यूजीसी नेट (UGC NET) हिंदी साहित्य के 2019 से 2025 तक के पेपरों में परीक्षा का पैटर्न काफी बदला है। अब प्रश्न केवल तथ्यों पर आधारित न होकर कथनों (Assertion-Reason), कालक्रम (Chronology) और कृतियों की आंतरिक पंक्तियों पर ज्यादा केंद्रित हैं।
यहाँ पिछले वर्षों के कुछ महत्वपूर्ण और प्रतिनिधि प्रश्न दिए जा रहे हैं ताकि आप प्रश्नों की प्रकृति को समझ सकें:
1. वैचारिक पृष्ठभूमि और इतिहास दर्शन
प्रश्न: "प्रत्येक देश का साहित्य वहाँ की जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिंब होता है।" यह कथन किसका है? (2019/2020 में कई बार रिपीट)
उत्तर: आचार्य रामचंद्र शुक्ल।
प्रश्न: अंबेडकर दर्शन के आधार पर कौन सा उपन्यास लिखा गया है?
उत्तर: धरती धन न अपना (जगदीश चंद्र)।
2. कविता (इकाई-5)
प्रश्न: 'कामायनी' के सर्गों का सही अनुक्रम क्या है? (अक्सर पूछा जाने वाला प्रश्न)
उत्तर: चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा, स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य, आनंद।
प्रश्न: 'असाध्य वीणा' कविता में वीणा किस वृक्ष से बनाई गई थी?
उत्तर: किरीटी तरु।
3. उपन्यास और कहानी (इकाई-6 और 7)
प्रश्न: 'बाणभट्ट की आत्मकथा' उपन्यास के पात्र कौन-कौन हैं?
उत्तर: बाणभट्ट, निपुणिका (निउनिया), महामाया, भटिनी।
प्रश्न: "परिंदे" कहानी को हिंदी की पहली नई कहानी किसने माना है?
उत्तर: नामवर सिंह।
4. नाटक और निबंध (इकाई-8 और 9)
प्रश्न: 'अंधा युग' नाटक के अंकों का सही क्रम क्या है?
उत्तर: 1. कौरव नगरी, 2. पशु का उदय, 3. अश्वत्थामा का अर्धसत्य, (अंतराल: पंख और पहिये), 4. गांधारी का शाप, 5. विजय: एक क्रमिक आत्महत्या।
प्रश्न: 'मजदूरी और प्रेम' निबंध के लेखक कौन हैं?
उत्तर: सरदार पूर्ण सिंह।
5. स्थापना और तर्क (Assertion & Reason)
आजकल ऐसे प्रश्न बहुत पूछे जा रहे हैं:
स्थापना (A): साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना है।
तर्क (R): क्योंकि साहित्य समाज का दर्पण नहीं होता।
उत्तर: (A) और (R) दोनों गलत हैं।
तैयारी के लिए मुख्य बिंदु (2019-2025 पैटर्न):
| खंड | मुख्य फोकस |
| कालक्रम | रचनाकारों के जन्म वर्ष और रचनाओं के प्रकाशन वर्ष (विशेषकर छायावाद और प्रगतिवाद)। |
| पात्र-मिलान | उपन्यासों और नाटकों के मुख्य व गौण पात्रों के नाम। |
| पंक्तियाँ | कबीर, जायसी, सूरदास और तुलसीदास की महत्वपूर्ण पंक्तियाँ। |
| स्थापना-तर्क | पाश्चात्य और भारतीय काव्यशास्त्र पर आधारित अवधारणाएँ। |
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