमारी बुद्धि उन्हीं पदार्थों के पीछे दौड़ती है जो हमारे पास हैं।" यह पंक्ति किस निबंध की है?

  • (A) शिवशंभु के चिट्ठे

  • (B) शिवमूर्ति

  • (C) मजदूरी और प्रेम

  • (D) कविता क्या है उत्तर: (B) शिवमूर्ति (UGC NET दिसंबर 2023)

इस निबंध का मूल संदेश यह है कि मूर्ति पूजा का वास्तविक अर्थ मानसिक शुद्धि और प्रेम के भाव को जाग्रत करना है

शुक्लोत्तर निबंध: हजारी प्रसाद द्विवेदी और ललित निबंध की परंपरा

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने हिंदी निबंध को ऐतिहासिकता और सांस्कृतिक मानवतावाद के साथ जोड़ा । उनका निबंध 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' (1948) एक वैचारिक निबंध है जो मानव की आदिम पाशविकता और आधुनिक सभ्यता के द्वंद्व को दर्शाता है

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) प्रारूप और प्रामाणिक वर्ष:

प्रश्न 12: हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार 'नाखून' किसका प्रतीक हैं?

  • (A) मानवी करुणा का

  • (B) पाशविक वृत्ति का

  • (C) सुंदरता का

  • (D) सभ्यता के विकास का उत्तर: (B) पाशविक वृत्ति का (UGC NET 2020)

द्विवेदी जी के अन्य प्रमुख निबंध संग्रहों का कालक्रम भी परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है:

निबंध संग्रहप्रकाशन वर्ष
अशोक के फूल

1948

कल्पलता

1951

विचार और वितर्क

1957

कुटज

1964

आलोक पर्व

1972

परीक्षक अक्सर इन संग्रहों को कालक्रम में लगाने का प्रश्न पूछते हैं

कुबेरनाथ राय: 'उत्तरा फाल्गुनी के आसपास'

कुबेरनाथ राय को 'रस धर्मा' निबंधकार कहा जाता है । उनका निबंध 'उत्तरा फाल्गुनी के आसपास' (1974) समय, आयु और नक्षत्रों के रूपक के माध्यम से मनुष्य के जीवन चक्र की व्याख्या करता है 。 लेखक ने पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रों की तुलना जीवन की विभिन्न अवस्थाओं से की है

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) 

प्रश्न 13: 'उत्तरा फाल्गुनी के आसपास' निबंध के अनुसार लेखक कुबेरनाथ राय वर्ष 1972 में अपनी उम्र का कौन सा पावस झेल रहे थे?

  • (A) 30वाँ

  • (B) 35वाँ

  • (C) 38वाँ

  • (D) 40वाँ उत्तर: (C) 38वाँ (UGC NET 2022)

प्रश्न 14: कुबेरनाथ राय के अनुसार मनुष्य के जीवन में 'उत्तर फाल्गुनी' की स्थिति किस आयु वर्ग में आती है?

  • (A) 25 से 30 वर्ष

  • (B) 30 से 40 वर्ष

  • (C) 40 से 45 वर्ष

  • (D) 45 से 50 वर्ष उत्तर: (C) 40 से 45 वर्ष (UGC NET जून 2024 संदर्भ)

राय का मानना है कि 30वाँ वर्ष जीवन के सम्मुख एक प्रश्नचिह्न खड़ा करता है, और 40 के बाद का जीवन जीना दस्तोवस्की के अनुसार एक तरह की चुनौती या विडंबना है

विद्यानिवास मिश्र: 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है'

ललित निबंधों की परंपरा में विद्यानिवास मिश्र का स्थान अप्रतिम है । उनका निबंध 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' (1974) लोक मानस में रचे-बसे राम के प्रति अगाध प्रेम और चिंता का चित्रण है 。 लेखक एक संगीत कार्यक्रम से देर रात लौटे अपने पुत्र और मेहमान लड़की की प्रतीक्षा करते समय कौशल्या के उस दर्द को महसूस करते हैं, जो राम के वनवास के समय उनके मुकुट के भीगने की चिंता में था

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) प्रारूप और प्रामाणिक वर्ष:

प्रश्न 15: 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' निबंध का प्रकाशन वर्ष क्या है?

  • (A) 1970

  • (B) 1972

  • (C) 1974

  • (D) 1976 उत्तर: (C) 1974 (UGC NET 2020)

मिश्र जी के निबंधों में संस्कृत पांडित्य और ग्रामीण लोक जीवन का अद्भुत समन्वय मिलता है 。 परीक्षा में उनके अन्य संग्रहों जैसे 'चितवन की छांह' और 'कदम की फूली डाल' से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते रहे हैं

नामवर सिंह और 'संस्कृति और सौंदर्य'

डॉ. नामवर सिंह का निबंध 'संस्कृति और सौंदर्य' मुख्य रूप से हजारी प्रसाद द्विवेदी की 'अशोक के फूल' संबंधी मान्यताओं का एक प्रगतिशील मूल्यांकन है । नामवर सिंह ने सौंदर्य को श्रम और पसीने से जोड़ा है 。 उनके अनुसार, वह सौंदर्य सात्विक है जहाँ 'चोटी का पसीना एड़ी तक आता है'

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) प्रारूप और प्रामाणिक वर्ष:

प्रश्न 16: 'संस्कृति और सौंदर्य' निबंध के अनुसार हजारी प्रसाद द्विवेदी अशोक के फूल को केवल एक फूल नहीं, बल्कि क्या मानते हैं?

  • (A) प्रकृति का शृंगार

  • (B) भारतीय संस्कृति का एक अध्याय

  • (C) बौद्ध धर्म का प्रतीक

  • (D) विलासिता का चिन्ह उत्तर: (B) भारतीय संस्कृति का एक अध्याय (UGC NET 2023)

यह निबंध द्वंद्वात्मक भौतिकवाद और भारतीय संस्कृति के सामंजस्य की वकालत करता है

अन्य महत्वपूर्ण निबंध और उनके लेखक

पाठ्यक्रम के अंतिम निबंधों में विवेकी राय का 'उठ जाग मुसाफिर' (2012) शामिल है, जो गाँव की संस्कृति के लुप्त होने और नई पीढ़ी के दिशाहीन होने पर चिंता प्रकट करता है

निबंधलेखकमुख्य विषय
उत्तराफाल्गुनी के आसपासकुबेरनाथ राय

समय और वृद्धावस्था का दर्शन

उठ जाग मुसाफिरविवेकी राय

ग्रामीण चेतना और सांस्कृतिक जागरण

संस्कृति और सौंदर्यनामवर सिंह

हजारी प्रसाद द्विवेदी की परंपरा का पुनर्मूल्यांकन

परीक्षा में इन निबंधों के प्रकाशन वर्ष और उनके भीतर आए महत्वपूर्ण उद्धरणों को मिलाने वाले प्रश्न (Matching type) अधिक पूछे जाते हैं

परीक्षा की तैयारी हेतु विशेष सुझाव

UGC NET की इकाई-9 के लिए केवल लेखकों और निबंधों के नाम याद करना पर्याप्त नहीं है 。 पिछले वर्षों के रुझानों के आधार पर निम्नलिखित रणनीतियां प्रभावी सिद्ध हो सकती हैं:

  1. मूल पाठ का अध्ययन: रामचंद्र शुक्ल और हजारी प्रसाद द्विवेदी जैसे लेखकों के निबंधों के मूल पाठ को पढ़ना अनिवार्य है, क्योंकि अब प्रश्न निबंध के आंतरिक अनुच्छेदों और गूढ़ दार्शनिक मान्यताओं से पूछे जा रहे हैं

  2. उद्धरणों पर ध्यान: प्रसिद्ध कथनों और पंक्तियों को उनके संबंधित निबंध और संदर्भ के साथ नोट करें

  3. कालक्रम तालिका: सभी निबंधों और उनके संग्रहों की एक कालक्रम तालिका बनाकर अभ्यास करें, क्योंकि प्रतिवर्ष 2-3 प्रश्न प्रकाशन वर्ष के आधार पर अनुक्रम लगाने के आते हैं

  4. पात्र और रूपक: प्रतीकों और रूपकों (जैसे शिवशंभु के बुलबुल या भारतेंदु की रेलगाड़ी) के अर्थों को गहराई से समझें

   

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