विश्वंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' की प्रसिद्ध कहानी 'ताई मध्यवर्गीय परिवार के मनोवैज्ञानिक द्वंद्व और मानवीय संवेदनाओं की एक बेहतरीन कहानी है।
यहाँ इस कहानी का सारांश दिया गया है:
मुख्य पात्र
रामेश्वरी: कहानी की मुख्य पात्र (ताई), जो निसंतान होने के कारण चिड़चिड़ी हो गई है।
बाबू रामदास: रामेश्वरी के पति।
बाबू कृष्णदास: रामदास के छोटे भाई।
मनोहर: कृष्णदास का छोटा बेटा, जिससे रामेश्वरी ईर्ष्या करती है।
कहानी का सारांश
1. संतानहीनता का दर्द:
रामेश्वरी और रामदास की अपनी कोई संतान नहीं है। रामेश्वरी को लगता है कि उनके देवर कृष्णदास के बच्चे ही उनकी संपत्ति के वारिस बनेंगे, इसलिए वह मन ही मन उनसे घृणा करती है। उसे लगता है कि समाज में बिना संतान के उसका कोई सम्मान नहीं है।
2. मनोहर के प्रति द्वेष:
रामदास अपने भतीजे मनोहर से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन रामेश्वरी को यह बिल्कुल पसंद नहीं आता। वह मनोहर को अपने पास आने से रोकती है और उसे झिड़क देती है। मासूम मनोहर फिर भी अपनी 'ताई' के पास जाने की कोशिश करता रहता है, पर रामेश्वरी का कठोर हृदय नहीं पिघलता।
3. हृदय परिवर्तन की घटना:
एक दिन मनोहर छत पर पतंग उड़ा रहा होता है। पतंग काटते समय उसका पैर मुंडेर (छत के किनारे) से फिसल जाता है और वह नीचे लटक जाता है। रामेश्वरी वहीं खड़ी सब देख रही होती है। पहले तो उसके मन में आता है कि अच्छा हुआ, बला टली। लेकिन जैसे ही वह मनोहर की आँखों में मौत का डर और अपनी ताई के लिए पुकार देखती है, उसका ममतामयी रूप जाग उठता है।
4. प्रायश्चित और प्रेम:
रामेश्वरी मनोहर को बचाने के लिए दौड़ती है, लेकिन तब तक मनोहर नीचे गिर जाता है। उसे बचाने की कोशिश में रामेश्वरी खुद भी गिरकर घायल हो जाती है। अस्पताल में होश आने पर वह सबसे पहले मनोहर के बारे में पूछती है। वह अपने किए पर शर्मिंदा होती है और उसका सारा द्वेष समाप्त हो जाता है। अंत में, वह मनोहर को अपने सगे बेटे से भी ज्यादा प्यार करने लगती है।
निष्कर्ष
'ताई' कहानी यह दर्शाती है कि ईर्ष्या और द्वेष केवल मन के विकार हैं, लेकिन ममता स्त्री का स्वाभाविक गुण है। एक छोटी सी दुर्घटना ने रामेश्वरी के भीतर की कड़वाहट को धोकर उसे प्रेम और वात्सल्य से भर दिया।
पात्रों का चरित्र-चित्रण (Character Sketches)
1. रामेश्वरी (ताई)
रामेश्वरी कहानी की केंद्रीय पात्र है। उसका चरित्र बहुत ही जटिल और मानवीय है:
ईर्ष्यालु स्वभाव: अपनी कोई संतान न होने के कारण वह अपने भतीजे मनोहर से जलती है। उसे लगता है कि उसके पति का सारा प्यार और संपत्ति देवर के बच्चों में बंट रही है।
कुंठित मन: वह समाज के तानों और "बांझ" कहलाने के डर से मानसिक रूप से परेशान रहती है।
हृदय परिवर्तन: वह स्वभाव से बुरी नहीं है, बस परिस्थितियों ने उसे कठोर बना दिया था। कहानी के अंत में उसका ममतामयी रूप उसकी ईर्ष्या पर विजय प्राप्त कर लेता है।
2. बाबू रामदास
धैर्यवान और स्नेही: वे रामेश्वरी के पति हैं। वे मनोहर को अपने बेटे की तरह प्यार करते हैं।
संतुलित व्यक्तित्व: वे अपनी पत्नी की कड़वाहट को समझते हैं और उसे समझाने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन वे मनोहर के प्रति अपना प्रेम कम नहीं होने देते।
3. मनोहर
मासूमियत का प्रतीक: मनोहर एक छोटा बच्चा है जो अपनी ताई की डांट के बावजूद उनके पास जाने की कोशिश करता है। उसकी यही निश्छल मासूमियत अंत में रामेश्वरी का पत्थर जैसा दिल पिघला देती है।
कहानी का मुख्य उद्देश्य (Theme & Purpose)
लेखक विश्वंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' ने इस कहानी के माध्यम से कई गहरे संदेश दिए हैं:
मानवीय मनोविज्ञान का चित्रण: कहानी यह दिखाती है कि कैसे ईर्ष्या मनुष्य की सोच को अंधा कर देती है, लेकिन संकट के समय हमारी मूल मानवीय संवेदनाएं (जैसे ममता) जाग उठती हैं।
संतानहीनता का सामाजिक पक्ष: समाज में निसंतान महिलाओं को जिस नज़रिए से देखा जाता है, वह उनके स्वभाव में कैसे चिड़चिड़ापन और हीनभावना (Inferiority Complex) पैदा कर देता है।
प्रेम की विजय: कहानी का अंतिम संदेश यही है कि नफरत को केवल प्रेम और निस्वार्थ भाव से ही जीता जा सकता है। मनोहर की मासूमियत रामेश्वरी के अहंकार और द्वेष को पूरी तरह खत्म कर देती है।
विशेष टिप्पणी
"ताई" कहानी यह साबित करती है कि नारी का हृदय स्वभाव से कोमल होता है। रामेश्वरी का मनोहर को गिरते देख उसे बचाने के लिए खुद कूद जाना यह दिखाता है कि रक्त के रिश्तों से बड़ा मानवता और ममता का रिश्ता होता है।
शीर्षक की सार्थकता (Significance of the Title)
इस कहानी का शीर्षक 'ताई' पूरी तरह सार्थक और सटीक है क्योंकि:
पूरी कहानी रामेश्वरी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे परिवार में 'ताई' कहा जाता है।
कहानी का मुख्य संघर्ष एक 'ताई' के मन में चल रहे द्वंद्व (Conflict) का है—एक तरफ उसका 'ताई' का पद जो ईर्ष्या से भरा है, और दूसरी तरफ उसके भीतर छिपी 'माँ' जो अंत में जीत जाती है।
यह शीर्षक छोटा, आकर्षक और कौतूहल पैदा करने वाला है।
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Important Q&A)
प्रश्न 1: रामेश्वरी मनोहर से नफरत क्यों करती थी?
उत्तर: रामेश्वरी के मन में दो मुख्य कारण थे: पहला, उसकी अपनी कोई संतान नहीं थी और मनोहर उसके देवर का पुत्र था। दूसरा, उसे डर था कि उसके पति की सारी संपत्ति और प्यार मनोहर को मिल जाएगा। उसे मनोहर में अपने भविष्य का सहारा नहीं, बल्कि अपनी संतानहीनता का "कांटा" दिखाई देता था।
प्रश्न 2: मनोहर का चरित्र रामेश्वरी के हृदय परिवर्तन में कैसे सहायक सिद्ध हुआ?
उत्तर: मनोहर एक अत्यंत मासूम और निश्छल बालक था। वह रामेश्वरी की डांट और उपेक्षा के बाद भी बार-बार उनके पास जाता था। उसकी इसी निस्वार्थ मासूमियत और अंत में उसकी जान पर आए संकट ने रामेश्वरी के भीतर दबी ममता को झकझोर कर जगा दिया।
प्रश्न 3: "ताई" कहानी का अंत किस प्रकार सुखद है?
उत्तर: कहानी का अंत बहुत भावनात्मक है। जब रामेश्वरी को अस्पताल में होश आता है, तो उसकी सारी कड़वाहट खत्म हो चुकी होती है। वह मनोहर को गले लगाकर चूमती है। इससे न केवल एक परिवार का बिखराव रुक जाता है, बल्कि रामेश्वरी को मानसिक शांति और एक बेटा (भतीजे के रूप में) भी मिल जाता है।
प्रश्न 4: रामेश्वरी ने मनोहर को छत से गिरते देख तुरंत क्यों नहीं बचाया?
उत्तर: जब मनोहर का पैर फिसला, तो कुछ पलों के लिए रामेश्वरी के मन की 'ईर्ष्या' जीत गई। उसे लगा कि यदि यह नहीं रहेगा तो उसकी सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। वह जड़वत खड़ी रही। लेकिन जैसे ही उसकी ममता जागी, वह उसे बचाने दौड़ी, पर तब तक देर हो चुकी थी। यही पश्चाताप उसे बाद में महान बनाता है।
निष्कर्ष
यह कहानी हमें सिखाती है कि मनुष्य बुरा नहीं होता, उसके विचार और परिस्थितियाँ उसे बुरा बनाती हैं। प्रेम और करुणा किसी भी कठोर हृदय को बदल सकते हैं।
'ताई' कहानी के आधार पर यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
'ताई' कहानी पर आधारित प्रश्नोत्तरी
1. 'ताई' कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) मुंशी प्रेमचंद
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) विश्वंभरनाथ शर्मा 'कौशिक'
(घ) जैनेंद्र कुमार
2. रामेश्वरी के मन में किसके प्रति ईर्ष्या की भावना थी?
(क) अपने पति के प्रति
(ख) मनोहर के प्रति
(ग) अपनी देवरानी के प्रति
(घ) समाज के प्रति
3. मनोहर और रामेश्वरी का आपस में क्या रिश्ता था?
(क) माँ-बेटा
(ख) ताई-भतीजा
(ग) चाची-भतीजा
(घ) बुआ-भतीजा
4. रामेश्वरी दिन-भर चिड़चिड़ी क्यों रहती थी?
(क) बीमारी के कारण
(ख) गरीबी के कारण
(ग) अपनी कोई संतान न होने के कारण
(घ) पति से झगड़े के कारण
5. कहानी के अंत में रामेश्वरी के स्वभाव में क्या परिवर्तन आता है?
(क) वह और अधिक क्रूर हो जाती है
(ख) वह घर छोड़कर चली जाती है
(ग) उसके भीतर ममता और प्रेम जाग उठता है
(घ) वह मनोहर से बात करना बंद कर देती है
6. मनोहर छत से कैसे गिरा?
(क) रामेश्वरी ने उसे धक्का दिया
(ख) वह पतंग उड़ाते समय फिसल गया
(ग) वह खेल-खेल में कूद गया
(घ) बंदरों के डर से भागते हुए
7. रामेश्वरी के पति का क्या नाम था?
(क) बाबू कृष्णदास
(ख) बाबू रामदास
(ग) बाबू श्यामदास
(घ) बाबू हरिदास
उत्तर तालिका (Answer Key)
| प्रश्न संख्या | सही उत्तर |
| 1 | (ग) विश्वंभरनाथ शर्मा 'कौशिक' |
| 2 | (ख) मनोहर के प्रति |
| 3 | (ख) ताई-भतीजा |
| 4 | (ग) अपनी कोई संतान न होने के कारण |
| 5 | (ग) उसके भीतर ममता और प्रेम जाग उठता है |
| 6 | (ख) वह पतंग उड़ाते समय फिसल गया |
| 7 | (ख) बाबू रामदास |
'ताई' कहानी अपनी मनोवैज्ञानिक गहराई और भावुकता के लिए जानी जाती है। यहाँ कहानी की कुछ ऐसी मुख्य पंक्तियाँ दी गई हैं जो पात्रों के स्वभाव और कहानी के मोड़ को दर्शाती हैं:
1. रामेश्वरी की कुंठा और संतानहीनता का दर्द
"संतान ही वह जंजीर है, जो स्त्री-पुरुष को एक सूत्र में बाँधती है, वह आधार है जिस पर प्रेम की बेल चढ़ती है।"
यह पंक्ति बताती है कि रामेश्वरी के जीवन में संतान का क्या महत्व था और उसके न होने से वह कितनी अधूरी महसूस करती थी।
2. रामेश्वरी का मनोहर के प्रति द्वेष
"पराई संतान कभी अपनी नहीं होती। दूसरे का बच्चा कितना ही पालो, वह अपना नहीं हो सकता।"
यह रामेश्वरी की संकुचित सोच को दर्शाता है, जहाँ वह मनोहर को अपना मानने के बजाय उसे 'देवर की संतान' और 'संपत्ति का वारिस' अधिक समझती थी।
3. रामदास का अपनी पत्नी को समझाना
"अपने हृदय को विशाल बनाओ। यह बालक भी तो तुम्हारे ही खून का है। इसे प्यार करोगी, तो तुम्हें अपनी संतान की कमी महसूस नहीं होगी।"
बाबू रामदास का यह संवाद रामेश्वरी के कठोर व्यवहार को बदलने की एक कोशिश थी।
4. दुर्घटना के समय का मनोवैज्ञानिक चित्रण
"एक पल के लिए रामेश्वरी के मन में पाप आया—अच्छा है, यह काँटा निकल जाए। पर दूसरे ही पल उसकी आँखों में मनोहर की भयभीत आँखें समा गईं और उसका कलेजा मुँह को आ गया।"
यह कहानी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ (Turning Point) है, जहाँ ईर्ष्या और ममता के बीच युद्ध होता है और अंततः ममता जीत जाती है।
5. हृदय परिवर्तन और पश्चाताप (अंत)
"होश आते ही रामेश्वरी ने व्याकुल होकर पूछा— मेरा मनोहर कहाँ है? उसे मेरे पास लाओ।"
यह पंक्ति कहानी के सुखद अंत और रामेश्वरी के पूर्ण हृदय परिवर्तन का प्रतीक है। अब मनोहर उसके लिए पराया नहीं, बल्कि उसका अपना 'बेटा' बन चुका था।
इन पंक्तियों का महत्व:
ये पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि मनुष्य के भीतर देवत्व (Goodness) और दानवत्व (Evil) दोनों होते हैं।
ये पाठक को रामेश्वरी के मानसिक संघर्ष से जोड़ती हैं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें